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मुख्यमंत्री ने तीन दिवसीय उ0प्र0 कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 का शुभारम्भ किया

April 8, 2026

मुख्यमंत्री ने तीन दिवसीय उ0प्र0 कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 का शुभारम्भ किया

 
मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना 2025-26
के अन्तर्गत चयनित वैज्ञानिकों को सम्मानित किया
 
उ0प्र0 में कृषि और कृषि से सम्बन्धित क्षेत्र में असीमित सम्भावनाएं, विगत 09 वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा किये गये प्रयासों के बेहतर परिणाम प्राप्त हुए : मुख्यमंत्री
 
कृषि विकास दर को 08 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत पहुंचाने में सफलता प्राप्त
 
प्रदेश के अन्नदाता किसानों में कृषि क्षेत्र की सम्भावनाओं को धरातल पर
उतारकर दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने का सामर्थ्य, राज्य
सरकार ने किसानों और कृषि को एजेण्डे का हिस्सा बनाया
 
गन्ना किसानों के खाते में अब तक 02 लाख 90 हजार करोड़ रु0 से अधिक
धनराशि डी0बी0टी0 के माध्यम से प्रेषित की जा चुकी, प्रदेश की
चीनी मिलें सुगर कॉम्प्लेक्स के रूप में काम कर रहीं
 
देश के कुल गन्ना का 55 प्रतिशत उत्पादन अकेले उ0प्र0 कर रहा
 
अच्छे बीज आने, समय पर बीमारी चिन्हित कर समाधान का रास्ता निकालने
तथा टिश्यू कल्चर जैसी नई तकनीक अपनाने से प्रदेश में गन्ना उत्पादन बढ़ा
 
प्रदेश सरकार के प्रयासों से कृषि तथा किसानों के हित में स्पष्ट नीति बनायी
गयी, किसान को बीज प्रदान करने से लेकर उसके उत्पाद को खरीदने
तथा उसे वैल्यू एडीशन के साथ जोड़ने का कार्य कर रही
 
प्रदेश सरकार द्वारा सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को वर्ष 2021 में पूर्ण कराया
गया, इसके माध्यम से 14 लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध
 
खेती प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग कर कई कार्यों को आसान किया जा सकता
 
इण्टरनेट ऑफ थिंग्स‘ के माध्यम से मिट्टी की नमी और पोषण का डाटा एकत्र
कर किसान लाभान्वित हो सकते, कृषि में आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस उपयोगी
हो सकती, प्रदेश में ‘वन नेशन वन मण्डी’ के नियम को लागू किया गया
 
अब समय आ गया, जब लैब-टू-लैण्ड नहीं, बल्कि लैब-इन-लैण्ड का उपयोग किया जाए, अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाने की दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता

 

