
Posted on 29.05.2026 Time 04.05 PM
बिजनौर , 29 मई 2026, स्वास्थ्य विभाग में ‘सेवा’ के नाम पर मेवा’ खाने की चर्चाएं तो आपने बहुत सुनी होंगी, लेकिन बिजनौर के नजीबाबाद से जो खबर सामने आई है, उसने महकमे की साख को तार-तार कर दिया है। समीपुर स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात नोडल अफसर डॉ. प्रमोद देशवाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें साहब सरेआम एक झोलाछाप डॉक्टर से ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) की डील करते और पैसे लेते हुए कैद हो गए हैं।
वायरल वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि साहब बड़ी बेबाकी से कह रहे हैं— “तेरे पास मुझे तीन-तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं।” मतलब साफ है, साहब का यह ‘चक्कर’ कोई इलाज के लिए नहीं, बल्कि अपनी जेब गर्म करने के लिए था। 5 हजार रुपये की यह रकम रिश्वत की है या ‘हफ्ता-वसूली’, यह तो जाँच का विषय है, लेकिन जिस तरह से एक जिम्मेदार अफसर एक झोलाछाप डॉक्टर के साथ पैसे का लेन-देन कर रहा है, वह सिस्टम के मुंह पर एक बड़ा तमाचा है।
जब वीडियो वायरल हुआ और मामला तूल पकड़ा, तो आरोपी डॉक्टर प्रमोद देशवाल ने अपना बचाव करते हुए बड़ा ही दिलचस्प तर्क दिया। साहब का कहना है कि उन्होंने तो बस अपना ‘उधार’ दिया हुआ पैसा वापस लिया था।
उन्होंने इसे अपने खिलाफ एक ‘गहरी साजिश’ करार दिया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी अस्पताल के नोडल अफसर का काम अस्पताल में बैठकर अपना ‘उधार’ वसूलना है
इस पूरे ‘घूसकांड’ ने प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं। बिजनौर की डीएम जसजीत कौर ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने तुरंत जाँच के आदेश दे दिए हैं। अब देखना यह है कि जाँच की आंच में कौन-कौन झुलसता है और क्या डॉक्टर साहब की ‘उधार वाली दलील’ जाँच टीम को हजम होती है या नहीं।
सवाल यह उठता है कि अगर एक नोडल अफसर खुद झोलाछाप डॉक्टरों से ऐसे डील करेगा, तो आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा कौन करेगा? क्या ये महज एक इत्तेफाक है या बिजनौर स्वास्थ्य विभाग के अंदर पनप रहे एक बड़े भ्रष्टाचार का छोटा सा हिस्सा है।
