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प्रदेश के विकास का एक्सप्रेस वे बनेगा गंगा एक्सप्रेस वे मृत्युंजय दीक्षित

April 29, 2026

प्रदेश के विकास का एक्सप्रेस वे बनेगा गंगा एक्सप्रेस वे मृत्युंजय दीक्षित

Mratunjay Dixit, Journalist lucknow

मृत्युंजय दीक्षित
उत्तर प्रदेश में अवस्थापना विकास के क्रम में निर्मित गंगा एक्सप्रेस वे आम जनमानस के लिए खुल रहा है जिसे प्रदेश के विकास में मील का पत्थर माना जा रहा है। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस वे प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र (दिल्ली -एनसीआर) को पूर्वी क्षेत्र से जोड़ने वाला पहला सीधा हाई स्पीड एक्सप्रेस वे है। इस परियोजना पर 36,230 करोड़ की लागत आर्इ है। यह एक्सप्रेस वे मेरठ के बिजौली गाँव से प्रारंभ होकर बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, शाहजहांपुर, संभल, बंदायू, उन्नाव, हरदोई, प्रतापगढ़, रायबरेली होते हुए प्रयागराज जिले के जुडापुर दांदू गांव तक जाएगा। इस एक्सप्रेस वे के प्रारंभ हो जाने के बाद देश के एक्सप्रेस वे नेटवर्क में यूपी की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत हो जाएगी और परियोजनाओं की कुल लंबाई 1910 किमी हो जाएगी। छह लेन का यह एक्सप्रेस वे पूरी तरह ग्रीनफील्ड व एक्सेस -कंट्रोल्ड है। इसमें 3.75 मीटर चौड़ी सर्विस रोड, 17 टोल प्लाजा 8 मुख्य पुल और 381 अंडरपास शामिल हैं।
यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेस है जिस पर होटल, ढाबा और ईवी चार्जिंग स्टेशन से लेकर अस्पताल तक बनाए गए हैं। इस एक्सप्रेस वे पर विश्वस्तरीय फूड चेन और मोटेल तक की सुविधाएं मिलेगी। 594 किमी लंबे इस एक्सप्रेस वे का 80 प्रतिशत निर्माण अडानी इंटरप्राइजेज ने किया है।अडानी ने प्रयागराज से बदायूं तक 464 किमी लंबा एक्सप्रेस वे बनाया है जबकि शेष 20 प्रतिशत आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर ने बनाया है।
एक्सप्रेस वे मतल्टीनेशनल चेन भी उपलब्ध – एक्सप्रेस वे पर लखनऊ के खानपान और चिकनकारी की झलक दिखाई पड़ेगी। इस वे पर एक बड़ा डाइनिंग फूड एरिया विकसित किया गया है। पहली बार किसी एक्सप्रेस वे पर ट्रक लेन बनाया गया है। मोटेल भी तैयार हो गया है जहां विश्राम के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कमरे उपलब्ध हैं। स्टारबक्स जैसे बड़े ब्रांड के साथ गंगा भोग ढाबा भी है। इसमें लोकप्रिय मुरथल ढाबे को लाने का भी प्रयास चल रहा है। यहां पर एक ट्रामा सेन्टर भी तैयार किया गया है।एक्सप्रेस वे पर सुविधा केंद्रों में बच्चों के लिए चिल्ड्रन प्ले एरिया भी बनाया गया है जहां बच्चों के खेलने के लिए झूला पार्क भी बनाया गया है।ड्राइवरों के लिए भी अलग- अलग विश्राम एरिया बनाया गया है।हर क्षेत्र में वाहनों के लिए सर्विस सेंटर बनाया गया है।यह एक्सप्रेस वे 12 जिलों को जोड़ते हुए प्रयागराज से मेरठ की दूरी मात्र 6 घंटे में समेट देगा। वाहनों की 120 किमी प्रति घंटा गति, एयर स्ट्रिप, हाईटेक टेाल और दुर्घटना रोकने वाली अलर्ट स्ट्रिप्स जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस यह एक्सप्रेस वे प्रदेश की कनेक्टिविटी के परिदृश्य को बदलकर रख देगा।
