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एआई और पत्रकारिता अवसर भी, चुनौती भी — उपज की संगोष्ठी में हुआ गंभीर मंथन

May 31, 2026

एआई और पत्रकारिता अवसर भी, चुनौती भी — उपज की संगोष्ठी में हुआ गंभीर मंथन

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष

*पत्रकारिता में एआई की भूमिका पर बरेली में जुटे वरिष्ठ पत्रकार*

*तकनीक अपनाएं, लेकिन संवेदना और सत्य से न हो समझौता*
*एआई कभी नहीं ले सकती पत्रकार की मानवीय सोच और जिम्मेदारी का स्थान*

*हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर उपज का विचार मंथन*

*वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान, पत्रकारिता के भविष्य पर खुली चर्चा*

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स (उपज) बरेली इकाई द्वारा “एआई और पत्रकारिता : अवसर एवं चुनौती” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभाव तथा पत्रकारिता के मूल्यों को बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा हुई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला सूचना अधिकारी श्रीमती नीतू कनौजिया तथा अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार दादा शंकर दास ने की। गोष्ठी में जिले के अनेक वरिष्ठ एवं युवा पत्रकारों ने अपने विचार व्यक्त किए।
उपज के जिला अध्यक्ष डॉ. आशीष गुप्ता ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नाम में ही “कृत्रिम” शब्द शामिल है, इसलिए यह कभी भी वास्तविक मानवीय व्यवहार, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों की बराबरी नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि एआई पत्रकारिता में एक प्रभावी टूल के रूप में उपयोगी हो सकती है, लेकिन किसी भी स्थिति में पत्रकार की संवेदनशीलता, अनुभव और विवेक का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने पत्रकारों से तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने और उस पर पूर्ण निर्भरता से बचने का आह्वान किया।
वरिष्ठ पत्रकार संजीव गंभीर ने कहा कि बदलते समय के साथ तकनीक को अपनाना आवश्यक है, लेकिन पत्रकारिता के मूल मूल्य और विश्वसनीयता हमेशा सर्वोपरि रहने चाहिए। उपज के जिला महामंत्री अजय कश्यप ने कहा कि आज भी समाज खबरों की सत्यता के लिए पत्रकारों पर भरोसा करता है और कोई भी तकनीक मानव की जगह नहीं ले सकती।
वरिष्ठ शिक्षाविद डॉक्टर स्वतंत्र कुमार ने कहा की तकनीक हमेशा उन्नत होती रहती है लेकिन कभी भी वह मानव सभ्यता के ऊपर नहीं हो पाई

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार दादा शंकर दास ने कहा कि जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है, उसी प्रकार मस्तिष्क को सक्रिय रखने के लिए निरंतर अध्ययन और चिंतन आवश्यक है। यदि पत्रकार अपने ज्ञान और विवेक का विकास करते रहेंगे तो वे कभी भी एआई पर निर्भर नहीं होंगे।
पत्रकार रामविलास सक्सेना ने अध्ययन और सतत सीखने की संस्कृति को पत्रकारिता की सबसे बड़ी शक्ति बताया। वहीं मुख्य अतिथि नीतू कनौजिया ने उपज द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि एआई पर गंभीर मंथन की आवश्यकता है ताकि तकनीक मानव की सहायक बने, उसका स्वामी नहीं। उन्होंने सूचना विभाग द्वारा इस विषय पर एक व्यापक कार्यशाला आयोजित करने की भी घोषणा की।
भीम मनोहर, दिनेश्वर दयाल, विकल्प कुदेशिया आदि ने भी अपने विचार रखें
इस अवसर पर प्रिंट मीडिया से डिजिटल और एआई युग तक का सफर तय करने वाले वरिष्ठ पत्रकार आर.बी. लाल और संजीव गंभीर को सम्मानित किया गया। पत्रकारिता में दीर्घकालीन योगदान के लिए दादा शंकर दास का भी सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि नीतू कनौजिया को ‘मीडिया का लोकतंत्र’ पुस्तक एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में आर.के. सिंह, भीम मनोहर, रंजीत शर्मा, दिनेश्वर दयाल सक्सेना, विकल्प कुरेशिया डॉ स्वतंत्र कुमार, शानू कठेरिया आदित्य शर्मा तरुण कुमार, सुयोग्य सिंह, शुभम सिंह सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे। गोष्ठी ने यह संदेश दिया कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत हो जाए, पत्रकारिता की आत्मा हमेशा मानवीय संवेदनाओं, सत्यनिष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व में ही निहित रहेगी।