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अपमानजनक बयान पर खरगे के खिलाफ RSS ने थाने में शिकायत दर्ज कराई

April 8, 2026

अपमानजनक बयान पर खरगे के खिलाफ RSS ने थाने में शिकायत दर्ज कराई

गोवाहाटी, 08 अप्रैल 2026, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दक्षिण असम में आयोजित चुनावी रैली के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ दिए गए अपमानजनक, उकसावेपूर्ण एवं साम्प्रदायिक बयान पर संघ (आरएसएस) की उत्तर असम प्रांत एवं दक्षिण असम प्रांत इकाइयों ने कार्रवाई की मांग करते हुए क्रमशः दिसपुर पुलिस थाना तथा सिलचर पुलिस थाना में औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायतों के अनुसार, कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने श्रीभूमि जिले के करीमगंज दक्षिण विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नीलामबाजार में आयोजित चुनावी सभा में सोमवार को विवादास्पद टिप्पणी की। उन्होंने आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा की तुलना “ज़हरीले साँप” से करते हुए उसे समाप्त किए जाने का आह्वान किया।

खड़गे ने कहा – “यदि आप नमाज़ अदा कर रहे हों और आपके सामने एक ज़हरीला साँप आ जाए, तो आपको नमाज़ रोककर पहले उस साँप को मारने के लिए दौड़ना चाहिए – क़ुरान यही सिखाती है। मैं कहता हूँ कि आरएसएस और भाजपा उसी ज़हरीले साँप की तरह हैं; यदि आप आरएसएस और भाजपा जैसे ज़हरीले साँप को समाप्त नहीं करेंगे, तो आप जीवित नहीं रह पाएंगे।”

RSS ने इस प्रकार के वक्तव्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियाँ चुनावी अभियान के दौरान धार्मिक भावनाओं का उपयोग करते हुए आरएसएस एवं भाजपा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के विरुद्ध शत्रुता, भय तथा हिंसा को उकसा सकती हैं।

शिकायतों में कहा गया है कि यह बयान जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 83 के अंतर्गत भ्रष्ट चुनावी आचरण की श्रेणी में आता है। इससे जनता को आपराधिक रूप से भयभीत करने और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक समूहों के समर्थकों के बीच वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया है। आरएसएस एवं भाजपा की विचारधारा को “ज़हरीला” बताना तथा उनके उन्मूलन की बात करना संगठन के सदस्यों एवं समर्थकों को शारीरिक क्षति पहुँचाने के लिए उकसाने के रूप में देखा जा सकता है।

यह बयान हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच साम्प्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने का प्रयास प्रतीत होता है, जिससे असम में सार्वजनिक शांति एवं सौहार्द प्रभावित हो सकता है तथा चुनावी वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शिकायतों में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इस प्रकार के वक्तव्य साम्प्रदायिक तनाव या टकराव का कारण बन सकते हैं।

संघ ने बल देकर कहा है कि लोकतांत्रिक संवाद संवैधानिक एवं विधिक मर्यादाओं के भीतर रहना चाहिए तथा चुनावी राजनीति में ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए जो सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक शांति को खतरे में डाले।

शिकायतें निम्नलिखित पदाधिकारियों ने प्रस्तुत की —

1. खगेन सैकिया, प्रांत कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उत्तर असम प्रांत, गुवाहाटी (दिसपुर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज)

2. ज्योत्स्नामय चक्रवर्ती, प्रांत संघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दक्षिण असम प्रांत, सिलचर (सिलचर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज)

April 7, 2026

पीएमओ के नाम पर ठगी, दो पत्रकार गिरफ्तार

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Posted on 07.04.2026 Tuesday Time 09.22 PM, Mumbai

पीएम मोदी के ‘फर्जी’ हस्ताक्षर से 4 लाख की रंगदारी; प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नाम पर ठगी करने वाले दो ‘पत्रकार’ गिरफ्तार

