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हिन्दू सम्मेलनों में समस्त परिवारों से सहभागिता करने का आह्वान

January 18, 2026

हिन्दू सम्मेलनों में समस्त परिवारों से सहभागिता करने का आह्वान

हाथरस नगर की विश्वकर्मा शाखा पर मनाया गया मकर संक्रांति उत्सव

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समरसता भोज हाथरस

मकर संक्रांति उत्सव में शामिल   स्वयंसेवक
हाथरस। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा सामाजिक समरसता का पर्व मकर संक्रांति उत्सव को नगर की विभिन्न शाखाओं पर  हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। सामूहिक खिचड़ी भोज कर प्रेम और एकता का संदेश दिया गया।
सरस्वती शिशु मंदिर में विश्वकर्मा शाखा पर मकर संक्रांति उत्सव का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर एव पुष्प आर्पित कर किया।  मुख्य वक्ता नगर कार्यवाह भानु ने कहा कि संघ वर्षभर में 6 प्रमुख उत्सव मानता है उनमें से मकर संक्रांति का उत्सव प्रमुख है।  उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति का पर्व सामाजिक समरसता का पर्व है। सनातन का गौरवशाली इतिहास रहा है लेकिन देश मे साजिश के तहत सनातन धर्म और इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। हिंदू समाज को जाति धर्म , ऊँच नीच आदि के द्वारा विभाजित करने का कार्य किया गया।  हिन्दू समाज को कमजोर बनाने की साजिश की गई। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति का पावन पर्व का महत्व सनातन में अधिक है। सूर्य का उत्तरायण होना सनातन संस्कृति में शुभ समय का शुभारंभ माना जाता है। यह पर्व हमे सभी मतभेद वर्गभेद को समाप्त कर एकजुट रहने का संदेश देता है। इसलिये हमे इस पर्व पर एकजुट रहने का संकल्प लेना चाहिये। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण एव स्वदेशी अपनाने की बात कही।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ पीपी सिंह ने  15 जनवरी से 15 फरबरी तक होने वाले हिन्दू सम्मेलनों में समस्त हिन्दू परिवारों से सहभागिता करने का आह्वान किया। इस अवसर पर सामूहिक खिचड़ी भोज किया गया।
कार्यक्रम का संचालन जिला प्रचार प्रमुख आशीष सेंगर ने किया।
कार्यक्रम में नगर प्रचारक शिवम , उत्तर प्रदेश दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के सदस्य सागर शर्मा , जिला गौ सेवा प्रमुख देवेंद्र तोमर , प्रान्त उपाध्यक्ष किसान संघ अनिल गुप्ता , नगर सह कार्यवाह टिंकू राना , नगर सह संपर्क प्रमुख वीरेंद्र माहौर , मुख्य शिक्षक योगेश पचौरी , शाखा कार्यवाह सुभाष राना , शेखर सिंह परमार,  डॉ राजीव सेंगर  , पीयूष सेंगर ,  नवीन प्रताप सिंह , मनोज अग्निहोत्री, योगेश गुप्ता, विजय कुमार,  भव्य सेंगर  ,प्रिन्स शर्मा,गर्व आदि मौजूद रहे

विराट हिंदू सम्मेलन से दिया एकता का संदेश

Virat Hindu Sammelan, Samrasta Bhoj

हिन्दू सम्मेलन और समरसता भोज का आयोजन

लखनऊ। अलीगंज के सेक्टर-जे स्थित कोठारी बंधु पार्क में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन और समरसता भोज ने हिंदू समाज की एकतासामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में विभिन्न वर्गोंविचारधाराओं और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आए लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। आयोजन का उद्देश्य स्पष्ट रूप से समाज को जोड़नाभेदभाव की दीवारों को तोड़ना और राष्ट्रहित में संगठित होकर आगे बढ़ने का संदेश देना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत समरसता भोज के साथ हुईजिसमें सभी ने एक साथ बैठकर भोजन किया। यह केवल औपचारिकता नहीं थीबल्कि सामाजिक समानता और आपसी भाईचारे का प्रतीक था। आयोजकों ने यह संदेश दिया कि जब समाज एक पंक्ति में बैठकर भोजन कर सकता हैतो वह हर चुनौती का सामना भी एकजुट होकर कर सकता है। इसके बाद सम्मेलन का वैचारिक सत्र प्रारंभ हुआजिसमें राष्ट्रसमाज और संस्कृति को लेकर गंभीर और विचारोत्तेजक वक्तव्य सामने आए।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लखनऊ विभाग के विभाग प्रचारक अनिल ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि हिंदू समाज की सबसे बड़ी ताकत उसका संगठन है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इतिहास साक्षी हैजब-जब समाज संगठित हुआ हैतब-तब भारत ने प्रगति की है और जब समाज बिखरा हैतब चुनौतियाँ बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि संघ व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की अवधारणा पर कार्य करता है और ऐसे विराट हिंदू सम्मेलन समाज को जागृत करने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल अपने अधिकारों की चर्चा तक सीमित न रहेंबल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को भी आत्मसात करें।

