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नक्सलमुक्ति के बाद विकास का नया सूर्योदय

May 25, 2026

नक्सलमुक्ति के बाद विकास का नया सूर्योदय

ARTICLE  25.05.2026, Wednesday , by Sarvesh Kumar Singh

-सर्वेश कुमार सिंह-

भारत को नक्सलवाद के ग्रहण से मुक्ति मिली है। इसके साथ ही उन क्षेत्रों में जहां कभी बंदूकों की दहशत व्याप्त रहती थी। अब विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। यह नया सवेरा भी उसी “मिशन मोड” में साकार हो रहा है, जिस “मिशन मोड” में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की योजना, रणनीति और दृढ इच्छाशक्ति ने भारत को नक्सलमुक्त कर दिया है। यहां अब दिल्ली से लेकर रायपुर तक की सरकारें अपनी सभी 371 योजनाओं को लेकर नक्सलमुक्त क्षेत्र में उतरी हैं। छत्तीसगढ़ का “बस्तर” वह क्षेत्र है जहां नक्सलवाद दैनिक जीवन का पर्याय और आतंक के साये में जीना दिनचर्या बन गया था। इस परिस्थिति को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान करके बदल दिया,यानि की तारीख तय करके नक्सलवाद से भारत को मुक्ति दिला दी। अब यहां विकास की गंगा बह रही है।

असंभव दिखने वाला सपना साकार हुआ

नक्सलवाद मुक्त भारत एक सपना था। भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती। ये देश के सामने एक ऐसी समस्या थी, जिसके बारे में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने कहा था कि “नक्सलवाद देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है”। उसी नक्सलवाद को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तारीख तय करके समाप्त कर दिया है। उन्होंने अगस्त 2024 में घोषणा की थी कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त कर देंगे। यह कार्य तय समयसीमा से पहले ही पूरा हो गया। ऐसा देश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि तारीख निश्चित करके किसी ऐसी समस्या का समाधान हुआ हो, जहां सशस्त्र संघर्ष चलता हो, लेकिन ऐसा भारत में हुआ है। इसका श्रेय जहां सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, वीरता और बलिदान को जाता है, वहीं कुशल रणनीति, योजना और दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाने के लिए अमित शाह को जाता है।

छत्तीसगढ में 13 दिसम्बर 2023 को भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी। मुख्यमंत्री बने विष्णु देव साय, भाजपा सरकार आने के बाद नक्सलवाद की समाप्ति को प्राथमिकता का कार्य और जिम्मेदारी मान कर अभियान शुरु हुआ। कमान संभाली केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने, उन्होंने 24 अगस्त 2024 को देश के सभी पुलिस महानिदेशकों/पुलिस महानिरीक्षकों की उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में तय हुआ कि नक्सलवाद को समय सीमा निर्धारित करके समाप्त करना है। यह समय सीमा खुद अमित शाह ने घोषित की और यह थी 31 मार्च 2026, तारीख तय होने के बाद रणनीति बनी, संसाधन बढ़ाये गए, सामाजिक, आर्थिक स्तर पर सुधार किये गए। परिणाम देश के सामने है कि ठीक 31 मार्च 2026 को गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में घोषणा कर दी कि भारत अब नक्सलवाद-माओवाद के आतंक से मुक्त है। यह विचारधारा सात दशक बाद पराजित हो गई।

अमित शाह ने देश से लाल आतंक को पोषित करने वाली माओवादी विचारधारा से वनवासियों को मुक्ति दिलाने के लिए मिशन मोड में काम किया। केंद्र और राज्य सरकारों का बेहतर समन्वय किया। योजनाओं को संबंधित पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाया। सुरक्षा बलों को खुली छूट और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सूचना तंत्र को मजबूत किया। प्रतिफल दो साल से कम समय में लक्ष्य पूरा कर दिया, मिशन पूरा किया।

