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एटा में यूजीसी एक्ट के विरोध में भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा

January 29, 2026

एटा में यूजीसी एक्ट के विरोध में भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा

एटा में यूजीसी के विरोध में प्रदर्शन

Published on 29.01.2026, Thursday, 09:45 PM, Report by Anuj Mishra , Etah, UP Samachar Sewa

एटा 29 जनवरी उप्रससे। भारतीय मीडिया फाउंडेशन के पदाधिकारियों और सैकड़ों लोगों ने यूजीसी एक्ट के विरोध में पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन नायब तहसीलदार वाजिद हुसैन को सौंपा।

मेहता पार्क पर एकत्रित हुए प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर पोस्टर थाम रखे थे। उन्होंने कानून को वापस लेने की मांग की। यह प्रदर्शन अनिल सोलंकी के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बुद्धिजीवी और सवर्ण समाज के लोग शामिल थे।

अनिल सोलंकी ने बताया कि इस कानून में सुधार की आवश्यकता है, और यदि सुधार संभव नहीं है तो इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इस कानून के तहत दलित समाज के बच्चों द्वारा सवर्ण समाज के लड़के-लड़कियों पर गलत आरोप लगाकर हरिजन एक्ट का दुरुपयोग किया जा सकता है, जिससे उनकी पढ़ाई और नौकरी प्रभावित होगी।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कानून में झूठी शिकायत करने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा में समानता पर जोर दिया। ज्ञापन के माध्यम से यह भी कहा गया कि यदि कोई सवर्ण या ओबीसी समाज का छात्र/छात्रा दलित बच्चे के साथ भेदभाव का दोषी पाया जाता है। तो उस पर कार्रवाई हो, लेकिन यह कार्रवाई गहन जांच के बाद ही की जाए ताकि निर्दोष लोगों को न फंसाया जा सके। इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में अभिषेक तोमर, संजीव गुप्ता, हीरा पाराशर, गजेंद्र चौहान, रुद्र, रोहित अजीत सिंह, राजीव सोलंकी सहित सैकड़ों समर्थक मौजूद रहे।

एटा पहुंचे बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री

Published on 29.01.2026, Thursday, 09:40 PM, Report by Anuj Mishra , Etah, UP Samachar Sewa 

इस्तीफे के बाद बोले – UGC काला कानून, सरकार सवर्णों को बना रही स्वघोषित अपराधी

Alankar Agnihotri in Etah

एटा पहुंचने पर अलंकार अग्निहोत्री का हुआ भव्य स्वागत

एटा 29 जनवरी उप्रससे। शहर मुख्यालय स्थित शहीद पार्क में अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी कानून को सवर्ण समाज के लिए “काला कानून” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कानून सामान्य वर्ग को स्वघोषित अपराधी बनाने का काम कर रहा है। उनका आरोप था कि इस कानून के तहत बिना ठोस आधार के आरोप लगाए जा सकते हैं और युवाओं को समता समिति के सामने पेश किया जाएगा, जहां फर्जी शिकायतकर्ता भी खड़े किए जा सकते हैं।

यूजीसी कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित अभद्रता के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देने वाले बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री गुरुवार को एटा पहुंचे। शहीद पार्क में उनका सैकड़ों की संख्या में जुटे सवर्ण समाज के लोगों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान यूजीसी कानून के खिलाफ जमकर नारेबाजी होती रही और माहौल पूरी तरह विरोधी स्वर में नजर आया।

उन्होंने कहा, “जब आपके बेटे-बेटियां पढ़ने जाएंगे, तो उन पर निराधार आरोप लग सकते हैं। इस प्रक्रिया में बच्चों का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न तक संभव है। यह कानून सिर्फ एक वर्ग को नहीं, बल्कि समाज के दो वर्गों को आपस में लड़ाकर दोनों का नुकसान करता है।
पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट ने केंद्र और राज्य सरकार के जनप्रतिनिधियों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने उन्हें “अकर्मण्य” बताते हुए कहा कि अधिकतर जनप्रतिनिधियों को कानून की धाराओं की जानकारी तक नहीं होती। उन्होंने कहा, “ये संसद और विधानसभा में जाते हैं, हाथ उठाकर समर्थन कर देते हैं और ताली बजाकर लौट आते हैं। अगर ये एक्ट को पढ़ते, तो अपने समाज के लिए कुछ करते। यूजीसी एक्ट में जो विघटनकारी प्रावधान हैं, उन पर कभी गंभीर चर्चा ही नहीं हुई।

