प्रिय प्रधान साथियों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, जिला पंचायत सदस्यों एवं समस्त पंचायत प्रतिनिधियों,
आज मैं आप सबसे किसी राजनीतिक दल, जाति या व्यक्तिगत स्वार्थ के आधार पर नहीं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र को बचाने की अपील करने आया हूँ।
हम सभी की अपनी-अपनी राजनीतिक विचारधाराएं हो सकती हैं। हम अलग-अलग दलों में आस्था रख सकते हैं। लेकिन सबसे पहले हम गांव के निवासी हैं, किसान हैं, और पंचायत प्रतिनिधि हैं। हमारी पहली जिम्मेदारी गांव, पंचायत और लोकतंत्र के प्रति है।
ऑल इंडिया पंचायती राज संगठन लंबे समय से समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग करता रहा है। हमें आशंका थी कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक तो बना दिया जाएगा, लेकिन पंचायतों की वास्तविक शक्तियों को सीमित कर दिया जाएगा। दुर्भाग्य से आज वही होता दिखाई दे रहा है।
यदि गांव के चुने हुए प्रतिनिधियों को अधिकार नहीं मिलेंगे, यदि निर्णय लेने की शक्ति प्रशासन के हाथों में केंद्रित होती जाएगी, तो यह केवल प्रधानों का नहीं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र और संविधान की भावना का भी प्रश्न है। 73वें संविधान संशोधन का उद्देश्य सत्ता का विकेंद्रीकरण था, न कि उसका केंद्रीकरण।
आज लोकतंत्र को आपकी आवश्यकता है। आज गांवों की आवाज को एकजुट होकर उठाने की आवश्यकता है।
आइए, हम सब राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर पंचायतों के अधिकारों, ग्रामीण लोकतंत्र की मजबूती और समय पर पंचायत चुनाव की मांग के लिए एकजुट हों।
लोकतंत्र बचाइए — पंचायत बचाइए।
यदि अधिकार नहीं, तो चुनाव कराइए।
— ब्रजवीर दहिया
राष्ट्रीय अध्यक्ष
ऑल इंडिया पंचायती राज संगठन
