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प्रेम, आशीर्वाद और साधना के संगम के बीच विवाह बंधन में बंधे तीन युगल”

February 16, 2026

प्रेम, आशीर्वाद और साधना के संगम के बीच विवाह बंधन में बंधे तीन युगल”

#शाहजहांपुर।
#प्रेम, आशीर्वाद और अध्यात्म के संगम के बीच परिणय सूत्र बंधन का साक्षी बना राम चन्द्र मिशन आश्रम, जहाँ बसंत उत्सव में तीन विवाह पवित्र रीति से संपन्न हुए। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडिटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल (दाजी) के सान्निध्य और आशीर्वाद के साथ इन विवाह संस्कारों ने आध्यात्मिक गरिमा का अनुपम रूप धारण किया।
#प्रथम विवाह में रायबरेली के संदीप और अर्चना ने एक-दूसरे को वरमाला अर्पित कर प्रेम और विश्वास के सूत्र में बंधने की प्रतिज्ञा ली। दूल्हे द्वारा मंगलसूत्र धारण कराए जाने और मांग सिंदूर से अलंकृत होने के क्षण साक्षी बने उस पवित्र संकल्प के, जिसमें दो आत्माएँ एक पथ पर अग्रसर होने को तत्पर हुई नवदम्पति ने पूज्य दाजी से आशीर्वाद प्राप्त कर अपने वैवाहिक जीवन की शुभ शुरुआत की।
#दूसरा विवाह में हल्द्वानी की ब्रजनीलता और रुद्रपुर के गणेश ने वैदिक परंपराओं के साथ सात्विक भाव से परिणय सूत्र में बंधकर दाजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। तीसरा विवाह कानपुर के शिवम और नागपुर की रितु के साथ हुआ। तीनों नवदम्पतियों को पूज्य दाजी ने प्रसाद प्रदान कर मंगल कामनाएँ दीं और उनके दांपत्य जीवन को प्रेम, संयम तथा सेवा के पथ पर अग्रसर होने का संदेश दिया।
#इस प्रकार बसंत उत्सव का यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संस्कारों, संवेदनाओं और साधना से अनुप्राणित वैवाहिक जीवन की प्रेरक मिसाल बन गया—जहाँ विवाह मात्र सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नयन का शुभ आरंभ प्रतीत हुआ।

February 15, 2026

चरित्र की पूजा होती है चित्र की नहीं: स्वामी

Swami Chinmayanand

#महाविद्यालय में शादी के लिए बच्चे पढ़ाए जाते थे
#चौराहे की भाषा देश की सर्वोच्च संसद में बोली जा रही है
#बोलने की इतनी आजादी मिल गई है कि हम बदतमीज हो गए हैं
#वाइस चांसलर बनने को कहा गया मैंने मना कर दिया
#डॉ आकुल स्मृति सम्मान समारोह में बोले पूर्व गृहराज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद
#शाहजहांपुर।
#स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के सभागार में शनिवार की दोपहर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। यह समारोह जिले के कीर्तिशेष साहित्यकार डॉ गिरिजानंदन त्रिगुणायत “आकुल” की स्मृति में आयोजित किया गया। परिक्रमा प्रजेंट्स के बैनर तले आयोजित समारोह में चार विशिष्ट जनों को “आकुल सम्मान” प्रदान किया गया।
#मुख्य अतिथि स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने रंगकर्म से वरिष्ठ रंगकर्मी मनोज मंजुल, कानूनविद ब्रजेश पांडे एडवोकेट, सीए जीसी वर्मा और समाजसेवा से लायन संजय चोपड़ा को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए। इस मौके पर स्वामी चिन्मयानंद ने विस्तृत भाषण में चित्र और चरित्र पर खुलकर बात की। कहा, यह देश उसी चित्र की पूजा करता है, जिसका कोई चरित्र होता है। राम सबके लिए थे, इसलिए उनको पूजा जाता है। इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षर में नाम लिखा जाए, ऐसा कुछ काम किया जाना चाहिए, चिता में चित्र ही जले और चरित्र अमर हो जाए। ऐसा जीवन जिया जाना चाहिए।