लखनऊ : 08 अप्रैल, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि और कृषि से सम्बन्धित क्षेत्र में असीमित सम्भावनाएं हैं। भारत की कुल कृषि योग्य भूमि में उत्तर प्रदेश का योगदान 11 प्रतिशत है, लेकिन देश के कुल खाद्यान्न का 21 प्रतिशत उत्पादन इस भूमि पर होता है। विगत 09 वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में किये गये प्रयासों के बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं। कृषि विकास की दर को 08 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत पहुंचाने में सफलता प्राप्त हुई है।
मुख्यमंत्री जी आज यहां ‘विकसित कृषि-विकसित भारत/2047’ के लिए कृषि कायाकल्प हेतु कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों का महासंगम-छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 (08 से 10 अप्रैल, 2026) का शुभारम्भ करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना 2025-26 के अन्तर्गत चयनित वैज्ञानिकों को लाइफटाइम एचीवमेण्ट, विशिष्ट वैज्ञानिक, विशिष्ट महिला वैज्ञानिक, युवा वैज्ञानिक, उत्कृष्ट पी0एच0डी0 थीसिस आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री जी ने ‘विकसित कृषि-विकसित उत्तर प्रदेश/2047’, ‘उपकार कृषि प्रेरणा’, ‘उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद परिचय, गतिविधियाँ एवं भावी रणनीतियाँ’, ‘उपकार समाचार’, ‘न्यू डाइमेंशन्स ऑफ एग्रीकल्चर इन रिसर्च कोआर्डिनेशन एण्ड प्रोडक्टिविटी’, ‘उपकार सीड’, ‘छठी यू0पी0 एग्रीकल्चरल साइंस कांग्रेस सौवेनिर एण्ड एब्स्ट्रैक्ट‘ आदि पुस्तकों का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद एवं इसकी सहयोगी संस्थाओं ने प्रदेश में तीन दिवसीय कृषि विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया है, इनमें भारतीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान, उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान अकादमी तथा गो-सेवा आयोग आदि सम्मिलित हैं। इस कार्यक्रम में तीन दिनों तक कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित अलग-अलग विषयों पर चर्चा की जाएगी। उत्तर प्रदेश की आबादी देश में सर्वाधिक है। यहां देश की 16 से 17 प्रतिशत आबादी निवास करती है। यहां दुनिया की सबसे उर्वरा भूमि, सबसे अच्छा जल संसाधन है। विश्व में सर्वाधिक सिंचित भूमि का प्रतिशत भारत में तथा भारत में सर्वाधिक सिंचित भूमि का प्रतिशत उत्तर प्रदेश में है।
जब भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था में 44 से 45 प्रतिशत हिस्सा रखता था, उसका आधार भारत की कृषि, अन्नदाता किसान और कारीगर थे। यहां किसानों को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा गया था, बल्कि वह स्वयं में कारीगर भी थे। उत्पादक किसान जब कारीगर के रूप में कार्य करता था, तो स्वयं को उद्यमी के रूप में स्थापित करता था। भारत की कृषि की गाथा उत्पादक से उद्यमी बनने की है। वैदिक काल से ही उत्तर प्रदेश इसकी भूमि रहा है। आक्रान्ताओं ने भारत की कृषि पर ही हमला नहीं किया, बल्कि यहां की उद्यमिता पर भी हमला किया था। जो किसान पहले कारीगर से उद्यमी बनने की गाथा को आगे बढ़ाता था, उसे केवल कच्चा माल उत्पन्न करने का अधिकार दिया गया। यहां का कच्चा माल बाहर जाता था। वैल्यू एडीशन का लाभ विदेशियों को मिलता था। हमारा उत्पादक किसान ऋणी बन गया। हमारी कारीगर उद्यमी से बेरोजगार हो गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम‘ बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय के आनन्द मठ उपन्यास का एक हिस्सा है। यह बंगाल की त्रासदी पर आधारित गीत है। बंगाल में पड़े अकाल के दौरान लोग भूख से मर रहे थे। वहां के जमींदार महेन्द्रनाथ के परिवार को भी संकट का सामना करना पड़ा। इस कालक्रम की परिणति संन्यासी विद्रोह के रूप में हुई। आनन्द मठ में औपनिवेशिक काल के शोषण की पूरी गाथा समाहित है। जब भारत के उत्पादक किसान को ऋणी बना दिया जाता है, तो उसका परिणाम अकाल की त्रासदी के रूप में देखने को मिलता है। इन सभी बिन्दुओं पर विचार करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के अन्नदाता किसानों में कृषि क्षेत्र की सम्भावनाओं को धरातल पर उतारकर दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने का सामर्थ्य है। दूसरों पर निर्भरता किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति उत्पन्न करती है। वैदिककालीन भारत में जब उत्पादक व उद्यमिता की इकाइयां किसानों के पास थीं, तब हमारे गांव आत्मनिर्भर होते थे। एक साजिश के तहत उस आत्मनिर्भर इकाई को भंग किया गया। उस समय ऐसा कोई ईकोसिस्टम तैयार नहीं किया गया, जो प्रत्येक सम-विषम परिस्थितियों में टॉप-टू-बॉटम प्रत्येक कड़ी को जोड़ते हुए चुनौतियों का सामना कर सके।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में ‘खेती की बात खेत पर’ कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। इसके अन्तर्गत प्रदेश के कुछ क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान वहां तीसरी फसल देखने को मिली। किसानों ने संवाद के दौरान बताया कि उन्हें मक्का की खेती से प्रति एकड़ 01 लाख रुपये बचत हो रही है। जिस प्रदेश में बिजली, पानी, बीज, प्रोक्योरमेण्ट सेण्टर आदि के अभाव में पहले एक फसल प्राप्त करने में किसान परेशान था, आज वहां तीसरी फसल उत्पादित हो रही है। पहले प्रदेश के कृषि विज्ञान केन्द्र बदहाल थे, आज उन कृषि विज्ञान केन्द्रों पर प्रत्येक सप्ताह गोष्ठियां व किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। डेमोन्स्ट्रेशन के माध्यम से किसानों को अवगत कराया जाता है कि कौन सा कृषि कार्य किस रूप में हो और उसके क्या परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के आपसी समन्वय से कृषि वैज्ञानिकों की क्षमताओं में वृद्धि का कार्य आगे बढ़ा है। राज्य सरकार ने किसानों और कृषि को एजेण्डे का हिस्सा बनाया है। जिस उत्तर प्रदेश में पहले कई वर्षों से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हुआ था, आज किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाता है। गन्ना किसानों के खाते में अब तक 02 लाख 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि डी0बी0टी0 के माध्यम से प्रेषित की जा चुकी है। प्रदेश में जो चीनी मिलें पहले बन्द हो रही थीं, आज वह सुगर कॉम्प्लेक्स के रूप में काम कर रहीं हैं। देश के कुल गन्ना का 55 प्रतिशत उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश कर रहा है। यहां एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग पौने 02 लाख करोड़ लीटर तक पहुंच चुका है, जो देश में नम्बर एक है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में संचालित 122 चीनी मिलों में 106 या 107 चीनी मिलें ऐसी हैं, जो छठें-सातवें दिन गन्ना मूल्य का भुगतान कर देती हैं। लोग नई चीनी मिलें स्थापित करने के लिए आगे आ रहे हैं। अच्छे बीज आने, समय पर बीमारी चिन्हित कर समाधान का रास्ता निकालने तथा टिश्यू कल्चर जैसी नई तकनीक अपनाने से प्रदेश में गन्ना उत्पादन बढ़ा है। हम सभी के समक्ष भारत की प्राचीन पद्धति अपनाते हुए अपने उत्पाद को पोषण से जोड़ने तथा फर्टिलाइजर के स्थान पर नेचुरल व जैविक खेती अपनाने की चुनौती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए कार्य को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। किसानों को तकनीक का प्रयोग करते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन करने पर जोर देना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज भारत को खाद्य संकट से जूझना नहीं पड़ रहा है। यहां प्रचुर मात्रा में खाद्य पदार्थों का उत्पादन हो रहा है। वर्ष 2014 से पूर्व, देश में किसान आत्महत्या कर रहे थे। आज किसान की आत्महत्या के मामले शून्य हो चुके हैं। किसान की आमदमी कई गुना बढ़ी है। यह परिवर्तन हम सभी को देखने को मिल रहा है। वर्ष 2017 से पूर्व, प्रदेश के किसानों व आमजन में सरकार के प्रति विश्वास का अभाव था। किसान विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाओं से परेशान होकर पलायन को मजबूर थे। अन्नदाता किसान केवल चुनावी मुद्दा रह जाता था। लागत अधिक तथा उत्पादन कम होता था। प्रोक्योरमेण्टर सेण्टर न होने से बिचौलिये हावी थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 के पश्चात प्रदेश सरकार के प्रयासों से कृषि तथा किसानों के हित में स्पष्ट नीति बनाई गयी। इसके अन्तर्गत सरकार किसान को बीज प्रदान करने से लेकर उसके उत्पाद को खरीदने तथा उसे वैल्यू एडीशन के साथ जोड़ने का कार्य कर रही है। क्रय केन्द्रों के माध्यम से किसानों को एम0एस0पी0 के रूप में लागत का डेढ़ गुना अधिक मूल्य उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश सरकार पहले से ही सरकारी ट्यूबवेलों और नहरों से निःशुल्क पानी उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही, 16 लाख ऐसे ट्यूबवेलों, जिसका संचालन किसान बिजली कनेक्शन लेकर करता था, जिससे उन्हें बिजली का बिल चुकाना पड़ता था। प्रदेश सरकार ने ऐसे ट्यूबवेलों के बिजली बिल को माफ करते हुए 03 हजार करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को भुगतान किया। जिन 23 लाख ट्यूबवेलों में बिजली के कनेक्शन नहीं है, उन्हें सोलर पैनल से जोड़ने की कार्यवाही आगे बढ़ायी जा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में नहरों का जाल बिछाया जा रहा है। वर्ष 1972 में सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना बनायी गयी थी। वर्ष 1977 में इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था, परन्तु वह पूर्ण नहीं हो सकी थी। प्रदेश सरकार के प्रयासों से वर्ष 2021 में इसे पूर्ण कराया गया। आज इसके माध्यम से 14 लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। इसी प्रकार धनराशि, इच्छा शक्ति, एजेण्डे में कृषि व किसान के अभाव के कारण पहले से अधूरी पड़ी कई अन्य परियोजनाओं को पूर्ण करने का कार्य किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसानों की फसलों को जानवरों से बचाने के लिए सोलर फेन्सिंग उपलब्ध करायी जा रही है। देश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में 16 लाख गोवंश के लिए 7,700 निराश्रित गोआश्रय स्थलों का निर्माण किया गया है। प्रदेश सरकार प्रत्येक गाय के भरण-पोषण के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध करा रही है। उत्तर प्रदेश का यह मॉडल देश में लागू किया जा रहा है। आज बुन्देलखण्ड से अन्ना प्रथा समाप्त हो चुकी है। गोसेवा आयोग को इस दिशा में और अधिक प्रयास करने और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। प्रत्येक किसान को फार्मर रजिस्ट्री की व्यवस्था से जोड़ना आवश्यक है। अंश निर्धारण के कार्यक्रम को समय पर आगे बढ़ाना चाहिए, जिससे तकनीक माध्यम से लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समय से प्राप्त हो सके।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस तीन दिवसीय आयोजन में प्रोडक्शन को प्रोडक्टिविटी से जोड़ने तथा प्रोडक्टिविटी को प्रॉफिटेबिलिटी में बदलने तथा प्रॉफिटेबिलिटी से प्रॉस्पेरिटी प्राप्त करने पर चर्चा अवश्य करें, ताकि अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ उनमें खुशहाली भी लाई जा सके। अन्नदाता किसान खुशहाल होगा, तो समाज और देश भी खुशहाल होगा। तकनीक से कृषि और किसानों की एफिशिएन्सी में वृद्धि की जा सकती है। कृषि में जहां ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए छिड़काव किया जाता है, वहां एक जैसी खेती दिखाई देती है, लेकिन जहां बेतरतीब तरीके से छिड़काव किया जाता है, वहां विषमता दिखाई देती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस समय असमय बरसात, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान के कारण अन्नदाता किसानों की खेतों में खड़ी फसल नष्ट हुई हैं। आज कृषि से जुड़े इन सभी मुद्दों के सम्बन्ध में एक बैठक की गई है। इस सम्बन्ध में सरकार ने व्यापक कार्ययोजना आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में किसी भी आपदा में जनहानि होने अथवा अन्नदाता किसान, बटाईदार या उसके परिवार के किसी सदस्य के दुर्घटना की चपेट में आने पर तत्काल राहत देने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अन्तर्गत पीड़ित परिवार को 05 लाख रुपये उपलब्ध कराया जाता है। यह सहायता 24 घण्टे के भीतर अन्नदाता किसानों को मिलनी चाहिए। राहत कोष से पशु हानि पर भी धनराशि तत्काल उपलब्ध होनी चाहिए।
यदि किसी किसान या नागरिक का आवास अग्निकाण्ड, तूफान, अतिवृष्टि की चपेट में आ गया है, तो उसे तत्काल मुख्यमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत एक आवास उपलब्ध कराया जाए। हमारा प्रयास होना चाहिए कि अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान को बीमा कम्पनियां कम्पनसेट करें। सरकार के स्तर से प्रत्येक पीड़ित किसान की हर सम्भव सहायता करने के लिए प्रत्येक जिलाधिकारी को आदेश जारी किये गये हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि खेती प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग कर पूर्वानुमान के आधार पर कई कार्यों को आसान किया जा सकता हैं। 05 वर्ष पूर्व मीरजापुर और सोनभद्र में आकाशीय बिजली से एक दिन में 30 मौतें हुई थीं। प्रदेश सरकार ने जनपद सोनभद्र में अर्लीवॉर्निंग सिस्टम लगवाया। अर्लीवॉर्निंग सिस्टम से 03 घण्टे पूर्व  सूचना देकर लोगों को जागरूक किया जा सकता हैं। सोनभद्र व मीरजापुर में इसके अच्छे परिणाम सामने आए। जहां एक दिन में 30 मौतें होती थीं, आज वहां यदा-कदा एक या दो मौतें होती हैं। टेक्नोलॉजी इस दिशा में अच्छी भूमिका का निर्वहन कर रही है।
सेटेलाइट के माध्यम से भूमि और मौसम की निगरानी की जानकारी और समय पर व्यापक प्रचार-प्रसार की सुविधा दी जा रही है। प्रदेश में वेदर रडार लगाए जा रहे हैं। ‘इण्टरनेट ऑफ थिंग्स‘ के माध्यम से सेन्सर द्वारा मिट्टी की नमी और पोषण का डाटा एकत्र कर किसान लाभान्वित हो सकते हैं। कृषि में आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस उपयोगी हो सकती है। तकनीक के माध्यम से फसल का रियल टाइम विश्लेषण, रोगों की समय से पहचान तथा उत्पादन का पूर्वानुमान किया जा सकता हैं। बायोटेक्नोलॉजी के माध्यम से अच्छी उत्पादकता वाले बीजों को प्राप्त किया जा सकता हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग कर जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य के अनुरूप फसलों की उन्नत किस्मों को विकसित कर सकते हैं। कृषि में डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म अर्थात किसान को बाजार से जोड़ने की कार्रवाई के अन्तर्गत मौसम और कीमत की जानकारी उपलब्ध करायी जा सकती है। यह आवश्यक नहीं कि किसान क्रय केन्द्र में अपनी उपज लेकर आएं। किसानों को बाजार में अच्छा दाम मिलने पर अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता दी गई है।
प्रदेश में ‘वन नेशन वन मण्डी’ के नियम को लागू किया गया है। मण्डी शुल्क को आधे से भी कम किया गया है। ए0आई0 आधारित डिजिटल स्वॉयल हेल्थ कार्ड के माध्यम से प्रत्येक किसान को जानकारी प्राप्त हो। किसानों को सीधे मोबाइल पर सलाह और समाधान उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा भूमिका का निर्वहन किया जा रहा है। इन कार्यां को और बड़े स्केल पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अब समय आ गया है जब लैब-टू-लैण्ड नहीं बल्कि लैब-इन-लैण्ड का उपयोग किया जाए। पहले लैब-टू-लैण्ड के माध्यम से प्रयोगशाला से तकनीक निकाल कर खेती में प्रयोग की जाती थी। अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाने की दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है। हमें ऐसी देशी पद्धति विकसित करनी पड़ेगी, जिसके बारे में प्रधानमंत्री जी बार-बार कहते हैं। वह पद्धति प्राकृतिक खेती है।
यह तीन दिवसीय कांग्रेस निश्चित ही अपने लक्ष्यों तक पहुंचेगी। अच्छे शोध पत्रों को प्राप्त कर एक्शन टेकन प्लान आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि प्रदेश के अन्नदाता किसान इससे लाभान्वित हो सकें। प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र तथा कृषि विश्वविद्यालयों को भी इस अभियान से जोड़ने की आवश्यकता है। एक कृषि विज्ञान केन्द्र में कृषि के 06-07 सेक्टरों के वैज्ञानिक होते हैं। इस गोष्ठी में सम्बन्धित वैज्ञानिकों को बुलाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद ‘उपकार‘ से सम्बन्धित लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी।
कार्यक्रम को कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री सरदार बलदेव सिंह ओलख, उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता तथा उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद के अध्यक्ष कैप्टन (सेवानिवृत्त) विकास गुप्ता ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव कृषि श्री रविन्द्र, महानिदेशक उपकार डॉ0 संजय सिंह, महानिदेशक इक्रीसैट डॉ0 हिमांशु पाठक, भारतीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान, लखनऊ के निदेशक डॉ0 दिनेश सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

