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बाबूजी की कुटिया अभ्यासियों के लिए बनी आकर्षण का केंद्र

February 19, 2026

बाबूजी की कुटिया अभ्यासियों के लिए बनी आकर्षण का केंद्र


श्री रामचंद्र मिशन आश्रम में तैयार की गई है बाबूजी महाराज की कुटिया
– चित्र प्रदर्शनी देखकर अभिभूत हो रहे हैं बाबूजी के अनुयाई
– ( संजीव गुप्त द्वारा )
#शाहजहांपुर का श्री रामचंद्र मिशन आश्रम इन दिनों स्वर्ण जयंती समारोह मना रहा है। बसंत उत्सव नाम से आयोजित भव्य और दिव्य उत्सव गुरु के चरणों में समर्पित है। देश-विदेश से जुटने वाले हजारों अभ्यासियों पर अध्यात्म का रंग पूरी तरह से चढ़ चुका है। हर ओर उल्लास ही उल्लास दिखाई दे रहा है।
#अध्यात्म के रंग में सराबोर अभ्यासी आश्रम परिसर में इधर-उधर आपस में एक दूसरे का परिचय प्राप्त करते और फोटो खिंचवाते देखे जा सकते हैं। वही सुबह शाम की ध्यान साधना से इतर पूरे दिन लोग कभी गुरु महाराज की समाधि के समक्ष या फूलों से खिलखिलाते पार्कों में ध्यान में लीन दिखाई दे रहे हैं। यूं तो आश्रम परिसर को तमाम प्रकार से सुसज्जित किया गया है। नए-नए भवन भी तैयार किए गए हैं, जिससे दूर दराज से आने वाले साधकों को कोई असुविधा न हो और वह आराम से अपना समय व्यतीत कर सकें, खान-पान के साथ ही स्वरुचि जलपान या भोजन के लिए बृहद रूप से कैंटीन भी सेवा में खोली गई है, जहां तमाम प्रकार के फास्ट फूड से लेकर अन्य लजीज व्यंजन और पकवान सहज उपलब्ध हो रहे हैं।
#चूंकि बाबूजी महाराज का आवास केरूगंज स्थित मोहल्ला दीवान जोगराज में एक पतली गली में स्थित है, जहां सभी अनुयाई नहीं पहुंच सकते हैं, इसलिए मिशन आश्रम में ही बाबूजी की कुटिया तैयार कराई गई है। इस कुटिया की विशेषता यह है कि जिस तरीके से बाबूजी अपने घर पर कक्ष में रहते थे, हूबहू उसी प्रकार की कुटिया आश्रम में निर्मित की गई है। कुटिया में बाबूजी की दिव्य कांस्य प्रतिमा भी रखी गई है। कुटिया के बाहर वैसा ही फर्श तैयार कराया गया है, जैसा कि उनके आवास पर था। इस कुटिया में कभी उनके द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुएं भी अभ्यासियों के दर्शनार्थ रखी गई हैं, जिसमें कुर्सी, चौकी, लालटेन, बाबू जी की छड़ी, छतरी, चप्पल, चारपाई यहां तक कि वह रिक्शा भी कुटिया के बाहर खड़ा किया गया है, जिस पर बैठकर बाबूजी आश्रम से अपने आवास और अपने आवास से आश्रम तक का सफर तय किया करते थे।
#उसके पड़ोस में ही एक चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई है जो एक बड़े से कक्ष में स्थापित है। बाबूजी के चित्रों को देखने के लिए सैकड़ो अनुयाई कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। कमरे के एक दरवाजे से प्रवेश करते हुए और चित्रों को निहारत हुए अभ्यासी अभिभूत हो रहे हैं। साथ ही फोटोग्राफी और सेल्फी का भी दौर खूब चल रहा है। वहीं स्थाई ध्यान साधना के आकर्षक भवन के इर्द-गिर्द भी बाबूजी महाराज के बड़े-बड़े चित्र लगाए गए हैं। फूलों से सुगंधित आश्रम में दुर्लभ फूलों की प्रजातियां और पेड़ पौधे देखने के लिए भी खास खर्च किया गया है। व्यवस्थाएं अभ्यासी ही अपने आप संभाले हुए हैं।
#सबसे खास बात यह भी है कि 20 दिन तक यानि दो मार्च तक चलने वाले इस भव्य महाकुंभ में प्रतिदिन 5000 से 6000 श्रद्धालु या जिन्हें अनुयाई कह सकते है आते रहते हैं, लेकिन उनको व्यवस्थित करने के लिए किसी भी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र लाउडस्पीकर आदि की व्यवस्था नहीं की गई है। शांतिपूर्ण माहौल में सभी ध्यान साधना में डूबे हुए हैं। गुरु महाराज की समाधि के इर्द-गिर्द लोग पहुंचकर अपने आप को धन्य समझ रहे हैं। रंग-बिरंगे फूलों से समाधि को सुसज्जित किया गया है। आश्रम इस समय एक पर्यटन स्थल के रूप में दिखाई दे रहा है। हजारों की संख्या में लोग आपस में बतियाते तो देखे जा सकते हैं, लेकिन किसी प्रकार का शोर सुनाई नहीं दे रहा है। वातावरण पूरा शांत पूर्ण ढंग से दिखाई दे रहा है।

