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पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान को संगठन सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम

February 14, 2026

पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान को संगठन सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम

लखनऊ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महा अभियान का शुभारंभ करते ओमप्रकाश धनखड़ और प्रदेश महामंत्री धर्मपाल सिंह

लखनऊ 14 फरवरी 2026। भारतीय जनता पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश में शुरू किए जा रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान की प्रदेश कार्यशाला शनिवार को बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनऊ स्थित सभागार में सम्पन्न हुई। कार्यशाला में पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री एवं प्रशिक्षण अभियान के राष्ट्रीय सहसंयोजक श्री ओमप्रकाश धनखड़, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री श्री पंकज चौधरी, प्रदेश महामंत्री (संगठन) श्री धर्मपाल सिंह, प्रशिक्षण महाभियान के उत्तर पूर्व क्षेत्र (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार) के क्षेत्रीय प्रभारी, पार्टी के प्रदेश महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद श्री अमर पाल मौर्य, उत्तराखंड के पूर्व महामंत्री श्री राजू भंडारी ने उपस्थित प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण महाभियान को लेकर विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन किया। कार्यशाला का संचालन पार्टी के प्रदेश महामंत्री एवं प्रशिक्षण अभियान के प्रदेश संयोजक श्री अनूप गुप्ता ने किया। पार्टी ने तय किया है कि बूथ स्तर तक प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जायेंगे।
पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री एंव प्रशिक्षण महाभियान के राष्ट्रीय संयोजक श्री ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि प्रशिक्षण तरासने की प्रक्रिया है। जो सीखता है वह बढ़ता है, जो सीखना बंद कर देता है वो बढ़ना भी बंद कर देता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति निर्माण से ही संगठन का निर्माण होता है। श्री धनखड़ ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान को संगठन सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह अभियान कार्यकर्ताओं को विचार, व्यवहार और नेतृत्व तीनों स्तरों पर समृद्ध करेगा। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय और एकात्म मानववाद का दर्शन ही भाजपा की कार्यसंस्कृति की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं, बल्कि कार्यकर्ता के व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया है। इससे संगठन की कार्यपद्धति में एकरूपता आएगी और सेवा, समर्पण तथा राष्ट्रहित की भावना और अधिक प्रखर होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह महाअभियान भाजपा को बूथ स्तर तक और अधिक संगठित, सक्रिय और प्रभावी बनाएगा।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री श्री पंकज चौधरी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के संदर्भ में कहा कि यह अभियान कार्यकर्ताओं को वैचारिक रूप से सशक्त, अनुशासित और सेवा भाव से ओत-प्रोत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित ‘एकात्म मानववाद’ की विचारधारा आज भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
श्री चौधरी ने कहा कि प्रशिक्षण महाअभियान के माध्यम से बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कार्यकर्ताओं को संगठन की कार्यपद्धति, सरकार की नीतियों और जनसेवा के मूल मंत्र से जोड़ा जा रहा है। यह अभियान केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प को सुदृढ़ करने का महायज्ञ है।
उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करता है और प्रशिक्षण से उसकी क्षमता, दक्षता और वैचारिक स्पष्टता में वृद्धि होती है। यह महाअभियान संगठन की मजबूती, विस्तार और अंत्योदय के लक्ष्य की प्राप्ति में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भाजपा की आत्मा, उसकी वैचारिक प्रतिबद्धता और उसके कार्यकर्ता निर्माण की निरंतर चलने वाली साधना का अभिन्न अंग है।