वायुसेना के लिए भी अहम बनेगा एक्सप्रेस वे – यह एक्सप्रेस वे नागरिकों का सफर आसान बनाने के साथ ही भारतीय वायुसेना की ताकत भी बनने वाला है। एक्सप्रेस वे पर शाहजहांपुर के जलालाबाद में 3.5 किमी की हवाई पट्टी का भी निर्माण किया गया है। आपातकालीन स्थिति व युद्ध होने पर रणनीतिक तौर पर यह हवाई पट्टी लड़ाकू विमानों के उतरने व उड़ान भरने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकेगी। इस हवाई पट्टी का निर्माण सभी प्रकार के लड़ाकू व परिवहन विमानों के हिसाब से किया गया है। इस पर राफेल सुखोई -0 एमकेआई मिराज 2000 जगुआर और मिग 29 जैसे लडाकू और सी -130 जे सुपर हरक्यूलिस और एएन -32 जैसे वायुसेना के विमान उतरने के साथ-साथ उड़ान भी भर सकेंगे। इस पर रात में भी लड़ाकू विमानो के उतरने और उड़ान भरने की सुविधा होगी। इसके लिए एक्सप्रेस वे पर प्रीसिज़न अप्रोच लाइंटिंग सिस्टम व उन्नत नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही इाई इंटेसिटी रनवे लाइटिंग का उपयोग किया गया है। हवाई पट्टी की सुरक्षा के लिए 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जो किसी भी आपातकालीन स्थिति पर नज़र रखने के लिए सहायक हैं।
इस एक्सप्रेस वे का संचालन पूरी तरह आरम्भ हो जाने के बाद 12 जिलों के औद्योगिक विकास को गति मिलेगी जिससे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे तथा पलायन कम होगा। प्रदेश सरकार की योजना इसके किनारे 27 औद्योगिक क्लस्टर बनाने की है जिसके लिए भूमि का अधिग्रहण हो चुका है और आवंटन चल रहा है।इससे रसद आपूर्ति, खाद्य प्रसंस्करण वस्त्र उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी। मेरठ के खेल उद्योग, हापुड़ के हथकरघा, बंदायू के जरी जरदोजी और प्रयागराज के कृषि उत्पादों को अब दिल्ली और पूर्वांचल के बाजारो तक पहुंचना आसान होगा।
प्रमुख विशेषताएं – इस एक्सप्रेस वे की पूरी सड़क पर जल संचयन प्रणाली लगाई गई है ताकि वर्षा का जल सीधे जमीन के अंदर जाए और भूजल स्तर पर बना रहे। यह भारत का सबसे लंबा निरंतर नियंत्रित प्रवेश एक्सप्रेस वे है जहां आवारा पशुओं व स्थानीय यातायत के अनियंत्रित प्रवेश को पूरी तरह से रोका गया है। यह परियोजना टिकाऊ इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसके निर्माण में भारी मात्रा में कोयले की राख का उपयोग किया गया है जो प्रदूषणा कम करने में सहायक है। पहले सभ्यताएं नदियों के किनारे बसती थीं किंतु अब एक्सप्रेस वे के किनारे होती हैं इसे ध्यान मे रखते हुए एक्सप्रेस वे किनारे 18 लाख से अधिक पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। गंगा एक्सप्रेस वे के निर्माण की गुणवत्ता को एक्सीलेंट रेटिंग मिली है ।
विशिष्ट सुरक्षा तकनीक भी – यहां पर विशिष्ट सुरक्षा तकनीक का प्रयोग किया गया है। सड़क के दोनों किनारों पर व्हाइट एलर्ट स्ट्रिप लगाई गई है। यदि किसी चालक को झपकी आ जाए और वाहन इन स्ट्रिप पर चढ़ जाए तो तेज कंपन और आवाज पैदा होगी जिससे चालक तुरंत सतर्क हो जाएगा और दुर्घटना टल जाएगी। इस सड़क पर चलने के दौरान झटके और कंपन महसूस नही होंगे।
मंदिर आर्थिकी व पर्यटन को गति मिलेगी – गंगा एक्सप्रेस वे का निर्माण हो जाने के बाद अब मंदिर आधारित आर्थिकी व पर्यटन को भी गति मिलेगी। यह एक्सप्रेस वे यात्रा को ही आसान नहीं करेगा अपितु प्रदेश में आध्यात्मिक व धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा । 12 जिलों से होकर गुजरने वाले इस एक्सप्रेस वे से प्रमुख आध्यात्मिक व धार्मिक स्थल जुड़ रहे हैं – इनमें गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिकादेवी शक्ति पीठ और त्रिवेणी संगम शामिल हैं। एक्सप्रेस वे शुरू हो जाने के बाद श्रद्धालु इन तीर्थों के दर्शन आसानी से कर सकेंगे । आगामी समय में वाराणसी, मिर्जापुर और सोनभद्र तक इसका विस्तार किया जिससे वाराणसी , विन्ध्याचल और अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी।

