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अच्छी शिक्षा से ही देश का विकास सम्भवः बाबा रामदेव

March 15, 2026

अच्छी शिक्षा से ही देश का विकास सम्भवः बाबा रामदेव

योग गुरु ने जिले में भारतीय शिक्षा बोर्ड कें पहले विद्यालय का किया लोकार्पण
मैनपुरी, 15 मार्च 2026 (उप्र समाचार सेवा) , भोगांव में स्वामी रामदेव ने कहा अच्छी शिक्षा और संस्कृति आज भी समाज को प्रेरित कर रही है। ऐसी परंपरा केवल शिक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, वेद, उपनिषद, योग आध्यात्मिक ज्ञान की धरोहर है। संतों ने वेदों और शास्त्रों के ज्ञान को आम जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।
स्वामी रामदेव रविवार को नगर के रसूलाबाद मे स्थित सेन्ट एसआरआरडी सीनियर सैकेण्ड्री स्कूल के प्रशासनिक भवन का लोकार्पण के बाद उपस्थित लोगो को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि भारत मे शिक्षा के बिना विकास असम्भव है भारतीय शिक्षा बोर्ड की एक ऐसा बोर्ड है जिसके माध्यम से बालक बालिकाओ को भारतीय संस्कृति, सस्कारवान बनाकर देश के विकास मे अहम भूमिका निभा सकते है तथा देश को विश्व गुरू मनाया जा सकता है। उन्होने कहा कि सनातन न कभी मिटा है, न कभी मिटेगा। सनातन हर उस स्थान पर जीवित रहता है, जहां त्याग, तपस्या और बलिदान की भावना होती है। सनातन धर्म शाश्वत है और सदैव बना रहेगा। सनातन धर्म सत्य, अहिंसा और करुणा जैसे उच्च मूल्यों पर आधारित है। उन्होने कहा कि छात्रो को आज अपने पूर्वजो के इतिहास को बढने की जरूरत है तभी बच्चे जान पायेगे कि हमारी सस्कृति बीर गाथाओ से भरी पडी है। उन्होने भारतीय शिक्षा बोर्ड के सम्बन्ध मे बिस्तृत जानकारी देते हुये कहा कि विज्ञान पढाने के साथ साथ हिन्दी, संस्कृत आदि विषय पढाये जायेगे लेकिन उन विषयो मे संस्कार सिखानंे एंव देशभक्ति, समाजसेवा का विशेष महत्व दिया गया है। उन्होने कहा कि उनका लक्ष्य पूरे देश मे लगभग पांच लाख स्कूल खोलने का है जो कि भारतीय शिक्षा बोर्ड से संचालित होगे। उन्होने मुलायम सिंह यादव को याद करते हुये कहा कि बह हिन्दी के प्रेमी थे और बह भी हिन्दी के प्रेमी है हिन्दी की अलख जलाने के लिये हर सम्भव प्रयास किये जायेगे। उन्होने कहा कि आखिरी सांस तक भारत माता के लिये समर्पित रहेगे। भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन सेवानिबृत्त एनपी सिंह ने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का लक्ष्य है कि लोगो मे शैक्षिक व्यवस्था मे क्रान्तिकारी परिवर्तन लाना है जब तक लोग शिक्षा को व्यवसाय समझेगे तब तक देश का भला नही हो सकता है। उन्होने कहा कि बच्चो को अच्छी शिक्षा दिलाना हर मां बाप का लक्ष्य होना चाहिये। कार्यक्रम मे जिलाधिकारी एंव पुलिस अधीक्षक ने भी अपने विचार व्यक्त किये। पूर्व मे स्वामी रामदेव एंव बीएसबी के चेयरमैन डा0 एनपी सिंह ने प्रशासनिक भवन का लोकार्पण किया तथा महिलाओ एंव कार्यक्रम संयोजक संजय यादव ने तिलक लगाकर एंव आरती उतारकर स्वागत किया। इस मौके पर एमएलसी अरविन्द यादव, पूर्व एमएलसी अवधेश यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन यादव, विधायक रामनरेश अग्निहोत्री, चेयरमैन नेहा तिवारी, चेयरमैन प्रतिनिधि आशीष तिवारी,सच्चिदानन्द तिवारी, कामता सिंह यादव,  धनवेश यादव, डा0 विजय यादव, केसी यादव आदि मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी सुमेदानन्द ने की। कार्यक्रम संयोजक संजय यादव ने सभी अतिथियो का शाल उडाकर एंव प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया तथा आगुन्तको का आभार व्यक्त किया।

