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बदरीनाथ धाम के कपाट खुले, दर्शन शुरू

April 23, 2026

बदरीनाथ धाम के कपाट खुले, दर्शन शुरू

Posted on 23.04.2026 Thursday Time 07.48 AM, Chamoli, Uttarakhand News, Uk News, Uttarakhand Samachar, Badrinath Dham

देहरादून, 23 अप्रैल 2026, गुरुवार ( उत्तराखंड समाचार), चमोली जिला स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट आज सुबह 6  बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। वैदिक मंत्रों के बीच पुजारियों ने कपट खोले। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रबंध किया है।

प्रशासन के अनुसार केदारनाथ धाम के कपाट कल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे, जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री धामों की तीर्थयात्रा सुचारू रूप से चल रही है।

April 20, 2026

केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को और बद्रीनाथ धाम के कपाट गुरुवार को खुलेंगे

देहरादून, 20 अप्रैल 26, कल से शुरू हुई गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की तीर्थयात्रा सुचारू रूप से चल रही है। वहीं, रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने बताया कि जिला प्रशासन ने यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

इस बीच, केदारनाथ मंदिर को पुष्पों से सजाने का काम शुरू हो गया है। बाबा केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा की पालकी रात्रि विश्राम के लिए गौरीकुंड पहुंच गई है। इसके अलावा, चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। जिला और पुलिस प्रशासन ने सुचारू और सुरक्षित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।

अक्षय तृतीया पर खुले गंगोत्री, यमुनोत्री के कपाट

Dehradun,  गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट अक्षय तृतीया के अवसर पर रविवार को वैदिक मंत्रों और धार्मिक उल्‍लास के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की। दोनों तीर्थस्थलों के खुलने के साथ ही राज्य में वार्षिक चार धाम यात्रा का भी औपचारिक रूप से शुभारंभ हो गया है।

April 13, 2026

सभी की सहभागिता से ही हो सकता है गौमाता का संरक्षण संवर्धन-राजेश दवे

हरिद्वार, 13 अप्रैल। गायों के संरक्षण संवर्धन को लेकर राजेश दवे ने कहा कि गौ माता का संरक्षण संवर्धन सभी की सहभागिता से ही हो सकता है। प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए राजेश दवे ने केंद्र सरकार से भी मांग की कि संस्कृति मंत्रालय का गठन किया जाना चाहिए, ताकि पालतू पशुओं का डाटा एकत्र किया जा सके। राजेश दवे ने कहा कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि गौ माता के अलावा भैंस, हाथी, घोड़ा, ऊंट, भेड़, बकरी, गधा आदि की रक्षा के लिए तत्पर रहे। पालतू जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। गौ हत्या पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने कहा कि गाय की संख्या लगातार घट रही है। जो कि चिंता का विषय है। पालतू जानवरों की रक्षा, सुरक्षा के लिए सभी की सहभागिता होनी चाहिए। धर्म को व्यवसाय ना बनाने की अपील भी की। पालतू जानवरों के संरक्षण संवर्धन को लेकर समाज में चेतना फैलाने का काम कर रहे राजेश दवे ने धर्म नगरी के संतों से भी गौमाता की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की।

एक्स मुस्लिम यात्रा को लेकर गंगा अध्यक्ष के बयान पर स्वामी रामविशाल दास ने किया पलटवार

श्री गंगा सभा से की नितिन गौतम व उज्जवल पंडित को सभा से बाहर करने की मांग
हरिद्वार, 13 अप्रैल। एक्स मुस्लिम यात्रा को लेकर उठे सवाल एवं आरोप प्रत्यारोपों के बीच स्वामी रामविशाल दास महाराज ने श्री गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम एवं तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित के बयान पर पलटवार किया है। प्रैस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान स्वामी रामविशाल दास महाराज ने कहा कि वे एक्स मुस्लिम यात्रा के ना तो संयोजक हैं, ना ही आयोजक हैं। वे केवल मुस्लिम से हिंदू बने लोगों का सम्मान करने पहुंचे थे। लेकिन श्री गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम ने उन्हें कालनेमि कहकर संतों का अपमान किया है। रामविशाल दास ने कहा कि संत बनने के बाद वे संत परंपरांओं का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। संतों के प्रचार प्रसार के चलते ही पूरे देश से लोग हरकी पैड़ी आते हैं। एक संत को कालनेमि बताने वाले व्यक्ति को श्री गंगा सभा का अध्यक्ष रहने का कोई अधिकार नहीं है। श्री गंगा सभा को नितिन गौतम व उज्जवल पंडित को तुरंत बाहर करना चाहिए। स्वामी रामविशाल दास ने गंगा सभा अध्यक्ष को डिबेट की चुनौती भी दी और कहा कि यदि किसी के टोपी पहनने पर आपत्ति थी तो मौके पर इसे रोका जा सकता था। लेकिन कार्यक्रम के दौरान किसी ने कोई आपत्ति नहीं जतायी। बाद में विवाद खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संतों के अपमान के इस मुद्दे को लेकर बुधवार को संत समाज की बैठक आयोजित की गयी है। बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। बैठक के दौरान विनोद महाराज ने कहा कि एक्स मुस्लिम शब्द इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। सनातन हिंदू संस्कृति में विश्वास जताकर हिंदू धर्म अपना चुके लोगों को अब हिंदू ही कहा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संतों को कालनेमि कहने का किसी कोई अधिकार नहीं है। स्वामी देवानंद ने कहा कि किसी भी तरह के आरोप लगाने से पहले सत्यता जाननी चाहिए। जिससे विवाद उत्पन्न ना हो।

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