बिजनौर में शिक्षा प्रेरकों ने बकाया की मांग को लेकर धरना दिया

किरतपुर 29 अप्रैल।साक्षर भारत मिशन के तहत संविदा पर प्रत्येक ग्राम सभा में रखे गए जनपद बिजनौर के शिक्षा प्रेरकों ने बकाया मानदेय के भुगतान के लिए आज खंड शिक्षा अधिकारी किरतपुर के कार्यलय में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। धरना स्थल पर पहुंचे उप सचिव – साक्षर भारत मिशन /खंड शिक्षा अधिकारी किरतपुर एवं खंड विकास अधिकारी किरतपुर को अपने बकाया मानदेय भुगतान संबंधित दो सूत्रीय मांग पत्र दिया।

धरना स्थल पर एकत्र हुए विकास खंड किरतपुर के शिक्षा प्रेरको ने सरकार पर प्रेरकों को बेरोजगार करने और उनका लगभग 18 महीने का मानदेय न देने का आरोप लगाते हुए शिक्षा प्रेरकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। तथा कहा कि साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषा विभाग भारत सरकार द्वारा वर्ष 2009 -10 में पूरे प्रदेश में साक्षर भारत मिशन योजना लागू करके प्रत्येक ग्राम सभा पर एक महिला एवं एक पुरुष प्रेरक को तैनात करके 15 वर्ष से ऊपर की उम्र के लोगों को साक्षर बनाने के लिए प्रेरित करने का कार्य दिया था। लेकिन सरकार ने जनपद बिजनौर के लगभग 2250 प्रेरको के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए साक्षर भारत मिशन योजना को 31 मार्च 2018 को बंद कर दिया था। सरकार द्वारा प्रेरकों से बीएलओ से लेकर हाउसहोल्ड सर्वे और अन्य सरकारी योजनाओं में भी काम लिया गया था। इन सब के बावजूद भी अकेले जनपद बिजनौर के लगभग 2250 प्रेरकों को उनका 18 माह का मानदेय आठ वर्ष बाद भी नहीं दिया गया। जिसके कारण बेरोजगारी का दंश झेल रहे प्रेरकों के परिवार में रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इस अवसर पर प्रेरक एकता कल्याण समिति (पंजीकृत) के जिला अध्यक्ष पुखराज सिंह मलिक ने बताया कि बकाया मानदेय के संबंध में भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 को साक्षरता विभाग की ऑडिट कराई गई थी। ऑडिट टीम द्वारा धनराशि के सापेक्ष वांछित साक्षरता कर्मियों का सत्यापन/ प्रमाणित विवरण निर्धारित प्रपत्र पर उपलब्ध करा कर साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत रहे साक्षरता कर्मियों का अवशेष मानदेय का भुगतान करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन भारत सरकार ने बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उनके अवशेष मानदेय 8 वर्ष बाद भी निर्गत नहीं किया। जिसके चलते बेरोजगार हो चुके शिक्षा प्रेरकों के परिवार में आर्थिक संकट पैदा हो गया है। धरना स्थल पर पहुंचे प्रेरक एकता कल्याण समिति के जिला अध्यक्ष श्री पुखराज सिंह मलिक ने भारत सरकार से मांग की कि साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्य कर चुके और बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों को उनका बकाया मानदेय एक मुफ्त दिलाया जाए तथा साक्षरता कर्मियों को अनुभव के आधार पर किसी भी विभाग में समायोजित किया जाए। अथवा बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों को बेरोजगारी भत्ता दिलाया जाए। साक्षरता कर्मियों ने इस अवसर पर उप बेसिक शिक्षा अधिकारी किरतपुर एवं खंड विकास अधिकारी किरतपुर को प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम दो सूत्रीय मांग पत्र देकर प्रेरकों का मानदेय एकमुश्त दिलाने एवं साक्षरता कर्मियों को किसी भी विभाग में समायोजित करने की मांग की। ब्लॉक अध्यक्ष बाबूराम सिंह की अध्यक्षता एवं महिपाल सिंह के संचालन में संपन्न सांकेतिक धरना प्रदर्शन में सर्वश्री चौधरी ईशम सिंह (जिला महामंत्री), रविंद्र सिंह, अंजार अहमद, बाबूराम सिंह, महिपाल सिंह, मनीराम सिंह, तारा सिंह, दिलशाद आलम, कनक देवी, मनोहरी देवी, शबनम परवीन, नाजिया परवीन, भीम सिंह, भूपेंद्र सिंह आदि सैकड़ो प्रेरक उपस्थित रहे।

