-शनिवार को एडीजे कोर्ट ने दिया सुनाया 47 पेज का निर्णय
-डीआईजी,डीएम ने कोर्ट में दर्ज कराए बयान
Post on 28.3.26
Saturday Moradabad
Rajesh Bhatia
मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
शनिवार को मैनाठेर कांड में सजा का फैसला सुर्खियां बना। कोर्ट ने दोषी ठहराए सभी 16 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। 47 पेज के आदेश में घटना में साक्ष्य और गवाहों के बयान अहम रहे। कोर्ट के फैसले पर प्रशासन से लेकर शासन तक की निगाह रहीं।
पन्द्रह साल पुराने मैनाठेर कांड में शनिवार को फैसला सुनाया गया। हालांकि अदालत ने 23 मार्च को कांड में सभी सोलह लोगों को दोषी ठहराया था। तभी से यह मामला सबके लिए खासी सुर्खियां बन गया। थाना मैनाठेर में असालतनगर बघा में 6 जुलाई, 2011 को खासा बवाल हुआ। मैनाठेर में बवाल के चलते भीड़ ने डीआईजी की बुरी तरह से पिटाई की और सर्विस रिवॉल्वर छीन लिया।
विभिन्न अदालतों में हुईं कांड की सुनवाई–
केस की सुनवाई अलग-अलग अदालत में चलीं। अदालतों में सुनवाई के दौरान गवाहों के भी बयान हुए। केस के हालातों को देखते हुए अभियोजन पक्ष की ओर से इसकी मजबूत पैरवी की गई।
एडीजे कोर्ट दो में एडीजीसी ब्रजराज सिंह के अनुसार बसपा सरकार में हुआ बवाल शासन में खासा चर्चा में आया। आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए 51 गवाहों के कोर्ट में बयान कराने को सूची तैयार की गई। सभी के बारी बारी से अदालत में बयान हुए।
अदालत में रखे घटनाक्रम के साक्ष्य, डीआईजी-डीएम बने प्रमुख गवाह
डीजीसी नितिन गुप्ता और एडीजीसी संजीव अग्रवाल का कहना है कि डीआईजी पर जान लेवा हमले, पीएसी वाहन में आग लगाने, पेट्रोल पंप में तोड़ फोड़ समेत घटनाक्रम हुआ था। लिहाजा अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों को बयान के लिए कोर्ट में बुलाया। डीआईजी, मौके पर साथ पीआरओ रवि, डीएम राजशेखर,उनके ड्राइवर और गनर के अलावा पेट्रोल पंप संचालक संतराम समेत अन्य प्रमुख साक्षी बने। केस में दसवें नंबर के गवाह प्रत्यक्षदर्शी पंप संचालक संतराम ने घटना का हाल बताया। भीड़ से बचते बचाते पेट्रोल पंप की तरफ आए तो भीड़ लाठी-डंडे, पथराव करती वहां पहुंच गई। गोली लगने से डीआईजी गिर गए। साथ ही हमलावरों ने पंप का कैश लूट लिया और तोड़फोड़ कर डाली। डीजीसी के अनुसार
केस में कुल 22 गवाहों के बयान हुए।
*अदालत ने दिया 47 पेज का निर्णय*
एडीजे कोर्ट दो कृष्ण कुमार ने डेढ़ दशक पुराने घटना और हालातों के मद्देनजर गवाहों के बयान और तब के साक्ष्यों को अहम माना। अदालत ने पूरे तथ्यों पर गौर करने के बाद फैसला सुनाया। फैसले पर पुलिस प्रशासन की निगाह रहीं।
*इन धाराओं में मिलीं सजा व जुर्माना*
धारा 147- दो वर्ष –
148- तीन वर्ष
307 दस वर्ष -10 हजार
336 दो माह
332 दो वर्ष
353 दो वर्ष
436 आजीवन कारावास -20 हजार
427 दो वर्ष
395 आजीवन कारावास -20 हजार
397 सात वर्ष -आठ माह
आपराधिक विधि संशोधन अधि.- तीन वर्ष
लोक संपत्ति क्षति -पांच वर्ष -5 हजार
मुरादाबाद में संयुक्त निदेशक (अभियोजन) चन्द्र प्रकाश मणि त्रिपाठी का कहना है कि डेढ़ दशक पुराने मैनाठेर कांड में अभियोजन पक्ष की पैरवी से दोषियों को कठोर सजा मिली।
न्यायालय के निर्णय से अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगेगा।
*माहौल को शांत कराने गए डीआईजी पर ही उत्तेजित भीड़ ने हमला बोल दिया, मरणासन्न हालत में अस्पताल पहुंचे थे*
घटनास्थल पर मामले को शांत कराने जाते तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह को बेकाबू भीड़ ने घेर लिया। जमकर पिटाई की और गोली चलाई। डीआईजी को गंभीर हालत में पहले सांई अस्पताल लाया गया।लहूलुहान डीआईजी की हालत देखकर उन्हें तत्काल दिल्ली एम्स अस्पताल ले जाया गया। घटना के दौरान हालात देख तत्कालीन डीएम राजशेखर व अन्य पुलिसकर्मी वहां से लौट गए।
हालांकि इस केस में कुछ मुकदमे दर्ज हुए। पर थाना मैनाठेर में अपराध संख्या 177/2011 में दर्ज इस केस सुनवाई के बाद दोषियों को दिलाई जा सकीं।
केस में बचाव पक्ष के अधिवक्ता पीके जैन और विवेक जैन का कहना है कि न्यायालय ने अधिकतम सजा की है।अब न्यायालय के निर्णय का अवलोकन करेंगे। अपील का अधिकार है। हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे।