मुंबई 07 अप्रैल 2026 । मुंबई पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल (जबरन वसूली विरोधी प्रकोष्ठ) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर वाले फर्जी पत्र का इस्तेमाल करके 4 लाख फिरौती मांगने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान टारगेट मीडिया से जुड़े तौसीफ हुसैन इस्माइल पटेल (44) और सिद्धिनाथ दीनानाथ पांडे उर्फ ​​सुनील (43) के रूप में हुई है। दोनों आरोपी शास्त्री नगर, गोरेगांव (पश्चिम) के निवासी हैं। शिकायत के अनुसार, पीड़िता “मेगा श्रेया” नामक एक गैर सरकारी संगठन चलाती हैं, जो 2020 से वंचित बच्चों, वृद्धाश्रमों और अनाथालयों के लिए सामाजिक कार्य कर रहा है।

शिकायतकर्ता की मुलाकात तौसीफ पटेल और उसके सहयोगी फरनाज वाडिया से 2022 में एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान हुई। दोनों ने खुद को पत्रकार बताया और व्हाट्सएप के जरिए शिकायतकर्ता के सामाजिक कार्यों के बारे में जानकारी साझा करते हुए संपर्क में रहे। 18 मार्च को पटेल ने कथित तौर पर व्हाट्सएप पर एक वॉयस नोट भेजा, जिसमें पैसे के बदले प्रधानमंत्री कार्यालय से जन्मदिन की बधाई का पत्र भेजने की पेशकश की गई थी। शिकायतकर्ता ने शुरू में इस दावे को फर्जी बताकर खारिज कर दिया। हालांकि, आरोपियों ने पत्र को असली बताते हुए 4 लाख रुपये जनसंपर्क शुल्क की मांग की। इसके बाद, 28 मार्च को फरनाज वाडिया ने प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर वाला एक पत्र की डिजिटल प्रति भेजी, जो शिकायतकर्ता को संबोधित था और उसके सामाजिक कार्यों की प्रशंसा करता था। शिकायतकर्ता ने शुरू में पत्र को सोशल मीडिया पर साझा किया, लेकिन सहकर्मियों द्वारा इसकी प्रामाणिकता पर संदेह जताए जाने के बाद इसे हटा दिया। आरोपी ने कथित तौर पर अपनी मांगों को तेज कर दिया और फर्जी संदेश को विश्वसनीयता प्रदान करने के लिए शिकायतकर्ता के नाम से एक फर्जी ईमेल आईडी बनाई। शिकायतकर्ता ने आरोपियों को वर्ली के एक कैफे में बुलाया.

यहां आरोपियों ने दावा किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय में उनके संपर्क हैं और उन्होंने एक “असली” पत्र के बदले में 4 लाख रुपये की मांग दोहराई। लगातार दबाव और धमकियों के बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जबरन वसूली विरोधी प्रकोष्ठ ने वर्ली सी फेस स्थित एक होटल में जाल बिछाया, जहां आरोपियों को शिकायकर्ता से पैसे लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से प्रधानमंत्री द्वारा कथित तौर पर हस्ताक्षरित एक फर्जी जन्मदिन का बधाई पत्र, खिलौने वाले नोटों के बंडल, दो असली 500 रुपये के नोट और अपराध में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन बरामद किए।

इसके बाद आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और आईटी अधिनियम की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में एफआईआर वर्ली पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी और बाद में जांच के लिए जबरन वसूली विरोधी प्रकोष्ठ को स्थानांतरित कर दी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तकनीकी जांच की और वर्ली इलाके में जाल बिछाया, जहां आरोपियों को रंगे हाथों जबरन वसूली की रकम लेते हुए पकड़ा गया। पुलिस को अन्य आरोपियों की संलिप्तता का संदेह है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री के जाली हस्ताक्षर और लेटरहेड के स्रोत, फर्जी दस्तावेज बनाने में इस्तेमाल किए गए डिजिटल उपकरण सहित पहले भी इस तरह की धोखाधड़ी समेत अन्य बिंदुओं पर जांच कर रही है।

April 6, 2026

दक्षिण भारत के हजारों लोगों ने ली मूल गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण की शपथ

