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नहर किनारे मिट्टी खोदते वक्त ढाय गिरी, बुजुर्ग महिला की मौत, किशोरी की हालत नाजुक

May 2, 2026

नहर किनारे मिट्टी खोदते वक्त ढाय गिरी, बुजुर्ग महिला की मौत, किशोरी की हालत नाजुक

मैनपुरी। थाना एलाऊ क्षेत्र के गांव भांवत में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। नहर किनारे मिट्टी खोदते समय अचानक खाई धंस गई, जिसमें दबकर एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि एक किशोरी गंभीर रूप से घायल हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव भांवत निवासी मोरश्री पत्नी स्वर्गीय मातादीन जाटव तथा बबीता पुत्री मानिकचंद शनिवार सुबह करीब 9 बजे नहर किनारे चीका मिट्टी लेने गई थीं। दोनों मिट्टी की खुदाई कर रही थीं, तभी अचानक पीछे की ओर से खाई भरभराकर गिर गई और दोनों को अपने आगोश में ले लिया। बताया जा रहा है कि दोनों करीब दो घंटे तक मलबे में दबी रहीं। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक युवक को किशोरी की आवाज सुनाई दी, जिस पर उसने शोर मचाया। आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े और कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला। सूचना मिलने पर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और घायलों को तत्काल जिला अस्पताल मैनपुरी भेजा गया। जहां इलाज के दौरान मोरश्री ने दम तोड़ दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल बबीता को बेहतर उपचार के लिए सैफई रेफर किया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

मांगों को लेकर सड़क पर उतरी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियाँ

मैनपुरी, आंगनवाड़ी संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो उनका आंदोलन और तेज तथा उग्र रूप लेगा।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके बावजूद, ये कर्मचारी आज अपने मूल अधिकारों से वंचित हैं। कुपोषण से लड़ने वाली ये महिलाएं स्वयं आर्थिक तंगी और असुरक्षित कार्य परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। संयुक्त मोर्चा ने बताया कि वे वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। 8 मार्च 2026 को महिला दिवस पर हुए प्रदर्शन के दौरान भी सरकार ने जल्द समाधान का भरोसा दिया था। हालांकि, 30 अप्रैल तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया,जिसके बाद अब आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
ज्ञापन में प्रमुख मांगों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, वेतनमान, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सुविधाएं लागू करने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष करने, पदोन्नति प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाने तथा आयु सीमा की बाध्यता समाप्त करने की बात भी कही गई है। पोषण ट्रैकर के लिए 5जी मोबाइल खरीदने हेतु 20 हजार रुपये और हर महीने 2500 रुपये डेटा भत्ता देने की मांग भी उठाई गई है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह सुविधा प्रदान नहीं की गई, तो वे ऑनलाइन कार्य बंद कर देंगे। ज्ञापन में यह आरोप भी लगाया गया है कि प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार व्याप्त है, जिसे नियमित मानदेय में जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही, किराए के भवनों का भुगतान सीधे भवन स्वामी को करने, केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की गयी है

मथुरा में सड़क हादसा: ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक को रौंदा, महिला की मौत

मथुरा। थाना फरह क्षेत्र के रेलवे फाटक पर शनिवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। सीमेंट से लदी एक अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक सवारों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में 52 वर्षीय रतनदेई (निवासी खेरागढ़, आगरा) की मौके पर ही मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार  मृतका अपने बेटे और नातिन के साथ हरियाणा जा रही थीं, तभी रेलवे फाटक के पास यह हादसा हो गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि रतनदेई ट्रॉली के टायर के नीचे आ गईं, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
हादसे के बाद चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं, फरार चालक की तलाश शुरू कर दी गई है।
इस घटना से मृतका के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

सहरसा से लापता बच्चा ट्रेन में भटका,चेकिंग स्टाफ ने तलाशा


-हरदोई में बालक को सुरक्षित आरपीएफ को सौंपा
Post on 2.5.26
Saturday Moradabad
Rajesh Bhatia
मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
बिहार से भटक कर ट्रेन में पहुंचे एक मासूम को असुरक्षित हाथों में पहुंचने से पहले बचा लिया गया। ट्रेन में चेकिंग स्टाफ ने हरदोई में बच्चे को आरपीएफ को सौंप दिया गया।
घटना गरीब रथ एक्सप्रेस की 12204 का है।अमृतसर से सहरसा जा रहीं ट्रेन के जी -3 कोच में एक 11 साल का बच्चा अकेला घूमता दिखा। चेकिंग ड्यूटी पर तैनात सीआईटी मनीष प्रकाश बाजपेई ने उसे देखा तो पूछताछ की। बच्चे ने अपना नाम बादल बताया। सहरसा के रहने वाले बच्चे के संग परिजन न होने से सीआईटी नेबच्चे के कहीं असुरक्षित जगह पर पहुंचने की संभावना को देखते हुए मामले की सूचना कंट्रोल रूम को दी। सूचना के बाद रेलवे पुलिस एक्टिव हो गई। हरदोई में गाड़ी पहुंचने पर बच्चेको सीआईटी ने आरपीएफ के सुपुर्द कर दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते रेलवे में मानवीय पहल की सराहना की गई। सतर्कता को सराहा गया।

