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मैनाठेर में डीआईजी पर जानलेवा हमले में 16 दोषी करार, 27 को सजा पर फैसला

March 23, 2026

मैनाठेर में डीआईजी पर जानलेवा हमले में 16 दोषी करार, 27 को सजा पर फैसला

Moradabad Samachar

मुरादाबाद समाचार

सोमवार को एडीजे-2 कोर्ट का फैसला
कोर्ट के दोषी मानते ही 14 लोगों को हिरासत में जेल भेजा

-मुरादाबाद में मैनाठेर थाने में डींगरपुर की 6 जुलाई, 2011 की घटना

-कोर्ट में पच्चीस आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल

-हिंसक भीड़ से घिर गए थे डीआईजी अशोक कुमार सिंह
हमले से मरणासन्न अवस्था में
पहुंचे तत्कालीन डीआईजी

-उनके साथ मौजूद तत्कालीन डीएम राज शेखर व डीआईजी के हमराह भी वापस लौट गए

Post on 23.3.29
Monday, Moradabad
Rajesh Bhatia

मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
15 साल पहले मैनाठेर क्षेत्र में डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर जानलेवा हमले, बवाल केस में 16 लोगों को दोषी ठहराया गया है। अदालत ने डीआईजी की बेदर्दी से पिटाई, आगजनी में सभी को दोषी करार दिया। अदालत 27 मार्च को सजा पर फैसला सुनाएगी। निर्णय के बाद पुलिस ने सभी चौदह लोगों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। फैसले के दौरान दो दोषी अदालत में हाजिर नहीं हुए।

मुरादाबाद जिले में 2011 में हुआ मैनाठेर बवाल कांड खासी सुर्खियों में रहा। मैनाठेर में डींगरपुर रोड पर चल रहे बवाल को शांत कराने तत्कालीन डीएम राजशेखर और डीआईजी अशोक कुमार सिंह गए थे। पर हंगामे के बीच आक्रामक हुईं भीड़ ने बचाव के लिए आगे बढ़े डीआईजी को घेर लिया। हमला बोल दिया। भीड़ ने डीआईजी की पिस्टल भी छीनकर वर्दी भी फाड़ डाली बुरी तरह पिटाई से डीआईजी लहूलुहान होकर मरणासन्न अवस्था में पहुंच गए। शरीर पर कई जगहों पर फ्रेक्चर हुए। इस दौरान मौजूद तत्कालीन डीएम व डीआईजी के हमराह हमले से बचने को वहां से लौट गए।उत्तेजित भीड़ ने पेट्रोल पंप आदि पर आग लगाई।
पुलिस ने बवाल मामले में 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम किया। इस केस की सुनवाई मुरादाबाद में एडीजे-2 कृष्ण कुमार की अदालत में हुईं।
डीजीसी नितिन गुप्ता व कोर्ट में एडीजीसी ब्रजराज सिंह ने बताया कि मैनाठेर बवाल केस में आज 16 लोगों को साक्ष्य के आधार पर दोषी ठहराया गया। इनमें से कोर्ट में मौजूद 14 लोगों को न्यायालय के आदेश के बाद हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। मामले में कोर्ट 27 मार्च को सजा पर फैसला सुनाएगी।

*बवाल केस में 25 के खिलाफ आरोपपत्र*

तीन आरोपितों की सुनवाई के दौरान मौत, छह का मामला किशोर न्यायालय में पेश
मुरादाबाद।
बवाल केस में पुलिस ने परवेज आलम समेत 25 के खिलाफ आरोपपत्र पत्र दाखिल किया गया। एडीजीसी ब्रजराज सिंह का कहना है कि सोमवार को केस की सुनवाई के बाद अदालत ने 16 लोगों को दोषी करार दिया। हालांकि इनमें तीन आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। जबकि बाकी छह की कम उम्र के चलते किशोर न्यायालय बोर्ड(Juvenile Justice Board) में रखा गया। सोमवार को अदालत ने 16 को दोषी करार दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाजिर 14 को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। जेल जाने से पहले पुलिस ने उनका मेडिकल भी कराया।

