-सीमा रामवीर उपाध्याय
हाथरस। जनपद में बीते दिनों आई तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई गांवों में गेहूं, सरसों, आलू और चना जैसी प्रमुख फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।जिला पंचायत अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सीमा रामवीर उपाध्याय ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर प्रभावित किसानों के लिए तत्काल सर्वे, मुआवजा और विशेष राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने बताया कि 3 अप्रैल को आई आपदा से जनपद के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ी फसलें गिरकर नष्ट हो गईं, जबकि कटाई के बाद रखी फसल भी बारिश में भीगकर खराब हो गई।उन्होंने कहा कि किसानों की महीनों की मेहनत एक ही दिन में खत्म हो गई, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। ऐसे में शीघ्र राहत पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत सर्वे कर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए और किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाए।साथ ही पूरी तरह नष्ट फसल वाले किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज लागू करने और फसल बीमा दावों का शीघ्र निस्तारण करने की भी मांग की गई। उन्होंने भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।इस संबंध में पत्र की प्रतिलिपि कृषि मंत्री, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव कृषि, प्रमुख सचिव राजस्व, मंडलायुक्त अलीगढ़ और जिलाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।
डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
उत्तरप्रदेश समाचार सेवा
प्रतापगढ़, 4 अप्रैल।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से काशी प्रांत के कुटुंब प्रबोधन प्रमुख श्री शुकदेवजी, विभाग प्रचारक श्री ओम प्रकाश जी, और विभाग कुटुंब प्रबोधन प्रमुख श्री रघुवीर जी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि द्वारा प्रतापगढ़ नगर की बेल्हा बस्ती के सरयू प्रसाद धर्मशाला में कुटुम्ब मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बस्ती के सैकड़ो परिवारों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता बोलते हुए प्रांत कुटुंब प्रबोधन प्रमुख श्री शुकदेव जी ने कहा कि भारत जैसी कुटुंब व्यवस्था दुनिया के किसी देश में नहीं है और अब ये विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत है क्योंकि कुटुंब में जोड़ने की ताकत है।
उन्होंने कहा कि मातृशक्ति के बिना भारत न अपने परम वैभव को पा सकता है, न ही विश्व को परम वैभव पर ले जा सकता ,संस्कारों की जड़ है परिवार।
कुटुंब प्रबोधन विभाग प्रमुख श्री रघुवीर जी ने कहा कि भारतीय कुटुंब व्यवस्था हमारी सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक संरचना का आधार है। यह केवल परिवारों का समूह नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और मूल्यों का संगम है। इसमें सभी सदस्य आपसी सहयोग, सम्मान और प्रेम से जुड़े होते हैं। बुजुर्गों का अनुभव और आशीर्वाद, युवाओं की ऊर्जा और बच्चों की मासूमियत मिलकर एक आदर्श परिवार का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि कुटुंब व्यवस्था हमें एकता, सहनशीलता और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाती है। यह न केवल सामाजिक संतुलन बनाए रखती है, बल्कि पीढ़ियों के बीच संस्कारों और ज्ञान का आदान-प्रदान भी सुनिश्चित करती है। भारतीय कुटुंब व्यवस्था, हमारी सांस्कृतिक पहचान की आत्मा है।
ब्रम्हाकुमारी संचालिका बीके दीदी जी, जिला प्रचारक श्री प्रवीण जी, जिला कार्यवाह श्री हेमंत कुमार, भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संयोजक और संचालन शिव सोनी जी किया।
आगरा के चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुई यह सर्जरी
आगरा। आगरा के चिकित्सा इतिहास में आज एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है, जिसने पूरे शहर को गर्व से भर दिया है। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा के सीटीवीएस विभाग ने पहली बार सफलतापूर्वक ओपन हार्ट सर्जरी कर एक 13 वर्षीय किशोर की जान बचा ली।
यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि आगरा के सरकारी चिकित्सा ढांचे की बड़ी छलांग है। अब तक जिस तरह की जटिल और हाई-रिस्क सर्जरी केवल बड़े मेट्रो शहरों या कॉर्पोरेट अस्पतालों में संभव मानी जाती थी, वह अब आगरा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में सफल होकर एक नई उम्मीद बन गई है।
—–बच्चे की जान पर था बड़ा खतरा
जानकारी के अनुसार, 13 वर्षीय किशोर एक बेहद गंभीर और जटिल बीमारी ‘कांस्ट्रिक्टिव पेरिकार्डिटिस’ (Constrictive Pericarditis) से पीड़ित था। इस बीमारी में हृदय के ऊपर मवाद की एक सख्त परत जम जाती है, जिससे दिल सामान्य रूप से फैल और सिकुड़ नहीं पाता। परिणामस्वरूप हृदय की पंपिंग क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो जाती है और मरीज की जान पर खतरा मंडराने लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति में सर्जरी बेहद जोखिमभरी होती है, क्योंकि धड़कते हुए दिल से उस जमी हुई कठोर परत को हटाना तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। अगर थोड़ी भी चूक हो जाए तो स्थिति जानलेवा हो सकती है।