#किसी को कुछ बताया नहीं जा रहा है। सभी लोग अपने-अपने समय पर भोजन के लिए पहुंच जाते हैं, जलपान के लिए पहुंच जाते हैं और ध्यान साधना से ठीक एक घंटे पहले से लोग अपने आप धीरे-धीरे करके अस्थाई रूप से तैयार किए गए ध्यान साधना पंडाल में अपना स्थान ग्रहण कर लेते हैं। विशाल पंडाल में लगभग 5000 के आसपास अभ्यासी बैठ जाते हैं। सुविधा के लिए लगभग 4000 कुर्सियां और 1000 लोगों के जमीन पर बैठने की व्यवस्था की गई है। सबसे पहले श्री रामचंद्र मिशन आश्रम के अध्यक्ष गुरुदेव कमलेश डी पटेल जिन्हें दाजी के नाम से जाना जाता है वह अभ्यासियों का मार्गदर्शन करते हैं। उसके बाद में सभी गुरुदेव के साथ ही ध्यान साधना में डूब जाते हैं।

February 18, 2026

ध्यान, साधना से आलोकित हुआ योगाश्रम

 

#बसंत उत्सव–2026: दूसरे चरण के दूसरे दिन पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित देश विदेश के हजारों अभ्यासियों ने की ध्यान साधना
( संजीव गुप्त द्वारा )
#शाहजहांपुर।
#श्री रामचन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडिटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य में आयोजित बसंत उत्सव–2026 के दूसरे चरण के दूसरे दिन का शुभारंभ सामूहिक ध्यान साधना से हुआ। देश विदेश से पधारे हजारों अभ्यासी एकात्म भाव से ध्यान में लीन होकर मानव कल्याण एवं विश्व शांति की मंगल कामना करते दिखाई दिए। सम्पूर्ण आश्रम परिसर शांति, श्रद्धा और साधना के आलोक से आलोकित हो उठा।
इस अवसर पर श्री दाजी ने बाबूजी महाराज के वचनों का स्मरण कराते हुए कहा कि आत्मा अपनी जंजीरों से मुक्त होना चाहती है, और यही सर्वोच्च स्तर की महत्वाकांक्षा का स्वरूप है। हम वही बनना चाहते हैं, जो वास्तव में हम हैं, किंतु जिसे हम विस्मृत कर बैठे हैं। बाबूजी महाराज ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि हमारा लक्ष्य ईश्वर के साथ पूर्ण रूप से एकमय होना है और जब तक ध्येय की प्राप्ति न हो, तब तक विश्राम नहीं करना चाहिए। लक्ष्य के प्रति जागरूकता बनी रहे तो आलस्य स्वयं ही पराजित हो जाता है। ध्यान सत्र के उपरांत मिशन के अभ्यासी एवं ख्यातिलब्ध भजन गायक चरनप्रीत ने अपने मधुर स्वर और संगीत से “सजा दो घर गुलशन सा मेरे सरकार आए हैं” तथा “लालाजी की याद में हम सब खो जाएँ” जैसे भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा पंडाल भक्ति और अध्यात्म की रसधारा में सराबोर हो उठा।
#ध्यान सत्र में साधकों को ध्यान कराया गया। इस अवसर पर कान्हा आश्रम प्रबंधक विनीत राणावत, माधोगोपाल अग्रवाल, एके. गर्ग, सुयश सिन्हा, राजीव श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार सिंह, शुभम सक्सेना, जोन प्रभारी सौमेंद्र त्यागी सहित अनेक साधकों का योगदान रहा।

