एटा 20 मई उप्रससे। संग्रहालय ऐसी इमारतें या संस्थाएँ हैं जिनमें विविध कलात्मक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, पारम्परिक और वैज्ञानिक वस्तुओं को रखकर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाता है और यह बताया जाता है कि समय के साथ मानवता अपने परिवेश में कैसे जीवित रही है। ये हमारी विरासत के प्रचार और सोच-समझ को बढ़ाने में सहायता प्रदान करते हैं। इन संग्रहालयों को इतिहास का भंडार, सभ्यता की स्मृति तथा ज्ञान का जीवंत केन्द्र कहा जाता है। भारत विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। यहाँ सिन्धु घाटी की सभ्यता से लेकर वैदिक, मौर्य, गुप्तकालीन, मुगल आदि समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराएँ रहीं हैं। इस धरोहर को सुरक्षित रखने में संग्रहालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत में इस संग्रहण परम्परा के केन्द्र राजदरबार, किले, मंदिर-मठ, नालंदा, तक्षशिला आदि होते थे किन्तु पुरातत्व विषय अवशेषों को संग्रहित करने की सबसे पहले 1796 ई० में आवश्यकता महसूस की गई जब बंगाल की एशियाटिक सोसाइटी ने पुरातत्वीय, नृजातीय, भूवैज्ञानिक, प्राणिविज्ञान दृष्टि से महत्व रखने वाले विशाल संग्रह को एक स्थान पर एकत्र करने की आवश्यकता महसूस की। यह पहला संग्रहालय 1814 ई० में प्रारम्भ किया गया तदन्तर अनेक राज्यों में इनकी स्थापना हुई।
भारत में ये संग्रहालय पुरातात्विक, कला, विज्ञान, लोक एवं जनजातीय, स्मारक, प्राकृतिक आदि विभिन्न विषयों पर स्थापित किए गए हैं। दिल्ली, सारनाथ, मथुरा के राष्ट्रीय संग्रहालयों में प्राचीन सभ्यताओं, मूर्तियों, सिक्कों व शिलालेखों के संरक्षण, सालारजंग, राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालयों में चित्रकला, मूर्तिकला, वस्त्रकला, आधुनिक कला को, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद, नेहरू विज्ञान केन्द्र मुम्बई में विज्ञान व तकनीक को, शिल्प संग्रहालय दिल्ली, जनजातीय संग्रहालय भोपाल में लोक संस्कृति, जनजातीय जीवन आदि परम्पराओं को सुरक्षित रखने हेतु स्थापना हुई। इसी भाँति गाँधी स्मृति, नेता जी संग्रहालय दिल्ली में महापुरुषों व ऐतिहासिक घटनाओं के लिए बनाए गए,जिनमें उपलब्ध सामग्री अनुसंधान व अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है। भारत के स्थापित इन संग्रहालयों में रखी मोहन जोदड़ो की नृत्यांगना प्रतिमा, अशोक स्तंभ, बुद्ध की प्राचीन मूर्तियाँ, मुगलकालीन चित्रकला, राजस्थानी लघुचित्र, प्राचीन सिक्के, ताड़पत्र पांडुलिपियाँ , जनजातीय कलाकृतियाँ आदि धरोहर भारत जैसे गौरवशाली देश के अतीत की साक्षी हैं। आज की आधुनिक तकनीक में अनेक संग्रहालय अपनी सामग्री को डिजिटल रूप में उपलब्ध करा रहे हैं। इन संग्रहालयों के समक्ष वित्तीय अभाव, तकनीक सुविधाओं का न होना, प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव एवं आम जनमानस में मनोरंजन स्थलों की अपेक्षा संग्रहालयों में कम रुचि लेने जैसी आज भी अनेक चुनौतियाँ हैं, जिनकी ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।
सारत: भारतीय संग्रहालय इतिहास, संस्कृति और ज्ञान संरक्षण के महत्वपूर्ण केन्द्र हैं। ये समाज को उसकी संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं तथा ये शिक्षा,अनुसंधान, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक संवाद के सशक्त माध्यम भी हैं। आज के युग में जब वैश्वीकरण और तकनीक परिवर्तन के कारण सांस्कृतिक मूल्यों पर संकट उत्पन्न हो रहा है तब अपनी धरोहर और विरासत को सुरक्षित रखने व सशक्त बनाने की हम सभी की सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है।