बस्तर में सेवा डेरा, नये सूर्योदय के केन्द्र

नक्सलवाद से प्रभावित जो क्षेत्र रहे हैं, उनमें छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग प्रमुख है। यहां अनेक खुंखार माओवादी-नकस्लवादी समूह और उनके नेता रहे हैं। अब ये आत्मसमर्मपण कर चुके हैं या सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड में मारे जा चुके हैं। इस क्षेत्र से नक्सलवाद समाप्त होने के बाद जो आवश्यक कार्य है, उसपर अब भारत सरकार ने काम शुरु कर दिया है। इस काम को करने की जिम्मेदारी भी गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथों में ली है। वह कार्य है हथियार डाल चुके पूर्व नक्सलियों का पुनर्वास, उनका रोजगार और विकास की गंगा को शेष देश के समानान्तर इस क्षेत्र में भी प्रवाहित करना। यह कार्य शुरु हो गया है। यह सरकार के उस दायित्व का हिस्सा है, जो किसी भी समस्या के उन्मूलन के बाद किया जाना अवश्यम्भावी होता है।

नक्सल आतंक से जो क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित थे। उनमें छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग सबसे प्रमुख रहा है। इस संभाग में 7 जिले हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने अब इस क्षेत्र के समुचित विकास का बीड़ा उठाया है। इन क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुंच नहीं थी। न तो राशन कार्ड थे, न मुफ्त मिलने वाला राशन मिल पता था और न ही 5 लाख की चिकित्सा सुविधा ही मिल रही थी। कारण था नक्सलवादी रोड़ा बने थे। वे स्कूल, अस्पताल,सड़क नहीं बनने दे रहे थे। अब बस्तर नक्सलमुक्त है तो ये सभी योजनाएं और सुविधाएं प्रदान करने की तैयारी की गई है। इसके लिए गृहमंत्री खुद बस्तर पहुंचे है। उन्होंने 18 और 19 मई को योजनाओं की शुरुआत कराई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ योजनाओं का उद्घाटन किया। जगदलपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र ने बस्तर में 200 सुरक्षा कैंप खोले थे। अब इनमें से एक तिहाई यानी कि 70 को प्रथम चरण में सेवा डेरा में परिवर्तित किया जा रहा। ये डेरा वीर शहीद गुंडाधुर के नाम से होंगे। इनमें केंद्र और राज्य की सभी 371 योजनाओं का लाभ मिलेगा। ये कमान सर्विस सेंटर के रूप में काम करेंगे। ये सेंटर गांव के हर दरवाजे तक योजना का लाभ पहुंचाएंगे।

पांच साल में छह गुना बढ़ेगी बस्तर की आय

पत्रकार वार्ता में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 5 साल में बस्तर की आय 6 गुना बढ़ेगी। उन्होंने घोषणा की है कि हर आदिवासी महिला को एक गाय और एक भैंस दी जाएगी। डेयरी सेक्टर का नेटवर्क स्थापित करके आय बढ़ाएंगे। बैंक, एटीएम, पोस्ट ऑफिस खोले जा रहे है। सड़कें बनाई जा रही है। सेवा डेरा में स्थापित सीएससी “कामन सर्विस सेन्टर” के साथ-साथ यहां पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समिति) भी बनेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर इस आदिवासी-जनजाति क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए “बस्तर पंडुम” की शुरुआत की जा रही है। इससे बस्तर की मूल संस्कृति, लोक कला, गीत, संगीत, लोक नृत्य, खानपान को संरक्षित और समृद्ध किया जाएगा।

बस्तर को आतंक के अंतहीन समझे जाने वाले साए से निकालकर विकास की राह दिखाना निसंदेह उल्लेखनीय और सराहनीय कार्य है।

 

लेखक परिचयः स्वतंत्र पत्रकार, राज्य मुख्यालय, लखनऊ

निवास- 3/11 आफीसर्स कालोनी कैसरबाग, लखनऊ-226001

मोबाइलः 9140624166, ई-मेल-sarveshksingh61@gmail.com

 

 