फसलों को नुकसान पर तत्काल किसानों का सहयोग करने के सीएम के निर्देश

  • मुख्यमंत्री ने असमय वर्षा, ओलावृष्टि तथा कुछ स्थानों पर आगजनी से रबी फसलों को हुए नुकसान के दृष्टिगत त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील कार्रवाई के निर्देश दिए
  • प्रत्येक प्रभावित किसान एवं बटाईदार के नुकसान का सटीक, निष्पक्ष एवं समयबद्ध आकलन कर तत्काल क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए
  • बीमा कम्पनियों के साथ सक्रिय समन्वय स्थापित कर फसल बीमा दावों का शीघ्र निस्तारण किया जाए, अधिकारी स्वयं किसानों से सम्पर्क कर उन्हें बीमा योजनाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें
  • राज्य आपदा राहत कोष से प्रत्येक जनपद को पर्याप्त धनराशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए, आवश्यकतानुसार राहत शिविर स्थापित किए जाएं, मण्डी समितियों के माध्यम से भी किसानों को हरसम्भव सहयोग उपलब्ध कराया जाए
  • जनहानि एवं पशुहानि की स्थिति में 24 घण्टे के अन्दर राहत राशि उपलब्ध कराई जाए, पात्र लाभार्थियों को कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अन्तर्गत शीघ्र लाभान्वित किया जाए
  • जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजनान्तर्गत आवास उपलब्ध कराया जाए

लखनऊ : 08 अप्रैल, 2026 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने असमय वर्षा, ओलावृष्टि तथा कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाओं से रबी फसलों को हुए नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री जी ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि प्रदेश सरकार इस आपदा की घड़ी में प्रत्येक किसान, कृषक परिवार एवं बटाईदार के साथ पूरी संवेदनशीलता, तत्परता एवं प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है। उन्हें हर सम्भव सहायता उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रत्येक प्रभावित किसान एवं बटाईदार के नुकसान का सटीक, निष्पक्ष एवं समयबद्ध आकलन कर तत्काल क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए। जनपद स्तर पर राजस्व, कृषि एवं अन्य सम्बन्धित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए शीघ्र सर्वेक्षण कर रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जाए, ताकि राहत वितरण में किसी प्रकार का विलम्ब न हो। बीमा कम्पनियों के साथ सक्रिय समन्वय स्थापित कर फसल बीमा दावों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश देते हुए कहा कि अधिकारी स्वयं किसानों से सम्पर्क कर उन्हें बीमा योजनाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें, जिससे अधिकतम राहत उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री जी ने राजस्व विभाग को निर्देशित करते हुए कहा कि राज्य आपदा राहत कोष से प्रत्येक जनपद को पर्याप्त धनराशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए। जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि प्रभावित किसानों को त्वरित एवं पारदर्शी ढंग से सहायता प्रदान की जाए। जहां आवश्यकता हो, वहां राहत शिविर स्थापित किए जाएं तथा मण्डी समितियों के माध्यम से भी किसानों को हरसम्भव सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
मुख्यमंत्री जी ने अग्निकाण्ड की घटनाओं पर विशेष संवेदनशीलता बरतते हुए कहा कि जनहानि एवं पशुहानि की स्थिति में 24 घण्टे के अन्दर राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, पात्र लाभार्थियों को कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अन्तर्गत शीघ्र लाभान्वित किया जाए। जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत आवास उपलब्ध कराया जाए। राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य होगी और इसके लिए सम्बन्धित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के चित्रकूट नोड को मिली गति

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*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को सौंपा भूमि आवंटन पत्र*

*₹562.5 करोड़ के निवेश से बीईएल स्थापित करेगी अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण इकाई, 300 से अधिक नौकरियों की संभावना*

*समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के लिए विख्यात चित्रकूट अब रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में भी बनाएगा सशक्त पहचान*

*लखनऊ, 08 अप्रैल।* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के चित्रकूट नोड में 75 हेक्टेयर भूमि का आवंटन पत्र भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनोज जैन को सौंपा। यह पहल चित्रकूट डिफेंस नोड के व्यवस्थित एवं चरणबद्ध विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम मानी जा रही है, जो प्रदेश में रक्षा विनिर्माण अवसंरचना को सुदृढ़ करने के साथ-साथ बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक आधार के विस्तार को नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल उत्तर प्रदेश को रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में एक सशक्त और विश्वसनीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के समग्र आर्थिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी। मध्य भारत में रणनीतिक रूप से स्थित चित्रकूट नोड अपनी उत्कृष्ट लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी और भौगोलिक अनुकूलता के कारण रक्षा उत्पादन के लिए एक उभरता हुआ केंद्र बन रहा है, जो आने वाले समय में निवेश, रोजगार सृजन और उच्च-प्रौद्योगिकी आधारित औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार सिद्ध होगा।

सीएम योगी ने कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा लगभग ₹562.5 करोड़ का निवेश करते हुए अत्याधुनिक राडार एवं वायु रक्षा प्रणालियों के निर्माण हेतु एक उन्नत विनिर्माण इकाई स्थापित की जाएगी। यह पहल न केवल रक्षा क्षेत्र में उच्च-प्रौद्योगिकी आधारित उत्पादन को सुदृढ़ करेगी, बल्कि प्रदेश में औद्योगिक दक्षता और तकनीकी क्षमताओं के विस्तार को भी नई दिशा देगी। इसके परिणामस्वरूप 300 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है, जबकि सहायक एवं संबद्ध क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रूप से व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन से स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट में इस उच्च-प्रौद्योगिकी इकाई की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे रोजगार के लिए अन्य क्षेत्रों में पलायन करने की आवश्यकता में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष मानव संसाधन के विकास, अनुसंधान और नवाचार को भी संस्थागत रूप से प्रोत्साहित करेगी, जिससे प्रदेश में आधुनिक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण को बल मिलेगा।

उन्होंने कहा कि यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को ठोस आधार प्रदान करते हुए रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन क्षमता को निर्णायक रूप से सुदृढ़ करेगी। इसके माध्यम से आयात पर निर्भरता में कमी आएगी और देश में एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं एकीकृत रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण संभव होगा। साथ ही, इस परियोजना से सहायक एवं एमएसएमई आधारित उद्योगों के विकास को गति मिलेगी तथा उन्नत तकनीकी सहयोग, नवाचार और ज्ञान हस्तांतरण के नए अवसर सृजित होंगे, जो प्रदेश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि चित्रकूट, जो अब तक अपनी समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के लिए विख्यात रहा है, अब रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भी एक नई और सशक्त पहचान स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है। यहां प्रस्तावित यह उन्नत औद्योगिक इकाई न केवल क्षेत्रीय विकास को नई गति देगी, बल्कि प्रदेश के संतुलित, समावेशी और बहुआयामी विकास के संकल्प को ठोस रूप में साकार करने का कार्य करेगी, जिससे पारंपरिक विरासत और आधुनिक औद्योगिक प्रगति के बीच एक सशक्त समन्वय स्थापित होगा।

April 7, 2026

यूपी केबीनेट के फैसलेः निशुल्क टैबलेट योजना समेत कई अहम फैसले

Posted on 07.04.2026 Tuesday Time 10.07 pm

 

लखनऊ : 07 अप्रैल, 2026 उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद् की बैठक आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इसमें कई अहम फैसले लिये गए। इनमें प्रमुख रूप से रोडवेज के 49 बस स्टेशनों का पीपीपी मोड पर विकास करने तथा निशुल्क टैबलेट योजना को मंजूरी प्रदान की गई।
उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम के 49 बस स्टेशनों को पी0पी0पी0 मोड पर विकसित कराये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने सार्वजनिक निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) पद्धति पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस स्टेशनों को विकसित कराये जाने हेतु द्वितीय चरण में, प्रारम्भिक रूप से 54 बस स्टेशनों के स्थान पर अनुपयुक्त 06 बस स्टेशनों को छोड़ते एवं जनपद चन्दौली को सम्मिलित करते हुये, कुल 49 बस स्टेशनों को विकसित कराये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इस सम्बन्ध में बिडिंग की कार्यवाही प्रारम्भ करने के लिये ड्राफ्ट आर0एफ0पी0 और ड्राफ्ट कन्सेशन एग्रीमेन्ट को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। बिडिंग प्रक्रिया के दौरान बिड दस्तावेजों में संशोधनों पर स्वीकृति हेतु मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया है।
पी0पी0पी0 मोड पर विकसित कराये जाने वाले 49 बस स्टेशनों में फाउंड्री नगर (आगरा), अकबरपुर (डिपो कार्यशाला) (अम्बेडकरनगर), अमेठी तथा जगदीशपुर (अमेठी), अयोध्या (ओल्ड बस स्टेशन) (अयोध्या), तरवा (आजमगढ़), रसड़ा तथा बेल्थरा रोड (बलिया), बलरामपुर (डिपो कार्यशाला) (बलरामपुर), हैदरगढ़ (बाराबंकी), बस्ती (डिपो कार्यशाला) (बस्ती), नहटौर (बिजनौर), बदायूं (बदायूं), बुलन्दशहर (पुराना) तथा खुर्जा (बुलन्दशहर), देवरिया (देवरिया), एटा (एटा), फिरोजाबाद तथा शिकोहाबाद (फिरोजाबाद), नोएडा (डिपो कार्यशाला) (गौतमबुद्धनगर), गढ़ तथा लोनी (गाजियाबाद), गोण्डा (डिपो कार्यशाला) (गोण्डा), हरदोई (हरदोई), हाथरस (हाथरस), जौनपुर, मछलीशहर तथा बादशाहपुर (जौनपुर), झाँसी (नई भूमि) (झाँसी), माती (कानपुर देहात), सराय आकिल (कौशाम्बी), गोला (लखीमपुर खीरी), जानकीपुरम तथा कैसरबाग (लखनऊ), सोनौली तथा निचलौल (महराजगंज), विन्ध्याचल (मिर्जापुर), मुरादाबाद (पीतल नगरी) (मुरादाबाद), मुजफ्फरनगर (नई भूमि) (मुजफ्फरनगर), पीलीभीत (पीलीभीत), कुण्डा (प्रतापगढ़), रामपुर (रामपुर), भिनगा (श्रावस्ती), नैमिषारण्य तथा सिधौली (सीतापुर) रॉबर्टसगंज (सोनभद्र), उन्नाव (उन्नाव), काशी (गोलगट्टा) (वाराणसी) तथा चन्दौली (चन्दौली) सम्मिलित हैं।
इन बस स्टेशनों को ’डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण’ (डी0बी0एफ0ओ0टी0) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से राज्य सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। बिना किसी सरकारी निवेश के बस स्टेशनों पर शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर और आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
निवेशकों की तकनीकी क्षमता की शर्त को परियोजना लागत के 150 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है। पात्र परियोजनाओं की गणना के लिए समय सीमा 05 वर्ष से बढ़ाकर 08 वर्ष कर दी गई है। नेट वर्थ की आवश्यकता अनुमानित परियोजना लागत का 25 प्रतिशत निर्धारित की गई है। कंसोर्टियम में सदस्यों की अधिकतम संख्या 03 से बढ़ाकर 04 कर दी गई है।
इसके लिए समय-सीमा को 06 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दिया गया है। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रस्तावित स्थलों पर 2.5 के समान फ्लोर एरिया रेशियो (एफ0ए0आर0) और ग्राउण्ड कवरेज की निःशुल्क अनुमति प्रस्तावित की गयी है। लीज अवधि (35 या 90 वर्ष) समाप्त होने पर यदि विकासकर्ता स्वामित्व वापस नहीं करता है, तो भूमि का स्वामित्व स्वतः ही परिवहन निगम को प्राप्त हो जाएगा।

