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यातायात पुलिस को मिली इंटरसेप्टर की सौगात, सड़क सुरक्षा और यातायात को मिलेगी नई रफ्तार 

August 6, 2026

यातायात पुलिस को मिली इंटरसेप्टर की सौगात, सड़क सुरक्षा और यातायात को मिलेगी नई रफ्तार 

मैनपुरी। देशभर में सड़क हादसों पर लगाम लगाने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए ट्रैफिक पुलिस विभागों को आधुनिक तकनीक से लैस ‘इंटरसेप्टर वाहन सौंपे जा रहे हैं। हाइवे और एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीडिंग और अन्य नियमों की अनदेखी करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए यह हाई-टेक गाड़ियां बेहद कारगर साबित हो रही हैं। इंटरसेप्टर वाहन को पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया।
यातायात प्रभारी एसके सिंह ने इस आधुनिक इंटरसेप्टर गाड़ियों की उन खासियतों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इन्हें सड़क सुरक्षा के लिए एक पावरफुल हथियार बनाती हैं
इंटरसेप्टर गाड़ियों में अत्याधुनिक स्पीड रडार और लेजर गन लगी होती है। इसकी मदद से पुलिसकर्मी चलती या खड़ी गाड़ी से ही दूर गुजर रहे वाहनों की सटीक रफ्तार माप लेते हैं। तय सीमा से तेज गति से वाहन चलाने वालों की तस्वीरें और वीडियो कैमरे में कैद हो जाते हैं। इन गाड़ियों में हाई-रिजॉल्यूशन पीटीजेड और एएनपीआर कैमरे लगे होते हैं, जो दिन हो या रात, तेज रफ्तार वाहनों की नंबर प्लेट को आसानी से स्कैन कर लेते हैं। इससे बिना रुके या पीछा किए संदिग्ध या चालान वाले वाहनों की पहचान पलक झपकते ही हो जाती है। पारदर्शिता और तुरंत कार्रवाई के लिए इन आधुनिक वाहनों में जीपीएस सिस्टम, प्रिंटर और सर्वर से जुड़े कंप्यूटर्स की पूरी यूनिट होती है। नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों का डेटा जैसे ही रडार और कैमरे में आता है, गाड़ी के अंदर से ही तुरंत ऑनलाइन ई-चालान जनरेट कर दिया जाता है।सड़क पर नशे में गाड़ी चलाकर दुर्घटनाओं को न्योता देने वालों की जांच के लिए इंटरसेप्टर वाहन में एडवांस्ड ब्रेथ एनालाइजर किट मौजूद होती है। उन्होंने बताया कि इससे ड्राइवर के अल्कोहल लेने की पुष्टि तुरंत मौके पर ही हो जाती है। कई नए आधुनिक इंटरसेप्टर वाहनों में गाड़ियों से निकलने वाले धुएं की जांच के लिए प्रदूषण मापने वाले यंत्र और अन्य सुरक्षा जांच उपकरण भी इंटीग्रेटेड होते हैं, जिससे फिटनेस नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी कार्रवाई की जाती है। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक इंटरसेप्टर गाड़ियों के हाईवे पर उतरने से वाहन चालकों में डर और अनुशासन दोनों बढ़ेगा। लोग अब तय स्पीड लिमिट और सीट बेल्ट/हेलमेट जैसे नियमों को लेकर ज्यादा सतर्क रहेंगे, जिससे सड़क हादसों और मौतों के आंकड़ों में भारी कमी दर्ज की जा सकेगी।