March 14, 2026

विकास नहीं तो वोट नहीं ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार का एलान

मैनपुरी, 14 मार्च 26, जनपद की तहसील भोगांव के अंतर्गत आने वाले ग्राम जमथरी में विकास कार्यों की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासन की उदासीनता के विरोध में ग्रामीणों ने एकजुट होकर आगामी चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का संकल्प लिया है।
​”नल नहीं तो वोट नहीं” के नारों से गूँजा गांव
​ग्रामीणों ने गांव की गलियों में जमकर विरोध प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों का मुख्य मुद्दा गांव में नल (पेयजल व्यवस्था) का न होना है। प्रदर्शन के दौरान “नल नहीं तो वोट नहीं” जैसे नारों के साथ ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे इस बार मतदान प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगे।
​भेदभाव का आरोप यादव बाहुल्य होने की मिल रही सजा
​नाराज ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र यादव बाहुल्य है, जिसके चलते गांव के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि राजनीतिक कारणों से न तो गांव में नल लगाए जा रहे हैं और न ही अन्य कोई विकास कार्य कराए जा रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीणों ने प्रशासन पर जानबूझकर उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया है।

January 16, 2026

मैनपुरी: पहले फाँसी की सजा सुनाई फिर कर दिया बरी

सोबरन सिंह प्रजापति

पिता पर था मां-बेटी की हत्या का आरोप
-2017 में अपर जिला जज ने सुनाई थी फांसी की सजा
-सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा हुई मुकदमे की सुनवाई
मैनपुरी, 16 जनवरी 2026, थाना करहल क्षेत्र के गांव रूपपुर में 11 साल पहले मां-बेटी की हत्या करने के आरोपी पिता सोबरन सिंह प्रजापति को संदेह का लाभ देते हुए स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट जयप्रकाश ने बरी कर दिया है। उसको 2017 में अपर जिला जज ने फांसी की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुकदमे की दोबारा सुनवाई करने के बाद सोबरन सिंह को आरोप साबित नहीं होने पर बरी कर दिया गया है।
रूपपुर में 29 जून 2014 की रात को ममता और उसकी बेटी सपना की हत्या कर दी गई थी। 30 जून को ममता के फुफुेरे भाई रजनेश निवासी नगला पजाबा थाना कोतवाली ने ममता के पति सोबरन सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने सोबरन को पकड़कर जेल भेज दिया था। पुलिस द्वारा जांच कर भेजी गई चार्जशीट के बाद मुकदमे की सुनवाई करके तत्कालीन अपर जिला जज प्रथम गुरुप्रीत सिंह बाबा ने सोबरन सिंह को एक मार्च 2017 को फांसी की सजा सुनाकर 25000 रुपये का जुर्माना लगाया था।
सोबरन सिंह द्वारा हाई कोर्ट इलाहाबाद में इसके खिलाफ अपील की गई। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति ओमप्रकाश और संजय अग्रवाल की खंडपीठ ने अपील की सुनवाई करने के बाद एक अक्तूबर 2018 को अपील खारिज करके अपर जिला जज द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा की पुष्टि की। लेकिन 25000 रुपये का जुर्माना खत्म कर दिया। सोबरन सिंह ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संजय करोल, संदीप मेहता की खंडपीठ ने अपील मंजूर करके 4 फरवरी 2025 को मुकदमे की नए सिरे से दोबारा सुनवाई करने के आदेश दिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट जयप्रकाश के न्यायालय में मुकदमे की दोबारा सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सोबरन के पुत्र अंकुश की गवाही को न्यायालय ने अविश्वसनीय माना, इसी आधार पर संदेह का लाभ देते हुए सोबरन को बरी कर दिया गया। 2026 में 11 साल बाद जेल से बाहर आया।