श्री चौधरी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन हमें एक देश एक विधान के मंत्र को सिखाता है, वहीं पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का एकात्म मानववाद हमें सिखाता है कि राजनीति का केंद्र सत्ता नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति है। इसलिए यह प्रशिक्षण कार्यकर्ताओं में समाज के प्रति संवेदनशीलता और दायित्व बोध जागृत करने का भी सशक्त माध्यम है,और वो भी सेवा, समर्पण और समरसता के भाव के साथ।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री पंकज चौधरी ने कहा कि यह प्रशिक्षण महाभियान कार्यकर्ता को यह स्मरण कराता है कि संगठन व्यक्ति से बड़ा है, और राष्ट्र सर्वाेपरि है। प्रशिक्षण प्राप्त कार्यकर्ता केवल चुनावी योद्धा नहीं, बल्कि समाज का पथ प्रदर्शक बनता है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी कहते है कि हम राजनीतिक क्षेत्र में संगठन आधारित राजनीतिक दल हैं। हमारा संगठन कार्यकर्ता आधारित है एवं हमारा कार्यकर्ता विचारधारा आधारित है। श्री चौधरी ने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि इस प्रशिक्षण वर्ग को पूर्ण निष्ठा, अनुशासन और आत्मचिंतन के साथ आत्मसात करें तथा स्व. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के विचारों को अपने आचरण में उतारते हुए संगठन और राष्ट्र सेवा के पथ पर और अधिक दृढ़ता से आगे बढ़ें।
पार्टी के प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान को संगठनात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह अभियान कार्यकर्ताओं में वैचारिक स्पष्टता, अनुशासन और कार्यकुशलता को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि बूथ स्तर तक सक्रिय और प्रशिक्षित कार्यकर्ता ही संगठन की वास्तविक शक्ति होते हैं। यह महाअभियान कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति-नीति, सेवा कार्यों और जनसंपर्क अभियान से जोड़ते हुए उन्हें अधिक प्रभावी बनाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस व्यापक प्रशिक्षण से संगठन और अधिक सुदृढ़ होगा तथा राष्ट्र निर्माण के संकल्प को नई ऊर्जा मिलेगी। यह अभियान केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि कार्यकर्ता निर्माण की सतत प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित यह प्रशिक्षण कार्यकर्ताओं को राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और सेवा भाव की दिशा में और अधिक सजग बनाता है। संगठन का प्रत्येक कार्यकर्ता जब विचार से दृढ़ और व्यवहार से विनम्र होगा, तभी भाजपा की शक्ति समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी।
प्रदेश महामंत्री (संगठन) ने विश्वास व्यक्त किया कि यह महाअभियान संगठनात्मक एकजुटता को और मजबूत करेगा तथा आगामी दायित्वों के निर्वहन में कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा और स्पष्टता प्रदान करेगा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के अन्तर्गत प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग तीन दिन का होगा। जबकि जिला स्तर पर दो दिन व मंडल स्तर चौबीस घंटे का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया जाएगा जबकि बूथ स्तर पर दो सत्रों में वर्ग आयोजित किए जायेंगे।
प्रशिक्षण महाभियान के उत्तर पूर्व क्षेत्र (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार) के क्षेत्रीय प्रभारी, पार्टी के प्रदेश महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद श्री अमर पाल मौर्य ने पीपीटी के माध्यम से पूरे प्रशिक्षण अभियान के संदर्भ में विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए अभियान की रूपरेखा साझा की। उत्तराखंड के पूर्व महामंत्री श्री राजू भंडारी ने भी प्रशिक्षण महाभियान के संदर्भ में कार्यशाला को संबोधित किया।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के लिए पार्टी के प्रदेश महामंत्री एवं सदस्य विधान परिषद श्री अनूप गुप्ता को प्रदेश संयोजक बनाया गया है। जबकि प्रदेश उपाध्यक्ष श्री बृज बहादुर, श्री त्रयम्बक त्रिपाठी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री रामशंकर कठेरिया, पूर्व सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, विभाग/प्रकोष्ठ के संयोजक श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव, पार्टी के प्रदेश मंत्री श्रीमती मीना चौबे और सोशल मीडिया प्रदेश संयोजक श्री अंकित सिंह चन्देल को सहसंयोजक बनाया गया है।
कार्यशाला में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, जिला प्रभारी, जिलाध्यक्ष, मोर्चो के प्रदेश अध्यक्ष/महामंत्री, प्रदेश मीडिया प्रभारी, सोशल मीडिया व आईटी के प्रदेश संयोजक, प्रशिक्षण महाभियान की प्रदेश, क्षेत्र और जिला टोली के सदस्य सम्मिलित हुए।