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डॉ0 बी0आर0 आंबेडकर मूर्ति विकास योजना प्रारम्भ किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने डॉ0 बी0आर0 आंबेडकर मूर्ति विकास योजना प्रारम्भ किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
महापुरुषों, राष्ट्रीय स्तर के समाज सुधारकों एवं सांस्कृतिक विभूतियों की मूर्तियाँ हमारे राष्ट्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। यह मूर्तियां सार्वजनिक स्मृति, सामाजिक मूल्यों तथा राष्ट्रीय एवं स्थानीय योगदानकर्ताओं के प्रति सम्मान को प्रदर्शित करती हैं।
वर्तमान में अनेक मूर्तियों निर्धारित विधिक मानकों के अनुरूप स्थापित हैं, जो छत्र एवं बाउण्ड्रीवॉल से रहित हैं। इसके कारण यह मूर्तियां मौसम की मार, अतिक्रमण एवं उपेक्षा के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। पर्याप्त सुरक्षा एवं सौंदर्याकरण के अभाव में इन प्रतिमाओं की गरिमा तथा दृश्य आकर्षण भी प्रभावित होता है।
उक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह योजना तैयार की गई है। इसका उद्देश्य 31 दिसम्बर, 2025 तक स्थापित ऐसी विद्यमान मूर्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उनके आसपास के क्षेत्र का सौन्दर्यीकरण कर उन्हें संरक्षित एवं सम्मानजनक स्वरूप प्रदान करना है। योजना के माध्यम से मूर्तियों की भौतिक सुरक्षा तथा सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का सरंक्षण किया जा सकेगा। योजना के क्रियान्वयन से मूर्ति स्थलों का सौन्दर्यीकरण एवं गरिमा-वर्धन होगा। इस प्रकार मूर्ति स्थलों को जानकारीपरक एवं जनोपयोगी बनाया जाएगा।
डॉ0 बी0आर0 आंबेडकर मूर्ति विकास योजना को प्रारम्भ किये जाने से मूर्तियों के आस-पास स्थल का विकास तथा बाउण्ड्रीवाल का निर्माण कराया जाएगा, जिससे रोजगार सृजन होगा। प्रत्येक विधान सभा में 10 स्मारकों का विकास कराया जाएगा। प्रति स्मारक लागत 10 लाख रुपये निर्धारित है। इस प्रकार कुल 403 विधान सभाओं में 10 स्मारकों के विकास हेतु कुल 403 करोड़ रुपये का व्यय सम्भावित है।

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स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तिकरण योजना के अन्तर्गत निःशुल्क टैबलेट वितरित किये जाने के सम्बन्ध में 25 लाख टैबलेट क्रय किये जाने हेतु अन्तिम बिड डॉक्यूमेन्ट अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तिकरण योजना के अन्तर्गत निःशुल्क टैबलेट वितरित किये जाने के सम्बन्ध में 25 लाख टैबलेट क्रय किये जाने हेतु अन्तिम बिड डॉक्यूमेन्ट पर अनुमोदन प्रदान किया है। निविदा की शर्तों तथा डिवाइसेस की संख्या में परिवर्तन, सफल निविदादाताओं के चयन एवं क्रयादेश निर्गमन पर अनुमोदन प्रदान करने के लिये मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाये जाने हेतु टैबलेट वितरण की यह एक अभिनव योजना है। स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास आदि विभिन्न शिक्षण/प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लाभार्थी युवा वर्ग को टैबलेट निःशुल्क प्रदान करने से न केवल वह अपने शैक्षिक पाठ्यक्रमों को सफलतापर्वक पूर्ण कर सकेंगें वहीं उसके उपरान्त विभिन्न शासकीय/गैर-शासकीय तथा स्वावलम्बन की योजनाओं में भी वे इसका सदुपयोग कर सेवारत/व्यवसायरत हो सकेगें।
निःशुल्क टैबलेट वितरण से प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण एवं आई0टी0आई0 तथा सेवामित्र पोर्टल पर पंजीकृत कुशल युवा वर्ग तकनीकी रूप से सशक्त बनेगें। इससे युवा वर्ग को रोजगार का सृजन एवं सेवायोजन में सहायता होगी।

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उ0प्र0 औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अन्तर्गत 08 प्रकरणों पर उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की संस्तुतियां अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अन्तर्गत 08 प्रकरणों पर उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की संस्तुतियों पर अनुमोदन प्रदान किया है।
इसके तहत 7608.04 करोड़ रुपये के कुल प्रस्तावित निवेश हेतु 06 औद्योगिक इकाईयों (ओएफबी टैक प्राइवेट लिमिटेड, शाहजहाँपुर ; इण्डिया ग्लाइकौल्स लिमिटेड, गोरखपुर ; सीईएससी ग्रीन पावर लिमिटेड, गौतमबुद्धनगर ; बिसलेरी इण्टरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, प्रयागराज ; एजीआई कैन, हाथरस ; इण्टीग्रेटेड बैटरीज़ इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड, गौतमबुद्धनगर) को लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत किये जाने, 237 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश की एक इकाई (त्रिवेणी इन्जीनियरिंग, मुरादाबाद) को प्रथम वर्ष हेतु स्वीकृत पूंजीगत सब्सिडी 4,04,47,054.28 रुपये की प्रतिपूर्ति तथा 16139.5 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश की 01 इकाई (अवाडा इलेक्टो्र लिमिटेड, गौतमबुद्धनगर) के लेटर ऑफ कम्फर्ट में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के प्रस्तर-12 में औद्योगिक इकाईयों को छूट, अनुदान एवं वित्तीय सुविधाएं प्रदान किये जाने का प्राविधान किया गया है। इस नीति के क्रियान्वयन हेतु शासन के पत्र दिनांक 14.04.2023 द्वारा दिशा-निर्देश एवं क्रियान्वयन की प्रक्रिया निर्धारित की गयी है।
शासनादेश दिनांक 14.04.2023 के प्रस्तर-4 एवं 5 में लेटर ऑफ कम्फर्ट तथा प्रोत्साहनों की स्वीकृति हेतु आवेदन प्रक्रिया का विस्तृत विवरण का उल्लेख है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इन्वेस्ट यू0पी0 (नोडल संस्था) की अध्यक्षता में मूल्यांकन समिति का गठन किया गया है। मूल्यांकन समिति द्वारा औद्योगिक इकाईयों के आवेदनों का मूल्यांकन कर संस्तुति प्राधिकारी के समक्ष विचार-विमर्श हेतु प्रस्तुत किये जाने की व्यवस्था है।
मेगा एवं उससे उच्च श्रेणी की औद्योगिक इकाईयों के आवेदन पत्रों पर मुख्य सचिव, उ0प्र0 शासन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया जाता है। उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा की गई अन्तिम संस्तुतियों को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित किया जाता है। उच्चस्तरीय प्राधिकृत समिति की 10 फरवरी, 2026 को सम्पन्न बैठक में 08 प्रकरणों पर मंत्रिपरिषद का अनुमोदन प्राप्त किये जाने की संस्तुति की गयी थी।

