हाथरस। जनपद के इगलास रोड पर संचालित ईंट भट्टा व्यवसायियों की लापरवाही अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। आगरा-अलीगढ़ बाईपास से इगलास की ओर जाने वाले मार्ग पर गांव टुकसान के निकट कई ईंट भट्टे संचालित हैं, जहां से मिट्टी ढोने वाले वाहनों के कारण सड़क पर लगातार मिट्टी फैल रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि भट्टा संचालकों द्वारा किसी प्रकार की सावधानी नहीं बरती जा रही, जिससे सड़क पर फिसलन बनी रहती है और आए दिन हादसे होते रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इस मार्ग पर अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भट्टा व्यवसायियों ने सड़क किनारे अतिक्रमण जैसा माहौल बना दिया है। ईंट बनाने के लिए लाई जाने वाली मिट्टी खुलेआम सड़क पर बिखरती रहती है, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।समस्या को और गंभीर बनाता है इस मार्ग पर रात के समय प्रकाश व्यवस्था का अभाव। अंधेरे में सड़क की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भट्टा संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सड़क पर फैलाई जा रही मिट्टी को तुरंत हटवाया जाए। साथ ही, मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है, ताकि लगातार हो रहे हादसों पर रोक लगाई जा सके।
हाथरस। न्यायालय के आदेश पर दर्ज कराया गया धोखाधड़ी का मामला पुलिस जांच में पूरी तरह फर्जी पाया गया है। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने मुकदमे को निरस्त कर दिया और वादी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
मामला अलीगढ़ रोड औद्योगिक क्षेत्र निवासी राजुल मोहता से जुड़ा है, जिन्होंने 10 फरवरी को कोतवाली हाथरस गेट में अपने पार्टनर अजय कुमार शर्मा, विशेष शर्मा, राजकुमार तथा दो चार्टर्ड अकाउंटेंट,प्रवीन जैन और सौरभ शुक्ला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उन्हें कंपनी से हटाया गया और वित्तीय अनियमितता की गई।
विवेचना के दौरान निरीक्षक आदित्य शंकर तिवारी द्वारा मामले की गहन जांच की गई। थाना प्रभारी नितिन कसाना के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। जांच में पाया गया कि वास्तविक तथ्यों को छिपाकर झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके आधार पर 5 अप्रैल 2026 को न्यायालय में खारिज रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें स्पष्ट किया गया कि कोई अपराध होना नहीं पाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2021 में राजुल मोहता और अजय कुमार शर्मा ने मिलकर आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण के लिए कंपनी की स्थापना की थी। कंपनी की जमीन और भवन अजय कुमार शर्मा के थे, जबकि राजुल मोहता ने लगभग 4.5 लाख रुपये का निवेश किया था, जिसका भुगतान लाभ सहित किया जा चुका है।
पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया कि राजुल मोहता और उनके भाई आयुष मोहता कंपनी का माल बेचकर उसकी राशि कंपनी के खाते में जमा न कर निजी खातों में जमा कर रहे थे। जब अन्य निदेशकों को इसकी जानकारी हुई तो विवाद उत्पन्न हो गया। बाद में समझौते के तहत करीब सात लाख रुपये का भुगतान किया गया और राजुल मोहता ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया।
इसके बावजूद, पुलिस के अनुसार, व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता और दुर्भावना के चलते बाद में झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। जांच में यह भी सामने आया कि करीब 18 माह पूर्व भी इसी तरह की एक शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की गई थी, जो जांच में फर्जी पाई गई थी।
इसके अतिरिक्त, श्री मोहता आयुर्वेदिक भवन प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक निवेदिता मोहता द्वारा दिया गया बयान भी पुलिस जांच में असत्य पाया गया।
पुलिस ने इस मामले में झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोप में राजुल मोहता के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 217 के तहत कार्रवाई की संस्तुति करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हाथरस के न्यायालय में रिपोर्ट प्रेषित की है।