February 13, 2026

सनातन हित के पार्टी बनायेंगे अलंकार अग्निहोत्री

Posted on 13.02.2026 Time 09.31 PM Bareilly News Alankar Agnihotri ex City Magistrate Bareilly 

अलंकार अग्निहोत्री का राजनीति करने का ऐलान

बरेली, 13 फरवरी 2026, यूजीसी नियमों के विरोध में इस्तीफा देने वाले सिटी मैजिस्ट्रेट और अब निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री Alankar Agnihotri ने राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है। उन्होंने सनातन के नाम पर अन्य दलों की भांति पार्टी बनाने ऐलान किया है।

श्री अग्निहोत्री ने कहा जैसे अपना दल, निषाद पार्टी, राजभर समाज की पार्टियां हैं उसी तरह सनातन के लिए पार्टी होगी। ज्ञातव्य है कि अलंकार अग्निहोत्री बरेली में तैनात थे। उन्होंने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर त्यागपत्र दिया था। उनका त्यागपत्र स्वीकार नहीं हुआ। ये सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। किंतु सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया और डीएम ऑफिस शामली से संबद्ध कर दिया।

इस्तीफा देने के बाद सलाहकार अग्निहोत्री को खासी लोकप्रियता मिली। विशेष रूप से ब्राह्मण समाज उनके पक्ष में खड़ा नजर आया। कई स्थानों पर धरना प्रदर्शन हुआ।

भगवा हो सकता है झंडे का rang

उन्होंने अभी पार्टी के नाम की घोषणा नहीं की है। पार्टी का नाम और झंडा, रंग आदि शीघ्र घोषित होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि उनके झंडे का रंग भगवा होगा।

इस्तीफे पर संपादकीय टिप्पणी में लिख दिया गया था कि राजनीति में जाएंगे

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February 8, 2026

मन में 2047 में देश विभाजन का डर नहीं, अखंड भारत का संकल्प मजबूत बनाओ

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का उदघोष, 2047 में विभाजन का डर पालने की बजाए, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो

DR MOHAN BHAGWAT SRSANGHCHALAK RSS

मुम्बई में संघ यात्रा के सौ वर्ष नए क्षितिज व्याख्यान माला के पहले सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 08.09 PM, RSS Rashtriya Swayamsevak Sangh, Sar Sanghchalak, Mumbai Samvad, #RSS100

मुंबई, 08 फरवरी। देश विरोधी शक्तियों के देश विभाजन के मंसूबों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी ने कहा कि आप 2047 में देश विभाजन का डर पालने की बजाय, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो। जो 500 साल में सुल्तान बादशाह यहां रहकर नहीं कर सके, 200 साल में अंग्रेज नहीं कर सके। वह स्वतंत्र भारत में क्यों व कैसे होगा, यह 1947 नहीं है। हम बहुत आगे बढ़ गए हैं, अब भारत को तोड़ने वाले टूट जाएंगे। भारत जुड़ जाएगा, और यह होगा। यह संकल्प मन में मजबूत बनाओ। तो ये जो कुछ लोग दुस्वप्न देख रहे हैं, उनके मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। हम सब लोग हैं, हम होने नहीं देंगे।

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘संघ यात्रा के १०० वर्ष : नए क्षितिज’ दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में मुंबई के ९०० से अधिक प्रतिष्ठित मान्यवरों को संबोधित किया। नेहरू सेंटर सभागार, वरळी में रविवार, ०८ फरवरी को संपन्न प्रश्नोत्तर सत्र में डॉ. मोहन भागवत जी ने उपस्थित सदस्यों द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विषयों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। इस अवसर पर मंच पर पश्चिम क्षेत्र संघचालक डॉ. जयंतीभाई भाडेसिया, कोंकण प्रांत संघचालक अर्जुन चांदेकर, मुंबई महानगर संघचालक सुरेश भगेरिया उपस्थित थे। पूछे गए कुल १४३ प्रश्नों को १४ श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया। इनमें संघ नीति, हिन्दुत्व, राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीति, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, संस्कृति, कला, खेल व भाषा, जीवनशैली, पर्यावरण आदि विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल रहे।

