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भारतीय संग्रहालय: इतिहास, संस्कृति और ज्ञान संरक्षण के केन्द्र – डाॅ० राकेश सक्सेना

May 20, 2026

भारतीय संग्रहालय: इतिहास, संस्कृति और ज्ञान संरक्षण के केन्द्र – डाॅ० राकेश सक्सेना

Rakesh Saxena

एटा 20 मई उप्रससे। संग्रहालय ऐसी इमारतें या संस्थाएँ हैं जिनमें विविध कलात्मक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, पारम्परिक और वैज्ञानिक वस्तुओं को रखकर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाता है और यह बताया जाता है कि समय के साथ मानवता अपने परिवेश में कैसे जीवित रही है। ये हमारी विरासत के प्रचार और सोच-समझ को बढ़ाने में सहायता प्रदान करते हैं। इन संग्रहालयों को इतिहास का भंडार, सभ्यता की स्मृति तथा ज्ञान का जीवंत केन्द्र कहा जाता है। भारत विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। यहाँ सिन्धु घाटी की सभ्यता से लेकर वैदिक, मौर्य, गुप्तकालीन, मुगल आदि समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराएँ रहीं हैं। इस धरोहर को सुरक्षित रखने में संग्रहालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत में इस संग्रहण परम्परा के केन्द्र राजदरबार, किले, मंदिर-मठ, नालंदा, तक्षशिला आदि होते थे किन्तु पुरातत्व विषय अवशेषों को संग्रहित करने की सबसे पहले 1796 ई० में आवश्यकता महसूस की गई जब बंगाल की एशियाटिक सोसाइटी ने पुरातत्वीय, नृजातीय, भूवैज्ञानिक, प्राणिविज्ञान दृष्टि से महत्व रखने वाले विशाल संग्रह को एक स्थान पर एकत्र करने की आवश्यकता महसूस की। यह पहला संग्रहालय 1814 ई० में प्रारम्भ किया गया तदन्तर अनेक राज्यों में इनकी स्थापना हुई।
भारत में ये संग्रहालय पुरातात्विक, कला, विज्ञान, लोक एवं जनजातीय, स्मारक, प्राकृतिक आदि विभिन्न विषयों पर स्थापित किए गए हैं। दिल्ली, सारनाथ, मथुरा के राष्ट्रीय संग्रहालयों में प्राचीन सभ्यताओं, मूर्तियों, सिक्कों व शिलालेखों के संरक्षण, सालारजंग, राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालयों में चित्रकला, मूर्तिकला, वस्त्रकला, आधुनिक कला को, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद, नेहरू विज्ञान केन्द्र मुम्बई में विज्ञान व तकनीक को, शिल्प संग्रहालय दिल्ली, जनजातीय संग्रहालय भोपाल में लोक संस्कृति, जनजातीय जीवन आदि परम्पराओं को सुरक्षित रखने हेतु स्थापना हुई। इसी भाँति गाँधी स्मृति, नेता जी संग्रहालय दिल्ली में महापुरुषों व ऐतिहासिक घटनाओं के लिए बनाए गए,जिनमें उपलब्ध सामग्री अनुसंधान व अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है। भारत के स्थापित इन संग्रहालयों में रखी मोहन जोदड़ो की नृत्यांगना प्रतिमा, अशोक स्तंभ, बुद्ध की प्राचीन मूर्तियाँ, मुगलकालीन चित्रकला, राजस्थानी लघुचित्र, प्राचीन सिक्के, ताड़पत्र पांडुलिपियाँ , जनजातीय कलाकृतियाँ आदि धरोहर भारत जैसे गौरवशाली देश के अतीत की साक्षी हैं। आज की आधुनिक तकनीक में अनेक संग्रहालय अपनी सामग्री को डिजिटल रूप में उपलब्ध करा रहे हैं। इन संग्रहालयों के समक्ष वित्तीय अभाव, तकनीक सुविधाओं का न होना, प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव एवं आम जनमानस में मनोरंजन स्थलों की अपेक्षा संग्रहालयों में कम रुचि लेने जैसी आज भी अनेक चुनौतियाँ हैं, जिनकी ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।
सारत: भारतीय संग्रहालय इतिहास, संस्कृति और ज्ञान संरक्षण के महत्वपूर्ण केन्द्र हैं। ये समाज को उसकी संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं तथा ये शिक्षा,अनुसंधान, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक संवाद के सशक्त माध्यम भी हैं। आज के युग में जब वैश्वीकरण और तकनीक परिवर्तन के कारण सांस्कृतिक मूल्यों पर संकट उत्पन्न हो रहा है तब अपनी धरोहर और विरासत को सुरक्षित रखने व सशक्त बनाने की हम सभी की सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है।