#पूर्व राष्ट्रपति ने भेंट किया पुष्पगुच्छ
शाहजहांपुर।
श्री रामचन्द्र मिशन आश्रम में चल रहे बसन्त उत्सव में आज देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी अपने तीन दिन के प्रवास पर ध्यान साधना करने पहुंचे। रिलायंस में बने हैलीपैड में जब उनका हैलीकॉप्टर पहुंचा तो यहां जिला अधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह व पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने उनका स्वागत किया। यहां से पूर्व राष्ट्रपति भारी काफिले के साथ आश्रम पहुंचे। यहां पहुंचने पर उनका मिशन के सचिव उमा शंकर बाजपेई,संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल, श्री गोपाल अग्रवाल, केंद्र प्रभारी सर्वेश चंद्रा, राज गोपाल अग्रवाल आदि ने उनका स्वागत किया। पूर्व राष्ट्रपति श्री कोविंद ने आश्रम पहुंचकर पूज्य दाजी को पुष्पगुच्छ भेंटकर अभिनंदन किया।इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति श्री कोविंद ने गुरुवर दाजी से मुलाकात की और ध्यान किया

February 16, 2026

श्रद्धा भक्ति के साथ मुमुक्षु महोत्सव की तैयारी शुरु रामकथा पंडाल का भूमि पूजन संपन्न


शाहजहांपुर। शहर में धार्मिक चेतना और रामभक्ति के अनुपम संगम का साक्षी बनने जा रहे “मुमुक्षु महोत्सव” की तैयारियां आरंभ हो गई हैं। प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें पूज्य संत श्री विजय कौशल जी के श्रीमुख से प्रवाहित होने वाली रामकथा का रसास्वादन जनपदवासियों को प्राप्त होगा।
24 फरवरी से 2 मार्च तक चलने वाली रामकथा के एस.एस. कालेज मैदान में भव्य कथा पंडाल का भूमि पूजन संपन्न हुआ। भूमि पूजन का अनुष्ठान प्रबंध समिति के सचिव डा. अवनीश मिश्रा ने संपन्न कराया पूजन संस्कृत महाविद्यालय के आचार्य ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कराया।
पूजन अवसर पर मुमुक्षु शिक्षा संकुल के अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती , सीए संजीव बंसल,अशोक अग्रवाल,प्राचार्य प्रो आर के आजाद, प्रो अनुराग अग्रवाल,डा. जय शंकर ओझा,डा. आलोक कुमार सिंह,डा.डा. अजीत सिंह चारग, डा. आदर्श पाण्डे, डा. कविता भटनागर,डा.पवन गुप्ता,डा.मृदुल शुक्ला कमलेश द्विवेदी, ईशपाल सिंह,रवि बाजपेई, चंद्रभान त्रिपाठी, सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

प्रेम, आशीर्वाद और साधना के संगम के बीच विवाह बंधन में बंधे तीन युगल”

#शाहजहांपुर।
#प्रेम, आशीर्वाद और अध्यात्म के संगम के बीच परिणय सूत्र बंधन का साक्षी बना राम चन्द्र मिशन आश्रम, जहाँ बसंत उत्सव में तीन विवाह पवित्र रीति से संपन्न हुए। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडिटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल (दाजी) के सान्निध्य और आशीर्वाद के साथ इन विवाह संस्कारों ने आध्यात्मिक गरिमा का अनुपम रूप धारण किया।
#प्रथम विवाह में रायबरेली के संदीप और अर्चना ने एक-दूसरे को वरमाला अर्पित कर प्रेम और विश्वास के सूत्र में बंधने की प्रतिज्ञा ली। दूल्हे द्वारा मंगलसूत्र धारण कराए जाने और मांग सिंदूर से अलंकृत होने के क्षण साक्षी बने उस पवित्र संकल्प के, जिसमें दो आत्माएँ एक पथ पर अग्रसर होने को तत्पर हुई नवदम्पति ने पूज्य दाजी से आशीर्वाद प्राप्त कर अपने वैवाहिक जीवन की शुभ शुरुआत की।
#दूसरा विवाह में हल्द्वानी की ब्रजनीलता और रुद्रपुर के गणेश ने वैदिक परंपराओं के साथ सात्विक भाव से परिणय सूत्र में बंधकर दाजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। तीसरा विवाह कानपुर के शिवम और नागपुर की रितु के साथ हुआ। तीनों नवदम्पतियों को पूज्य दाजी ने प्रसाद प्रदान कर मंगल कामनाएँ दीं और उनके दांपत्य जीवन को प्रेम, संयम तथा सेवा के पथ पर अग्रसर होने का संदेश दिया।
#इस प्रकार बसंत उत्सव का यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संस्कारों, संवेदनाओं और साधना से अनुप्राणित वैवाहिक जीवन की प्रेरक मिसाल बन गया—जहाँ विवाह मात्र सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नयन का शुभ आरंभ प्रतीत हुआ।