इसके पश्चात ज्योतिषाचार्य आचार्य मनोजानंद ने अपने वक्तव्य में सनातन संस्कृति की गहराई और उसकी वैज्ञानिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहींबल्कि जीवन को संतुलित और उद्देश्यपूर्ण ढंग से जीने की संपूर्ण व्यवस्था है। आज समाज में जो भ्रमतनाव और विघटन दिखाई देता हैउसका मूल कारण अपने सांस्कृतिक मूल्यों से दूरी है। उन्होंने कहा कि विराट हिंदू सम्मेलन और समरसता भोज जैसे आयोजन समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने परिवार और समाज में संस्कारों के पुनर्स्थापन पर विशेष बल दिया।

सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर प्रदीप श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में राष्ट्र सुरक्षा और सामाजिक अनुशासन के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं हैबल्कि समाज का हर नागरिक राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रभक्ति को आचरण में उतारने का आह्वान किया।

भारतीय केसरिया वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज कृष्ण श्रीवास्तव ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा कि हिंदू समाज को अब केवल सहनशील नहींबल्कि संगठित और सजग होना होगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के बिना किसी भी प्रकार का राष्ट्रीय उत्थान संभव नहीं है। ऐसे सम्मेलन यह प्रमाणित करते हैं कि हिंदू समाज एकजुट है और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति के पतन के लिए सुनियोजित षड़यंत्र रचे गए। वर्ष 1932 में देश में लगभग सात लाख गुरुकुल थेलेकिन एक साजिश के तहत आज़ादी के बाद भी गुरुकुलों के दमन की संस्कृति को लगातार बढ़ावा दिया गया। परिणामस्वरूप आज पूरे देश में मात्र लगभग चार सौ गुरुकुल ही शेष रह गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि आज़ादी के बाद देश में जिस प्रकार की दमनकारी नीतियाँ अपनाई गईंउनसे हिंदू हितों को लगातार कुचलने का कुचक्र रचा गया। हिंदू समाज की गौरक्षा की परंपरा को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया गयाजिसके चलते गौरक्षा के स्थान पर गौरभक्षण की संस्कृति हावी होती चली गई।

सम्मेलन के दौरान स्वच्छतापर्यावरण संरक्षणशिक्षासेवा कार्ययुवाओं के मार्गदर्शन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे विषयों पर भी गंभीर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि समाज को केवल भाषणों से नहींबल्कि निरंतर जमीनी कार्यों से मजबूत किया जा सकता है। यह भी स्पष्ट किया गया कि यह आयोजन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहींबल्कि समाज और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर किया गया। सम्मेलन में आचार्य नमेश ने कहा कि हिंदू मां भारती की आत्मा हैं।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी उपस्थित लोगों ने हिंदू समाज की एकतासामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। कोठारी बंधु पार्क में आयोजित यह विराट हिंदू सम्मेलन और समरसता भोज सामाजिक चेतना को नई दिशा देने वाला आयोजन सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम में सोनेलाल श्रीवास्तवडॉपीएनशर्मानीरज गुप्ताराजेन्द्र श्रीबदरूलालसच्चिदानन्द श्रीवास्तवआशा बदरूदुर्गेश मिश्रअनुराग श्रीवास्तवअजय सिंहनन्दन उपाध्यायडॉअनिल दीक्षितराष्ट्रेश्वर मिश्ररामलालअमित कुमार अग्रवालविशाल श्रीवास्तवपवन श्रीवास्तवदेवी प्रसाद सिंहसंजीवन गुप्ताप्रदीपशरतरामसेवक गौड़ सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

राघवेंद्र सिंह बने मथुरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष 

Mathura Bar Association President Raghvendra Singh

राघवेंद सिंह बने मथुरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष

मथुरा। बार एसोसिएशन के चुनाव में  राघवेंद्र सिंह अध्यक्ष चुने गए।
 राघवेंद्र सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी त्रिलोक चंद्र शर्मा को 111 मतों से हराया। राघवेंद्र सिंह को 1171 मत मिले वहीं त्रिलोक चंद्र शर्मा को 1060 मत मिले। इसके अलावा अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले कृष्ण कुमार चौधरी को 44, राजकुमार उपाध्याय को 785 जबकि प्रहलाद सिंह तरकर को 241 वोट मिले।
बार एसोसिशन के अध्यक्ष बनने पर राघवेंद्र सिंह को उनके समर्थकों ने फूल माला पहनाकर स्वागत किया।