नौतपा की तपिश

Editorial 25.05.2026, Tuesday, by Sarvesh Kumar Singh, Editor UP Web News

नौ दिन की भीषण गर्मी, लू और तपिश आज सोमवार 25 मई से शुरु हो गई है। आज नौतपा  का पहला दिन है। ये नौ दिन की भीषणतम गर्मी और तपिश का कालचक्र 2 जून तक रहेगा। इस दौरान प्राकृतिक तपिश का सामना करना है, इससे जूझना है। हालांकि प्रकृति के सिद्धान्त के अनुसार यह नौ दिन की भीषण गर्मी, लू और तपिश भी जरूरी है। इन नौ दिनों के उच्चतम तापमान के बाद ही मानसून आएगा। यह प्राकृतिक प्रक्रिया है कि गर्मी बढने से ही वर्षा के लिए जल संचय होता है जो वाष्पिकरण के बाद बरसता है। इसलिए इस भीषण गर्मी को भी आवश्यक मानकर झेलना है। किन्तु इसके लिए उपाय अपनाने होंगे।

समाज की जीवनशैली बदली है। प्राचीन पद्यतियों में काफी कुछ बदलाव आया है, औद्यौगिकीकरण ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। वृक्षों के अंधाधुंध कटान ने गर्मी के स्तर को बढाया है। छायादार वृक्षों का अभाव हो गया है। शहरों के हालात यह हैं कि भीषण गर्मी और दोपहरी में यदि यात्री या आम नागरिक कहीं छांव में खड़ा होना चाहे या कुछ देर धूप से  बचना चाहे तो उसे कोई पेड़ दिखायी ही नहीं देगा। इसके अलावा पेयजल की गंभीर समस्या है। सामान्य आदमी यदि सड़क के किनारे कहीं पानी तलाशना चाहे तो बोतल बंद पानी के अलावा उसे कहीं पानी नहीं मिलेगा। इसका कारण यह है कि नगर निकायों ने सार्वजनिक स्थलों, चौराहों पर अब पीने के पानी के लिए सार्वजनिक टंकियां लगानी बंद कर दी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में, मार्गों में और प्रमुख स्थलों जैसे रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, टैक्सी स्टैंडों, अस्पतालों, कोर्ट कचहरी में कहीं भी सार्वजनिक पानी की टंकियां दिखायी नहीं देती हैं। पहले इन स्थलों पर सरकारों, निकायों और सामाजिक संगठनों, व्पापारियों, प्रमुख समाजसेवियों द्वारा पियाऊ लगवायी जाती थीं। इसका प्रचलन भी समाप्त हो गया है। नौतपा हो या पूरा मई-जून का महीना सबको पानी और छांव की जरूरत है। इसके लिए प्रयास किये जाने चाहिए।

उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गर्मी का प्रकोप पूर्वांचल और बुंदेलखण्ड के जिलों में होता है। इस बार भी बन्देलखंड सबसे ज्यादा तप रहा है। बांदा ने गर्मी का विश्व रिकार्ड बनाया है। कल के तापमान में भी बांदा 46.7 डिग्री सेल्शियस तक पहुंचा है। आगे भी चेतावनी है कि बुन्देलखंड के सभी जिलों में भीषण गर्मी पड़ेगी। बुन्देलखण्ड का सबसे बडा संकट पेयजल की आपूर्ति का है। यहां पहले से ही पानी का अभाव रहा है। किन्तु भारत सरकार के प्रयास से शुरु की गई जल जीवन मिशन योजना ने कुछ हद तक राहत पहुंचायी है। लेकिन, अभी भी स्थिति में काफी सुधार की गुंजाइश है। जल जीवन मिशन की प्रगति धीमी है। कुछ जगह पानी पहुंच रहा है तो कुछ स्थानों तक पेयजल पाइप लाइन बिछी है किन्तु पानी की आपूर्ति नहीं है। कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहां पाइप लाइन ही नहीं पहुंची है। सरकारी अनुश्रवण के अभाव में योजना से शत-प्रतिशत लाभ ग्रामीण जनता को नहीं मिल पा रहा है।

