Posted on 17.06.2026 Time 10.18 AM, Wednesday, by Sarvesh Kumar Singh
सर्वेश कुमार सिंह
सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की सहमति बन गई। इसकी घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से उनके मीडिया प्लेटफार्म सोशल ट्रूथ पर हो गई है। अभी समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर हुए हैं यानिकि भौतिक हस्ताक्षर होना बाकी है। भौतिक हस्ताक्षर होने के बाद ही समझौते को अंतिम माना जाएगा। ये हस्ताक्षर 19 जून को जिनेवा में होंगे। लेकिन, डिजिटल हस्ताक्षर वाले समझौते को अस्थायी समझौता माना जा सकता है। इसे यह भी माना जा सकता है कि दोनों देश सैद्धान्तिक रूप से युद्धविराम और एक व्यापक समझौते के लिए सहमत हो गए हैं।
प्रारंभिक समझौते का दुनिया के अधिकाश देशों ने स्वागत किया है। अलबत्ता इस्राइल ने समझौता मानने और इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। इस्राइल के अपने हित हैं, वह उनकी अनदेखी नहीं कर सकता है। लेकिन, डोनाल्ड ट्रंप इस्राइल पर समझौता मानने का दवाब बना रहे हैं, जिसे इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होने कहा है कि हमें अपने हित देखने हैं। इस्राइल लेबनान, गाजा और सीरिया से पीछे नही हटेगा। जबकि ईरान चाहता है कि समझौते में इस्राइल को भी शामिल किया जाए और वह लेबनान में हमले बंद करे, वहां कब्जा की गई जमीन को छोड़े। लेकिन, इस्राइल ने साफ कह दिया है कि यह समझौता इस्राइल के लिए बाध्यकारी नहीं है। हालांकि इस्राइल ने जो मुद्दे उठाये हैं वे भी अहम हैं जैसे उसने कहा है कि आरंभिक समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने या उसके नियंत्रण की कोई बात शामिल नहीं है। क्योंकि इस्राइल इस बात के लिए कटिबद्ध है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उधर ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए भी अमेरिका ने कोई शर्त नहीं लगाई है। बैंजामिन ने कहा है कि न तो आज और न ही कल हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। इसलिए समझौते को इस्राइल ने सिरे से खारिज कर दिया है। उसने अमेरिका को साफ बता दिया है क उसे इस्राइल के आंतरिक और सैन्य मामलों में हस्तक्षेप करने का उसे कोई अधिकार नहीं है। इतना कड़ा रुख अपनाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह समझौता आधा अधूरा ही है और युद्ध की आशंका आगे भी बनी रहेगी। इस्राइल और ईरान के बीच फिर किसी भी समय युद्ध छिड़ सकता है।
सोशल ट्रूथ पर डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया है कि अब होर्मुज खुल गया है। तेल की स्वतंत्र रूप से आवाजाही होगी। कोई टोल नही लगेगा। ईरान होर्मुज से बारूदी सुरंगें हटाएगा और अमेरिका ईरान के समुद्री तटों की नाकेबंदी खत्म करेगा। इससे दुनिया को राहत मिलेगी। स्वतंत्र रूप से तेल के टैंकर वाले जहाज होर्मुज से निर्बाध आवाजाही कर सकेंगे। साथ ही ईरान से भी तेल खरीदा जा सकेगा। लेकिन ट्रंप इस बात पर मौन हैं कि ईरान के 60 प्रतिशत संबर्धित यूरेनियम का क्या होगा। उस पर किसका निंयत्रण होगा। क्या उसे ईरान नष्ट करेगा। क्योंकि ऊर्जा क्षेत्र के लिए सिर्फ 5 प्रतिशत संबंर्धित यूरेनियम की ही आवश्यकता होती है। हालांकि ईरान ने यह भी कहा है कि अगले दौर की बातचीत में परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को शामिल किया जा सकता है। फिलहाल यह समझौता अगले साठ दिन के लिए लागू होने जा रहा है। इन साठ दिनों में अमेरिका और ईरान एक दूसरे पर हमले नहीं करेंगे। यह युद्ध एक तरह से 108 दिन बाद समाप्ति की ओर है। माना जाना चाहिए कि अब दोनों के बीच हवाई और मिसाइल हमले नहीं होंगे।
समझौते का विश्व के अन्य देशों और खासकर भारत पर क्या प्रभाव होगा। यह जानना भी जरूरी है। विश्व के सभी देश तेल की आवश्यकता की पूर्ति के लिए मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। भारत कौ गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति खाडी के देशो से होती है। इस युद्द के कारण यह आपूर्ति प्रभावित हुई। क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान ने बंद कर दिया था। उधर अमेरिका ने ईरान के समुद्री तटों की नाकेबंदी कर दी थी। इसी नाकेबंदी के कारण भारत के तीन नाविकों की मृत्यु अमेरिकी हमले में हो गई थी। अमेरिका ने तीन विदेशी जहाजों पर ओमान के तट पर हमले किये थे, जिनपर भारतीय क्रू सवार थे। अब समझौते के बाद सभी तरह के प्रतिबंध हट जाएंगे। इससे भारतीय जहाजों को तेल और गैस लाने में कोई रोक टोक नहीं होगी। इसका असर पर देश में कच्चे तेल की कीमतो पर पड़ेगा। भारत का आयता बिल घटेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। कीमतें घटेंगीं तो घऱेलू बाजार में भी सरकार मूल्य घटाएगी। साथ ही आपूर्ति में कटौती और प्रतिंबध भी समाप्त हो जाएंगे। भारत को यूरिया की संभावित कमी का सामना भी नही करना पडेगा। कुल मिलाकर भारत के लिए और शेष विश्व के लिए यह समझौता लाभकारी है। हमें इस चर्चा में जाने की कोई जरूरत नहीं है कि इस समझौते में जीत अमेरिका की हुई है या ईरान की। विश्व के हित सुरक्षित हुए हैं यह संतोषजनक है।
