Editorial 07.06.2026 by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News
एक खास मुद्दे और टिप्पणी को लेकर डिजिटल मीडिया में शुरू हुआ आंदोलन जमीन पर उतरते ही दिशा भटक गया। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और उनके सोशल मीडिया समर्थकों ने 6 जून को जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। लगभग एक हजार लोग देशव्यापी आह्वान के बाद प्रदर्शन में जुटे। लगभग इतने ही पुलिसकर्मी और मीडिया, सोशल मीडिया, यूट्यूबर और तमाशबीन भी थे। आंदोलन के लिए दिल्ली पुलिस ने 8 घंटे की अनुमति दी थी किंतु यह 6 घंटे में खत्म हो गया।
संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस प्रदर्शन की घोषणा सिर्फ एक सूत्रीय मांग के लिए की थी। यह मांग थी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र। प्रदर्शन के दौरान इस मांग की यहां औपचारिकता पूरी की गई। सरकार को 7 दिन का समय देकर अल्टीमेटम जारी कर दिया गया। किंतु इससे भी बड़ी तस्वीर जो आंदोलन में उभरी वह ये थी कि पूरा आंदोलन एक खास विचारधारा के लोगों के हाथों हाइजैक हो गया। इसमें परंपरागत मोदी विरोधी, भाजपा विरोधी, भारत विरोधी विमर्श गढ़ने वाले समूह हावी हो गए। इन्होंने वही सब करना शुरू कर दिया जो सीएए विरोधी आंदोलन में हुआ। ये ग्रुप अपनी ढ़पली लेकर आंदोलन स्थल पर पहले से ही मौजूद था। इन्होंने आजादी -आजादी के नारे लगाए। मीडिया ने जब प्रश्न किया कि आंदोलन नीट यूजी की गड़बड़ियों और प्रधान के इस्तीफे को लेकर है तो आजादी के नारे का क्या औचित्य है, इस पर ये लोग भड़क गए और गोदी मीडिया कहकर उन्हें वहां से भगाने लगे। इससे पूरा आंदोलन रास्ते से भटकता नजर आया। आंदोलन में तमाम लोग ऐसे थे जिन्हें न तो नीट की कोई जानकारी थी और न ही वे मुद्दे को जानते थे। बस वे तो इस लिए आए कि एक आंदोलन मोदी सरकार के खिलाफ है। आंदोलन के मंच पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी पहुंचे। उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की बात की।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आंदोलन शुरू करने का ये भारत में पहला प्रयोग है। इसीलिए शायद सरकार ने इस आंदोलन और प्रदर्शन को आसानी से अनुमति दे दी। क्योंकि सरकार इसे एक प्रयोग के रूप में भी परखना चाहती होगी, की क्या सोशल मीडिया पर किसी मुद्दे पर एकजुट हुए लोग यथार्थ में धरातल पर भी सफल हो सकते हैं या नहीं। अथवा सोशल मीडिया पर उभरे समूह और फॉलोअर्स समुद्र के पानी पर उभरे बुलबुले साबित होते है, जो समय के साथ स्वत: ही फूट जाते है ।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की स्थापना को अभी 21 दिन ही हुए है। इस दौरान इसके लाखों सोशल मीडिया फॉलोअर्स हो गए। इंस्टाग्राम पर सीजेपी का अकाउंट बनने के 2 दिन के भीतर ही, 140 लाख फॉलोअर्स हो गए थे। पार्टी एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में 16 मई को अमेरिका में बैठे पूर्व आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता और मीडिया एक्सपर्ट अभिजीत दीपके ने बनाई। क्योंकि 15 मई को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी। उन्हें कॉकरोच की तरह बताकर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने वाला बताया था। टिप्पणी वास्तव में अपमानजनक और गैर जरूरी थी। इससे युवाओं को भावनात्मक ठेस पहुंची और अपमानित भी हुए। इस आक्रोश का आकलन करके अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया अभियान शुरू कर दिया। जो अब धरना,प्रदर्शन में बदलने लगा है।
सवाल फिर वहीं है कि क्या आंदोलन अपने उद्देश्य के अनुरूप है और क्या सही दिशा में है। क्या आंदोलन उसके संस्थापकों के हाथों में है या स्वार्थी तत्वों ने इसे हाइजैक कर लिया है। इन प्रश्नों का उत्तर सिर्फ अभिजीत दीपके को तलाशना होगा। वरना सही मांग के बावजूद ये अभियान युवाओं की सहानुभूति खो देगा।