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार पर सरसंघचालक जी ने बांग्लादेश के सवा करोड़ हिन्दुओं से संगठित होने का आह्वान किया। ऐसा होने पर अत्याचार पर स्वतः ही रोक लग जाएगी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र इनमें से कोई नहीं, बल्कि हिन्दू ही संघ का सरसंघचालक होगा। उन्होंने कहा कि संघ का सरसंघचालक बनने के लिए किसी भी जाति का होना न तो बाधा है और न ही कोई अनिवार्य योग्यता। भविष्य में अनुसूचित जाति या जनजाति के कार्यकर्ता भी सरसंघचालक बन सकते हैं।

जिन पर पीढ़ी दर पीढ़ी अन्याय या अत्याचार हुआ है, उनके सर्वांगीण उत्थान होने तक तथा उनके मन में सुरक्षा की भावना उत्पन्न होने तक संविधान सम्मत आरक्षण जारी रहना चाहिए, यह संघ की स्पष्ट भूमिका है।

संघ के स्वयंसेवकों को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों तथा सभी प्रकार के प्रयासों में सहभागी होना चाहिए, यह संघ की भूमिका है। किंतु केवल कानून बनाकर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करना कठिन है, इसके लिए संस्कारित समाज मन का निर्माण उतना ही महत्वपूर्ण है। साथ ही कोई भी व्यवस्था मूल रूप से भ्रष्ट नहीं होती, बल्कि उस व्यवस्था में कार्य करने वाले व्यक्तियों का मन भ्रष्ट होता है और उसी कारण व्यवस्था भ्रष्ट होती है।

जबरदस्ती या लालच देकर धर्मांतरण किया जाता है तो वह निंदनीय है और उसका प्रत्युत्तर घर वापसी होगा, यह स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा या स्वप्रेरणा से धर्म परिवर्तन करता है तो उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए। जनसंख्या का अनुपात केवल जन्मदर में कमी से नहीं बदलता, बल्कि धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ के कारण भी बदलता है, इस ओर ध्यान दिलाते हुए अवैध घुसपैठ के संदर्भ में ‘डिटेक्ट एंड डिपोर्ट’ नीति को कठोरता से लागू करने का आह्वान किया।

हिन्दू और सिक्ख पहले से ही एक थे और आज भी उनके बीच रोटी-बेटी के संबंध हैं। उनका रक्त संबंध है। पूजा पद्धति अलग मानी जा सकती है, उनकी विशिष्टता को मान्यता दी जानी चाहिए, लेकिन वे अलग नहीं हैं। हम सभी धर्म एक ही परंपरा से आए हैं। गुरु ग्रंथ साहिब में केवल सिक्ख गुरुओं की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के संतों की वाणी संकलित की गई है। ‘हिंद की चादर’ के रूप में पहचानी जाने वाली यह प्राचीन एकता पुनः स्थापित करनी है। समाज के नाते हम सभी एक हैं, यह ध्यान में रखना चाहिए। हिन्दू नाम से कोई अलग धर्म अस्तित्व में नहीं है। आज जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है, वही प्राचीन सनातन धर्म है। तथागत बुद्ध ने अपने उपदेशों के माध्यम से इसी सनातन धर्म में समयानुकूल सुधार किए। आधुनिक काल में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भी इस ओर इंगित किया।

ईसा मसीह द्वारा प्रतिपादित ईसाईयत और पैगंबर मोहम्मद द्वारा बताए गए इस्लाम का स्वरूप आज उसी रूप में दिखाई नहीं देता। इसका कारण यह है कि उनके बाद इन दोनों पंथों पर तत्कालीन राजनीति का प्रभाव बढ़ गया। परिणामस्वरूप इन पंथों की आध्यात्मिकता पीछे रह गई और राजनीतिक हित अधिक प्रभावी हो गए। इन पंथों के मूल आध्यात्मिक तत्वों को प्रोत्साहन दिया जाए तो विश्वभर के राजनीतिक संघर्ष कम हो सकते हैं।

भारत रत्न सम्मान प्राप्त न होने पर भी स्वातंत्र्यवीर सावरकर करोड़ों भारतीयों के हृदय पर राज कर रहे हैं। किंतु यदि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो इस सम्मान की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