*बवाल कांड में ये दोषी*
-परवेज आलम पुत्र आसिफ
-मंजूर अहमद पुत्र मो युनूस
-मो अली पुत्र अफसर
-हाशिम पुत्र हाजी भोलू
-मो कमरूल पुत्र बाबू
-मो नाजिम पुत्र मो हुसैन
-मो मुजीफ पुत्र नन्हें
-मो युनूस पुत्र मो युसुफ
अंबरीष पुत्र अनवार मिस्त्री
-कासिम पुत्र इकबाल
-मो मोबीन उर्फ मो मोहसिन पुत्र शौकत
-मो मुजीब पुत्र बाबू जमील उर्फ जमीर अहमद
-तहजीब आलम पुत्र हाजी जमील
-जाने आलम पुत्र जुम्मा

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
धारा – 147,148,307, 149,336,353,436,427
395,397
आपराधिक विधि संशोधन, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम

*तत्कालीन डीआईजी, डीएम समेत 24 के हुए बयान*
मुरादाबाद।
15 साल पहले मुरादाबाद के इतिहास में सनसनी मचाने वाले मैनाठेर प्रकरण में कोर्ट में 24 गवाहों ने बयान दर्ज कराएं। 51 लोगों को बयान के लिए लिस्ट बनाईं गई थी। पर जरुरत के हिसाब से कोर्ट में कम के बयान हुए।
एडीजीसी ब्रजराज सिंह का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट में ज्यादा लोगों को बुलाया जाना था पर साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में तत्कालीन डीएम और अब जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक राज शेखर, डीआईजी कोर्ट में पेश हुए और बयान दर्ज कराएं।
बवाल केस में डीआईजी की पिस्टल बरामद करने वाले एसएसआई जसवीर सिंह के अलावा हिंसक भीड़ के निशाने पर आया पेट्रोल पंप में तब सेल्समैन संतराम सिंह ने भी बयान दिए। एडीजीसी का कहना है कि भीड़ द्वारा छीनी गई डीआईजी की पिस्टल जंगल में एक गड्ढे में दबी मिलीं।आरोपियों की पूछताछ के बाद पिस्टल को तलाशा गया। कोर्ट में केस में वादी एसआई रवि कुमार के बयान अहम रहें।
इसके अलावा पुलिस की ओर से सिपाही राकेश कुमार, मो हुसैन, कौशलेंद्र , सुनील कुमार, सतीश चंद्र, राम निवास के बयान भी दर्ज हुए।

यह था मामला।
जिले में इतिहास बनी घटना 6 जुलाई वर्ष 2011 की है।मैनाठेर पुलिस ने छेड़छाड़ के एक केस में आरोपी की गिरफ्तारी को क्षेत्र के ही गांव में दबिश दी थी। पर अभियुक्त के परिजनों ने दबिश के दौरान पुलिस पर धार्मिक पुस्तक के अपमान का आरोप लगाया था। पुस्तक के अपमान से लोगों में गुस्सा भड़क गया। एक वर्ग के लोगों ने मुरादाबाद -संभल रोड को तीन जगहों पर जाम कर मैनाठेर थाने पर आग लगा दी। डींगरपुर में हिंसक भीड़ ने पुलिस चौकी व पीएसी के वाहनों में आगजनी की। बवाल पर काबू पाने के तब डीएम राजशेखर व डीआईजी अशोक कुमार सिंह संग मय फोर्स के मौके पर रवाना हुए थे। दोनों अफसर एक ही कार में सवार थे। डींगरपुर तिराहे पर भीड़ के पीएसी वाहन को फूंकता देख दोनों अधिकारी भीड़ को समझाने के लिए रुके थे। पर हिंसक भीड़ ने उनपर हमला बोल दिया। बताते हैं कि
तत्कालीन डीएम राजशेखर व डीआईजी के हमराह पुलिस कर्मी वाले भी हिंसक भीड़ के बीच डीआईजी को अकेला छोड़कर वापस लौट गए। भीड़ ने डीआईजी को बुरी तरह से पीटकर मरणासन्न हालत में छोड़ दिया। भीड़ ने डीआईजी पर फायर झोंके थे। और उनकी पिस्टल छीन ली। बुरी तरह से घायल डीआईजी को तीन महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा था।

*प्रकरण में आईपीएस अधिकारियों ने की थीं सीएम से शिकायत*

मैनाठेर कांड में डीआईजी को हिंसक भीड़ में अकेला छोड़ने से आईपीएस अधिकारी भी खुश नहीं थे। प्रकरण लंबे समय तक लगातार सुर्खियों में बना रहा।