February 15, 2026

चरित्र की पूजा होती है चित्र की नहीं: स्वामी

Swami Chinmayanand

#महाविद्यालय में शादी के लिए बच्चे पढ़ाए जाते थे
#चौराहे की भाषा देश की सर्वोच्च संसद में बोली जा रही है
#बोलने की इतनी आजादी मिल गई है कि हम बदतमीज हो गए हैं
#वाइस चांसलर बनने को कहा गया मैंने मना कर दिया
#डॉ आकुल स्मृति सम्मान समारोह में बोले पूर्व गृहराज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद
#शाहजहांपुर।
#स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के सभागार में शनिवार की दोपहर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। यह समारोह जिले के कीर्तिशेष साहित्यकार डॉ गिरिजानंदन त्रिगुणायत “आकुल” की स्मृति में आयोजित किया गया। परिक्रमा प्रजेंट्स के बैनर तले आयोजित समारोह में चार विशिष्ट जनों को “आकुल सम्मान” प्रदान किया गया।
#मुख्य अतिथि स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने रंगकर्म से वरिष्ठ रंगकर्मी मनोज मंजुल, कानूनविद ब्रजेश पांडे एडवोकेट, सीए जीसी वर्मा और समाजसेवा से लायन संजय चोपड़ा को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए। इस मौके पर स्वामी चिन्मयानंद ने विस्तृत भाषण में चित्र और चरित्र पर खुलकर बात की। कहा, यह देश उसी चित्र की पूजा करता है, जिसका कोई चरित्र होता है। राम सबके लिए थे, इसलिए उनको पूजा जाता है। इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षर में नाम लिखा जाए, ऐसा कुछ काम किया जाना चाहिए, चिता में चित्र ही जले और चरित्र अमर हो जाए। ऐसा जीवन जिया जाना चाहिए।

#अधिष्ठाता ने व्यंग्यात्मक लहज़े में कहा, पहले इस महाविद्यालय में शादी कराने के लिए बच्चे पढ़ाए जाते थे। सात कमरे, पौने तीन सौ विद्यार्थी से शुरू हुआ सफ़र अब विश्विद्यालय तक पहुंच गया है। अधिकतर लोग अपने और परिवार के लिए ही जिया करते हैं। याद वह किए जाते हैं, जो समाज और देश को कुछ दे जाते हैं।

#उन्होंने कहा, गुलज़ारी लाल नंदा, स्वामी शुकदेवानंद शाहजहांपुर में पैदा नहीं हुए, लेकिन उन्होंने जो समाज की सेवा की है। वह अनुकरणीय है। इन्होंने अपने लिए कुछ अर्जित नहीं किया। तभी इनको आज भी याद किया जाता है। दधीचि की हड्डी की तरह शुकदेवानंद ने सभी कुछ दिया। 1964 में गुलज़ारी लाल नंदा ने कहा था कि स्वामी शुकदेवानंद ने जो पौधा लगाया है, वह प्रयागराज के वट वृक्ष की तरह फलीभूत होगा। वह आज परिलक्षित है। कोई कुछ दे सकता है, पर शिक्षा से ज़्यादा कुछ नहीं दे सकता। उन्होंने बताया, उनसे कहा गया वाइस चाइंसलर बनिए…मना कर दिया। उन्हें खुशी है कि शाहजहांपुर जब तक रहेगा स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय का नाम रहेगा।

#केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद ने संसद में हो रही बहस पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। कहा, देश की सर्वोच्च संसद में क्या हो रहा है ? ये छिपा नहीं है। कौन से जनहित के मुद्दे पर बात हो रही है ? कहने का अधिकार इतना मिल गया है कि हम बदतमीज बन गए हैं। देश के मुखिया को चोर, चांडाल भी कह रहे हैं। चौराहे की भाषा संसद में बोली जा रही है। शब्द का अपना महत्व है। अच्छे शब्दों में भी आलोचना की जा सकती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राव का एक संस्मरण भी सुनाया। जिसमें उन्होंने संसद में दिए 90 मिनट के भाषण का जिक्र किया।