भाजपा के सत्ता में आने से संघ को कोई प्रत्यक्ष लाभ हुआ ऐसा नहीं है, बल्कि समाज में संघ की बढ़ती शक्ति और स्वीकार्यता का लाभ समान विचारधारा और भारतीय नीतियों का पालन करने वाले दलों को मिला है। संघ के स्वयंसेवकों के निरंतर परिश्रम तथा समाज द्वारा संघ को मिले स्नेह और विश्वास के कारण ही संघ का कार्य बढ़ा है। संघ से संबंधित संस्थाओं, संगठनों या दलों पर संघ दबाव नहीं डालता। यहां कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को पर्याप्त स्वतंत्रता होती है, जिससे वे अपने क्षेत्र में आवश्यक निर्णय और प्रयोग जिम्मेदारी से कर सकते हैं। वे जो अच्छे कार्य करते हैं, उसका श्रेय उन्हीं को जाता है, लेकिन जहां कमियां रह जाती हैं, उसके प्रश्न अभिभावक के नाते हमारे पास आते हैं और उसकी नैतिक जिम्मेदारी हम लेते हैं। संघ का कार्य केवल व्यक्ति निर्माण का कार्य है। किसी विशेष क्षेत्र में कार्य करना संघ का कार्य नहीं है।

समान नागरिक संहिता पर अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि समाज की मानसिकता तैयार करके तथा सभी समाज घटकों को विश्वास में लेकर इस प्रकार का कानून लागू किया जाना चाहिए। उत्तराखंड तथा अन्य कुछ राज्यों में ऐसे प्रयोग हो रहे हैं, इसलिए हम उसका स्वागत करते हैं। भारत विविधता में एकता को बनाए रखने वाला देश है, यह सिद्धांत ऐसे कानून बनाते समय प्राथमिकता से ध्यान में रखना चाहिए।

संघ के कार्यकर्ताओं की औसत आयु २८ वर्ष है और इसे २५ वर्ष से नीचे लाने का प्रयास चल रहा है। देश का युवा देशभक्त और नैतिक आचरण करने वाला है। यदि उन्हें उनकी भाषा में विषय समझाए जाएं, तो वे उन्हें स्वीकार करते हैं और उसका आचरण भी करते हैं। इसलिए तार्किक पद्धति से उन्हें अपने मूल विचारों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्हें प्रयोग करने की स्वतंत्रता और अवसर देना चाहिए तथा यदि प्रयोग में कोई त्रुटि हो जाए तो उनके पीछे दृढ़ता से खड़ा रहना चाहिए। यदि वर्तमान पीढ़ी युवाओं की जिज्ञासा शांत करने की क्षमता विकसित करे, तो युवा पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी के समन्वय से भविष्य का सशक्त भारत निर्माण होगा। भारतीय दर्शन का प्रभाव अंतरात्मा तक पहुंचता है, जबकि पाश्चात्य प्रभाव बाहरी स्तर तक सीमित रहता है।

February 7, 2026

Hathras UGC  बिल के विरोध में पदयात्रा रोकी, अलंकार अग्निहोत्री धरने पर

  • अपने आवास के बाहर धरने पर बैठे  पंकज धवरिया व सस्पेंड पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री Alankar Agnihotri
DHARNA BY ALANKAR AGNIHOTRI IN HATHRAS

हाथरस में दिल्ली यात्रा रोके जाने के विरोध में धरने पर बैठे बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्रिनोहोत्री