श्री राम चन्द्र मिशन आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब

महात्मा रामचन्द्र जी महाराज की 127 वीं जयंती समारोह में गूंजी आध्यात्मिक चेतना
हजारों अभ्यासियों ने ध्यान साधना कर की विश्व कल्याण की कामना
( संजीव गुप्त द्वारा )
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के मार्गदर्शन में राम चन्द्र मिशन आश्रम में महात्मा रामचन्द्र जी महाराज बाबूजी की 127 वीं जयंती समारोह का शुभारंभ ध्यान-साधना से हुआ।
हजारों अभ्यासियों ने एकात्म भाव से सामूहिक ध्यान कर मानव कल्याण एवं विश्व शांति के लिए मंगल की कामना कीं। संपूर्ण आश्रम परिसर शांति, श्रद्धा और साधना की दिव्य तरंगों से आलोकित हो उठा।
इस अवसर पर पूज्य दाजी ने वर्चुअल माध्यम से दिये अपने संदेश में कहा कि
हर वह स्वप्न जो बिना प्रयास किए ही मर जाता हैै, वह स्वप्न देेखनेे वालेे को उस
स्वप्न की तुुलना मेंं कहींं अधिक निरंंतरता सेे सताता हैै जिसेे पूूरा करनेे की कोोशिश
की गई और वह नाकाम रहीी। यही वह ज्ञान हैै, जिसेे परंंपरााएँँ सदा सेे सिखाती आई
हैंं – अपूूर्णता केे संंस्कार, असफलता केे संंस्कारोंं सेे अधिक गहरेे घाव देेतेे हैंं। एक
पूूर्ण किया गया कार्य, चाहेे उसका अंंत दुु:खद ही क्योंं न हो, उसमेंं ऐसी सच्चाई
होती हैै जो शांंति प्रदान करती हैै जबकि छोड़ेे गए स्वप्न मेंं ऐसी कोई सच्चाई नहींं
होती। वह चेेतनाा मेंं जीवित रहता हैै, अनसुुलझा जोो निरंंतर वही प्रश्न पूूछता रहता
हैै, जिसका उत्तर देेनेे सेे भय हमेंं रोकता हैै। सहज मार्ग साधना पद्धति और हार्टफुुलनेेस केे अभ्यास मेंं जब हम शाम की सफ़ाई करतेे हैंं तब हम बैैठकर दिन भर केे संंस्कारोंं को पीछेे सेे बाहर निकल जानेे देेतेे हैंं। हमनेे जो किया, जो कहा, जो अनुुभव किया, उसेे हम अपनेे तंंत्र सेे निकाल देेतेे हैंं। लेेकिन उन संंस्कारोंं का क्या जो न किए गए कर्मोंं सेे
बनतेे हैंं? वह संंवाद, जिसेे हमनेे टाल दिया, वह सत्य जिसेे हमनेे कहा नहींं, वह
कदम जिसेे हमनेे उठाया नहींं, वह प्रेेम जिसेे हमनेे व्यक्त नहींं किया येे सभी
अकर्म भीअपनेे पीछेे छापेंं छोड़तेे हैंं। उन्होंने बताया कि दिव्य प्राणाहुति की जीवंत धारा अल्प समय में ही निष्ठापूर्ण दैनिक अभ्यास द्वारा साधक को समाधि की अवस्थाओं तक पहुँचा देती है। यह अमूल्य विद्या कालांतर में लुप्तप्राय हो गई थी, जिसे मिशन के आदि गुरु लाला जी महाराज ने पुनः खोजकर मानवता को प्रदान किया। इस पावन परंपरा को पूज्य बाबूजी महाराज ने जन–जन तक पहुँचाकर हृदय से हृदय तक आध्यात्मिक चेतना का वास्तविक संप्रेषण किया।
पूज्य दाजी ने अभ्यासियों का आवाहन किया कि वे अपने भीतर की जड़ताओं को त्यागकर प्रेम, करुणा और शांति के पथ पर अग्रसर हों तथा अपने जीवन को साधना का सजीव माध्यम बनाएं।


