Posted on 14/05/2026 Time 12.57 P.M Gorakhpur
Santosh Kumar Singh
गोरखपुर, 14 मई 2026 ( उप्र समाचार सेवा )
गीताप्रेस के मुख्य द्वार पर कई तीर्थों के दर्शन एक साथ हो जाते हैं। दुनिया में ऐसा कोई दूसरा द्वार नहीं है जिसमें एक साथ इतने तीर्थ के दर्शन हो सके। चारों दिशाओं से यह द्वार अनूठा दिखता है। वैसे तो गीता प्रेस की ख्याति उसकी पुस्तकों की वजह से पूरे विश्व में है, लेकिन जो लोग गीता प्रेस आते हैं वह इसके मुख्य द्वार के सामने शीश नवाना नहीं भूलते हैं।
गीता प्रेस के मुख्य द्वार पर हिंदू के साथ बौद्ध, जैन एवं सिख धर्मों के पूजा स्थलों का समावेश है। गीता प्रेस का प्रवेश द्वार भूमि से शिखर तक 13 मीटर ऊंचा है। इसकी चौड़ाई 12 मीटर है। यह द्वार खंडों में बनाया गया है। प्रथम खंड में भूमि पर स्थित खंभे हैं, जो दक्षिणभारत के सुप्रसिद्ध गुफा मंदिर, एलोरा के खंभों के आधार पर बने हैं। इसी खंड के ऊपर प्रेस का नाम तथा स्थापना काल हिंदी एवं अंग्रेजी में लिखा गया है।
दूसरा खंड द्वार का मुख्य खंड है। द्वार का मुख्य आकर्षण इस खंड पर बना संगमरमर से बनाया चार घोड़ों का रथ है, जिस पर भगवान श्रीकृष्ण एवं अर्जुन विराजमान हैं। इस रथ का वजन लगभग 15 कुंतल है। यह मूर्ति जयपुर से बनवाकर मंगाई गई थी। तीसरे खंड में चंद्रमा के चित्र के साथ तमाम मंदिरों के दर्शन होते हैं।
गीता प्रेस के मुख्य द्वार में अजंता जलगांव, एलोरा औरंगाबाद, दक्षिणेश्वर कोलकाता, काशी विश्वनाथ वाराणसी, द्वारिकाधीश मंदिर मथुरा, जगन्नाथ मंदिर पुरी उड़ीसा, लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर, श्रीराम जानकी मंदिर जनकपुर, सूर्य मंदिर कोणार्कं, मीनाक्षी मंदिर मदुरा, स्वर्ण मंदिर अमृतसर, खजुराहो, सांची, आबू राजस्थान, महाकाल उज्जैन, केदारनाथ उत्तराखंड, बुद्ध गया बिहार के दर्शन लोगों को होते हैं।