#अधिष्ठाता ने व्यंग्यात्मक लहज़े में कहा, पहले इस महाविद्यालय में शादी कराने के लिए बच्चे पढ़ाए जाते थे। सात कमरे, पौने तीन सौ विद्यार्थी से शुरू हुआ सफ़र अब विश्विद्यालय तक पहुंच गया है। अधिकतर लोग अपने और परिवार के लिए ही जिया करते हैं। याद वह किए जाते हैं, जो समाज और देश को कुछ दे जाते हैं।

#उन्होंने कहा, गुलज़ारी लाल नंदा, स्वामी शुकदेवानंद शाहजहांपुर में पैदा नहीं हुए, लेकिन उन्होंने जो समाज की सेवा की है। वह अनुकरणीय है। इन्होंने अपने लिए कुछ अर्जित नहीं किया। तभी इनको आज भी याद किया जाता है। दधीचि की हड्डी की तरह शुकदेवानंद ने सभी कुछ दिया। 1964 में गुलज़ारी लाल नंदा ने कहा था कि स्वामी शुकदेवानंद ने जो पौधा लगाया है, वह प्रयागराज के वट वृक्ष की तरह फलीभूत होगा। वह आज परिलक्षित है। कोई कुछ दे सकता है, पर शिक्षा से ज़्यादा कुछ नहीं दे सकता। उन्होंने बताया, उनसे कहा गया वाइस चाइंसलर बनिए…मना कर दिया। उन्हें खुशी है कि शाहजहांपुर जब तक रहेगा स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय का नाम रहेगा।

#केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद ने संसद में हो रही बहस पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। कहा, देश की सर्वोच्च संसद में क्या हो रहा है ? ये छिपा नहीं है। कौन से जनहित के मुद्दे पर बात हो रही है ? कहने का अधिकार इतना मिल गया है कि हम बदतमीज बन गए हैं। देश के मुखिया को चोर, चांडाल भी कह रहे हैं। चौराहे की भाषा संसद में बोली जा रही है। शब्द का अपना महत्व है। अच्छे शब्दों में भी आलोचना की जा सकती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राव का एक संस्मरण भी सुनाया। जिसमें उन्होंने संसद में दिए 90 मिनट के भाषण का जिक्र किया।

#वह बोले, उनके लिए सौभाग्य की बात है जो आकुल जी जैसे साहित्यकार के बारे में अकिंचन संन्यासी को बोलने का मौका मिला। उन्होंने ये भी कहा, संन्यासी 70 फीसदी भगोड़े होते हैं। लेकिन एक संन्यासी ही देश, समाज के लिए जीता है। तभी प्रधानमंत्री मोदी को कहना पड़ा, योगी बड़ा उपयोगी। दूसरों के दिल के दर्पण में आपकी योग्यता दिखनी चाहिए। भाषण के दौरान बातचीत करने पर उन्होंने टिप्पणी की, छात्रों का मुंह बंद किया जा सकता है, शिक्षकों का नहीं। यहां सब शिक्षक बैठे हैं।

#उन्होंने भावुक होकर कहा। शरीर की आयु निश्चित है। जो रक्तदान किया जाता है, वह व्यक्ति के मरने तक प्रवाहित रहता है। जीवनकाल में जो अर्जित किया वह ही स्मरणीय होता है। यहां से पढ़ने वाले देश समाज के लिए योगदान दे सकें, ऐसा कार्य करना चाहिए। शहीदों के सपने को साकार करने का मौका मिला है। आने वाली पीढ़ी के लिए यह बहुत सार्थक रहेगा।

#डॉ सुरेश मिश्रा ने डॉ आकुल के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। सम्मानित श्री मंजुल ने इस पुरस्कार का श्रेय अपने कलाकारों को दिया। लायन संजय चोपड़ा ने संस्था की ओर से कराए जा रहे रक्तदान अभियान के बारे में बताया। एडवोकेट बृजेश पांडे ने विस्तृत भाषण अपने परिवार के बारे में दिया।