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जनपद गोरखपुर में ‘उ0प्र0 वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय’ की स्थापना तथा उससे सम्बन्धित आनुषंगिक विषयों के उपबन्ध के लिए ‘उ0प्र0 वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026’ का आलेख स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद गोरखपुर में ‘उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय’ की स्थापना तथा उससे सम्बन्धित आनुषंगिक विषयों का उपबन्ध करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026’ के आलेख को स्वीकृति प्रदान की है। प्रस्तावित अध्यादेश में आवश्यकतानुसार अन्य निर्णय लिए जाने/संशोधन किये जाने हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
प्रदेश में वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा, वनावरण एवं वृक्षावरण में वृद्धि तथा औद्यानिकी क्षेत्र में प्रगति राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना से जहाँ एक ओर वन एवं वन्य जीव की सुरक्षा, वनीकरण एवं औद्यानिकी के क्षेत्र में उन्नत खेती को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर कृषि एवं पर्यावरण में दिलचस्पी रखने वाले व्यक्तियों तथा छात्रों-छात्राओं को वानिकी एवं औद्यानिकी के सम्बन्ध में आधुनिक ज्ञान और प्रशिक्षण के साथ-साथ आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभ होंगे।
उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना भारी वैसी वन ब्लॉक, कैम्पियरगंज रेंज, गोरखपुर के अन्तर्गत 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर किया जाना प्रस्तावित है। विश्वविद्यालय में वानिकी एवं औद्यानिकी से सम्बन्धित विभिन्न विषयों में अध्ययन एवं अनुसंधान हेतु पाठ्यक्रम का संचालन किया जाएगा।
वानिकी से सम्बन्धित सेल्वी-कल्चर एवं एग्रो-फॉरेस्ट्री विज्ञान, प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन एवं संरक्षण विज्ञान, वन उपज एवं उनके उपयोग, विज्ञान पारिस्थितिकीय, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विज्ञान, वन्य जीव विज्ञान एवं संरक्षण विज्ञान सामान्य एवं सामाजिक विज्ञान पर अध्ययन प्रस्तावित है। औद्यानिकी के तहत वनस्पति विज्ञान, फल और बागवानी विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पुष्प कृषि और भू-निर्माण तथा कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी (पोस्ट हार्वेस्टिंग टेक्नोलॉजी) एवं वानिकी तथा औद्यानिकी से सम्बन्धित अन्य सम-सामयिक विषयों में अध्ययन प्रस्तावित है। इसके अन्तर्गत बी0एस0सी0, एम0एस0सी0 तथा पी0एच0डी0 डिग्री के साथ-साथ अल्प अवधि डिप्लोमा कार्यक्रम संचालित होंगे।
विश्वविद्यालय के मुख्य उद्देश्य-वानिकी औद्यानिकी और अन्य सम्बन्धित विषयों में संगठित और गुणात्मक शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान सुनिश्चित करना। वानिकी और औद्यानिकी के माध्यम से खाद्य सुरक्षा को हरित आवरण से जोड़ने के लिए एक मंच प्रदान करना। वानिकी और औद्यानिकी के क्षेत्र में छात्रों और किसानों आदि की क्षमता वृद्धि। वानिकी, औद्यानिकी आदि से सम्बन्धित विभिन्न मुद्दों पर विभिन्न संगठनों, संस्थाओं और एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना। प्रयोगशाला से भूमि तक कार्यक्रम के अन्तर्गत अनुसंधान के निष्कर्षों का विस्तार करना। विभिन्न शैक्षिक और अनुसंधान गतिविधियों के माध्यम से जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित करना आदि।

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स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, बलिया की स्थापना के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने जनपद बलिया में चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तान्तरित जिला कारागार की 14.05 एकड़ (5.686 हे0) भूमि पर नवीन स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के निमित्त गठित की जाने वाली सोसाइटी का मेमोरेण्डम एवं बायलॉज पूर्व में मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित केन्द्र सहायतित योजना फेज-3 के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों के सोसाइटी गठन के मेमोरेण्डम एवं बायलॉज की भांति रहेगा। मंत्रिपरिषद द्वारा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, बलिया की व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 437.0021 करोड़ रुपये के व्यय प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान किया है।
मंत्रिपरिषद की बैठक के निर्णयों की मीडिया प्रतिनिधियों को जानकारी देने हेतु आहूत ब्रीफिंग में परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि मंत्रिपरिषद द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, बलिया का नाम महर्षि भृगु के नाम पर रखा जाएगा। इसी के साथ ही ढाई एकड़ भूमि पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व0 चित्तू पाण्डेय के नाम पर स्मारक बनाया जाएगा।

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जनपद पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर व बिजनौर में रह रहे शरणार्थी परिवारों को भूमि का मालिकाना हक दिलाने के लिए उ0प्र0 राजस्व संहिता, 2006 में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने भारत विभाजन के समय विस्थापित होकर जनपद पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर व बिजनौर में रह रहे शरणार्थी परिवारों को भूमि का मालिकाना हक दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इसके अन्तर्गत संहिता की धारा-76(1) में खण्ड (घघघ) व (घघघघ) को जोड़ा जायेगा।
इस सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, 2026 के प्रख्यापन तथा उसके प्रतिस्थानी विधेयक के आलेख्य पर, विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर उसे राज्य विधान मण्डल में पुरःस्थापित/पारित कराये जाने का प्रस्ताव भी मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत किया गया है। निर्णय को लागू करने में कोई व्यावहारिक कठिनाई उत्पन्न होने की स्थिति में उक्त के समाधान हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि पिछले 50-70 वर्षों में स्वामित्व के अभाव में इन परिवारों को खेती के लिये बैंक ऋण प्राप्त करने और सरकारी खरीद केन्द्रों पर अपनी उपज बेचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसके समाधान के लिये अध्यादेश के माध्यम से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 में संशोधन प्रस्तावित किया गया है। संहिता के प्रवृत्त होने के दिनांक से इन परिवारों को ‘असंक्रमणीय अधिकार’ प्रदान किया जायेगा।
इस निर्णय से परिवारों को अपनी जमीन का मालिकाना हक प्राप्त होगा, जिससे आसानी से बैंक लोन मिल सकेगा। सरकारी केन्द्रों पर अपनी फसल सम्मानजनक तरीके से बेच सकेंगे। इस प्रकार उन्हें न केवल कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनका आर्थिक सशक्किरण भी होगा।
दशकों से अपनी ही जमीन पर ‘अतिक्रमणकारी’ कहे जाने वाले विस्थापित परिवारों को अब ‘भूमिधर’ का सम्मान मिलेगा। राजस्व संहिता में इस संशोधन के माध्यम से प्रदेश सरकार ने अन्त्योदय के संकल्प को सिद्ध किया है।

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सिकन्दराराऊ, जनपद हाथरस में बस स्टेशन निर्माण के लिये ग्राम रतनपुर हुसैनपुर में 01 हेक्टेयर भूमि परिवहन विभाग के पक्ष में निःशुल्क नामान्तरित/हस्तान्तरित किये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने सिकन्दराराऊ, जनपद हाथरस में बस स्टेशन निर्माण के लिये ग्राम रतनपुर हुसैनपुर में खसरा संख्या-263, रकबा 10.012 हेक्टेयर भूमि में से 01 हेक्टेयर भूमि का परिवहन विभाग के पक्ष में निःशुल्क नामान्तरण/हस्तान्तरण किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
सिकन्दराराऊ क्षेत्र एटा, अलीगढ़, कासगंज एवं हाथरस जैसे प्रमुख जनपदों से जुड़ा हुआ है। 02 राष्ट्रीय राजमार्गों के मध्य स्थित होने के कारण यह क्षेत्र यातायात की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। बस स्टेशन का निर्माण हो जाने से क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार एवं रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। बेहतर परिवहन सुविधा से सामाजिक विकास, जीवन स्तर में सुधार एवं पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

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नरौरा, जनपद बुलन्दशहर में बस स्टेशन एवं डिपो कार्यशाला तथा तहसील तुलीसपुर, जनपद बलरामपुर में बस स्टेशन निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने नरौरा, जनपद बुलन्दशहर में बस स्टेशन एवं डिपो कार्यशाला स्थापित किये जाने हेतु सिंचाई विभाग की भूमि तथा तहसील तुलसीपुर, जनपद बलरामपुर में बस स्टेशन के निर्माण के लिये लोक निर्माण विभाग की भूमि परिवहन विभाग को निःशुल्क नामांतरित/हस्तांतरित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार ग्राम जयरामपुर बांगर, तहसील डिबाई, जनपद बुलन्दशहर स्थित सिंचाई विभाग की 43.9230 हेक्टेयर क्षेत्रफल की रिक्त भूमि में से
1.1260 हेक्टेयर चिन्हित भूमि एवं तहसील तुलसीपुर, जनपद बलरामपुर में हरैया तिराहा एवं देवीपाटन मन्दिर के मध्य सड़क के किनारे स्थित राजस्व पाटन के गाटा संख्या-169 रकबा 3.0350 हेक्टेयर भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-6(2) के अन्तर्गत डाक बंगला (लोक निर्माण विभाग) के नाम दर्ज है, में से 02 हेक्टेयर भूमि को परिवहन निगम के उपयोगार्थ/निवर्तन हेतु परिवहन विभाग को निःशुल्क नामांतरण/हस्तांतरण किया जायेगा। इसके लिये संगत आदेश सम्बन्धित विभागों के प्राधिकारी निर्गत करेंगे।
ज्ञातव्य है कि जनपद बुलन्दशहर में पूर्व में न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया की लीज भूमि पर परिवहन निगम का नरौरा डिपो संचालित था। लीज समाप्त होने के बाद इसे स्थायी रूप से नई भूमि पर स्थापित किया जाना आवश्यक है। जनपद बलरामपुर में देवी पाटन मन्दिर के समीप यात्रियों की सुविधा हेतु एक व्यवस्थित बस स्टेशन की मांग की जा रही थी।
बस स्टेशनों के संचालन से जनता को सुलभ, सस्ती और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलेगी। बस स्टेशन और कार्यशाला के निर्माण से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ेगा। बस स्टेशनों को ‘आर्थिक केन्द्र’ (दुकान, फूड कोर्ट) के रूप में विकसित किया जायेगा। व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से परिवहन निगम के राजस्व में वृद्धि होगी।