सायंकालीन ध्यान सत्र में भी साधकों ने ध्यान साधना कर वातावरण और अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। आयोजन में उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, केंद्र प्रभारी सर्वेश चंद्रा, ए के गर्ग, आश्रम प्रबंधक प्रमोद कुमार सिंह, राजगोपाल अग्रवाल,श्री गोपाल अग्रवाल, ममता सिंह, सुयश सिन्हा, कृष्णा भारद्वाज, हर्षवर्धन अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, राजीव श्रीवास्तव, सुरेंद्र मोहन सिन्हा, माया सिंह, अभिषेक आदि का विशेष सहयोग रहा।

गोरखपुर पुलिस की ‘नई खेप’ को मिला सफलता का मंत्र

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
29/04/2026

​1239 आरक्षियों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित

​गोरखपुर। जनपद गोरखपुर की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पुलिस विभाग में शामिल हुए 1239 नए महिला एवं पुरुष आरक्षियों के लिए बाबा गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में एक भव्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से नवागत पुलिसकर्मियों को न केवल उनके कर्तव्यों का बोध कराया गया, बल्कि उन्हें संवेदनशील और आधुनिक पुलिसिंग के गुर भी सिखाए गए।
​”वर्दी अधिकार नहीं, जिम्मेदारी का प्रतीक है”: एसएसपी डॉ. कौस्तुभ
​कार्यशाला को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. कौस्तुभ ने नए आरक्षियों में ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की वर्दी पहनना समाज की सेवा का संकल्प है।
​संवेदनशीलता: एसएसपी ने जोर देकर कहा कि हर पीड़ित पुलिस से उम्मीद लेकर आता है, इसलिए जनता के साथ व्यवहार में धैर्य और निष्पक्षता अनिवार्य है।
​अनुशासन और तकनीक: उन्होंने अनुशासन को विभाग की रीढ़ बताते हुए नए आरक्षियों को साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी रूप से दक्ष होने की सलाह दी।
​विश्वास की पूंजी: डॉ. कौस्तुभ के अनुसार, जनता का भरोसा ही पुलिस की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
​नींव की ईंट की तरह मजबूत बनें आरक्षी: एसपी नॉर्थ
​पुलिस अधीक्षक (नॉर्थ) ज्ञानेंद्र ने एक मार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह एक-एक मजबूत ईंट से विशाल इमारत खड़ी होती है, उसी तरह हर एक आरक्षी पुलिस विभाग की नींव को मजबूती देता है। उन्होंने आरक्षियों को अपने ‘बीट’ क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक जानकारी रखने पर विशेष जोर दिया।
​व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा
​कार्यशाला में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए:
​एसपी सिटी निमिष पाटिल: उन्होंने मौके पर त्वरित निर्णय लेने और कानून के दायरे में रहकर धैर्य के साथ काम करने की महत्ता समझाई।
​एएसपी अरुण कुमार एस: उन्होंने शारीरिक फिटनेस और जनता के साथ बेहतर संवाद को सफल पुलिसिंग का आधार बताया।
​एएसपी दिनेश गोदारा: उन्होंने कानून की स्पष्ट जानकारी रखने पर बल दिया, ताकि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई और निर्दोषों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
​कार्यशाला के मुख्य बिंदु
​इस प्रशिक्षण सत्र के दौरान आरक्षियों को निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई:
​अपराध नियंत्रण और बीट पुलिसिंग: स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करना।
​आपातकालीन प्रतिक्रिया: संकट के समय त्वरित और प्रभावी कार्यवाही।
​डिजिटल पुलिसिंग: साइबर अपराध और आधुनिक तकनीकी संसाधनों का उपयोग।
​मानवीय व्यवहार: जनता के प्रति संवेदनशीलता और बेहतर छवि निर्माण।
​निष्कर्ष:
यह कार्यशाला केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न होकर नए आरक्षियों को समाज सेवा के प्रति समर्पित करने का एक सशक्त माध्यम बनी। कार्यक्रम के समापन पर सभी नवागत आरक्षियों ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ गोरखपुर पुलिस के गौरव को बढ़ाने का संकल्प लिया।