#इससे पहले डॉ कविता भटनागर, डॉ प्रतिभा सक्सेना ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कवयित्री सुमन पाठक ने सरस्वती वंदना का पाठ किया। मनोज मिश्रा एडवोकेट और राजेश मिश्रा ने डॉ आकुल के गीत प्रस्तुत किए। समाजसेवी राजू बग्गा, पत्रकार रागिनी श्रीवास्तव, पूनम पांडे, सोनी राजवंशी, गर्ग, डॉ दीप्ति भटनागर ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करने वाली छात्रा मोहिनी, खुशी, दिव्यांशी, हिमांशी, राखी को पुरस्कृत किया। संचालन डॉ अनुराग अग्रवाल ने किया। आभार वरिष्ठ पत्रकार ओंकार मनीषी ने व्यक्त किया।

#वृत्तचित्र ” लास्ट कॉल” का हुआ शो
परिक्रमा प्रजेंट्स के निर्देशक प्रमोद प्रमिल निर्देशित सड़क हादसे पर आधारित वृत्तचित्र लास्ट कॉल का शो हुआ। इसके निर्माता इंस्पेक्टर विनय पांडे, कलाकार डॉ पुनीत मनीषी, विकास पांडे, अनूप धवन को पुरस्कृत किया गया।

#ये लोग थे मौजूद
समाजसेवी रमेश भैया, डॉ अवनीश मिश्रा, ओंकार मनीषी, डॉ प्रभात शुक्ला, जेएस ओझा, पत्रकार कुलदीप दीपक, डॉ राजीव सिंह भारत, डॉ विकास खुराना, राकेश अग्रवाल, मुरारी लाल, कमल गुप्ता, प्रमोद अग्रवाल, ऐश्वर्य अवस्थी, जीतू शर्मा, मनोरमा त्रिगुणायत, प्रतीक त्रिगुणायत, प्रसून गुप्ता, प्रदीप बेदार, रऊफ खान, सुशील विचित्र, सुहेल संन्यासी, नरेंद्र सक्सेना, चित्रकार कमर, नक़ीबुद्दीन खान, राकेश पांडे, डॉ आलोक पांडे, रामेंद्र मिश्रा एडवोकेट, अनिल गुप्ता, भूपेंद्र सिंह होरा डिंपल, पत्रकार अजय अवस्थी, इरफान ह्यूमन, पूनम पांडे, पवन सिंह आदि मौजूद रहे।

February 13, 2026

ध्यान, प्रेम और करुणा की त्रिवेणी में प्रवाहित हुआ रामचन्द्र मिशन आश्रम

शाहजहांपुर में बसंत उत्सव–2026 का शुभारंभ

Dada Ji D Patel, Ramchandra Mission

ध्यान करते दादा जी

Posted on 13.02.2026 Time 06.29 Friday, Shahjahanpur, Ramchandra Mission, Meditation, DADA ji, Dhyan Sadhana

शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और मार्गदर्शन में राम चन्द्र मिशन आश्रम की पुण्य धरा पर आज बीस दिवसीय बसंत उत्सव–2026 का शुभारंभ पूर्ण दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिक उल्लास के अनुपम वातावरण में हुआ। प्रातःकालीन साधना से प्रारंभ हुआ यह महोत्सव मानो साधकों की चेतना को नवप्रकाश से आलोकित करने का विराट यज्ञ बन गया। देश–विदेश से आये हजारों अभ्यासियों ने एकात्म भाव से सामूहिक ध्यान-साधना कर मानव कल्याण और विश्व शांति के लिए मंगल कामना कीं।