पुत्री ने दी थी पिता के खिलाफ गवाही
मैनपुरी। पत्नी और पुत्री की हत्या करने का आरोपी सोबरन सिंह फांसी की सजा होने से बरी तक होने तक बेचैन रहा। जेल में उसने दिन-रात गुमसुम रहकर गुजारे। वर्ष 2017 में फांसी की सजा होने के बाद उसको मैनपुरी जेल से फतेहगढ़ सेंट्रल जेल भेजा गया था। वर्ष 2025 में मुकदमे की सुनवाई दोबारा शुरू होने पर उसको फतेहगढ़ सेंट्रल जेल से मैनपुरी जेल लाया गया।
घटना के बाद सोबरन सिंह के परिजन ने उससे दूरी बना ली थी। पहले हुई सुनवाई में सोबरन की पुत्री पूनम ने पिता के खिलाफ गवाही दी थी। उस समय अंकुश की गवाही नहीं कराई गई थी। दोबारा हुई सुनवाई में पूनम ने पिता के खिलाफ गवाही नहीं दी। अब पूनम की भी शादी हो चुकी है। उसकी एक बच्ची भी है। दोबारा हुई सुनवाई के दौरान हर तारीख पर सोबरन को जेल से न्यायालय में लाया गया। हर तारीख पर उसके चेहरे पर बेचैनी साफ नजर आती रही।
सोबरन सिंह के जेल में होने के कारण दोबारा मुकदमे की सुनवाई के दौरान उनके भाई पन्नालाल और बहनोई हरीशंकर ने न्यायालय में पैरवी की। हर तारीख पर दोनों लोग न्यायालय पहुंचते और सोबरन को दिलासा देते। एक बार हो चुकी फांसी की सजा के कारण सोबरन दहशत में ही रहा। मुकदमे में फैसले वाले दिन जब उसको जेल से न्यायालय लाया गया, तब भी उसके चेहरे पर बेचैनी साफ नजर आई। स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट जयप्रकाश ने जब उसको बरी करने का फैसला सुनाया तो उसकी आंखों में आंसू आ गए।
पूरी घटना पर एक नजर
मैनपुरी। थाना करहल के गांव रूपपुर में ममता और सपना के शव सोबरन सिंह प्रजापति के भाई पन्नालाल के मकान की छत पर 30 जून 2014 की सुबह पड़े मिले थे। जानकारी होने पर गांव पहुंचे ममता के फुफुेरे भाई रजनेश ने ही पुलिस को सूचना दी थी। मौके पर सोबरन के बच्चे पूनम, अंजली, अंकुश, सुमित मिले थे। बच्चों द्वारा बताई गई कहानी के आधार पर ही रजनेश ने अपनी ममेरी बहिन ममता तथा भांजी सपना की हत्या करने की रिपोर्ट सोबरन के खिलाफ लिखाई थी।
कोर्ट ने बालक की गवाही मानी अविश्वसनीय
मैनपुरी। स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट जयप्रकाश के न्यायालय में सोबरन के पुत्र के रूप में अंकुश की गवाही कराई गई। सोबरन ने अंकुश को अपना पुत्र मानने से ही मना कर दिया। बताया कि अंकुश नाम की उसकी पुत्री थी, जिसकी मृत्यु हो चुकी है। अंकुश की घटना के समय उम्र लगभग तीन साल थी। गवाही के समय उसकी उम्र लगभग 14 साल है। उनके द्वारा दी गई स्पष्ट गवाही को न्यायाधीश ने अविश्वसनीय माना है। आदेश में लिखा है कि घटना के समय लगभग तीन साल का बालक मानव स्वभाव के अनुसार घटना के बारे में इतनी सूक्ष्मता से गवाही नहीं दे सकता है। बालक की गवाही को अविश्वसनीय मानते हुए सोबरन सिंह को संदेह का लाभ देकर बरी किया गया है। अन्य गवाह अपनी गवाही में घटना को साबित नहीं कर सके हैं।
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