अलंकार अग्निहोत्री ने सवाल उठाया कि 13 तारीख को यह कानून लागू हुआ, लेकिन पूरे देश में इस पर कोई व्यापक बहस क्यों नहीं हुई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी सवाल बताया। राजनीतिक गोद में बैठने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधि कलराज मिश्र ने इस कानून को असंवैधानिक बताया, तो क्या वह भी किसी की गोद में बैठ गए? उन्होंने इसे मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।
अपने खिलाफ इस्तेमाल किए गए अपशब्दों और आरोपों पर उन्होंने कहा कि सबको पता है यह सब किसने किया। उन्होंने दावा किया कि उनके और उनके साथियों के फोन सर्विलांस पर हैं और उन्हें किसी पुराने मामले में फंसाने की साजिश रची जा रही है।
राजनीतिक पार्टी बनाने के सवाल पर उन्होंने साफ इनकार करते हुए कहा, “साला पंडित पागल- सवाल में ही मेरा जवाब छुपा है।”
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज के विभिन्न संगठनों से बातचीत चल रही है और इस कानून के विरोध में जल्द ही नई रणनीति बनाई जाएगी।

शहीद पार्क में मौजूद लोगों में खासा उत्साह और आक्रोश देखने को मिला। मंच से लगातार कानून वापस लेने की मांग उठती रही। कार्यक्रम के दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात रहा, लेकिन सभा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। इस्तीफे के बाद एक प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह खुलकर सड़क पर उतरना और सरकार व कानून पर सीधे सवाल उठाना एटा की इस सभा को सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि आने वाले दिनों के बड़े आंदोलन की भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।

January 28, 2026

एटा में बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद, जनजीवन अस्त-व्यस्त

 

एटा 28 जनवरी उप्रससे। जनपद में रुक-रुक कर हो रही लगातार बारिश ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। ग्रामीण और किसान इस बेमौसम बरसात से खासी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।

बारिश के कारण किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। आलू की फसलें खराब हो गई हैं, जबकि पकी हुई सरसों और तंबाकू की फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हो गईं हैं।

गांव तिसोरी निवासी किसान सुजल मिश्रा ने बताया कि उनकी आलू और गेहूं की फसल को इस बारिश से काफी क्षति हुई है। वहीं किसान आयुष मिश्रा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार बारिश में भीगने से उनके मवेशी, जैसे गाय और भैंस, बीमार पड़ सकते हैं।

हिमांशु मिश्रा ने बताया कि 18,19 घंटे से हो रही बारिश और लगातार खराब मौसम के कारण लोगों में चिंता बढ़ गई है। बे मौसम बारिश ने किसानों की फसलों को काफी प्रभावित कर दिया है। काफी छोटे किसान ऐसे हैं जो अपनी लागात भी नहीं निकाल सकते।

January 27, 2026

एटा में सवर्ण समाज ने यूजीसी कानून के विरोध में सड़क पर पैदल मार्च कर उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा

एटा 27 जनवरी उप्रससे। जनपद में सवर्ण समाज के सैकड़ों लोगों ने यूजीसी कानून के विरोध में प्रदर्शन करते हुए शहीद पार्क से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला और उपजिलाधिकारी सतीश कुमार को राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के नाम एक लिखित ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने कानून वापस लेने की मांग की।

यूजीसी विरोध में रैली

यूजीसी के विरोध में दिया ज्ञापन

यह प्रदर्शन अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह चौहान, मनोज पचौरी और करणी सेना के पदाधिकारियों के संयुक्त नेतृत्व में किया गया। सैकड़ों की संख्या में सवर्ण समाज के लोग शहीद पार्क से कलेक्ट्रेट तक पहुंचे, जहां उन्होंने सरकार विरोधी नारे लगाए। युवाओं ने हाथों में ‘यूजीसी एक्ट बायकॉट’ के पोस्टर थाम रखे थे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि कानून वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि सरकार ने यह कानून बनाकर सवर्ण समाज के बच्चों को ‘स्वघोषित अपराधी’ बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सवर्ण समाज को कुचलने का काम कर रही है। चौहान ने मांग की कि इस कानून को वापस लिया जाए या इसमें संशोधन किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कानून संशोधन समिति में सवर्ण समाज के लोगों को शामिल किया जाए और सवर्ण अभ्यर्थियों के लिए अलग शैक्षणिक संस्थान बनाए जाएं।

January 20, 2026

एटा में चार हत्याओं का कातिल निकला दबा कारोबारी बेटा, 5 साल के मासूम ने दी 4 चिताओं को मुखाग्नि

Kotwali Etah

पुलिस की गिरफ्त में चार हत्याओं का आरोपित

एटा 20 जनवरी उप्रससे। कोतवाली नगर क्षेत्र में दवा कारोबारी बेटा ही अपने मां-बाप, पत्नी और बेटी का कातिल निकला है। पुलिस ने मंगलवार को 24 घंटे के भीतर हत्याकांड का खुलासा कर दिया।

 

