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लोजपा (रामविलास) की वर्चुअल बैठक, संगठन मजबूती पर दिया गया जोर

April 19, 2026

लोजपा (रामविलास) की वर्चुअल बैठक, संगठन मजबूती पर दिया गया जोर

Mathura News

Mathura Samachar

मथुरा। अतुल कुमार जिंदल।लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पश्चिम उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पवन कुमार वर्मा द्वारा एक जूम मीटिंग आयोजित की गई, जिसमें संगठन को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में पवन कुमार वर्मा ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में प्रदेश अध्यक्ष का दौरा किया जाएगा। साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रभारी एवं सांसद अरुण भारती का भी प्रदेशभर में दौरा प्रस्तावित है।
उन्होंने सभी प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों से आह्वान किया कि वे मिलकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करें, ताकि पार्टी की पकड़ जमीनी स्तर पर सुदृढ़ हो सके।
बैठक में यह भी बताया गया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसे ध्यान में रखते हुए संगठन विस्तार और मजबूती को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
इस वर्चुअल बैठक में पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रदेश पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

महिला आरक्षण: नारी शक्ति या सत्ता का नया मुखौटा?

 (आरक्षण, नैतिकता और राजनीति का असली सवाल)
Dr Priyanka Saurabh Writer, Poet
– डॉ. प्रियंका सौरभ
देश में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ, तो इसे “ऐतिहासिक” बताया गया, संसद में तालियां बजीं और महिला सशक्तिकरण के नए युग की घोषणा की गई, लेकिन इस पूरे उत्सव के बीच एक असहज सवाल लगातार सिर उठाता रहा—क्या सच में महिलाओं के लिए राजनीति के दरवाजे खुले हैं, या केवल एक नया प्रतीकात्मक फ्रेम तैयार किया गया है जिसमें वही पुरानी सत्ता की तस्वीर फिट कर दी जाएगी। भारतीय राजनीति का चरित्र आदर्शवाद जितना नहीं, उससे कहीं अधिक यथार्थवादी और कई बार कठोर भी रहा है, जहां सिद्धांतों से ज्यादा समीकरण काम करते हैं और नैतिकता अक्सर सत्ता की सुविधा के हिसाब से बदलती रहती है, ऐसे में यह उम्मीद करना कि केवल आरक्षण से व्यवस्था का चरित्र बदल जाएगा, शायद एक भोला विश्वास हो सकता है। महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़नी चाहिए, यह एक बुनियादी लोकतांत्रिक आवश्यकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भागीदारी वास्तविक सशक्तिकरण में बदलेगी या फिर वही सत्ता संरचना उन्हें अपने ढांचे में ढाल लेगी, जैसा वह हर नए प्रवेशकर्ता के साथ करती आई है। राजनीति में प्रवेश का रास्ता आज भी बेहद जटिल है, जहां परिवार, पूंजी, संपर्क और दलगत निष्ठा का दबाव काम करता है, और महिलाओं के लिए यह राह और अधिक कठिन हो जाती है क्योंकि उन्हें सामाजिक बंधनों, चरित्र पर सवाल और अवसरों की कमी जैसे अतिरिक्त अवरोधों से गुजरना पड़ता है, ऐसे में यह मान लेना कि हर महिला जो आगे बढ़ेगी वह केवल समझौतों के रास्ते ही बढ़ेगी, यह न केवल सरलीकरण है बल्कि उन हजारों महिलाओं के संघर्ष का अपमान भी है जो अपनी मेहनत और योग्यता से जगह बना रही हैं।
असल समस्या यह है कि जिस सिस्टम में यह आरक्षण लागू हो रहा है, वह खुद पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं है, राजनीतिक दलों के भीतर लोकतंत्र की कमी, टिकट वितरण में अपारदर्शिता और नेतृत्व का केंद्रीकरण यह सुनिश्चित करता है कि अवसर योग्यता से अधिक नजदीकियों के आधार पर बांटे जाते हैं, ऐसे में अगर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित भी हो जाती हैं, तो यह जरूरी नहीं कि वे वास्तव में स्वतंत्र और सशक्त प्रतिनिधि बनकर उभरें, बल्कि यह भी संभव है कि वे उसी सत्ता खेल का हिस्सा बन जाएं जहां निर्णय कहीं और होते हैं और चेहरे कहीं और दिखते हैं। यही कारण है कि इस कानून को लेकर आशा के साथ-साथ आशंका भी स्वाभाविक है, क्योंकि अगर संरचना नहीं बदली, तो परिणाम भी वैसा ही रहेगा जैसा अब तक रहा है। राजनीति में नैतिकता का सवाल भी इस बहस के केंद्र में है, क्योंकि सत्ता के गलियारों में “संपर्क” और “समझौते” की संस्कृति लंबे समय से मौजूद है, और यह केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम में फैली हुई है, ऐसे में अगर इस संस्कृति को चुनौती नहीं दी गई, तो आरक्षण भी उसी ढांचे में समाहित होकर अपना मूल उद्देश्य खो सकता है।
यह भी समझना जरूरी है कि प्रतिनिधित्व बढ़ाने से परिवर्तन की गारंटी नहीं मिलती, कई बार नए लोग भी पुराने ढर्रे पर चलने लगते हैं क्योंकि व्यवस्था उन्हें वैसा बनने के लिए मजबूर करती है, इसलिए किसी भी सुधार का मूल्यांकन केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उसके प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए, क्या महिलाओं की संख्या बढ़ने से नीतियों में संवेदनशीलता आएगी, क्या सामाजिक मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी, या फिर राजनीति केवल नए चेहरों के साथ पुरानी दिशा में चलती रहेगी, यह एक खुला सवाल है जिसका जवाब समय ही देगा। इस पूरे परिदृश्य में सबसे महत्वपूर्ण तत्व जवाबदेही है, अगर कोई भी व्यक्ति, चाहे वह पुरुष हो या महिला, सत्ता का दुरुपयोग करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि हमारे संस्थान स्वतंत्र और मजबूत हों, जो बिना राजनीतिक दबाव के काम कर सकें, दुर्भाग्य से आज अपराध और राजनीति का गठजोड़ एक गंभीर समस्या बन चुका है, जहां कई मामलों में आरोपियों को संरक्षण मिलता है और पीड़ितों की आवाज दबा दी जाती है, ऐसे में यह उम्मीद करना कि केवल आरक्षण इस समस्या को खत्म कर देगा, यथार्थवादी नहीं है।
समाधान के रूप में हमें व्यापक सुधारों की जरूरत है, राजनीतिक दलों के भीतर पारदर्शिता लानी होगी, टिकट वितरण के स्पष्ट और निष्पक्ष मानदंड तय करने होंगे, महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वतंत्र शिकायत तंत्र विकसित करना होगा ताकि वे बिना डर के अपनी बात रख सकें, साथ ही उन्हें केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधि के रूप में नहीं बल्कि सक्षम और प्रशिक्षित नेतृत्व के रूप में तैयार करना होगा, इसके लिए राजनीतिक शिक्षा, संसाधन और संस्थागत समर्थन जरूरी है, और सबसे महत्वपूर्ण, समाज की मानसिकता में बदलाव लाना होगा क्योंकि जब तक महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी कानून अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाएगा। अंततः यह समझना होगा कि देश की समस्याओं का समाधान केवल सीटों की संख्या बढ़ाने में नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में है, क्योंकि एक सशक्त समाज ही एक सशक्त लोकतंत्र की नींव रख सकता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक अवसर है, लेकिन यह अवसर तभी सार्थक होगा जब इसे ईमानदारी और दूरदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा, अन्यथा यह भी एक नया मुखौटा बनकर रह जाएगा, जिसके पीछे वही पुरानी सत्ता की तस्वीर छिपी होगी।