सीटीवीएस विभाग के प्रोफेसर एवं हेड डॉ. अतुल कुमार गुप्ता ने बताया कि यह ऑपरेशन मेडिकल दृष्टि से अत्यंत जटिल था। उन्होंने बताया कि इस तरह की सर्जरी में 50 प्रतिशत तक जान जाने का जोखिम बना रहता है। लेकिन एसएनएमसी की विशेषज्ञ टीम ने अद्भुत समन्वय, तकनीकी दक्षता और साहस का परिचय देते हुए इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
यही वजह है कि इस उपलब्धि को आगरा के चिकित्सा क्षेत्र में ‘मील का पत्थर’ माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए प्रिंसिपल एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने सीटीवीएस विभाग की पूरी टीम को बधाई दी और इसे संस्थान के लिए क्रांतिकारी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि आज हमारे संस्थान ने वह मुकाम हासिल किया है, जो अब तक केवल बड़े मेट्रो शहरों के कॉर्पोरेट अस्पतालों तक सीमित था।
एक 13 साल के बच्चे की जान बचाना हमारे डॉक्टरों की काबिलियत, समर्पण और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हमारा उद्देश्य एस.एन. मेडिकल कॉलेज को सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं का मजबूत केंद्र बनाना है, ताकि आगरा और आसपास के जिलों का कोई भी गरीब मरीज इलाज के अभाव में दिल्ली या जयपुर जाने को मजबूर न हो। प्रशासन की ओर से सीटीवीएस विभाग को अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और हर संभव ‘अनकंडीशनल सपोर्ट’ मिलता रहेगा, ताकि भविष्य में ऐसे और भी जटिल ऑपरेशन यहां निरंतर सफल हो सकें। डॉ. प्रशांत गुप्ता का यह बयान साफ संकेत देता है कि एसएनएमसी अब केवल एक मेडिकल कॉलेज नहीं, बल्कि आगरा की नई सुपर-स्पेशलिटी उम्मीद बनकर उभर रहा है।
इस ऐतिहासिक सर्जरी को सफल बनाने में केवल एक डॉक्टर नहीं, बल्कि कई विशेषज्ञों की समर्पित टीम ने मिलकर काम किया। एनेस्थीसिया टीम के डॉ. दीपक, डॉ. मिहिर का सर्जरी के दौरान मरीज को सुरक्षित रखने और पूरी प्रक्रिया को स्थिर बनाए रखने में विशेष योगदान रहा। इस जटिल ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली टीम में डॉ. अतुल कुमार गुप्ता, डॉ. शिव, डॉ. शुभांशु, डॉ. सुलभ, डॉ. आरती, तकनीशियन सचिन, तकनीशियन मोनू, पोस्ट-ऑपरेटिव केयर टीम शामिल थे।
पहली बार सरकारी एसएन मेडिकल कॉलेज में इतनी जटिल हाई-रिस्क कार्डियक सर्जरी का सफल होना बड़ी बात है।यह सफलता बताती है कि अगर संसाधन, इच्छाशक्ति और विशेषज्ञता साथ हों, तो सरकारी अस्पताल भी चमत्कार कर सकते हैं।
—आगरा के चिकित्सा जगत में नई उम्मीद की किरण
एसएनएमसी की यह पहली सफल ओपन हार्ट सर्जरी सिर्फ एक मेडिकल उपलब्धि नहीं, बल्कि आगरा के लिए भरोसे, आत्मविश्वास और चिकित्सा आत्मनिर्भरता की शुरुआत है। यह सुविधा उन हजारों परिवारों के लिए आशा का संदेश है जो अब तक गंभीर हृदय रोग होने पर बड़े शहरों के चक्कर काटने को मजबूर थे। अब आगरा कह सकता है कि इलाज के बड़े सपने अब अपने शहर में भी पूरे होंगे।
एफआईआर (FIR) के बाद डॉक्टरों पर केस
-IGRS पोर्टल पर शिकायत ने खोली पोल, प्रशासन ने अस्पताल सील किया, मिली भगत से धड़ल्ले से संचालन
शिकायत पर हुईं कार्रवाई
Post on 4.4.26
Saturday Moradabad
Rajesh Bhatia
मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
जिले में स्वास्थ्य नियम तार तार है। आपसी गठजोड़ का नतीजा है कि देहात क्षेत्र में चलते निजी अस्पताल को सील किया गया। लेकिन चोरी छिपे सील हटाकर अस्पताल का संचालन शुरू हो गया। आईजीआरएस IGRS में शिकायत से घपलेबाजी का भंडाफोड़ हुआ। एफआईआर के बाद डाक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
नियमों के उल्लंघन में सील हुए अस्पताल के संचालन का मामला थाना भगतपुर के गांव बिलाकुदान में स्थित टीएनएस अस्पताल से जुड़ा है। अवैध रूप से संचालित अस्पताल की शिकायत IGRS पोर्टल पर की गई थी। बिलारी तहसील के गांव मैनाठेर निवासी नदीम शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया कि अस्पताल बिना अनुमति आधार के संचालित किया जारहा है। इस शिकायत की जांच करते हुए स्वास्थ्य और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने 19 मार्च, 26 को अस्पताल का निरीक्षण किया।अस्पताल का मुआयना करते हुए पाया कि अस्पताल को पहले सील किया गया था। पर इसके बावजूद संचालकों ने सील तोड़कर अस्पताल का दोबारा संचालन शुरू कर दिया।
*उल्लंघन में सील अस्पताल को दोबारा संचालन से उठे सवाल*
इस प्रकरण में बड़ा सवाल यह कि पहले ही सील किया गया। पर संचालकों की हिम्मत यह कि बंद अस्पताल को दोबारा संचालित कर लिया गया। पर पूरी तरह से अवैध कार्यवाही की। भनक विभाग के जिम्मेदारों को नहीं हुई।पर आईजीआरएस पोर्टल में हुईं शिकायत ने गड़बड़झाले की पोल खोल दी।