लखनऊ में राष्ट्र सेविका समिति का भव्य पथ संचलन: महिला जागृति और राष्ट्र निर्माण का संदेश

Rashtra Sevika Samiti Path Sanchalan

राजधानी में पथ संचालन करतीं राष्ट्र सेविका शांति की स्वयंसेविकाएं

लखनऊ, 18 जनवरी 2026: आज राष्ट्र सेविका समिति के लखनऊ महानगर द्वारा आयोजित भव्य पथ संचलन में हजारों सेविकाओं ने अनुशासित और उत्साहपूर्ण ढंग से भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में महिला जागृति लाना तथा राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में महिलाओं की सक्रिय एवं निर्णायक भूमिका स्थापित करना रहा।

पथ संचलन में मुख्य अतिथि के रूप में वीणा सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशेष रूप से अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख सीता की शुभ उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर का महत्व प्रदान किया।

उनके साथ महानगर प्रांत संचालिका रत्नम , प्रांत निधि प्रमुख मिथिलेश ,प्रांत व्यवस्था प्रमुख अरुणा सिंह और पूर्व क्षेत्र उत्तर प्रदेश की क्षेत्र प्रचारिका माननीया शशी भी उपस्थित रहीं।

इस अवसर पर लखनऊ नगर निगम की महापौर माननीया सुषमा खर्कवाल जी ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति देकर कार्यक्रम को गौरवान्वित किया।

राष्ट्र सेविका समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह पथ संचलन केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय नारी की शक्ति, संगठन और राष्ट्रभक्ति का जीवंत संदेश है। सेविकाओं ने एक समान गणवेश में कदमताल करते हुए शहर के प्रमुख मार्गों पर राष्ट्र निर्माण का मंत्र गूंजाया।

लखनऊवासियों ने पुष्पवर्षा और जोरदार तालियों के साथ सेविकाओं का उत्साहवर्धन किया।

राष्ट्र सेविका समिति निरंतर ऐसी गतिविधियों के माध्यम से समाज को जागृत कर रही है और भारतीय महिला को राष्ट्र निर्माण की मुख्य शक्ति के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिए हुए है।

एटा महोत्सव की हरियाणवी नाइट में मीडिया को कवरेज से रोका गया, पंडाल में हंगामा व तोड़फोड़ से अव्यवस्था हुई उजागर

एटा 18 जनवरी उप्रससे। शहर के सैनिक पढ़ाव मैदान में आयोजित एटा महोत्सव उस समय सुर्खियों में आ गया, जब शनिवार की देर रात को हरियाणवी नाइट के दौरान एक तरफ मीडिया कर्मियों को कवरेज से रोका गया, तो दूसरी ओर पंडाल के भीतर खुलेआम हंगामा और तोड़फोड़ देखने को मिली। महोत्सव की चमक-दमक के बीच अव्यवस्था की यह तस्वीर प्रशासन के दावों की पोल खोलती नजर आई।

हरियाणवी नाइट की प्रदर्शनी पंडाल में कवरेज के लिए पहुंचे प्रिंट मीडिया के पत्रकारों को पुलिस ने गेट पर ही रोक दिया। प्रेस कार्ड, कैमरा और नोटपैड होने के बावजूद पत्रकारों को अंदर जाने नहीं दिया गया, जिससे मौके पर तनाव फैल गया। आक्रोशित मीडिया कर्मियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन एक ओर प्रचार के लिए मीडिया का सहारा लेता है, लेकिन मौके पर पुलिस उन्हें बाहरी समझकर व्यवहार कर रही है।

मामला बढ़ने पर पत्रकारों ने प्रदर्शनी अध्यक्ष से सवाल किया कि जब रसूखदार और बिना पहचान पत्र वाले लोग वीआईपी क्षेत्रों में बेरोकटोक घूम रहे हैं, तो मीडिया को क्यों रोका जा रहा है। मीडिया कर्मियों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए पुलिस व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की। बाद में एसपी सिटी श्वेताभ पांडेय के हस्तक्षेप से स्थिति कुछ शांत हुई और रोके गए पत्रकारों को पंडाल में प्रवेश मिला।
इधर पंडाल के अंदर कार्यक्रम के लिए प्रारंभ में ही हालात और भी बेकाबू नजर आए। मशहूर हरियाणवी गायिका रुचिका जांगिड़ के कार्यक्रम के दौरान भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया। कुर्सियां तोड़ी गईं, लोग पंडाल के खंभों पर चढ़कर बैठते दिखे और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था के दावे इस हंगामे के आगे कमजोर पड़ते दिखे। हालांकि पुलिस दो उपद्रवियों को मौके से पकड़े जाने का दावा कर रही है। कुल मिलाकर एटा महोत्सव में एक ओर मीडिया के साथ टकराव और दूसरी ओर बेकाबू भीड़ का हंगामा प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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