Hathras गदाखेड़ा में विवाहिता का शव फंदे पर मिला, मायके पक्ष का हंगामा

हाथरस। सासनी क्षेत्र के गांव गदाखेड़ा में करीब 20 वर्षीय एक विवाहिता का शव घर के अंदर फंदे पर लटका मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई, वहीं सूचना मिलते ही मायके पक्ष के लोग भी पहुंच गए और आक्रोश जताया।प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतका रेनू की शादी करीब दो वर्ष पूर्व गांव निवासी विक्की के साथ हुई थी। बताया जाता है कि विवाहिता की अभी कोई संतान नहीं थी। शनिवार दोपहर अज्ञात कारणों के चलते उसने घर के अंदर फांसी लगा ली, जिससे परिजनों में कोहराम मच गया।घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को फंदे से उतरवाकर कब्जे में लिया। इसके बाद पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया गया। उधर, मायके पक्ष के लोग सासनी कोतवाली पहुंच गए और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।प्रभारी निरीक्षक विपिन चौधरी ने लोगों को समझाकर शांत कराया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।पुलिस ने बताया कि अभी तक मायके पक्ष की ओर से कोई लिखित तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मध्याह्न भोजन में लापरवाही पर कार्रवाई, 5 प्रधानाध्यापक व 3 संस्थाओं को नोटिस

हाथरस। बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वाति भारती ने परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन वितरण में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निर्धारित मीनू के अनुसार दूध का वितरण न किए जाने पर पांच विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और तीन भोजन आपूर्ति करने वाली संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सभी से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।निरीक्षण के दौरान पाया गया कि विद्यार्थियों को तय मीनू के अनुसार ‘तहरी और दूध’ दिया जाना था, लेकिन कई विद्यालयों में दूध नहीं वितरित किया गया, जिसे नियमों का उल्लंघन माना गया।इस मामले में संविलयन विद्यालय तिपरस, अजरोई, दोहई, सुल्तानपुर तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय नगला जलाल के प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही जनहितकारी सेवा समिति (अलीगढ़), ग्रामीण विकास सेवा संस्थान (अतरौली) और अशर्फी ग्रामोद्योग संस्थान (छर्रा) को भी कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।बीएसए ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधितों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।

तहसीलदार राखी शर्मा पर गिरी गाज: अनुशासनहीनता में कार्रवाई, लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध

Rakhi Sharma PCS

फिरोजाबाद, 18 अप्रैल 2026। जनपद फिरोजाबाद में तैनात तहसीलदार सुश्री राखी शर्मा के विरुद्ध गंभीर अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा जारी आदेश में उन्हें तत्काल प्रभाव से फिरोजाबाद से हटाकर लखनऊ स्थित मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जमीन संबंधी प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

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