अलीगढ़ रेंज के DIG प्रभाकर चौधरी ने बताया- कमल सिंह शाक्य ने ही पिता, मां, पत्नी और छोटी बेटी की बेरहमी से हत्या की थी। बेटी की शादी अगले महीने 11 फरवरी को तय थी। शादी चंडीगढ़ में अनुराग सक्सेना से होनी थी। शादी के लिए चार लाख का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। पत्नी कमल सिंह को ताना मारती थी। इसी बात को लेकर सोमवार दोपहर कमल का पत्नी से झगड़ा हुआ था। गुस्से में उसने पहले पत्नी की हत्या की। बाद में माता-पिता और बड़ी बेटी को भी मार दिया। कमल खुद को भी खत्म करना चाहता था।

 

हत्याकांड का खुलासा करते हुए डीआईजी अलीगढ़ प्रभाकर चौधरी ने पुलिस लाइन में अहम 4 बातें बताईं-

1- कमल सिंह ने पिता डॉ. गंगा सिंह शाक्य, मां श्यामा देवी, पत्नी रत्ना देवी और बेटी ज्योति की ईंट से कुचल कर हत्या की थी।

2-बेटी ज्योति शाक्य का चंडीगढ़ में नौकरी करने वाले अनुराग सक्सेना से अफेयर था। वह इंटरकास्ट मैरिज करना चाहती थी।

3- कमल इंटरकास्ट मैरिज के लिए तैयार था। 11 फरवरी को शादी होनी थी। लेकिन कमल 4 लाख रुपए जुटा नहीं पा रहा था।

4- पत्नी रत्ना उसे 4 लाख रुपए जुटा न पाने के लिए ताना मारती थी। झगड़े में वह आपा खो बैठा और हत्याएं कर दीं।

 

 

CCTV फुटेज से खुला राज

 

कमल सिंह शाक्य सोमवार दोपहर खाना खाने घर आया था। CCTV फुटेज के अनुसार, दिन के 12.40 पर आरोपी कमल सिंह शाक्य घर में गया और 1.55 पर घर से बाहर निकला। इसी बीच आरोपी ने हत्या को अंजाम दिया। पहले पत्नी, फिर बेटी, फिर मां और आखिर में पिता को मारा। पिता को सबूत छिपाने के लिए मारा। परिवार के मुखिया गंगा सिंह पिछले दो वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था।

 

डीआईजी ने बताया- CCTV, CDR, मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर कमल सिंह की गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने कहा कि इसमें 80 फीसदी साक्ष्य साइंटिफिक एवीडेंस के थे। हत्या के बाद आरोपी कमल सिंह ने घर में खून के छींटे धोए और मेडिकल स्टोर पर चला गया। आरोपी खुद को भी खत्म करना चाह रहा था, लेकिन तभी उसकी बड़ी बेटी लक्ष्मी का फोन आ गया और उसने उनको बुला लिया। आगे की जांच के लिए 4 सदस्यों की टीम गठित की गयी है। जिसमें सीओ सिटी शामिल हैं।

 

पुलिस सुरक्षा के बीच चारों शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। जहां 5 साल के देवांश ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। मासूम देवांश ने अपने दादा-दादी, मां और बड़ी बहन के शवों को मुखाग्नि दी।

 

तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमॉर्टम, सिर-चेहरे कुचलकर हत्या की पुष्टि

 

तीन डॉक्टरों के पैनल ने चारों शवों का पोस्टमॉर्टम किया। इनमें डॉ. राजीव किशोर, डॉ. उत्सव जैन और डॉ. श्वेता राजपूत शामिल थे।

 

डॉक्टरों ने बताया कि हमलावरों ने पहले पत्नी रत्ना देवी की हत्या की। इसके बाद बेटी ज्योति को बेरहमी से मारा गया। जब बुजुर्ग मां श्यामा देवी बीच-बचाव के लिए आईं, तो उन पर भी सिलसिलेवार हमले किए गए और उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया गया। तीनों महिलाओं के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान मिले।

 

 

कमल सिंह करता रहा पुलिस को गुमराह

 

आरोपी कमल सिंह चार हत्याएं करने के बाद पुलिस को गुमराह करता रहा। उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उसने बताया था- दोपहर एक बजे के आसपास मैं अपने मेडिकल स्टोर से खाना खाने घर आया था। दुकान पर बड़ी बेटी लक्ष्मी को बिठाकर आया था। उस समय घर पर सबकुछ ठीक था। सभी लोग घर पर थे। खाना खाने के बाद मैं मेडिकल स्टोर चला गया। वहां से मार्केट चला गया। मेरा बेटा स्कूल से लौटा तो कमरे में पंखा चल रहा था। उसने बरामदे में अपने शूज उतारे और कहने लगा कि ठंड में पंखा कौन चला रहा है। जब कोई जवाब नहीं मिला तो अंदर जाकर देखा। अंदर का मंजर देख उसकी चीख निकल पड़ी। उसने शोर मचाकर लोगों को बुलाया तब हत्याकांड का पता चला।

 

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