Posted on : 07.02.2026 Saturday, Time: 08.35 PM,
हाथरस।यूजीसी बिल के विरोध में राष्ट्रीय सवर्ण परिषद द्वारा प्रस्तावित पदयात्रा को पुलिस ने रोक दिया। प्रशासन के अनुसार जिले में धारा 144 लागू होने के कारण किसी भी प्रकार के जुलूस या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरिया ने अकेले झंडा लेकर पदयात्रा शुरू करने का प्रयास किया, जिस पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान तीखी नोकझोंक हुई।
पदयात्रा रोकने की सूचना पर सस्पेंड पीसीएस अधिकारी Alankar Agnihotri अलंकार अग्निहोत्री भी हाथरस पहुंचे और पंकज धवरिया Pankaj Dhavariya के कंचन नगर स्थित आवास के बाहर उनके साथ जमीन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार डरी हुई है और उसका कोर वोटर उससे दूर हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि असल मुद्दों को उठाने वालों को रोका जा रहा है, जबकि कथित हिंदू सम्मेलनों को अनुमति दी जा रही है।
हाथरस से दिल्ली तक प्रस्तावित थी यात्रा
सवर्ण संगठनों की यह पदयात्रा हाथरस से दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास तक प्रस्तावित थी। सुबह से ही इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा और एसडीएम सदर राजबहादुर मौके पर मौजूद रहे। पदयात्रा में शामिल होने की घोषणा करने वाले कई संगठनों के पदाधिकारियों को पहले ही नजरबंद कर दिया गया था।
पदयात्रा रोके जाने के बाद पंकज धवरिया अपने आवास के बाहर धरने पर बैठ गए और प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी बिल और एससी/एसटी एक्ट के नाम पर समाज को बांटा जा रहा है और सरकार के इशारे पर पदयात्रा को जबरन रोका गया।

भारत का नेतृत्व राष्ट्रऋषि के हाथों में: योगी आदित्यनाथ

CM UP Yogi Adityanath & CM UK Pushkar Singh Dhami

उत्तराखंड के पौड़ी जनपद में यमकेश्वर इंटर कालेज के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

