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उत्तराखंड में 5 नए मंत्री बने, शपथ कराई गई

March 20, 2026

उत्तराखंड में 5 नए मंत्री बने, शपथ कराई गई

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में पांच विधायकों को शामिल कर इसका विस्तार किया गया है।

देहरादून , 20 मार्च 26, लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने नवनियुक्त मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण करने वालों में राजपुर से विधायक खजान दास, रुद्रप्रयाग से भरत सिंह चौधरी, हरिद्वार से मदन कौशिक, रुड़की से प्रदीप बत्रा और भीमताल से राम सिंह कैरा शामिल हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी नवनियुक्त मंत्रियों को बधाई देते हुए कहा कि उनका व्यापक अनुभव राज्य के लिए लाभदायक होगा।

March 16, 2026

माता पिता की गुहार: बेटे के हत्यारों को गिरफ्तार करो

माता पिता ने लगायी बेटे की हत्या में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने की गुहार
हरिद्वार, 16 मार्च। विष्णु लोक कालोनी निवासी दिव्यांग ई रिक्शा चालक मनीष की हत्या के मामले में मृतक के माता पिता ने पुलिस से पूरे मामले की गहराई से जांच कर हत्या में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने की गुहार लगायी है। मृतक ई रिक्शा चालक के पिता रामाश्रय एवं माता रानी ने प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि मनीष एक फरवरी से लापता था। इसके बाद उन्होंने पुलिस में उसकी गुमशुदगी दर्ज करायी। गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद जब पुलिस ने जांच की तो पता चला कि ज्वालापुर निवासी अयान ने काॅल करने के बहाने मनीष का मोबाइल लेकर भाग गया था। जब मनीष ने उसके घर जाकर मोबाइल वापस मांगा और पुलिस में जाने की धमकी दी तो अयान ने अपने साथी बिलाल के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी और शव प्लास्टिक के कट्टे में भरकर झाड़ियों में फेंक दिया था। इसके बाद पुलिस ने मनीष का शव बरामद करने के साथ अयान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन बिलाल को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। मृतक मनीष माता पिता ने आरोप लगाया कि मनीष की हत्या केवल मोबाइल फोन की वजह से नहीं हुई। बल्कि षड़यंत्र के तहत की गयी है। इसमें अयान तथा बिलाल के अलावा कई अन्य लोग शामिल हैं। इसलिए पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें सजा दिलाए। मृतक के माता पिता ने कहा कि वे मेहनत मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। मनीष की हत्या के बाद उसके तीन बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी भी उन पर आ गयी है।

जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस-रवि बहादुर


हरिद्वार, 16 मार्च। ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक रवि बहादुर ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश में जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभा रही है। हाल ही में गैरसैंण में संपन्न हुए विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस ने जनहित के तमाम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस नेताओं के साथ प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए विधायक रवि बहादुर ने कहा कि कांग्रेस के दबाव के चलते विधानसभा सत्र पूरे पांच दिन चला और कांग्रेस विधायक सदन में सरकार को घेरने में कामयाब रहे। एकजुट विपक्ष ने सत्ता पक्ष को जनहित से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने के लिए मजबूर किया। बजट को निराशाजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि बजट में युवा, महिलाओं, बेरोजगार, किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है। पलायन जैसी समस्या का भी कोई समाधान बजट में दिखाई नहीं देता है। अगले वर्ष हरिद्वार में कुंभ मेला होना है। लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण में कुंभ मेले की चर्चा के दौरान हरिद्वार का नाम तक नहीं लिया गया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक शर्मा ने कहा कि बजट सत्र में कांग्रेस विधायकों ने जनता से जुड़े तमाम मुद्दे और सरकार की विफलता को उजागर करने में कामयाब रहे। मनोज सैनी ने कहा कि विपक्ष को दुश्मन के रूप में देख रही सरकार का रूख जनभावनाओं के अनुरूप नहीं है। जनता गैस की किल्लत से जूझ रही है। सरकार और प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद गैस एजेंसियों पर रोजाना लंबी लाईनें लग रही हैं। सोम त्यागी ने कहा कि भाजपा के पास हिंदू मुसलमान के अलावा कोई मुद्दा नहीं है। लेकिन प्रदेश की जनता अब भाजपा के बहकावे में आने वाली नहीं है। वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री पूनम भगत ने कहा कि कांग्रेस जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष करती रहेगी। प्रैसवार्ता में वरिष्ठ कांग्रेस नेता संजय सैनी, विकास चंद्रा, विभाषा सिन्हा, विशाल प्रधान, आशु, राजीव चैधरी, समर्थ अग्रवाल, समीर त्यागी, महरूफ सलमानी सहित कई कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

March 15, 2026

महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने जूना अखाड़े के श्रीमहंतों पर लगाए गंभीर आरोप

हरिद्वार, 15 जनवरी। हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज ने जूना अखाड़े के चार श्रीमहंतों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने अखाड़े के चार श्रीमहंतों पर अखाड़े और सनातन परम्परा को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 30 नवंबर को जूना अखाड़े ने एक पत्र जारी कर उन्हें और उनके गुरु को अखाड़े से निष्कासित कर दिया था। सोशल मीडिया से इसकी जानकारी मिलने पर उन्होंने निष्कासन के आरोपों का जवाब एक करोड़ की मानहानि के साथ अधिवक्ता के माध्यम से अखाड़े के पदाधिकारियों को भेजा था। लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अखाड़े द्वारा उन पर लगाए गए सभी आरोप झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी जूना अखाड़े में नागा दीक्षा और अखाड़े की सदस्यता नहीं ली। वर्ष 2007 में प्रयागराज में संतों द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर के रूप में सम्मानित किया गया था। वर्ष 2021 में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी द्वारा उनका अभिषेक किया गया था और इस प्रक्रिया को किसी अन्य पदाधिकारी द्वारा निरस्त नहीं किया जा सकता। ना ही किसी को उन्हें निष्कासित करने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाने के नाम पर लाखों रूपए की धनराशि ली जाती है। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने यह आरोप भी लगाया कि कुंभ मेले में कुछ लोगों को अस्थायी रूप से नागा साधु बनाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिसका उन्होंने विरोध किया है। फर्जी नागा के रूप में उन्होंने अपनी ही संस्था हिन्दू रक्षा सेना के लोगों को पकड़ा है। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरि गिरी, श्रीमहंत मोहन भारती, श्रीमहंत प्रेम गिरी और श्रीमहंत नारायण गिरी पर आरोप लगाते हुए उनका पंक्ति पत्तल वहिष्कार किए जाने की घोषणा करते हुए कहा कि वह इन चारों को अपने यहां पंक्ति में नहीं बुलाएंगे और न ही उनके यहां जाएंगे। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने श्रीमहंत हरि गिरी से अखाड़े की आय-व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग करते हुए जिस व्यक्ति को फर्जी संत और कालनेमि बताकर पूर्व में जिसका निष्कासन किया गया था। अखाड़े के पदाधिकारी आज उसी को जगद्गुरु बना रहे हैं। जबकि उन्हें जगद्गुरु बनाने का कोई अधिकार ही नहीं है। उन्होंने अखाड़े के पदाधिकारियों पर इस्लामिक जेहादियों से सांठगांठ का आरोप भी लगाया और कहा कि उनकी हत्या करायी जा सकती है। केंद्र सरकार से संबंधित लोगों की संपत्ति और गतिविधियों की विशेष जांच एजेंसी से जांच कराने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित मांग करते हुए स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि वह जीवन भर सनातन धर्म, गौसेवा और संतों की सेवा के लिए कार्य करते रहेंगे तथा देशभर में धर्म जागरण के लिए निरंतर अभियान चलाते रहेंगे। प्रैसवार्ता के दौरान स्वामी सत्यव्रतानंद सरस्वती, स्वामी ओमानंद, प्रकाशानंद सरस्वती, वीरेन्द्र स्वरूप, प्रज्ञानंद गिरि, लक्की वर्मा, अमित वर्मा व लक्की राठौर आदि मौजूद रहे।

March 11, 2026

विश्व किडनी दिवस 2026* : *”सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य लोगों की देखभाल, पृथ्वी की रक्षा