एटा में कृषि भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा व्यक्ति

, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

एटा 20 मई उप्रससे। जिला मुख्यालय स्थित धरना स्थल पर एक व्यक्ति अपनी कृषि भूमि से अवैध कब्जा हटाए जाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गया है। पीड़ित का आरोप है कि प्रशासन ने उसकी पूर्व की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

फिरोजाबाद जिले के जोधपुर गांव निवासी उमेश कुमार (38 वर्ष) पुत्र भूरे सिंह ने अपनी कृषि भूमि पर अवैध कब्जा और जबरन फसल काटने का आरोप लगाया है। यह भूमि एटा जिले की मुजफ्फरपुर हिरौती, परगना एटा सकीट, तहसील एवं जिला एटा में स्थित है। उमेश कुमार ने कहा है कि वह इस भूमि का असली स्वामी है और राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि का समतलीकरण भी कराया और अपने खेत में गेहूं की फसल बोई थी। कुछ लोगों ने खेत में घुसकर जबरन गेहूं की फसल काट ली।

इस मामले में प्रवीन पुत्र लज्जाराम, पिंकी पत्नी प्रवीन, हरदेवी पत्नी लज्जाराम (निवासी शीतलपुर, थाना कोतवाली नगर एटा) तथा सचिन पुत्र रायसिंह और संदेश पुत्र रायसिंह (निवासी शाह आलमपुर) पर खेत पर कब्जा करने और फसल काटने का आरोप लगाया गया है।
उमेश कुमार का आरोप है कि उसने इस संबंध में जिलाधिकारी एटा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार एटा, क्षेत्राधिकारी सकीट और थाना मलावन प्रभारी सहित कई संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर शिकायत की थी, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। विपक्षी लोग खेत को जबरन जोत रहे हैं और धमकी दे रहे हैं कि यदि जमीन उनके नाम नहीं की गई तो वे खेत नहीं छोड़ेंगे।
पीड़ित ने जिला प्रशासन से अवैध कब्जाधारियों को हटाकर उसे उसकी वैध भूमि का कब्जा दिलाने की मांग की है। उसने चेतावनी भी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वह धरना जारी रखेगा। फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बिजनौर: नौकरी के बहाने कश्मीर ले जा कर कराया धर्म परिवर्तन

