यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा।
पांचवीं बार में देवांश ने 77 वीं रैंक, जबकि सृजित ने दूसरी लगाई लंबी छलांग, 84 वीं रैंक हासिल की जबकि ऋषभ शर्मा ने 116 और एडवोकेट की बेटी गरिमा सिंह ने 240 वीं रैंक
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Moradabad, Rajesh Bhatia.
मुरादाबाद, 6 मार्च (उप्र समाचार सेवा)।
शुक्रवार को संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित हो गया। परीक्षा में मुरादाबाद से चार होनहारों ने नया मुकाम हासिल किया। युवाओं ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता को दिया। एकाग्रता के साथ पढ़ाई पर फोकस किया और सिविल सेवा परीक्षा में अपनी चमक बिखेरी।
*पांचवीं बार में देवांश को 77 वीं रैंक*
मुरादाबाद में रैंकिंग में 77 वीं रैंकिंग गोकुल दास गर्ल्स कॉलेज की प्रोफेसर डा किरन साहू के बेटे देवांश गुप्ता ने पाईं है। देवांश ने पांचवीं बार सिविल सेवा परीक्षा में जगह बनाई। देवांश ने लगातार नाकामियों से हिम्मत न हारकर सिविल सेवा में जगह बनाने में कामयाब रहे।
इस बार 77 वीं रैंक हासिल की। बताया कि 2021 में एलएलबी के बाद सिविल सेवा के जरिए काम करने का निर्णय कर लिया। उनका कहना है कि आत्मविश्वास और धैर्य के साथ हुईं अंततः सफ़लता दिलातीं है।
*दूसरे प्रयास में खामियां दूर कर सृजित ने हासिल की 84 वीं रैंक*
पिछली बार 277 वीं रैंक हासिल करने वाले सृजित कुमार ने इस बार लंबी छलांग लगाई। मूलरूप से शाहजहांपुर के रहने वाले सृजित मुरादाबाद में तैनात एसपी ट्रैफिक सुभाष चंद्र गंगवार के बेटे हैं। अपनी कामयाबी का श्रेय पिता और माता नीलिमा सिंह को देते हैं। सिविल सेवा परीक्षा परिणाम आया तो पिता एसपी ट्रैफिक घर पर थे। परिणाम घोषित होते ही परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। खास यह कि सृजित ने अपनी रैंकिंग में सुधार कर 84 वीं रैंक पाईं। 2021 में आईआईटी IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरा कर यूपीएससी
UPSC की तैयारी में जुट गए।UPSC CSE 2024 में 277 वीं रैंक मिली। IRS (सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर) सेवा मिली। पिता को प्रेरणा स्रोत मानते हुए एक बार तैयारी की।
*प्राइवेट नौकरी छोड़ ऋषभ ने हासिल की 116 वीं रैंक*
बरेली की मूल निवासी आभा शर्मा मुरादाबाद में एल आईं यू की इंस्पेक्टर के पद पर हैं। उनके होनहार पुत्र ऋषभ ने सिविल सेवा परीक्षा में 116 वीं रैंक हासिल कर मुकाम बनाया। प्रयागराज से बीटेक कर बेंगलुरु में कंपनी में जाँब कर लीं। पर नौकरी में मन न लगा तो 2023 में नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। दो साल मेहनत कर 2025 में सिविल सेवा परीक्षा दीं। ऋषभ ने दूसरी बार की कोशिश में 116 वीं रैंक पाईं।

*गरिमा ने संघर्ष के बाद पाईं सफलता*
मूलरूप से रामपुर में टांडा दढ़ियाल के निवासी रामौतार सिंह की होनहार बेटी गरिमा सिंह ने सिविल सेवा परीक्षा में जगह बनाई। गरिमा ने 240 वीं रैंक हासिल की। मुरादाबाद में एडवोकेट रामौतार सिंह बताते हैं कि तीन बार की नाकामियों के बावजूद बिटिया ने हिम्मत नहीं हारी। पहली बार में इंटरव्यू में नंबर कम से पिछड़ गई। चौथी बार में गरिमा सिविल सेवा
की सीढ़ियां चढ़ गई।
मुरादाबाद में मानसरोवर कालोनी में रहने वाले रामौतार सिंह की बेटी गरिमा की शुरुआती पढ़ाई केसीएम स्कूल से हुई। इंटर कर डीयू में मिरांडा के बाद आईआईटी इंदौर से पढ़कर गरिमा ने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य बनाया। गरिमा के बड़े भाई रक्षा मंत्रालय में सेक्शन आँफीसर व दूसरा एनडीए में कैप्टन के पद पर हैं। अब यूपीएससी का परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद एडवोकेट रामौतार सिंह के परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं है। रात तक उनके घर बधाई देने वालों का सिलसिला जारी रहा। इनमें मुरादाबाद में शासकीय अधिवक्ता सुरेन्द्र पाल सिंह समेत तमाम लोग मौजूद रहे।