Ramchandra Mission Shahjahanpur

Ramchandra मिशन

उत्सव का शुभारंभ सुबह के ध्यान सत्र के साथ हुआ, जिसमें वातावरण शांति, श्रद्धा और साधना की दिव्य तरंगों से गुंजायमान हो उठा। इस पावन अवसर पर श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ ने अपने प्रेरक संदेश में बसंत पंचमी के आध्यात्मिक रहस्य को उद्घाटित करते हुए कहा कि बसंत केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि चेतना के नवीकरण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि सहज मार्ग के साधकों के लिए बसंत पंचमी केवल प्राकृतिक उल्लास का पर्व नहीं, बल्कि एक दिव्य स्मृति और चेतना का उत्सव है। इसी पावन तिथि को दिव्य प्रकाश ने पृथ्वी पर अवतरण का संकल्प लिया था। वर्ष 1873 की बसंत पंचमी को फतेहगढ़ में एक ऐसी महान आत्मा का अवतरण हुआ, जिसने मानवता की आध्यात्मिक यात्रा को नवीन दिशा प्रदान की। वही महापुरुष आगे चलकर ‘लालाजी महाराज’ के नाम से विख्यात हुए। संसार उस समय उनके महत्त्व से अनभिज्ञ था, क्योंकि महान आत्माएं प्रायः बिना किसी उद्घोष के सामान्य मानव रूप में प्रकट होती हैं। परंतु प्रकृति ने उस दिवस मानव जाति को मौन वचन दिया था कि चेतना का पुनरुत्थान एक नई ज्योति के रूप में प्रकट होगा।
दाजी ने कहा कि लालाजी महाराज के माध्यम से मानवता को एक विस्मृत आध्यात्मिक धरोहर प्राणाहुति का पवित्र विज्ञान पुनः प्राप्त हुआ, जिसे ‘प्राणस्य प्राणः’, अर्थात जीवन के मूल तत्व का संचार कहा गया है। यह सूक्ष्म, गूढ़ और दिव्य विद्या मानव अंतःकरण में ईश्वरीय चेतना के संचार का माध्यम बनी। उन्होंने उल्लेख किया कि यह परंपरा सर्वप्रथम अयोध्या में भगवान श्रीरामचन्द्र से तिहत्तर पीढ़ी पूर्व पूज्य ऋषभदेवजी महाराज द्वारा प्रतिपादित की गई थी।


पूज्य दाजी ने मिशन के अभ्यासियों से आह्वान किया कि वे इस बसंत उत्सव को केवल एक पर्व के रूप में न देखें, बल्कि इसे आत्म-परिष्कार, अंतर्मुखी साधना और चेतना के उत्कर्ष का अवसर बनाएं। उन्होंने कहा कि जैसे बसंत ऋतु में प्रकृति अपने पुराने आवरण को त्यागकर नव सृजन की ओर अग्रसर होती है, वैसे ही अभ्यासी को भी अपने भीतर की जड़ताओं को त्यागकर प्रेम, करुणा और शांति के पुष्प खिलाने चाहिए।
बसंत उत्सव में संपूर्ण आश्रम परिसर में श्रद्धा, साधना और शांति का दिव्य वातावरण दिखाई दिया ।यह उत्सव आने वाले बीस दिनों तक साधना, सेवा और सत्संग के माध्यम से मानव चेतना को उन्नत करने का अनुपम अवसर प्रदान करेगा।
सायंकाल में भी ध्यान सत्र में दाजी ने ध्यान कराया।
#dajji #heartfulness #sriramchandramission
#meditation