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जनपद कन्नौज में विधान सभा क्षेत्र छिबरामऊ के अन्तर्गत च्यवन ऋषि आश्रम के निकट चियासर घाट पर गंगा नदी पर ई0पी0सी0 मोड पर सेतु, पहुंच मार्ग, अतिरिक्त पहुंच मार्ग के निर्माण की सम्पूर्ण परियोजना व लागत 28899.22 लाख रु0 का व्यय प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद कन्नौज में विधान सभा क्षेत्र छिबरामऊ के अन्तर्गत विकास खण्ड गुगरापुर में ग्राम चियासर के पास च्यवन ऋषि आश्रम के निकट चियासर घाट पर गंगा नदी पर सेतु, पहुंच मार्ग, अतिरिक्त पहुंच मार्ग एवं सुरक्षात्मक निर्माण कार्य की सम्पूर्ण परियोजना, प्रश्नगत कार्य ई0पी0सी0 मोड पर कराये जाने तथा उक्त कार्य की व्यय वित्त समिति से अनुमोदित लागत 28899.22 लाख रुपये के व्यय प्रस्ताव पर अनुमोदन प्रदान किया है।
ज्ञातव्य है कि चियासर घाट पर गंगा नदी को पार करने हेतु केवल नाव ही एक मात्र साधन है, जो वर्षा ऋतु में बन्द हो जाता है। इससे नदी के दोनों ओर निवास करने वाली आबादी का आवागमन पूर्ण रूप से बाधित हो जाता है। प्रस्तावित सेतु बन जाने से जनपद कन्नौज व जनपद हरदोई की लगभग 04 लाख आबादी लाभान्वित होगी।
कन्नौज साइड रामगंगा नदी सेतु पलिया बेडीजोर, रामगंगा नदी सेतु अर्जुनपुर से हरदोई, बरेली, शाहजहांपुर से जुड़ जायेंगे। हरदोई साइड के निवासी छिबरामऊ गुरसहायगंज, कन्नौज, कानपुर तथा फर्रुखाबाद राष्ट्रीय राज मार्ग एन0एच0-34 तथा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से जुड जायेंगे। इससे समय एवं ईंधन की बचत होगी, क्षेत्रीय निवासियों तथा पर्यटकों के आवागमन में सुविधा होगी और क्षेत्र का चहुँमुखी विकास होगा।

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जनपद कुशीनगर में विधान सभा खड्डा के अन्तर्गत नारायणी नदी के भैंसहा घाट पर ई0पी0सी0 मोड पर दीर्घ सेतु, पहुंच मार्ग, अतिरिक्त पहुंच मार्ग के निर्माण की सम्पूर्ण परियोजना व लागत 70518.19 लाख रु0 का व्यय प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने जनपद कुशीनगर में विधान सभा खड्डा के अन्तर्गत नारायणी नदी के भैंसहा घाट पर दीर्घ सेतु, पहुंच मार्ग, अतिरिक्त पहुंच मार्ग एवं सुरक्षात्मक निर्माण कार्य की सम्पूर्ण परियोजना, प्रश्नगत कार्य ई0पी0सी0 मोड पर कराये जाने तथा उक्त कार्य की व्यय वित्त समिति से अनुमोदित लागत 70518.19 लाख रुपये के व्यय प्रस्ताव पर अनुमोदन प्रदान किया है।
ज्ञातव्य है कि वर्तमान में नारायणी नदी के भैंसहा घाट पर नदी पार करने का एक मात्र साधन पान्टून पुल है, जो वर्षा ऋतु में हटा लिया जाता है। प्रस्तावित सेतु का निर्माण हो जाने से बिहार एवं जनपद महराजगंज जाने के लिए लगभग 40-50 कि0मी0 दूरी कम हो जायेगी एवं कुशीनगर तथा महराजगंज साइड के गांव लाभान्वित होंगे। इससे क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा।

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जनपद शाहजहाँपुर में लिपुलेक भिण्ड मार्ग के 28.300 कि0मी0 लम्बाई में चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण की सम्पूर्ण परियोजना तथा पुनरीक्षित लागत 26670.09 लाख रु0 स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद शाहजहाँपुर में लिपुलेक भिण्ड मार्ग (राज्य मार्ग सं0-29) के चैनेज 468.750 से चैनेज 497.050 तक (लम्बाई 28.300 कि0मी0) मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण की सम्पूर्ण परियोजना तथा उक्त कार्य की व्यय-वित्त समिति द्वारा अनुमोदित पुनरीक्षित लागत 26670.09 लाख रुपये (दौ सौ छाछठ करोड़ सत्तर लाख नौ हजार मात्र) का प्रस्ताव स्वीकृत किया है।
यह मार्ग राज्य मार्ग (एस0एच0-29) श्रेणी का है। इस मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण हो जाने से क्षेत्र में यातायात सुगम होगा और जनपद शाहजहाँपुर व आस-पास के क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास होगा।

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पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित हिन्दू बंगाली परिवारों के जनपद कानपुर देहात में पुनर्वासन हेतु लीज रेंट एवं पट्टे के प्रारूप के निर्धारण हेतु की गयी कार्यवाही पर कार्यात्तर अनुमोदन

मंत्रिपरिषद ने पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित हिन्दू बंगाली परिवारों के जनपद कानपुर देहात में पुनर्वासन हेतु लीज रेंट एवं पट्टे के प्रारूप के निर्धारण हेतु की गयी कार्यवाही पर कार्यात्तर अनुमोदन प्रदान किया है।
ज्ञातव्य है कि 29 जनवरी, 2026 को मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदान किये गये अनुमोदन के क्रम में ग्राम नंगला गोसाई, तहसील मवाना, जनपद मेरठ से 99 विस्थापित परिवारों के जनपद कानपुर देहात की तहसील रसूलाबाद के ग्राम भैंसाया और ग्राम ताजपुर तरसौली में कतिपय शर्तां के अधीन पुनर्वासित किये जाने के आदेश 03 फरवरी, 2026 को जिलाधिकारी कानपुर देहात व मेरठ को निर्गत किये गये थे। इसमें लीज रेंट एवं पट्टे के प्रारूप का उल्लेख नहीं किया जा सका।
प्रकरण की तात्कालिकता एवं मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों के दृष्टिगत, पूर्व में पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 63 हिन्दू बंगाली परिवारों को तहसील रसूलाबाद, जनपद कानपुर देहात में पुनर्वासित किये जाने के सम्बन्ध में निर्गत शासनादेश दिनांक 11 नवम्बर, 2021 द्वारा निर्धारित लीज रेंट (01 रुपये) एवं पट्टे हेतु निर्धारित प्रारूप के अनुसार, वर्तमान प्रकरण में भी उपरोक्तानुसार कार्यवाही किये जाने हेतु जिलाधिकारी, कानपुर देहात को 27 मार्च, 2026 को आदेश निर्गत कर दिया गया था। उक्त कार्यवाही पर मंत्रिपरिषद द्वारा कार्यात्तर अनुमोदन प्रदान किया गया।

