एटा 13 मार्च उप्रससे। जिले की कोतवाली देहात क्षेत्र का छोटा सा गांव नगला जगरूप इन दिनों चर्चा में है। यहां के दो सगे भाई-बहन सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद घर लौटने पर जोरदार स्वागत किया गया।
पूरे क्षेत्र के लोगों की ओर से बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। शनिवार को गांव में दोनों भाई-बहन का सम्मान समारोह भी आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रमाकांत उपाध्याय और विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी इन्हें सम्मानित करेंगे।
गांव नगला जगरूप निवासी मानसी दीक्षित और उनके भाई प्रियांशु दीक्षित का चयन होने के बाद चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में 26 मार्च 2025 से ट्रेनिंग शुरू हुई। इसके बाद एक साल तक कठिन प्रशिक्षण चला। इसके बाद अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान भारतीय सेना में 7 मार्च 2026 को लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन मिला। दोनों अधिकारियों के गांव पहुंचने पर परिवार और ग्रामीणों ने उनका पारंपरिक तरीके से जोरदार स्वागत किया। घर पहुंचते ही परिजनों ने उनके माथे पर रोली-चावल से तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया और मिठाई खिलाकर खुशी व्यक्त की। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
वहीं अपनी सफलता पर लेफ्टिनेंट प्रियांशु दीक्षित ने कहा कि अपने पैतृक गांव आकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। गांव वालों और परिवार से मिल रहा प्यार उनके लिए गर्व की बात है। पहले मुझे प्रियांशु दीक्षित के नाम से जाना जाता था लेकिन अब मेरे नाम के आगे लेफ्टिनेंट प्रियांशु दीक्षित लग गया है, जिससे उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अब केवल अपने परिवार ही नहीं बल्कि पूरे देश के प्रति जिम्मेदार महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बहन भी उनके साथ ही लेफ्टिनेंट बनी हैं, जिससे यह खुशी दोगुनी हो गई है। प्रियांशु ने कहा कि सेना में जाना उनके पिता का सपना था, जो मेडिकल कारणों से पूरा नहीं हो सका, लेकिन आज लेफ्टिनेंट बनकर उन्होंने अपने पिता का सपना साकार कर दिया है। वहीं अपनी इस सफलता पर लेफ्टिनेंट मानसी ने खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मेरा और मेरे छोटे भाई का एकसाथ चयन हुआ। मेरे लिए ये बहुत गर्व की बात है कि अकादमी में भी हम साथ में रहे और सारे कॉम्पिटिशन हमने साथ में जीते। मानसी ने आगे कहा कि मुझे बिल्कुल भी ये एहसास नहीं हुआ की मैं घर से अलग हूं क्योंकी मेरा छोटा भाई प्रियांशु मेरे साथ था। अब जब हम दोनों एक साथ गांव आए तो मुझे बहुत खुशी हुई।
बच्चों की सफलता पर भावुक हुई मां
बातचीत के दौरान दोनों अधिकारियों की मां विनीता दीक्षित भावुक हो गईं और उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। उन्होंने बताया कि उनके पति का सपना था कि वह भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करें, लेकिन सेना में भर्ती प्रक्रिया के दौरान उन्हें स्थायी रूप से मेडिकल अनफिट घोषित कर दिया गया था, जिसके कारण उनका सपना अधूरा रह गया।
मां ने आगे कहा कि आज बेटे और बेटी ने सपना पूरा कर दिया है। मां ने बताया कि बच्चों ने हमेशा मेहनत और अनुशासन को प्राथमिकता दी। दोनों बचपन से ही सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करते थे और अपने लक्ष्य को लेकर हमेशा गंभीर रहते थे।
परिवार में पहले से ही कई सदस्य सरकारी सेवाओं में रह चुके हैं, जिससे बच्चों को प्रेरणा मिलती रही। बच्चों के ताऊजी राघवेंद्र बहादुर दीक्षित मध्य प्रदेश सरकार में रतलाम जनपद में अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
वहीं दूसरे ताऊजी नागेंद्र बहादुर दीक्षित मध्य प्रदेश सरकार में एडीओ पंचायत के पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा परिवार के सदस्य देवेंद्र बहादुर दीक्षित एटा नगर पालिका में क्लेरिकल पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। परिवार के ही सदस्य हर्षेद्र बहादुर दीक्षित मध्य प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं, जबकि धर्मेंद्र बहादुर दीक्षित अपने पैतृक गांव नगला जगरूप में खेती-बाड़ी का कार्य संभालते हैं।
राज्य मंत्री करेंगे सम्मानित
ग्रामीणों द्वारा शनिवार को दोनों भाई-बहन के सम्मान में एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रमाकांत उपाध्याय, मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी तथा भाजपा के एटा जिलाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता सहित कई जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
ग्रामीणों का कहना है कि नगला जगरूप जैसे छोटे गांव से निकलकर भाई-बहन का एक साथ भारतीय सेना में अधिकारी बनना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है और इससे गांव-देहात के बच्चों में भी देश सेवा के प्रति नई ऊर्जा पैदा हुई है।