#वह बोले, उनके लिए सौभाग्य की बात है जो आकुल जी जैसे साहित्यकार के बारे में अकिंचन संन्यासी को बोलने का मौका मिला। उन्होंने ये भी कहा, संन्यासी 70 फीसदी भगोड़े होते हैं। लेकिन एक संन्यासी ही देश, समाज के लिए जीता है। तभी प्रधानमंत्री मोदी को कहना पड़ा, योगी बड़ा उपयोगी। दूसरों के दिल के दर्पण में आपकी योग्यता दिखनी चाहिए। भाषण के दौरान बातचीत करने पर उन्होंने टिप्पणी की, छात्रों का मुंह बंद किया जा सकता है, शिक्षकों का नहीं। यहां सब शिक्षक बैठे हैं।

#उन्होंने भावुक होकर कहा। शरीर की आयु निश्चित है। जो रक्तदान किया जाता है, वह व्यक्ति के मरने तक प्रवाहित रहता है। जीवनकाल में जो अर्जित किया वह ही स्मरणीय होता है। यहां से पढ़ने वाले देश समाज के लिए योगदान दे सकें, ऐसा कार्य करना चाहिए। शहीदों के सपने को साकार करने का मौका मिला है। आने वाली पीढ़ी के लिए यह बहुत सार्थक रहेगा।

#डॉ सुरेश मिश्रा ने डॉ आकुल के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। सम्मानित श्री मंजुल ने इस पुरस्कार का श्रेय अपने कलाकारों को दिया। लायन संजय चोपड़ा ने संस्था की ओर से कराए जा रहे रक्तदान अभियान के बारे में बताया। एडवोकेट बृजेश पांडे ने विस्तृत भाषण अपने परिवार के बारे में दिया।

#इससे पहले डॉ कविता भटनागर, डॉ प्रतिभा सक्सेना ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कवयित्री सुमन पाठक ने सरस्वती वंदना का पाठ किया। मनोज मिश्रा एडवोकेट और राजेश मिश्रा ने डॉ आकुल के गीत प्रस्तुत किए। समाजसेवी राजू बग्गा, पत्रकार रागिनी श्रीवास्तव, पूनम पांडे, सोनी राजवंशी, गर्ग, डॉ दीप्ति भटनागर ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करने वाली छात्रा मोहिनी, खुशी, दिव्यांशी, हिमांशी, राखी को पुरस्कृत किया। संचालन डॉ अनुराग अग्रवाल ने किया। आभार वरिष्ठ पत्रकार ओंकार मनीषी ने व्यक्त किया।

#वृत्तचित्र ” लास्ट कॉल” का हुआ शो
परिक्रमा प्रजेंट्स के निर्देशक प्रमोद प्रमिल निर्देशित सड़क हादसे पर आधारित वृत्तचित्र लास्ट कॉल का शो हुआ। इसके निर्माता इंस्पेक्टर विनय पांडे, कलाकार डॉ पुनीत मनीषी, विकास पांडे, अनूप धवन को पुरस्कृत किया गया।

#ये लोग थे मौजूद
समाजसेवी रमेश भैया, डॉ अवनीश मिश्रा, ओंकार मनीषी, डॉ प्रभात शुक्ला, जेएस ओझा, पत्रकार कुलदीप दीपक, डॉ राजीव सिंह भारत, डॉ विकास खुराना, राकेश अग्रवाल, मुरारी लाल, कमल गुप्ता, प्रमोद अग्रवाल, ऐश्वर्य अवस्थी, जीतू शर्मा, मनोरमा त्रिगुणायत, प्रतीक त्रिगुणायत, प्रसून गुप्ता, प्रदीप बेदार, रऊफ खान, सुशील विचित्र, सुहेल संन्यासी, नरेंद्र सक्सेना, चित्रकार कमर, नक़ीबुद्दीन खान, राकेश पांडे, डॉ आलोक पांडे, रामेंद्र मिश्रा एडवोकेट, अनिल गुप्ता, भूपेंद्र सिंह होरा डिंपल, पत्रकार अजय अवस्थी, इरफान ह्यूमन, पूनम पांडे, पवन सिंह आदि मौजूद रहे।

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