हरिद्वार। विश्व किडनी दिवस एक वार्षिक वैश्विक अभियान है, जिसका उद्देश्य किडनी स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और विश्वभर में किडनी रोग के बोझ को कम करना है। इस वर्ष इसे 12 मार्च को मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम दो परस्पर जुड़ी प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है: प्रत्येक व्यक्ति के लिए किडनी उपचार तक समान पहुंच सुनिश्चित करना और पर्यावरणीय रूप से सतत स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना। यह मान्यता देती है कि मानव स्वास्थ्य और पृथ्वी का स्वास्थ्य एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, और एक की सुरक्षा के लिए दूसरे की रक्षा आवश्यक है।

किडनियां अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं जो जीवन बनाए रखने वाले कई कार्य करती हैं। वे रक्त से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल को छानती हैं, रक्तचाप को नियंत्रित करती हैं, इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखती हैं, और ऐसे हार्मोन बनाती हैं जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन तथा हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। जब किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो शरीर में हानिकारक विषैले तत्व जमा होने लगते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) की व्यापकता बढ़ रही है और वर्तमान में अनुमान है कि प्रत्येक 100 में से लगभग 15-20 लोगों में किसी न किसी स्तर की CKD मौजूद है। यह अब विश्वभर में मृत्यु के पांचवें प्रमुख कारण के रूप में उभर रही है। यह बीमारी धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती है, जिससे कई लोगों को उन्नत अवस्था तक अपनी बीमारी का पता नहीं चलता। इसके प्रमुख जोखिम कारकों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा और किडनी रोग का पारिवारिक इतिहास शामिल हैं। तीव्र किडनी चोट (AKI), जो अवसर संक्रमण, निर्जलीकरण या विषैले पदार्थों के संपर्क से होती है, भी विश्वभर में बीमारी और मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारण है।

“सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य” का आह्वान देशों के बीच और देशों के भीतर किडनी उपचार में गहरी असमानताओं को दर्शाता है। प्रारंभिक जांच, निदान सेवाओं, आवश्यक दवाओं, डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण तक पहुंच में व्यापक अंतर है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में डायलिसिस सीमित या महंगा हो सकता है, और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है। यहां तक कि समृद्ध देशों में भी ग्रामीण समुदायों, जातीय अल्पसंख्यकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच असमानताएं बनी रहती हैं। हमारे देश में भी अधिकांश लोग अपनी जेब से अधिक खर्च, सीमित बीमा कवरेज और भौगोलिक बाधाओं का सामना करते हैं। इन असमानताओं को दूर करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का विस्तार करना, सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना और सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग कार्यक्रम लागू करना आवश्यक है। प्रारंभिक पहचान और रोकथाम की रणनीतियां विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे किफायती हैं, रोग की प्रगति को धीमा कर सकती हैं और महंगे उपचारों की आवश्यकता को कम कर सकती हैं।

इस वर्ष की थीम किडनी उपचार, विशेषकर डायलिसिस, के पर्यावरणीय प्रभाव पर भी ध्यान आकर्षित करती है। हेमोडायलिसिस, जो किडनी विफलता के रोगियों के लिए जीवनरक्षक उपचार है, संसाधन-गहन प्रक्रिया है। प्रत्येक सत्र में बड़ी मात्रा में पानी और बिजली की आवश्यकता होती है तथा डिस्पोजेबल सामग्री से काफी प्लास्टिक और चिकित्सा कचरा उत्पन्न होता है। जब इसे विश्वभर के लाखों रोगियों के संदर्भ में देखा जाए, तो इसका पर्यावरणीय प्रभाव बहुत बड़ा हो जाता है। टेलीमेडिसिन और स्थानीय उपचार केंद्र न केवल अधिक सुविधाजनक हैं, बल्कि रोगियों और पर्यावरण दोनों के लिए अधिक अनुकूल विकल्प हैं। दूसरी ओर, बढ़ता तापमान, प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाएं निर्जलीकरण, हीट स्ट्रेस और विषैले पदार्थों के संपर्क के माध्यम से किडनी रोग के जोखिम को बढ़ाती हैं। इस प्रकार, किडनी स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य प्रदाताओं और नीति-निर्माताओं को अधिक टिकाऊ किडनी देखभाल मॉडल की दिशा में कार्य करना चाहिए। जल पुनर्चक्रण प्रणालियां, ऊर्जा-कुशल डायलिसिस मशीनें और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन जैसी नवाचार तकनीकें पर्यावरणीय प्रभाव को काफी कम कर सकती हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और हरित खरीद नीतियां कार्बन उत्सर्जन को घटा सकती हैं। टेलीमेडिसिन सेवाएं नियमित परामर्श और फॉलो-अप के लिए यात्रा की आवश्यकता को कम कर सकती हैं
रोकथाम सबसे प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल रणनीतियों में से एक है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है और मधुमेह, किडनी रोग तथा हृदय रोग के जोखिम को कम किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत के लिए निम्नलिखित कदम अपनाएं:

1. धूम्रपान न करें। यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ना आपके स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

2. रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखें।

3. स्वस्थ वजन बनाए रखें। मोटापा मधुमेह और किडनी रोग के जोखिम को बढ़ाता है।

4. संतुलित और पौष्टिक आहार लें। अत्यधिक नमक, संतृप्त वसा और साधारण

कार्बोहाइड्रेट से बचें। पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ पिएं।

5. अप्रमाणित और गैर-वैज्ञानिक वैकल्पिक उपचारों से बचें।

6. दर्दनाशक और एंटी-एसिड दवाओं का स्वयं सेवन न करें।

7. सप्ताह में 4-5 दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। प्रतिदिन आधा घंटा चलना

भी लाभदायक है।

8. नियमित योग लाभकारी है और तनाव कम करने में सहायक है।

9. प्रतिवर्ष स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं।

इन उपायों से किडनी विफलता की दर कम की जा सकती है और महंगे उपचारों पर निर्भरता घटाई जा सकती है।

सरकारी नीतियां और अंतरराष्ट्रीय सहयोग “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य” को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य रणनीतियों में किडनी रोग की रोकथाम और प्रबंधन को शामिल करना, प्रारंभिक पहचान कार्यक्रमों को वित्तीय सहायता देना और सतत स्वास्थ्य अवसंरचना में निवेश करना आवश्यक है। पोर्टेबल या पहनने योग्य डायलिसिस उपकरण, कृत्रिम किडनी, प्रारंभिक निदान के बेहतर बायोमार्कर और टिकाऊ चिकित्सा सामग्री जैसे नवाचार रोगी देखभाल में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। सरकार को किडनी प्रत्यारोपण के लिए पात्र रोगियों की प्रक्रिया को प्राथमिकता और तीव्रता से आगे बढ़ाना चाहिए।

सामुदायिक सहभागिता और शिक्षा भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जन-जागरूकता अभियान लोगों को जोखिम कारकों, नियमित जांच के महत्व और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी दे सकते हैं।

नैतिक दृष्टि से यह थीम स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी को रेखांकित करती है कि वे रोगी देखभाल के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा का भी संतुलन बनाए रखें। जीवनरक्षक उपचार प्रदान करते समय पृथ्वी को न्यूनतम हानि पहुंचाना आवश्यक है।

अंत में, “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य लोगों की देखभाल, पृथ्वी की रक्षा” विश्व किडनी दिवस 2026 का संदेश है कि किडनी स्वास्थ्य के लिए एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जाए। रोकथाम को प्राथमिकता देकर, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाकर, नवाचार को अपनाकर और पर्यावरण की रक्षा करके हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं जहां गुणवत्तापूर्ण किडनी उपचार सभी के लिए सुलभ हो।

याद रखें, आपकी किडनियां हीरे की तरह हैं एक बार क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता

प्रोफेसर (डॉ.) संजीव गुलाटी

एमडी, डीएनबी (बाल रोग), डीएम, डीएनबी (नेफ्रोलॉजी) एफआईएसएन, एफआईएपी (ऑस्ट्रेलिया), एफआरसीपीसी (कनाडा), एफआईएसओटी

चेयरमैन, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी प्रत्यारोपण, फोर्टिस अस्पताल समूह, एनसीआर

एडजंक्ट प्रोफेसर, नेफ्रोलॉजी विभाग, मणिपाल विश्वविद्यालय सदस्य, गवर्निंग बॉडी, इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांट पूर्व सचिव, नॉर्थ ज़ोन चैप्टर, इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (ISN)

पूर्व अध्यक्ष, इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी

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