सबसे पहले नहीं, सबसे सही होना जरूरी : कमलेश

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
02/05/2026

बाजार का दबाव है, पर पत्रकारिता के मूल्य नहीं टूटने चाहिए

सूचना संकुल में जुटे पत्रकार,लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर बहस

फेक न्यूज, टीआरपी और गिरती विश्वसनीयता पर खुलकर चर्चा

30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस पर होगा भव्य समापन

गोरखपुर।सबसे पहले नहीं, सबसे सही होना जरूरी है,इस संदेश के साथ हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने की श्रृंखला में विमर्श की शुरुआत हुई। नारद दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने साफ कहा कि आज मीडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी विश्वसनीयता है और इसे बचाए रखना ही पत्रकारिता की असली परीक्षा है।
मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, गोरखपुर की ओर से शनिवार को शास्त्री चौक स्थित सूचना संकुल भवन में ‘लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका एवं चुनौतियां’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार कमलेश त्रिपाठी ने कहा कि मीडिया पर बाजारवाद का असर दिख रहा है, लेकिन इसके सकारात्मक पहलू भी हैं। इससे संसाधन और तकनीक बढ़ी है, पत्रकारिता का दायरा विस्तृत हुआ है। हालांकि उन्होंने दो टूक कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में निष्पक्षता और विश्वसनीयता से समझौता नहीं होना चाहिए। मुख्य वक्ता जगदीश लाल श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत 30 मई 1826 को ‘उदन्त मार्तण्ड’ से हुई थी और आज यह 200 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर रही है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता बाजार से अलग नहीं रह सकती, लेकिन उसकी आत्मा उसके मूल्यों में ही बसती है। संपादकीय स्वतंत्रता को सबसे जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि दबाव में लिए गए फैसले मीडिया की साख को कमजोर करते हैं। विशिष्ट अतिथि पूर्व संपादक सुजीत पांडेय ने कहा कि पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदला है। पहले खबरें समाज के सरोकारों पर आधारित होती थीं, लेकिन अब कई बार खबरों के हिसाब से समाज को ढालने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। उन्होंने सनसनीखेज खबरों की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई और पत्रकारों से जिम्मेदारी निभाने की अपील की। वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिंह बशर ने कहा कि आज खबर प्रकाशित होने के बाद भी उस पर भरोसा नहीं बन पा रहा है। फेक न्यूज और अधूरी जानकारी ने मीडिया की साख को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने साफ कहा कि सबसे पहले से ज्यादा सबसे सही होना पत्रकारिता की असली पहचान है।
कार्यक्रम में अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया, जबकि जगदीश लाल श्रीवास्तव को ‘नारद सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के अध्यक्ष अरविंद राय ने बताया कि यह श्रृंखला हर शनिवार को जारी रहेगी। 9, 16 और 23 मई को संगोष्ठियां आयोजित होंगी, जबकि 30 मई 2026 को हिंदी पत्रकारिता दिवस पर भव्य समापन होगा। कार्यक्रम का संचालन मृत्युंजय शंकर सिन्हा ने किया। इस अवसर पर सहायक सूचना निदेशक प्रशांत श्रीवास्तव,मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के उपाध्यक्ष गजेंद्र त्रिपाठी,कोषाध्यक्ष धीरेंद्र गुप्ता,गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी,महामंत्री पंकज श्रीवास्तव,कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव, महेंद्र गौड़,वरिष्ठ पत्रकार टीपी शाही,पूर्व अध्यक्ष रीतेश मिश्रा,पूर्व उपाध्यक्ष भूपेंद्र द्विवेदी, संतोष सिंह,मुनव्वर रिजवी,अजय राय,सूर्यप्रकाश गुप्ता,वेद प्रकाश पाठक,रवि राय,दीपक त्रिपाठी,मनोज मिश्रा,रामचंद्र शाही सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।

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