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मगोर्रा में सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा, पत्नी समेत 5 गिरफ्तार

April 28, 2026

मगोर्रा में सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा, पत्नी समेत 5 गिरफ्तार

मथुरा। थाना मगोर्रा क्षेत्र में हुए चर्चित भोहरेलाल हत्याकांड का पुलिस ने कुछ ही दिनों में खुलासा कर दिया है। इस मामले में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि हत्या की साजिश मृतक के अपने ही परिवार ने रची थी। पुलिस ने मृतक की पत्नी, उसके तीन बेटों और एक पड़ोसी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
सीओ गोवर्धन अनिल कुमार सिंह ने बताया कि भोहरेलाल शराब पीने का आदी था और आए दिन नशे की हालत में घर आकर पत्नी व बच्चों के साथ मारपीट और गाली-गलौज करता था। लंबे समय से चल रही इस घरेलू हिंसा से परिवार बेहद परेशान था। घटना वाले दिन भी वह अपनी पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट कर रहा था।
पुलिस जांच के अनुसार, जब भोहरेलाल अपनी पत्नी को पीट रहा था, तभी उसके तीनों बेटों ने बीच-बचाव किया। इस दौरान हुई हाथापाई में उसके गले में पड़ी साफी (अंगोछा) कस गई, जिससे दम घुटने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद घबराए परिजनों ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए साक्ष्य मिटाने की साजिश रची। उन्होंने पड़ोसी की मदद से शव को गांव के पास स्थित तालाब किनारे फेंक दिया, ताकि इसे दुर्घटना का रूप दिया जा सके।
पुलिस को शुरुआत से ही परिवार के बयान पर संदेह था। मुखबिर की सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मगोर्रा पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए राहुल, रोहित, सौरभ (तीनों पुत्र), मृतक की पत्नी और पड़ोसी बृजेश को सोन चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और घरेलू कलह के गंभीर परिणामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बेटी की शादी से पहले पिता की दर्दनाक मौत, बंदरों के हमले से छत से गिरा युवक

फरह के पीगरी गांव में हादसा, शादी की खुशियां मातम में बदलीं; ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया
फरह (मथुरा)। शादी की तैयारियों के बीच एक परिवार की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब बंदरों के हमले में एक पिता की दर्दनाक मौत हो गई। घटना थाना फरह क्षेत्र के पीगरी गांव की है, जहां अमर सिंह (पुत्र श्यामलाल) की छत से गिरने के बाद मौत हो गई।
रविवार सुबह अमर सिंह अपनी बेटी की शादी की तैयारियों के तहत घर की छत पर गेहूं सुखाने गए थे। इसी दौरान बंदरों के एक झुंड ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हमले से घबराकर वह संतुलन खो बैठे और छत से नीचे गिर गए।
गंभीर सिर की चोट लगने पर परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बताया जा रहा है कि अमर सिंह की बेटी पूजा की शादी 10 मई को तय थी और घर में तैयारियां जोरों पर थीं। इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। बेटी के हाथ पीले होने से पहले ही पिता की अर्थी उठने से गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बंदरों का आतंक बना हुआ है। कई बार वन विभाग को शिकायत दी गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों ने घटना के लिए विभागीय लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।
 परिवारीजन ने कहा
“घर में शादी की खुशियां थीं, लेकिन अचानक यह हादसा हो गया। बंदरों का आतंक लंबे समय से है, कई बार शिकायत की, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अब हमारे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।”

हाईवे पर कार पलटने से युवक की मौत, दो गंभीर घायल

हाथरस। आगरा-अलीगढ़ नेशनल हाईवे पर देर रात हुए सड़क हादसे में एक युवक की मौके पर मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। थाना चंदपा क्षेत्र के कुंवरपुर पुलिया के पास बलेनो कार अनियंत्रित होकर पलट गई।हादसे में नगला भोपा, खैर (अलीगढ़) निवासी 35 वर्षीय नीरज पुत्र गजराज सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं कार में सवार 32 वर्षीय योगेंद्र पुत्र कुंवरपाल और 30 वर्षीय रवि पुत्र राम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए।बताया जा रहा है कि तीनों युवक आगरा के खंदौली क्षेत्र में एक शादी समारोह से लौट रहे थे। इसी दौरान चालक को नींद का झोंका आने से कार अनियंत्रित होकर पलट गई।सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया, जहां हालत गंभीर होने पर उन्हें अलीगढ़ रेफर कर दिया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।मृतक नीरज खैर की मंडी समिति में निजी कार्य करता था। घटना के बाद परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई है।