हालांकि पश्चिम उत्तर प्रदेश के आगरा और मथुरा जैसे जिले भी तप रहे हैं। यहां भी तेज गर्मी की चेतावनी है। पश्चिम उत्तर प्रदेश के हिमालय की तलहटी से सटे जिलों में गर्मी में भी कभी राहत रहती थी,लेकिन अब यहां भी अंधाधुंध शहरीकरण और पेडों की कटाई ने मौसम में बदलाव किया है। ये जिले बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, लखमीपुर, बहराइच भी भीषण गर्मी की चपेट में हैं। सरकारों ने अपने स्तर से प्रयास किये हैं। स्कूलों की छुट्टियां करा दी गई हैं। सकारी कार्यालयों के समय में भी परिवर्तिन किया गया है। वर्क फ्राम होम की अनुमति दी जा रही है। इससे राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार को दिहाड़ी मजदूरों, मनरेगा मजदूरों और निर्माण कारीगरों और मजदूरों को गर्मी से बचाने के लिए प्रयास करने चाहिए। यह आवश्यक किया जाना चाहिए कि इन कार्य स्थलों पर कुछ समय के लिए छांव में आराम करने और पर्याप्त पीने के पानी की व्यवस्था संबंधित कार्यदायी संस्था या स्वामी को करने के लिए निर्देश दिये जाएं। ताकि मजदूरों को गर्मी से बचाया जा सके। अलबत्ता यह मौसम का प्राकृतिक चक्र है लेकिन इसका व्यवस्थित तरीके से सामना करना हम सबका दायित्व है। (उप्रससे)

 

 

ड्रेस कोड के विरोध में सड़कों पर उतरे छात्र, एलयू में प्रदर्शन

लखनऊ, 25 मई 2025, राज्यपाल के ड्रेस कोड संबंधी आदेश के विरोध में आज लखनऊ यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन हुआ।

 

मुख्यमंत्री ने तेरहवीं में पहुंचकर प्रतीक यादव को दी श्रद्धांजलि

Posted on 25.05.2026 Time 06.16 PM

लखनऊ, 25 मई 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज प्रतीक यादव की तेरहवीं में पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती अपर्णा यादव जी के लखनऊ स्थित आवास पर स्वर्गीय प्रतीक यादव जी की आत्मा की शांति के लिए आयोजित त्रयोदशी संस्कार कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

डीडीयू के पीएचडी छात्र शिवम कुमार यादव को मिला ‘यंग जूलॉजिस्ट अवॉर्ड’

Posted on 25/05/2026
Time 11:30 A.M
Gorakhpur
Santosh Kumar Singh

सिक्किम में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया विश्वविद्यालय का मान

​गोरखपुर: 25 मई 2026 ( उप्र समाचार सेवा) दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) के जूलॉजी विभाग ने एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान दर्ज कराई है। विभाग के पीएचडी शोधार्थी शिवम कुमार यादव को सिक्किम में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिष्ठित ‘यंग जूलॉजिस्ट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। शिवम की इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय और गोरखपुर का नाम रोशन हुआ है।

सिक्किम अल्पाइन यूनिवर्सिटी, नामची में ‘नेचर एंड नेचुरल साइंसेज’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का जमावड़ा लगा था। इस प्रतिष्ठित मंच पर शिवम कुमार यादव ने जलीय प्रदूषण और घोंघों (मोलस्क) के व्यवहार पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उनके इस शोध कार्य की विशेषज्ञों ने काफी सराहना की, जिसके चलते उन्हें ‘यंग जूलॉजिस्ट अवॉर्ड’ से नवाजा गया।

शिवम वर्तमान में डीडीयू के जूलॉजी विभाग में प्रोफेसर विनय कुमार सिंह की देखरेख में अपनी पीएचडी पूरी कर रहे हैं। उनका शोध मुख्य रूप से जलीय जीवों की सुरक्षा और प्लास्टिक प्रदूषण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में केंद्रित है। शिवम की यह उपलब्धि उनके समर्पण और कड़ी मेहनत का परिणाम है। इससे पहले भी उन्हें ‘यंग रिसर्चर अवॉर्ड’ जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं।

शिवम की इस बड़ी कामयाबी पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने गहरा हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह डीडीयू के लिए गौरव का क्षण है। शिवम की सफलता न केवल उनके अनुशासन और कठिन परिश्रम को दर्शाती है, बल्कि यह हमारे विश्वविद्यालय के अन्य शोधार्थियों और छात्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

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