चिन्ना जीयर स्वामी बोले, प्राकट्य स्थल पर मंदिर बनना ही चाहिए
हमारे पास ठोस साक्ष्य, सभी के सहयोग से जीतेंगे मुकदमा: महेंद्र प्रताप
दक्षिण भारत में विस्तार लेने लगा श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का आंदोलन
वृंदावन (मथुरा): वृंदावन धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रविवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण को लेकर माहौल भावनात्मक हो गया। कथा स्थल पर दक्षिण भारत से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मूल गर्भगृह स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर निर्माण कराने की शपथ ली।
हैदराबाद स्थित स्टैच्यू ऑफ इक्वेल्टी  आश्रम के आध्यात्मिक गुरु श्रीमन्नारायण रामानुज चिन्ना जीयर स्वामी के सान्निध्य में एक होटल में आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। इस दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एवं हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने दक्षिण भारत से आए भक्तों को मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद के विवादित स्थल को मुक्त कर वहां मंदिर निर्माण में सहयोग की शपथ दिलाई। इससे पहले उन्होंने श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर को तोड़ने के इतिहास पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उनके पास इस मामले में ठोस साक्ष्य हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि न्यायालय में विजय मिलेगी। उन्होंने कहा कि हिंदुओं का जागा हुआ संकल्प ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि को कब्जा मुक्त कराएगा।
कार्यक्रम के दौरान दक्षिण भारत से आए श्रद्धालुओं ने महेंद्र प्रताप सिंह को अपने यहां आमंत्रित भी किया। भक्तों ने कहा कि वह दक्षिण भारत में भी श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के आंदोलन को बढ़ाने का कार्य तेजी करेंगे। साथ श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर को बार बार तोड़े जाने की जानकारी अपने क्षेत्र के लोगों के साथ में साझा करेंगे। टी. रमेश गुप्ता, मोहन शर्मा, विठ्ठल और पुन्ना गोपाल राव ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब दक्षिण भारत के लोग श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भी भव्य मंदिर निर्माण की उम्मीद लगाए हुए हैं। कहा कि जल्द हैदराबाद में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करेंगे, जिसमें मुख्य अतिथि भी हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट होंगे।
इस अवसर पर स्वामी जी महाराज ने कहा कि यह विषय हिंदुओं की आस्था और अस्मिता से जुड़ा है। जिस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ, वहां मंदिर बनना चाहिए। उन्होंने इस आंदोलन में महेंद्र प्रताप सिंह के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम से पूर्व अतिथियों का स्वागत किया गया। इस मौके पर गोपी स्वामी, मोहन शर्मा, टी. रमेश गुप्ता, एम. एसएसआर वर्मा, बी. रघुनंदन राव, विठ्ठल, पुनर्गोपाल राव, सत्यनारायण राव, मनोज, मनोहर व श्रीमती देवी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

April 3, 2026

Agra कंगना रनौत केस में अदालत में हुई बहस, किसानों संबंधी बयान पर तीखे सवाल

KANGNA RANAUT

16 अप्रैल को आएगा फैसला

आगरा। हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा की सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ दर्ज किसानों के अपमान और राजद्रोह से जुड़े मामले में आज स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए में सुनवाई के दौरान जोरदार बहस हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निर्णय के लिए 16 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित कर दी है।

यह मामला हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से सांसद कंगना रनौत द्वारा किसानों को लेकर दिए गए कथित विवादित बयानों से जुड़ा है। सुनवाई स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में हुई, जहां लगभग ढाई से तीन घंटे तक दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस चली।

वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा, जो स्वयं किसान पृष्ठभूमि से जुड़े हैं, ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 26 अगस्त 2024 को दिए गए बयान में कंगना रनौत ने किसान आंदोलन को लेकर गंभीर और अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। उन्होंने कोर्ट में अपनी खेती से जुड़े दस्तावेज (खसरा-खतौनी) भी प्रस्तुत किए और कहा कि इस बयान से करोड़ों किसानों की भावनाएं आहत हुई हैं।

बादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, दुर्गविजय सिंह भैया, राजवीर सिंह, बीएस फौजदार, विष्णु उपाध्याय, प्रीति कुमारी, राजेंद्र गुप्ता, धीरज, अजय सागर, पवन गौतम सहित कई अधिवक्ताओं ने बहस में हिस्सा लिया। उन्होंने अदालत के समक्ष यह सवाल भी उठाया कि क्या 1947 में मिली आजादी को भीख कहना उचित है और क्या किसान आंदोलन को गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया।

