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कंगना रनौत केस में कल आगरा की कोर्ट ले सकती है फैसला

April 15, 2026

कंगना रनौत केस में कल आगरा की कोर्ट ले सकती है फैसला

Posted on 15.04.2026 Wednesday Time 06.01 PM, Agra

Agra. Trouble seems to be mounting for BJP MP and film actress Kangana Ranaut from the Mandi Lok Sabha constituency in Himachal Pradesh. A major verdict in the case related to insult of farmers and sedition is expected tomorrow in the Special Court (MP-MLA) in Agra. The court is likely to decide tomorrow whether to summon Kangana Ranaut or not.

तलब आदेश हुआ तो पेश होना पड़ेगा

आगरा। हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। किसानों के अपमान और राजद्रोह से जुड़े मामले में कल आगरा के स्पेशल कोर्ट (एमपी-एमएलए) में अहम फैसला आने की संभावना है। अदालत कल ही यह तय कर सकती है कि कंगना रनौत को तलब किया जाए या नहीं।

मामले की सुनवाई स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में चल रही है। जानकारी के अनुसार, इस केस में दोनों पक्षों के बीच 3 अप्रैल 2026 को विस्तृत बहस पूरी हो चुकी है। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपनी-अपनी लिखित दलीलें कोर्ट में पेश की थीं, साथ ही मौखिक बहस भी की गई थी।

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने मामले को आदेश के लिए सुरक्षित रखते हुए 16 अप्रैल की तारीख तय की थी। ऐसे में कल यह स्पष्ट हो सकता है कि अदालत इस मामले में संज्ञान लेते हुए कंगना रनौत को समन जारी करती है या नहीं।

कंगना रनौत के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने किसानों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे आक्रोश फैल गया था। इसी के आधार पर राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्य़क्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा द्वारा उनके खिलाफ राजद्रोह समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कराया गया था। अब अदालत को यह तय करना है कि प्रस्तुत साक्ष्य और दलीलों के आधार पर मामला आगे बढ़ाने लायक है या नहीं।

अगर अदालत संज्ञान लेते हुए तलब आदेश जारी करती है, तो कंगना रनौत को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना पड़ सकता है। इससे न केवल कानूनी लड़ाई तेज होगी, बल्कि राजनीतिक और फिल्मी हलकों में भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

चूंकि कंगना रनौत वर्तमान में भाजपा की सांसद भी हैं, ऐसे में इस मामले का राजनीतिक असर भी व्यापक हो सकता है। विपक्ष पहले ही इस मुद्दे को लेकर हमलावर रहा है, जबकि समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं।

कुल मिलाकर कोर्ट का कल का फैसला इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा कि मामला आगे बढ़ेगा या यहीं थम जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।