बिजनौर, 20 मई 2026 (उत्तर प्रदेश समाचार सेवा) *नौकरी के बहाने कश्मीर ले जाकर नाबालिग युवक का कराया जबरण धर्म परिवर्तन* प्राप्त विवरण के अनुसार शहर कोतवाली थाना अंतर्गत गांव काजीवाला के सैकड़ो ग्रामीण आज पुलिस अधीक्षक बिजनौर के कार्यालय पहुंचकर धरना प्रदर्शन करते हुए गांव के ही नाबालिक को जबरन मुस्लिम धर्म परिवर्तन करने पर न्याय की मांग करने लगे। गांव काजीवाला के ग्रामीणों ने बताया कि कृष्ण कुमार के नाबालिक पुत्र विशाल को लगभग 4 वर्ष पूर्व गांव का ही वसीम नौकरी के बहाने जम्मू कश्मीर ले गया था। वहां ले जाकर उसने अपनी मीठी-मीठी बातों में विशाल को फंसा लिया। जिसके कारण वह पिछले चार वर्ष से परिवार वालों से बात नहीं करता था। 15 मई 2026 को जब विशाल के पिता कृष्ण कुमार ने विशाल से फोन पर वार्ता की तो विशाल बहुत डरा हुआ था और उसने रोते हुए अपने आप को जम्मू कश्मीर से ले जाने की पिता से गुहार लगाई तथा कहा कि मेरा जबरन धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम बना दिया गया है। इस घटना पर विशाल के पिता कृष्ण कुमार के होश उड़ गए, तो उसने गांव वालों को एकत्र करके पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर अपने बेटे को जबरन धर्म परिवर्तन कराने वालों से छुड़ाने की गुहार लगाई। भाजपा के वरिष्ठ नेता ऐश्वर्या मौसम चौधरी ने भी पुलिस अधीक्षक से इस संबंध में त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करने की मांग की। पुलिस अधीक्षक बिजनौर ने त्वरित कार्यवाही करते हुए एक दारोगा व दो सिपाहियों को हवाई जहाज से जम्मू कश्मीर भेज दिया। और विशाल से हमजा बने विशाल को कश्मीर के कुपवाड़ा थाना क्षेत्र से बरामद करने का आदेश दिया। फिलहाल पुलिस अधीक्षक बिजनौर अभिषेक झा ने वसीम और षड्यंत्रकारी लोगों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराकर विधिक कार्रवाई शुरू करने का आश्वासन दिया। हिंदूवादी संगठनों के कुछ नेताओं ने बताया कि पहले भी कुछ मजदूरों को पहाड़ों की घाटी में फंसे होने पर वहां से सकुशल बिजनौर लाने का काम किया गया था।

मुरादाबाद में वकीलों ने रजिस्ट्री दफ्तर पर लगाया ताला,विरोध प्रदर्शन

 

हाईकोर्ट द्वारा अधिवक्ताओं को नोटिस भेजने का विरोध

Post on 20.5.26
Wednesday Moradabad
Rajesh Bhatia,Time 3.00 pm
मुरादाबाद, उप्र समाचार सेवा।
हाईकोर्ट की ओर जारी नोटिस के विरोध में बुधवार को तमाम अधिवक्ता व संगठन हड़ताल पर रहे। हड़ताल के चलते वकीलों ने तहसील,रजिस्ट्री दफ्तर में काम काज ठप रखा। वकीलों के विरोध प्रदर्शन चलते रजिस्ट्री दफ्तरपर ताला लगाने से बैनामे, रजिस्ट्री आदि का काम पूरी तरह से बंद हो गया।
बुधवार को नोटिस को लेकर कड़ा विरोध हुआ।दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी मुरादाबाद के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री कार्यालय में व्याप्त अव्यवस्था व लंबित मांगों को लेकर जोरदार विरोध हुआ। हड़ताल के अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री कार्यालय पर तालाबंदी कर हड़ताल को सफल बनाया। इससे पूरे दिन कार्यालय का काम काज भी प्रभावित रहा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर अपनी नाराजगी जताई। अधिवक्ताओं का आरोप था कि लंबे समय से रजिस्ट्री कार्यालय में विभिन्न समस्याएं बनी हुई है।इससे न केवल अधिवक्त बल्कि आम लोगों को भी भारी परेशानी का सामना कर रहें है।
प्रदर्शन में अधिवक्ताओं ने कहा कि इस बारे में संबंधित अधिकारियों को कई बार समस्याओं से अवगत कराया गया पर अबतक कोई प्रभावी हल नहीं निकला।इसी के चलते कारण मजबूर होकर आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा।अध्यक्ष ने कहा कि अधिवक्ताओं की मांगें न्यायोचित ठहराया। कहा कि व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो आंदोलन चलेगा। प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर रजिस्ट्री कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की।
विरोध प्रदर्शन में पूर्व अध्यक्ष आदेश श्रीवास्तव,राकेश जौहरी विनय खन्ना समेत अधिवक्ता रहे।
इस दौरान हड़ताल व तालाबंदी के चलते रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

उज्जयिनी एक्सप्रेस हादसे की जांच शुरु,कई रेल कर्मियों से होगी पूछताछ

Rail

-यार्ड में खड़ी एक्सप्रेस ट्रेन रोल बैक होकर डैड एंड (पटरी का अंतिम छोर) से टकरा कर रुकीं

जीएम ने भी घटनास्थल का जाएजा लिया

Post on 20.5.26
Wednesday Moradabad
Rajesh Bhatia, Time 12.30 pm

मुरादाबाद, उप्र समाचार सेवा
सोमवार रात योगनगरी ऋषिकेश यार्ड में खड़ी खाली उज्जयिनी एक्सप्रेस(14310) घटना की मंडल रेल अफसरों ने जांच शुरू कर दीं हैं। जांच टीम घटना की गंभीरता को समझते हुए कई रेलकर्मियों से पूछताछ करेगी।हादसा कैसे हुआ, इसे लेकर रेल प्रशासन अभी ज्यादा कुछ बताने की स्थिति में नहीं है।
उज्जयिनी एक्सप्रेस ट्रेन हादसे को लेकर रेलवे गंभीर है।योग नगरी ऋषिकेश यार्ड में खड़ी गाड़ी अचानक रोल बैक(पीछे की ओर खिसकना) होकर करीब 40-50 मीटर खिसककर डैड एंड से टकराकर गई।घटना में ट्रेन के दो कोच भी पटरी से उतर गए। गनीमत रहीं कि उज्जयिनी का रैक खाली था। ट्रेन की तेज गति डैड एंड को तोड़ सकती थी।पर धीमी स्पीड से हादसा टल गया।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए समूचा रेल प्रशासन रात में घटनास्थल के लिए रवाना हो गया। डीआरएम तड़के पहुंची और रेल अधिकारियों संग हालात संभाले। मंगलवार सुबह उत्तर रेलवे के जीएम राजेश पांडेय भी मौके पर पहुंच गए।कई घंटे रूककर घटना स्थिति व कारणों का जाएजा लिया।जीएम ने हरिद्वार पहुंच कर कुंभ मेले की तैयारियों की समीक्षा बैठक की।इस दौरान डीआरएम विनीता श्रीवास्तव,सीनियर डीसीएम, सीनियर डीओएम समेत तमाम अधिकारी भी रहे।

*पांच घंटे देरी से चलीं उज्जयिनी,उत्कल कलिंगा हरिद्वार से हुईं रवाना*

रात से व्यापक स्तर पर शुरू हो गया राहत और ट्रेन संचालन का काम शुरू हो गया।योगनगरी ऋषिकेश से लक्ष्मीबाई नगर जाने वाली ट्रेन मंगलवार को पांच घंटे की देरी से रवाना हुईं।उत्कल कलिंगा एक्सप्रेस ट्रेन 18478 को योगनगरी ऋषिकेश की बजाय हरिद्वार से संचालित किया गया।

वर्जन।
उज्जयिनी एक्सप्रेस ट्रेन घटना की टीम गठित कर जांच कराई जा रही है। घटना के संबंध में रेलकर्मियों से पूछताछ की जाएगी।ट्रेन के रोलबैक, बेपटरी होने समेत अन्य पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।घटना के बाद रेल प्रशासन ने तत्परता से संचालन बहाली के लिए व्यापक स्तर पर कार्य शुरू कराया गया। मंगलवार को उज्जयिनी देरी व अन्य उत्कल कलिंगा को हरिद्वार से चलाया गया।
महेश यादव सीनियर डीसीएम मुरादाबाद।

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