वहीं, कंगना रनौत की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनुसूया चौधरी ने पक्ष रखते हुए कहा कि विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और इंटरव्यू में आंदोलन के दौरान कुछ विवादित घटनाओं का उल्लेख हुआ था, जिनके आधार पर बयान दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान अलगाववादी नारे और कुछ आपराधिक घटनाएं सामने आई थीं।

इस पर वादी पक्ष ने तीखा प्रतिवाद करते हुए कहा कि किसान आंदोलन केवल तीन कृषि कानूनों के विरोध में था और कुछ अलग घटनाओं के आधार पर पूरे आंदोलन को बदनाम करना गलत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन घटनाओं का जिक्र किया जा रहा है, उनमें किसी किसान का नाम या प्रत्यक्ष संबंध सिद्ध नहीं हुआ।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कोर्ट के पूर्व आदेश (16 मार्च 2026) के अनुपालन में कंगना रनौत की ओर से उनकी अधिवक्ता ने 500 रुपये का जुर्माना वादी पक्ष को अदा किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

करीब ढाई घंटे तक चली विस्तृत बहस के बाद अदालत ने दोनों पक्षों को सुनते हुए 16 अप्रैल 2026 को आदेश सुनाने की तिथि तय कर दी।

इस दौरान जिला कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन कुमार शर्मा सहित कई कांग्रेसी कार्यकर्ता भी अदालत परिसर में मौजूद रहे। मामले की अगली सुनवाई अब 16 अप्रैल को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

सपा सांसद ने लोकसभा में उठाया गुलदार के आतंक का मुद्दा

SP MP MORADABAD RUCHI VEERA

मुरादाबाद: गुलदार के आतंक पर लोकसभा में गूंजा मुद्दा, सपा सांसद ने 25 लाख मुआवजे और विशेष टास्क फोर्स की मांग उठाई। मुरादाबाद और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बढ़ते गुलदार (तेंदुआ) के हमलों का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा ने लोकसभा में इस गंभीर समस्या को जोरदार तरीके से उठाते हुए केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने क्षेत्र में लगातार हो रही जनहानि और लोगों में व्याप्त भय का मुद्दा उठाते हुए ठोस कदम उठाने की मांग की।

लोकसभा में बोलते हुए रुचि वीरा ने कहा कि मुरादाबाद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदार का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आम लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय में तेंदुए के हमलों में दर्जनों किसानों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इन घटनाओं के चलते ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग खेतों में जाने तक से डर रहे हैं।

सांसद ने कहा कि यह केवल वन्यजीवों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे-सीधे लोगों की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। उन्होंने सरकार से मांग की कि तेंदुए के हमलों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को कम से कम 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद हो सके।
इसके साथ ही रुचि वीरा ने प्रभावित क्षेत्रों में एक विशेष टास्क फोर्स तैनात करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की मौजूदा व्यवस्था इस समस्या से निपटने में पर्याप्त साबित नहीं हो रही है, इसलिए एक समर्पित और प्रशिक्षित टीम की जरूरत है, जो तेंदुओं की गतिविधियों पर नजर रखे और समय रहते कार्रवाई कर सके।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि लोग वन्यजीवों से बचाव के उपायों को समझ सकें और किसी भी आपात स्थिति में सही कदम उठा सकें। साथ ही, तेंदुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने की व्यवस्था को भी और मजबूत करने पर जोर दिया।

इस मुद्दे के लोकसभा में उठने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र और राज्य सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगी। मुरादाबाद और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी इस पहल को लेकर आशान्वित हैं और चाहते हैं कि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकले।

गौरतलब है कि बीते कुछ समय से मुरादाबाद मंडल के कई गांवों में गुलदार की लगातार बढ़ती गतिविधियों ने लोगों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है। ऐसे में इस मुद्दे का संसद तक पहुंचना इसे और गंभीर बनाता है और अब सभी की नजर सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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