February 12, 2026

Shahjahanpur साधना की सुवास से दमका Ramchandra Mission रामचंद्र मिशन आश्रम

ध्यान, प्रेम और करुणा की त्रिवेणी में प्रवाहित हुआ बसंतोत्सव

शाहजहांपुर आश्रम पहुंचने पर दाजी का भव्य स्वागत

Ramchandra Mission Shahjahanpur

Posted on 12.02.2026 Time 04.05 PM Thursday 
(संजीव गुप्ता उ. प.समाचार शाहजहांपुर से)
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और करुणामय मार्गदर्शन में आयोजित बीस दिवसीय बसंत उत्सव का शुभारंभ कल गुरुवार आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो रहा है।
पूज्य दाजी का आज दोपहर करीब 12 बजे शाहजहांपुर आश्रम आगमन हुआ।
यहां पहुंचने पर बाबूजी महाराज के सुपुत्र सर्वेश चंद्रा, मिशन के संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल,ए के गर्ग, उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, माधोगोपाल अग्रवाल, राजगोपाल अग्रवाल , श्री गोपाल अग्रवाल, अमिता चंद्रा, रामचंद्र मिशन आश्रम में बसंत उत्सव का शुभारंभ आज से
शाहजहांपुर आश्रम पहुंचने पर दाजी का भव्य स्वागत
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और करुणामय मार्गदर्शन में आयोजित बीस दिवसीय बसंत उत्सव का शुभारंभ कल गुरुवार आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो रहा है।
पूज्य दाजी का आज दोपहर करीब 12 बजे शाहजहांपुर आश्रम आगमन हुआ।
यहां पहुंचने पर बाबूजी महाराज के सुपुत्र सर्वेश चंद्रा, मिशन के संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल,ए के गर्ग, उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, माधोगोपाल अग्रवाल, राजगोपाल अग्रवाल , श्री गोपाल अग्रवाल, अमिता चंद्रा, बाबूजी के प्रपौत्र विनीत चंद्रा सुयश सिन्हा, सुमन अग्रवाल, ममता अग्रवाल, सौमेंद्र त्यागी, सहित सैकड़ों अभ्यासियों और छोटे छोटे बच्चों ने फूल भेंटकर ने उनका भव्य स्वागत किया ।
पूज्य दाजी के आगमन से आश्रम परिसर मानो साधना की सुवास और चेतना की उजास से आलोकित हो उठा। वातावरण में शांति, प्रेम और आत्मिक ऊर्जा का ऐसा संगम दृष्टिगोचर हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को भीतर तक स्पंदित कर दिया।
यहां पहुंचने के बाद दाजी पूरे आश्रम का निरीक्षण किया।
उत्सव में सहभागिता हेतु देश के विभिन्न प्रांतों सहित विदेशों से भी हजारों अभ्यासी शाहजहांपुर आश्रम पहुँच रहे हैं।
शाम को पूज्य दाजी ने उपस्थितअभ्यासियों को ध्यान कराया।

रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर दिन भर अभ्यासियों का तांता लगा
शाहजहांपुर । श्री राम चन्द्र मिशन आश्रम में मनाये जा रहे बसंत उत्सव के लिए देश विदेश से अभ्यासियों के आने का सिलसिला मंगलवार रात से ही शुरू हो गया जो बुधवार देर रात तक जारी रहा। रेलवे और बस स्टेशन से मिशन के स्वंय सेवकों ने अभ्यासियों को बस द्वारा आश्रम पहुंचाया।
#daaji #heartfulness #meditation #kanhashantivanam
@everyone

February 10, 2026

शाहजहांपुर में ध्यान साधना का महाकुंभ 12 फरवरी से

श्री रामचन्द्र मिशन आश्रम का स्वर्ण जयंती समारोह ‘बसंत उत्सव 2026’ से गूंजेगी आध्यात्मिक चेतना 12 फरवरी से 2 मार्च तक पांच चरणों में होगा आयोजन

Ramchandra Mission Press Conference

रामचंद्र मिशन की प्रेस वार्ता

Posted on 10.02.2026 Tuesday, Time 07.17 PM, Shahjahanpur by Sanjiv Gupta
(संजीव गुप्त, उप्र समाचार सेवा)

शाहजहांपुर, 10 फरवरी 2026, शाहजहांपुर की धरती केवल ऐतिहासिक और अमर शहीदों की स्मृतियों की ही वाहक नहीं रही है, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना की भी एक उज्ज्वल प्रयोगशाला रही है।

यह हम सब के लिए गौरव की बात है कि वर्ष 1945 में इसी पुण्यभूमि पर महात्मा रामचन्द्र जी महाराज ने श्री रामचन्द्र मिशन की स्थापना की थी। यह स्थापना मात्र एक संस्था का जन्म नहीं था बल्कि मानव हृदय को आत्मबोध की ओर ले जाने वाला एक आध्यात्मिक आंदोलन था जिसने निरंतर विस्तार पाया और आज विश्व के 164 देशों में श्री रामचन्द्र मिशन के केंद्र हैं। वर्ष 1976 में शाहजहांपुर में महात्मा रामचन्द्र जी महाराज (बाबूजी) ने अपने गुरु फतेहगढ़ के महात्मा रामचन्द्र जी महाराज (लालाजी) की स्मृति में मिशन के प्रथम आश्रम की स्थापना की थी। यह आश्रम साधकों के लिए साधना, सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना के विकास का स्थायी केंद्र बना। यह आश्रम केवल ईंट-पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि अनगिनत आत्माओं के अंतर्मन को शांति, प्रेम और सौहार्द से आलोकित करने वाला आध्यात्मिक तीर्थ बन गया।

