एटा 13 जून उप्रससे। वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज एटा में सीजर प्रसव के बाद दो नवजात शिशुओं के अदला-बदली का मामला सामने आया है। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। जांच में लापरवाही पाए जाने पर एक स्टाफ नर्स और एक आया को निलंबित कर दिया गया है।
जैथरा थाना क्षेत्र के गांव परौली की रहने वाली 25 वर्षीय शिवानी पत्नी जुगेंद्र से जुड़ा है। उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। सीजर प्रसव के लगभग एक घंटे बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने परिजनों को बताया कि उन्हें कन्या हुई है। जबकि प्रसूता शिवानी का कहना था कि उन्हें पुत्र हुआ था। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से शिकायत की।
दूसरी ओर 23 वर्षीय अफसाना पत्नी रवि को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के बाद अस्पताल स्टाफ ने अफसाना के परिजनों को पुत्र होने की जानकारी दी। बेटे के जन्म की खुशी में परिजनों ने न्योछावर भी बांटी और रिश्तेदारों को सूचना दे दी।
अफसाना के ससुर अमीर मुहम्मद ने बताया कि ऑपरेशन के बाद अस्पताल कर्मियों ने उन्हें लड़का दिखाया था। करीब एक घंटे बाद बताया गया कि बच्चा बदल गया है और वास्तव में लड़की हुई है। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआत में ही सही जानकारी दी जाती तो कोई विवाद नहीं होता। परिजनों ने बच्चे की फोटो भी खींच ली थी और खुशी में डॉक्टर को 1000 रुपए न्योछावर दिए थे। जब दोनों परिवारों को बच्चों के बदलने की जानकारी मिली तो अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया। मामला मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा, जिसके बाद तत्काल जांच कराई गई। जांच में नवजातों को परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया में लापरवाही सामने आई।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह ने बताया कि दोनों महिलाओं का सीजर ऑपरेशन हुआ था। अफसाना को जन्मी बच्ची की जन्म के तुरंत बाद पहली रोने की आवाज नहीं आई थी, इसलिए उसे बाल रोग विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया था। इसी दौरान नवजातों को परिजनों को सौंपते समय भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। जिस महिला को पुत्र हुआ था, उसे गलती से पुत्री सौंप दी गई और जिस महिला को पुत्री हुई थी, उसे पुत्र दे दिया गया। हालांकि ऑपरेशन रिकॉर्ड, पीडियाट्रिशियन के नोट्स, नर्सिंग रिकॉर्ड और पोर्टल पर दर्ज विवरण की जांच में बच्चों की वास्तविक पहचान स्पष्ट हो गई। मुख्य रूप से एक आया और एक स्टाफ नर्स की लापरवाही सामने आई है। दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। भविष्य में उन्हें गायनी वार्ड में तैनात नहीं किया जाएगा। दोनों परिवारों को समझाकर नवजातों को सही अभिभावकों को सौंप दिया गया है। अब आगे से नवजात शिशुओं को सीधे बाल रोग विशेषज्ञों की निगरानी में ही परिजनों को सौंपने की व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