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निजी क्षेत्र के अन्तर्गत मेट्रो विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा की स्थापना के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने निजी क्षेत्र के अन्तर्गत मेट्रो विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा की स्थापना हेतु प्रायोजक संस्था सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा को संचालन का प्राधिकार निर्गत किये जाने तथा ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ के प्रतिस्थानी विधेयक को विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर उसे राज्य विधान मण्डल में पुरःस्थापित/पारित कराये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, विद्यमान निजी विश्वविद्यालयों के निगमन, उनके कृत्यों के विनियमन तथा उससे सम्बन्धित या आनुषंगिक विषयों की व्यवस्था करने के लिये उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 प्रख्यापित किया गया है। सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा द्वारा ग्रेटर नोएडा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर मेट्रो विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इस सम्बन्ध में कुलपति, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की अध्यक्षता में मूल्यांकन समिति का गठन किया गया। मूल्यांकन समिति की आख्या एवं उसमें प्रायोजक संस्था को आशय-पत्र निर्गत किये जाने हेतु की गयी संस्तुति के आलोक में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा प्रायोजक संस्था को आशय पत्र निर्गत करने की संस्तुति की गयी।
संस्तुति के आधार पर मंत्रिपरिषद के अनुमोदनोपरान्त आशय पत्र निर्गत किया गया। आशय पत्र में उल्लिखित शर्तों का सत्यापन कुलपति, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की अध्यक्षता में गठित निरीक्षण और सत्यापन समिति द्वारा किया गया। उक्त समिति द्वारा प्रश्नगत विश्वविद्यालय का नाम उ0प्र0 निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की अनुसूची में सम्मिलित करने हेतु संस्तुति की गयी।

फिक्की फ्लो लखनऊ ने 2026–27 के लिए ‘चेंज ऑफ़ गार्ड’ समारोह मनाया

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
उत्तरप्रदेश समाचार सेवा
लखनऊ, 6 अप्रैल।

फिक्की फ्लो लखनऊ चैप्टर ने अपना ‘चेंज ऑफ़ गार्ड’ समारोह मनाया, जिसमें सिमरन साहनी को 2026–27 के लिए 12वीं चेयरपर्सन के रूप में शामिल किया गया।

इस शाम का मुख्य आकर्षण डॉ. किरण बेदी के साथ एक प्रेरणादायक सत्र था। अपनी प्रभावशाली उपस्थिति और ज़ोरदार कहानी कहने के अंदाज़ से, उन्होंने अनुशासन, नेतृत्व और दृढ़ता से भरी अपनी यात्रा से मिली गहरी सीख साझा की।

फिक्की फ्लो की 43वीं राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूजा गर्ग ने ‘गेस्ट ऑफ़ ऑनर’ (मुख्य अतिथि) के रूप में इस अवसर की शोभा बढ़ाई।

तत्कालीन चेयरपर्सन वंदिता अग्रवाल ने नई नेतृत्व टीम के सदस्यों से परिचय कराते हुए अपनी ज़िम्मेदारी (बैटन) उन्हें सौंपी।
महिलाएं घर, दफ्तर या किसी भी अन्य क्षेत्र में जन्मजात प्रबंधक होती हैं और शासन-प्रशासन के लिए पूरी तरह उपयुक्त होती हैं।

उन्होंने कहा कि “महिलाओं को सुलभ और दृश्यमान होना चाहिए, उन्हें दबाव में नहीं आना चाहिए, बल्कि समाधान खोजने चाहिए और आगे बढ़ने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। नारीवाद का उद्देश्य महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाना नहीं है, क्योंकि वे पहले से ही सशक्त हैं। इसका उद्देश्य तो दुनिया के उस नज़रिए को बदलना है, जिससे वह महिलाओं की इस शक्ति को देखती है,”

पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल और ‘सुपर कॉप’ डॉ. किरण बेदी ने फिक्की लेडीज़ ऑर्गनाइज़ेशन (FLO) द्वारा लखनऊ के होटल ताज में आयोजित सिमरन साहनी और देवांशी सेठ के साथ एक संवादात्मक सत्र में ये बातें कहीं। फिक्की फ्लो देश की महिला उद्यमियों का शीर्ष संगठन है।

उन्होंने कहा कि “मैं लोगों से जुड़ना चाहती थी, और इसी चाहत ने मुझे पुलिस सेवा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

पुडुचेरी की उपराज्यपाल के तौर पर अपने पाँच साल के कार्यकाल के दौरान, मैंने अपनी कई आदतों में बदलाव किया और कई नए विचार लागू किए, जिनकी बदौलत मैं इस सार्वजनिक पद पर रहते हुए असाधारण नेतृत्व प्रदान कर सकी,”।

पुडुचेरी की उपराज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान लोगों द्वारा उन्हें ‘माँ’ या ‘बहन’ कहकर संबोधित किए जाने की बात याद करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों के साथ एक मानवीय जुड़ाव स्थापित करना ही किसी महिला को विशेष बनाता है।

उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने नेतृत्व में इस मानवीय जुड़ाव को एक सकारात्मक बदलाव के माध्यम (transformation tool) के रूप में इस्तेमाल करें।

डॉ किरन बेदी ने कहा कि आत्मविश्वास समय के साथ बढ़ता है,अन्याय बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। माता-पिता के तौर पर, आपका बच्चा जो कुछ भी देखता है, उसका उस पर गहरा असर पड़ता है। साहस का मतलब है कि आप अपने आस-पास की चीज़ों के प्रति कितने संवेदनशील हैं—क्या वे आपको स्वीकार्य हैं? अगर हाँ या नहीं, तो क्यों?

उन्होंने कहा कि विकास का मतलब है उन स्थितियों पर प्रतिक्रिया देना जो मुझे स्वीकार्य नहीं हैं। सबके साथ समान व्यवहार करें और अपने फ़ैसलों पर अडिग रहें। हम सभी में असीमित क्षमता है,हमारे लिए आसमान ही सीमा है।

फिक्की फ्लो की उधमी महिलाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को मैन्युफ़ैक्चरिंग में नए आइडियाज़ (innovation) की ज़रूरत है, जिससे विदेशी मुद्रा आएगी और रुपए की कीमत गिरने से बचेगी।

उन्होंने कहा कि आयात का कोई विकल्प (import substitute) ढूँढ़ें और सोचें कि आप उसे कैसे बढ़ावा दे सकते हैं। अपनी SWOT Analysis (ताकत, कमज़ोरी, अवसर और चुनौतियाँ) को विस्तार से लिखें। अपनी कमज़ोरियों का विश्लेषण करें। खुद को थोड़ा समय दें।

उन्होंने सुझाव दिया कि खुद का ध्यान रखना (Self-care) और खुद को समझना (Self-awareness) यानी लगातार अपना विश्लेषण करते रहें। एक डायरी या जर्नल में अपने विचार लिखें।
स्पष्टता ही सफलता की कुंजी है, हम सभी को किसी न किसी रूप में मदद की ज़रूरत होती है।

कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण लखनऊ जेल में ‘रेडियो परवाज़’ की शुरुआत थी,यह ‘इंडिया विज़न फाउंडेशन’ की एक पहल है, जो अब लगभग 3,100 कैदियों तक पहुँच रही है। फ्लो ने 10 कैदियों के बच्चों की शिक्षा के लिए भी अपने समर्थन की घोषणा की, जिससे सामाजिक प्रभाव के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और मज़बूत हुई।

इस शाम ‘अपोलो प्रिविलेज कार्ड’ का भी अनावरण किया गया। यह फ्लो लखनऊ के ‘हेल्थ वर्टिकल’ द्वारा ‘अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल्स’ के सहयोग से शुरू की गई एक विचारशील पहल है, जिसका उद्देश्य सदस्यों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ और सशक्त बनाना है।

एक नए दृष्टिकोण के साथ फ्लो लखनऊ अपने 12वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और नेतृत्व, सशक्तिकरण तथा सामुदायिक प्रभाव पर अपना ध्यान केंद्रित रखना जारी रखेगा। यह कार्यक्रम एक पर्यावरण-अनुकूल पहल के रूप में आयोजित किया गया था, जिसमें प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के प्रयास किए गए।

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