अब यह आश्रम अपनी स्वर्ण जयंती की देहरी पर खड़ा है-पचास वर्षों की साधना, सेवा और संकल्प की गौरवशाली कथा को समेटे हुए इस ऐतिहासिक अवसर पर आश्रम का वृहद स्तर पर जीर्णोद्धार किया गया है। आश्रम की पचास वर्षों की स्वर्णिम यात्रा के पूर्ण होने पर श्री रामचन्द्र मिशन के अध्यक्ष और पूज्य गुरुदेव कमलेश डी पटेल (दाजी) के सानिध्य और मार्गदर्शन में स्वर्ण जयंती समारोह ‘बसंत उत्सव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है।

12 फरवरी से उत्सव का शुभारंभ

श्री रामचन्द्र मिशन आश्रम में 12 फरवरी से 2 मार्च तक पांच चरणों में ‘बसंत उत्सव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है।

पांच चरणों में होगा उत्सव

बसंत उत्सव पांच चरणों आयोजित किया जा रहा है प्रत्येक चरण में देश विदेश से करीब पांच हजार लोग सहभागिता कर आध्यात्मिक विकास के वाहक बनेंगे।

पहला चरण 12 फरवरी से 14 फरवरी, दूसरा चरण 16 फरवरी से 18 फरवरी, तीसरा चरण 20 फरवरी से 22 फरवरी, चौथा चरण 24 फरवरी से 26 फरवरी तथा पांचवा चरण 28 फरवरी से 2 मार्च तक चलेगा। इस तरह 20 दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक महाकुंभ में लगभग 25 से 30 हजार लोगों के यहां पहुंचने की संभावना है।

अभ्यासियों के ठहरने और अन्य व्यवस्थाएं

बाहर से आने वाले अभ्यासियों के ठहरने की व्यवस्था आश्रम परिसर और विभिन्न होटलों और गेस्ट हाउस में की गई है। सभी अभ्यासियों के भोजन की व्यवस्था आश्रम परिसर में रहेगी।

आवागमन की व्यवस्था

बाहर से आने वाले अभ्यासियों के लिए रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन से आश्रम लाने और वापस पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। 24 घंटे मिशन के स्वंय सेवक रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर मौजूद रहेंगे। साथ ही लखनऊ हवाई अड्डा, दिल्ली हवाई अड्डा, लखनऊ रेलवे स्टेशन पर भी किसी अभ्यासी को असुविधा न हो इसके लिए मिशन के स्वंय सेवक मौजूद रहेंगे।

यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक मिलन का महाकुंभ होगा। विविध आध्यात्मिक सत्र, ध्यान शिविर और सत्संग कार्यक्रमों के माध्यम से यह समारोह मानव जीवन को अंतर्मुखी बनाने की प्रेरणा देगा। यह स्वर्ण जयंती समारोह अतीत की उपलब्धियों का स्मरण और भविष्य के संकल्पों का उद्घोष है। शाहजहांपुर की इस पुण्य धरा से उठने वाली साधना की यह ध्वनि आज विश्व के कोने-कोने तक पहुँच चुकी है। श्री रामचन्द्र मिशन का यह आश्रम आज भी मानव को मानवता से जोड़ना के मूल उद्देश्य को लेकर अग्रसर है। स्वर्ण जयंती का यह महापर्व केवल एक संस्था का उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना के उत्थान का सामूहिक संकल्प है, जहाँ श्रद्धा, साधना और सेवा एक साथ प्रवाहित होगें।

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