Edit 26 may 2026 Time 11.48 AM, Tuesday ,By Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News
उत्तर प्रदेश में 2026 चुनावी वर्ष है। इसलिए सरकार हर फैसला चुनाव में मुद्दे को देखकर ले रही है। प्रदेश के चुनावों में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री ने पंचायती राज विभाग के प्रस्ताव को 25 मई को स्वीकृति प्रदान कर दी। इसके बाद 27 मई से यूपी के 57 हजार 694 प्रधान प्रशासक बन जाएंगे। क्योंकि इनका वर्तमान कार्यकाल 26 मई 2026 तक है। ये व्यवस्था यूपी में पहली बार हुई है। इसके पहले भी चुनाव में विलंब हुआ है लेकिन कभी पूर्व प्रधानों को प्रशासक नहीं बनाया गया। यह निर्णय यूपी में पहली बार हुआ है। इस निर्णय के दो प्रभाव होंगे पहला तो ये कि जब 11 जुलाई को जिला पंचायत अध्यक्षों और 19 जुलाई को ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल समाप्त होगा तो वे भी प्रशासक बनने की मांग करेंगे। दूसरा ये कि ग्राम प्रधानों की कार्यप्रणाली से नाराज ग्रामीण इस फैसले से नाखुश होंगे। अब सरकार के इस फैसले की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि प्रधानों की लोकप्रियता उनके गांवों में कितनी है, और है भी नहीं।
सरकार ने प्रधानों को प्रशासक जरूर बना दिया है किंतु उनके अधिकार सीमित ही रहेंगे। वे कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे। केवल रूटीन कार्य करने के ही अधिकार होंगे। विशेष और नीतिगत कार्यों के लिए उन्हें जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी। ऐसी स्थिति में ग्राम प्रधान क्या प्रशासक के रूप में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे। ये आने वाले समय में पता चढ़लेगा। हालांकि वे पिछले लंबित कार्य और भुगतान अवश्य कर लेंगे।
इस व्यवस्था की मांग ग्राम प्रधान संगठनों और आल इंडिया पंचायती राज संगठन की ओर से ही की गई थी। जिसे सरकार ने मान लिया है। लेकिन क्या ये व्यवस्था पंचायती राज को सुदृढ़ करेगी या उसे कमजोर करेगी। वैसे उचित तो ये होता कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन छह माह पूर्व किया जाता और अब तक रिपोर्ट आ जाती तथा समय पर चुनाव होते। लेकिन ऐसा हुआ नहीं , अभी एक सप्ताह पूर्व समर्पित पिछड़ा वर आयोग गठित हुआ। ये 6 माह में रिपोर्ट देगा। तब चुनाव में आरक्षण तय होगा तथा चुनाव प्रक्रिया आरम्भ होगी। शायद सरकार की मंशा भी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पंचायत चुनाव नहीं कराने की रही हो।
पंचायतें ग्रामीण लोकतंत्र की रीढ़ है। इनके प्रति सरकारों को संवेदनशील रहना चाहिए। साथ ही पंचायत चुनाव में विलंब और नए प्रधानों के न होने से विकास कार्य प्रभावित होंगे। जैसे मनरेगा जो जुलाई से जी राम जी के रूप में कसम करेगा। अब इसका क्रियान्वयन काम चलाऊ प्रधानों के कारण प्रभावित हो सकता है। बजटीय कार्यों में स्वीकृति जिलाधिकारी से करानी होगी, जिसमें विलंब होगा। कुल मिलाकर इस व्यवस्था से ग्रामीण विकास की गति बाधित ही होगी।

