एटा 06 मई उप्रससे। जनपद में आंगनवाड़ी सहायिका भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दो महिलाओं को पहले विधिवत नियुक्ति पत्र देकर जॉइन कराया गया, बैंक खाते खुलवाए गए और सभी औपचारिकताएं पूरी कराई गई। लेकिन कुछ ही दिनों बाद कथित रूप से दबाव बनाकर उनसे इस्तीफा लिखवा लिया गया।
जांच कमेटी पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे सक्षम न्यायालय की शरण लेंगी।
सकीट ब्लॉक के ग्राम छछैना केंद्र पर मंजू राठौर का चयन आंगनवाड़ी सहायिका पद पर हुआ था। उन्हें नियुक्ति पत्र जारी कर जॉइनिंग कराई गई और बैंक खाता तक खुलवाया गया। जॉइनिंग के बाद अधिकारियों ने यह कहते हुए नियुक्ति निरस्त कर दी कि उनका निवास दूसरी ग्राम पंचायत में है। इसके बाद उन पर दबाव बनाकर इस्तीफा लिखवा लिया गया।
मंजू के पति उमेश ने बताया कि वे कई दिनों से विकास भवन के चक्कर काट रहे हैं। उनका सवाल है कि यदि ग्राम पंचायत को लेकर आपत्ति थी तो नियुक्ति पत्र जारी करने से पहले जांच क्यों नहीं की गई।
दूसरा मामला मारहरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सरनऊ (नगला मानधाती) का है, जहां दामिनी पत्नी रवि कुमार को भी करीब 20 दिन पहले नियुक्ति पत्र दिया गया था। बाद में अधिकारियों ने यह कहते हुए चयन रद्द कर दिया कि उनके पास कक्षा 12 के शैक्षिक प्रमाण पत्र नहीं है। इस मामले में भी आरोप है कि उन पर दबाव बनाकर इस्तीफा लिखवाया गया।
दोनों मामलों में जांच कमेटी की कार्यप्रणाली कटघरे में है। नियमों के अनुसार आवेदन में किसी भी त्रुटि को प्रारंभिक जांच में ही पकड़ा जाना चाहिए था, लेकिन यहां पहले चयन और नियुक्ति के बाद खामियां निकाली गई। जांच में गंभीर लापरवाही हुई या फिर जानबूझकर अनियमितताओं को नजरअंदाज किया गया। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि जांच कमेटी के सदस्यों को निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। पहले भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जब एक अयोग्य अभ्यर्थी को जीआईसी में प्रधानाचार्य नियुक्त कर दिया गया था। बाद में नियुक्ति निरस्त होने पर मामला कोर्ट पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला देते हुए नियुक्ति बहाल करने के आदेश दिए थे। प्रशासनिक लापरवाही के ऐसे मामले न्यायालय तक पहुंचकर सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।
वर्जन
जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि मंजू राठौर का चयन ग्राम पंचायत अलग होने के कारण निरस्त किया गया। दामिनी का चयन शैक्षिक योग्यता अधूरी होने के कारण रद्द किया गया।


