नारी: शक्ति, संवेदना और सृजन -डाॅ० राकेश सक्सेना
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एटा 06 मार्च उप्रससे। सृष्टि के विकास में नर और नारी दोनों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। प्रकृतिस्वरूपा होने के कारण सृष्टि पहले से ही रहस्यात्मक थी किन्तु इसको गंभीरतम बनाने में नर-नारी का मिथुनस्वरूप सहायक सिद्ध हुआ। अपने पौरुष, साहस,शौर्य और तेज के कारण यदि नर एक भिन्न वर्ग में […]
