मथुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि यहां का वातावरण देखकर उनकी बोलने की इच्छा कम हो रही है। उन्होंने कहा कि जिस माहौल का उन्होंने यहां अनुभव किया, उसमें मौन रहना ही अधिक उचित प्रतीत होता है।
अपने उद्बोधन में उन्होंने भारत की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि भारत ही दुनिया की आत्मा है और जब तक भारत रहेगा, तब तक विश्व का अस्तित्व भी बना रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि भारत पूर्ण वैभव के साथ आगे बढ़ेगा तो पूरी दुनिया समृद्ध होगी, लेकिन वर्तमान में विश्व अपनी आत्मा से भटक गया है, जिससे उसकी स्थिति अस्थिर होती जा रही है।
गौसंरक्षण के विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि समाज को गौभक्त बनाने की आवश्यकता है, तभी गौहत्या स्वतः रुक सकेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सत्ता में बैठे लोगों के मन में भी यह भावना है, लेकिन कई प्रकार की कठिनाइयों के कारण ठोस कदम उठाने में बाधाएं आती हैं। ऐसे में समाज का सहयोग बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि गौ-जागृति को मजबूत करना होगा और जब जनभावना तैयार हो जाएगी तो व्यवस्था को भी उसे स्वीकार करना पड़ेगा। इसी संदर्भ में उन्होंने राम मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि 2014 से 2019 तक मंदिर का निर्माण नहीं हो सका, लेकिन 2019 के बाद जनभावना मजबूत होने पर मार्ग प्रशस्त हुआ।
संघ प्रमुख ने कहा कि समाज जैसा बनेगा, देश भी वैसा ही बनेगा। हमारे पास संतों की समृद्ध परंपरा है, जिसका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संत और संघ मिलकर कार्य करेंगे—संत अपने कार्य में लगे रहेंगे और संघ समाज की रक्षा के लिए तत्पर रहेगा।
अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब भारत विश्व गुरु बनकर पूरी दुनिया को एक नई दिशा और सुंदर अनुभव प्रदान करेगा।