प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग, सांसद को सौंपा ज्ञापन

अखिल भारतीय प्रधान संगठन के सदस्य ज्ञापन देते हुए

हाथरस। अखिल भारतीय प्रधान संगठन के बैनर तले सोमवार को हाथरस में ग्राम प्रधानों ने जोरदार हंगामा किया। प्रधानों ने अपने कार्यकाल में विस्तार की मांग को लेकर ज्ञापन हाथरस सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि को मुख्यमंत्री के नाम सौंपा। संगठन का कहना है कि अगर पंचायत चुनाव समय पर नहीं होते हैं तो प्रशासकों की नियुक्ति से बेहतर होगा कि मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा दिया जाए।
अखिल भारतीय प्रधान संगठन के जिला अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि सभी ग्राम प्रधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए जनप्रतिनिधि हैं और अपने-अपने गांव की हर समस्या से भलीभांति वाकिफ हैं। वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, लेकिन आशंका है कि पंचायत चुनाव करीब एक साल विलंब से होंगे। ऐसे में अगर प्रशासक लगाए गए तो विकास कार्य ठप हो जाएंगे। पूर्व में प्रशासकों के समय भ्रष्टाचार की शिकायतें भी सामने आई थीं। मौजूदा प्रधान अधिक जवाबदेह और प्रतिबद्ध हैं।
प्रधानों का तर्क है कि जनहित और सुचारु विकास कार्यों को देखते हुए उनका कार्यकाल बढ़ाया जाए। संगठन ने मुख्यमंत्री से इस मामले में सकारात्मक निर्णय लेने की गुहार लगाई है। ज्ञापन सौंपने वालों में तामसी प्रधान धर्मेन्द्र कुमार, प्रधान राकेश कुमार, जितेंद्र कुमार, धर्मेंद्र सिंह, महाराज सिंह, धर्मपाल सिंह, योगेश कुमार सहित कई अन्य प्रधान मौजूद रहे।

UP Election 2027 से पहले हाथरस की जमीनी हकीकत पर घिरती सत्तारूढ़ पार्टी

Posted on 28.04.2026 Time 10.58, Tuesday, UP Vidhan Sabha Election 2027, Neeraj Chakrapani  Hathras

हाथरस में अफसर-नेता गठजोड़ पर उठे सवाल, चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

हाथरस, आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। राज्य की सत्ता में वापसी की चुनौती के बीच सत्तारूढ़ दल के सामने जमीनी स्तर पर संगठन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। खासतौर पर ब्रज क्षेत्र के हाथरस जनपद को लेकर उठ रही चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों वाले इस जनपद में फिलहाल दो सीटों पर भाजपा और एक पर सहयोगी दल का कब्जा है। जिला पंचायत से लेकर नगर निकायों तक सत्ता पक्ष की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर असंतोष की स्थिति सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि जिले में प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल जनहित के बजाय निजी हितों की पूर्ति की ओर झुका हुआ है। आरोप हैं कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही, जिससे भूमाफिया सक्रिय बने हुए हैं। कई मामलों में सांठगांठ की आशंका भी जताई जा रही है।
विकास कार्यों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। लंबे समय से लंबित यातायात सुधार, मेडिकल सुविधाओं के विस्तार और ट्रांसपोर्ट नगर जैसी परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। जनसुविधाओं की कमी और अव्यवस्था को लेकर आम नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ विभागों जैसे लोक निर्माण, बिजली, जल निगम,वन विभाग ,समाज कल्याण , स्वास्थ्य सेवाएं, उप निबंधन कार्यालय,जिला उद्योग  और परिवहन विभाग सहित आदि में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इन विभागों में कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश से मिले संकेतों के बाद सत्तारूढ़ दल के लिए आगामी विधानसभा चुनाव आसान नहीं होंगे। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर संगठन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो इसका असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।
विपक्षी दल भी इन मुद्दों को लेकर सक्रिय हो गए हैं और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले महीनों में चुनावी माहौल और तेज होने के साथ ही हाथरस जैसे जनपदों की स्थिति प्रदेश की व्यापक राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।फिलहाल नजर इस बात पर है कि सरकार प्रशासनिक स्तर पर उठ रहे आरोपों और जन असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है।

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