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सुरक्षा के स्वदेशी अस्त्र

June 3, 2026

सुरक्षा के स्वदेशी अस्त्र

Editorial 03.06.2026 Wednesday by Sarvesh Kumar Singh Editor, UP Web News

संपादकीय

सर्वेश कुमार सिंह

भारत रक्षा अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में नित्य नवीन उपलब्धियां हासिल कर रहा है। अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ साथ मित्र देशों को स्वदेशी अस्त्र शस्त्रों का निर्यात भी कर रहा है। हमारे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड जैसे संस्थानों और कुछ निजी क्षेत्र की उच्च तकनीकी में दक्ष कंपनियां उल्लेखनीय सफलता अर्जित कर रही है। इनके दम पर भारत अब रक्षा उपकरणों के आयातक के स्थान पर निर्यातक देश के रूप में पहचान बना रहा है।

भारत ने 30 मई को ब्रह्मोस मिसाइल वियतनाम को निर्यात करने का समझौता किया है। ये क्रूज मिसाइल है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। सभी लक्ष्य सटीकता के साथ भेद दिए थे। ब्रह्मोस के प्रहार से पाकिस्तान युद्ध विराम के लिए गिड़गिड़ाने लगा था। कई अन्य देशों ने ब्रह्मोस प्राप्त करने के लिए भारत को प्रस्ताव दिए है।

दो जून को चांदीपुर रेंज में डीआरडीओ में विकसित सुपरसोनिक मिसाइल “रुद्रम 2” RudraM-II Air-to-Surface Missile का सफल परीक्षण हुआ है। इसका परीक्षण वायु सेना के सहयोग से सुखोई 30 लड़ाकू विमान से किया गया। ये ऐसी मिसाइल है जो भविष्य के किसी भी युद्ध का परिदृश्य बदल देगी। ये मिसाइल 300 से 350 किमी तक की दूरी का लक्ष्य सटीकता से भेद सकती है। ये हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है। इस मिसाइल की खास खूबी ये है कि ये दुश्मन के रडार सिस्टम, एयर डिफेंस सिस्टम और संचार सिस्टम को अंधा कर देगी और सटीकता से लक्ष्य को भेद देगी। ये मिसाइल दूर से रडार के सिग्नल पकड़ेगी। रुद्रम 2 हवा से जमीन पर मार करने वाली सर्वश्रेष्ठ विश्व स्तरीय मिसाइल होगी।

एक ही दिन पहले भारत ने पूर्ण स्वदेशी ड्रोन “दिव्यास्त्र” का परीक्षण किया। एक जून को राजस्थान के जोधपुर में उच्च तापमान में दिव्यास्त्र एम के 2 का परीक्षण हुआ। ये ड्रोन 500 किमी दूर तक जाकर लक्ष्य को भेद सकता है। इसको निजी कंपनी होवर इट ने बनाया है।

भारत के रक्षा विशेषज्ञ और अनुसंधानकर्ताओं ने रूस यूक्रेन युद्ध, ऑपरेशन सिंदूर और हाल के ईरान अमेरिका, इजराइल युद्ध के बाद अपने रक्षा उत्पादन को मिसाइल और उन्नत ड्रोन पर केंद्रित किया है। क्योंकि इन युद्धों में परंपरा से हटकर आक्रमण और बचाव के उपाय किए गए। जमीनी युद्ध के स्थान पर आकाशीय आक्रमण हुए। इनमें मिसाइल और ड्रोन की भूमिका प्रमुख रही। इसीलिए ड्रोन का भारी संख्य में निर्माण करने के लिए भारत निजी क्षेत्र की भी मदद ले रहा है। वहीं नवीन तकनीक के साथ मिसाइल निर्माण बढ़ाया गया है।

भारत ने स्वदेशी के दम पर ऐसा सुरक्षा कवच बना लिया है कि इसे भेदना किसी भी दुश्मन के लिए संभव नहीं होगा। बल्कि हमारी मिसाइल दुश्मन के घर में घुसकर शत्रु को तबाह कर देंगी।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh