Posted on 16.05.2026 Time 05.22 PM, Barabanki News
व्रत रिश्तों में प्रेम, धैर्य और स्थिरता बनाए रखने का संदेश देता
दिलीप कुमार श्रीवास्तव
बाराबकी। शनिवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अपने पति के लंबी आयु के लिए महिलाओं द्वारा वट सावित्री पूजा की गई।
यह व्रत सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, मान्यता है कि जिस तरह बरगद का पेड़ वर्षों तक मजबूती से खड़ा रहता है, उसी तरह ये व्रत रिश्तों में प्रेम, धैर्य और स्थिरता बनाए रखने का संदेश देता है।
पूजा के दौरान महिलाएं पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटती हैं और जल, फूल, रोली व चावल अर्पित करती हैं.
इसके बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है और पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद के पेड़ को बेहद पवित्र और दिव्य माना गया है. कहा जाता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है. यही वजह है कि वट सावित्री व्रत में इसकी पूजा का खास महत्व बताया गया है. बरगद का पेड़ लंबे समय तक हरा-भरा और मजबूत रहता है, इसलिए इसे अखंड सौभाग्य, लंबी उम्र और स्थिर रिश्तों का प्रतीक भी माना जाता है. मान्यता है कि सावित्री ने भी बरगद के पेड़ के नीचे अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाने के लिए तप और प्रार्थना की थी. तभी से सुहागिन महिलाएं इस पेड़ की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं.
वट सावित्री व्रत की कहानी सावित्री और सत्यवान से जुड़ी हुई है. मान्यता है कि जब सत्यवान की मृत्यु बरगद के पेड़ के नीचे हुई थी, तब सावित्री ने अपने प्रेम, बुद्धिमानी और अटूट विश्वास से यमराज से अपने पति के प्राण वापस ले लिए थे. तभी से इस व्रत को पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है. यही कारण है कि महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करती है।
वट वृक्ष की पूजा का धार्मिक महत्व
वट सावित्री व्रत सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि जिस तरह बरगद का पेड़ वर्षों तक मजबूती से खड़ा रहता है, उसी तरह ये व्रत रिश्तों में प्रेम, धैर्य और स्थिरता बनाए रखने का संदेश देता है।