लखनऊ : 06 फरवरी, 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी तथा उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने आज पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड में इण्टर कॉलेज, यमकेश्वर के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने विद्यालय के मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री जी ने यमकेश्वर महादेव की पावन धरा को नमन करते हुए सभी को इण्टर कॉलेज के नवनिर्मित भवन की बधाई दी।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तराखण्ड विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। यह विकास एकतरफा नहीं है, बल्कि अपनी सभ्यता और संस्कृति तथा अपने उच्च आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विकास के नये आयाम स्थापित हो रहे हैं। भौतिक विकास जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि उसका एक पक्ष है। यह तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है। वास्तविक और सार्थक विकास वही है, जो अपनी सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का सम्मान करते हुए हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करे। शिक्षण संस्थानों को इसी सोच के साथ स्वयं को तैयार करना होगा, ताकि विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि संस्कार, कौशल तथा जीवन निर्माण के केन्द्र बनें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हर सनातन धर्मावलम्बी अपने आप को किसी न किसी गोत्र से सम्बन्धित करता है। यह गोत्र हमारी ऋषि परम्परा का प्रतिनिधित्व करता है, जो उनके प्रति हमारी कृतज्ञता को भी व्यक्त करता है। प्राचीनकाल में ऋषियों के आश्रम हमारी शिक्षा के केन्द्र थे, जिन्हें गुरुकुल भी कहते थे। यह गुरुकुल अध्ययन के साथ ही शिक्षा, शिल्प, कृषि, आयुर्वेद सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में पारंगत बनाने के केन्द्र भी थे। यहां से निकले छात्र जीवन संग्राम में अपने आपको असहाय नहीं पाते थे। उनके लिए कोई कार्य छोटा अथवा कठिन नहीं होता था।
जीवन में वही सफल होता है, जो सकारात्मक भाव के साथ अपने पुरुषार्थ और परिश्रम से आगे बढ़ने में विश्वास रखता है। यह हमारा सौभाग्य है कि वर्तमान में भारत का नेतृत्व राष्ट्रऋषि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के हाथों में है, जो देश को विकास की नित नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 हमारा ध्यान आकर्षित करती हैं कि विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान देने तक सीमित न रहे, बल्कि व्यावहारिक जानकारी प्रदान करने के केन्द्र भी बनें। हमें इस दिशा में बढ़ना होगा।
हमारे विद्यालय स्किल डेवलपमेन्ट के केन्द्र हो सकते हैं। उत्तराखण्ड सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इण्टर कॉलेज, यमकेश्वर में स्मार्ट क्लासेज, स्किल लैब, डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं हैं। वर्तमान समय की उभरती हुई तकनीकों का केन्द्र बिन्दु हमारे शिक्षण संस्थान बन रहे हैं। इस कॉलेज की स्थापना स्व श्री सोहन सिंह चौहान द्वारा की गयी थी। उस समय यमकेश्वर में साधन, सड़कें एवं विद्युत की व्यवस्था नहीं थी। आज गांव-गांव में बिजली, पेयजल तथा सड़कें हैं। आवागमन आसान हुआ है। अच्छी कनेक्टिविटी हो गई है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वह आज से लगभग 45 वर्ष पहले यहां आये थे। उस समय इस क्षेत्र में मेला लगा था। तब कॉलेज भवन काफी जर्जर था। आदित्य बिरला ग्रुप ने उत्तराखण्ड सरकार के साथ मिलकर कॉलेज के नवीन भवन के निर्माण को पूर्ण किया। अब इसमें और अच्छी शिक्षा मिले, यह हमारा संकल्प होना चाहिए। हमें बच्चों को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना होगा। आज आपके लिए शिक्षा आसान हो गई है। हम भी आई0आई0टी0, जे0ई0ई0, नीट तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बच्चों को तैयार कर सकते हैं। निर्धारित समय तक विद्यालय के उपयोग के बाद भी विद्यालय भवन का उपयोग हो। उसमें कुछ विशेष कक्षाएं चलायी जाएं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमें पाठ्यक्रम में भी कुछ नयापन करना चाहिए। यमकेश्वर महादेव का बहुत अच्छा मन्दिर है। यहां पर पर्यटन की सम्भावनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में विद्यालय को स्वयं को जोड़ना चाहिए। इसी प्रकार बागवानी, सब्जी की अच्छी खेती तथा ऑर्गेनिक फसलों के क्षेत्र में लोगों को तैयार करना चाहिए। यहां का जल प्राकृतिक और शुद्ध है। इस शुद्धता की कीमत हमें समझनी होगी। इस दिशा में नये प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। हमारे यह कार्य लोगों के लिए एक प्रेरणा होंगे। इस प्रेरणा का केन्द्रबिन्दु हमारे शिक्षण संस्थानों को बनना पड़ेगा।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि ‘विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं’ अर्थात विद्या मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है। शिक्षा में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को दिशा तथा समाज को संस्कार देती है और राष्ट्र के भविष्य को सशक्त बनाती है। शिक्षा के महत्व को समझते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी देश में नई शिक्षा नीति लेकर आए। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, व्यावहारिक एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए निरन्तर प्रयास कर रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी सनातन संस्कृति के रक्षक हैं। वह इसी भूमि में पैदा हुए हैं तथा उनके हृदय में देवभूमि उत्तराखण्ड के प्रति विशेष लगाव है। संन्यास, साधना और राष्ट्र सेवा का अद्भुत समन्वय योगी जी के व्यक्तित्व में दिखाई देता है। यह उन्हें एक साधारण राजनेता से कहीं ऊपर एक राष्ट्र पुरुष के रूप में स्थापित करता है। आज योगी जी ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में सुशासन की स्थापना की है। वह आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। आज उत्तर प्रदेश सुरक्षा, विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। उनका सादा जीवन, उच्च विचार और कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली आज की युवा पीढ़ी के लिए आदर्श है।
योगी जी ने भी इसी क्षेत्र में पढ़ाई की है। इसी क्षेत्र में साधारण परिस्थितियों में पैदा होने के बाद उन्होंने असाधारण काम किया है। उन्होंने अपने अनुशासन, परिश्रम और संकल्प से असाधारण ऊंचाइयां प्राप्त की हैं और आज देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे हैं। योगी जी का जीवन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हां, कितनी भी कठिन क्यों ना हों, यदि राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण का भाव हो, तो कोई भी कार्य असम्भव नहीं होता है। हर चुनौती एक अवसर बन जाती है।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत, उत्तराखण्ड के विद्यालयी शिक्षा (बेसिक एवं माध्यमिक) मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण तथा विद्यार्थी उपस्थित थे।

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