गोरखपुर पुलिस का ‘ऑपरेशन क्लीन’ – 24 घंटे में लुटेरों का हिसाब!

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
29/04/2029

गोरखपुर : गोरखपुर में खाकी का खौफ! महज 24 घंटे के अंदर पुलिस ने उस दुस्साहस का जवाब दे दिया है, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया था। देवांश स्वर्णकला केंद्र में लूट करने वाले शातिर लुटेरे अब अस्पताल के बेड पर हैं और उनके पैरों में पुलिस की गोली का निशान है।
मामला गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र का है। सोमवार की दोपहर, जब देवांश स्वर्णकला केंद्र के मालिक राकेश वर्मा अपनी बड़ी बेटी की सगाई का कार्ड बांटने बाहर गए थे, तब उनकी छोटी बेटी अमृता वर्मा दुकान संभाल रही थी।
​दोपहर के करीब 2:20 बज रहे थे। दो युवक ग्राहक बनकर दुकान में दाखिल होते हैं। गहने देखने के बहाने उन्होंने अमृता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की और पलक झपकते ही करीब 20 ग्राम सोने के झाले लेकर भागने लगे।

​लेकिन लुटेरों को अमृता के साहस का अंदाजा नहीं था। #बहादुरबेटी न सिर्फ चिल्लाई, बल्कि जान की बाजी लगाकर लुटेरों के पीछे भाग निकली। सीसीटीवी में साफ दिख रहा है कि कैसे अमृता ने एक लुटेरे को पकड़कर जमीन पर गिरा दिया। हालांकि, लुटेरा धक्का देकर फरार होने में कामयाब रहा, लेकिन उसने पुलिस के लिए सुराग छोड़ दिया था।

गोरखपुर पुलिस ने इस चुनौती को स्वीकार किया। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और सर्विलांस की मदद से घेराबंदी शुरू हुई। बुधवार की सुबह, पुलिस और बदमाशों का आमना-सामना हुआ। ​खुद को घिरा देख बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। इस मुठभेड़ में सहारनपुर के देवबंद निवासी मेहदी और रहमान के पैर में गोली लगी है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से लूटा गया सारा सामान बरामद कर लिया है। घायल अवस्था में दोनों लुटेरों को अस्पताल भेजा गया है। गोरखपुर पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों को साफ संदेश दे दिया है— जुर्म करोगे, तो अंजाम यही होगा।
​साहसी अमृता की इस बहादुरी और पुलिस के सटीक निशाने ने आज पूरे गोरखपुर में चर्चा बटोर ली है।

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