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केरल: महिलाओं को मुफ्त यात्रा की यूडीएफ की सौगात

May 18, 2026

केरल: महिलाओं को मुफ्त यात्रा की यूडीएफ की सौगात

त्रिअनंतपुरम, 18 मई 2026, केरल में, यूडीएफ सरकार ने राज्य परिवहन की बसों में महिला यात्रियों को मुफ्त यात्रा सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने बताया कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी बाद में दी जाएगी। वे अपनी कैबिनेट की पहली बैठक के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे।

कैबिनेट की बैठक में लिए गए अन्‍य निर्णयों में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायकों और रसोइया कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि करना शामिल है। राज्‍य में नई विधानसभा का सत्र इस महीने की 21 तारीख को आयोजित किया जाएगा जिसमें नए सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी और अध्यक्ष का चुनाव होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले साल अलापुझा जिले में पूर्व मुख्यमंत्री के रक्षकों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर हमले के आरोपों की फिर से: जांच के लिए एक विशेष दल का गठन किया जाएगा। श्री वी डी सतीशन ने कहा कि यह निर्णय राजनीतिक प्रतिशोध नहीं है।

May 14, 2026

हम सब एक हैं’, यह एकत्व की अनुभूति वर्ग में प्राप्त होती है – अतुल लिमये जी

नागपुर में कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय का शुभारम्भ

नागपुर, 11 मई 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय आज रेशीमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति भवन परिसर के महर्षि व्यास सभागार में प्रारंभ हुआ। शताब्दी वर्ष में हो रहे वर्ग के उद्घाटन अवसर पर सह सरकार्यवाह तथा वर्ग के पालक अधिकारी अतुल जी लिमये, सह सरकार्यवाह रामदत्त जी तथा जयपुर प्रांत संघचालक व वर्ग के सर्वाधिकारी महेंद्र सिंह मग्गो जी उपस्थित रहे। उन्होंने भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर वर्ग का शुभारम्भ किया। वर्ग में देशभर से 880 शिक्षार्थी सम्मिलित हुए हैं। प्रशिक्षण वर्ग में सामाजिक जागरूकता एवं सामाजिक परिवर्तन पर प्रशिक्षण दिया जाता है।

सह सरकार्यवाह अतुल लिमये जी ने कहा कि हमारा जन्म भारत में हुआ, संघ के संपर्क में आकर स्वयंसेवक बने और संघ शताब्दी वर्ष में कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय में सहभागी होना, यह हमारा सौभाग्य है। संघ की शताब्दी की यात्रा में उपहास, उपेक्षा, विरोध का सामना करना पड़ा। तीन बार प्रतिबंध का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों के त्याग, संघर्ष और प्रसंगानुरूप बलिदान के कारण यह यात्रा संभव हुई है। सामान्य दिखने वाले स्वयंसेवकों के असामान्य कर्तृत्व ने संघ को बनाया। उन्होंने कहा कि संघ की व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया विकेंद्रित है। व्यक्ति निर्माण का महत्त्वपूर्ण हिस्सा तो संघ की प्रतिदिन की शाखा है। उसी तरह संघ शिक्षा वर्ग भी व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है। 1927 से संघ शिक्षा वर्ग की शुरुआत हुई। समय के अनुसार वर्गों की पद्धति में परिवर्तन आया। लेकिन भारत हिन्दू राष्ट्र है, परम वैभव साध्य करने हेतु संपूर्ण समाज का संगठन का लक्ष्य, समाज संगठन के लिए व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया, यह तीन मूलभूत बातें नहीं बदली। नागपुर में आयोजन के कारण इस वर्ग का महत्व असाधारण है। शरीर के साथ मन की सिद्धता भी जरुरी है। वही प्रक्रिया इस वर्ग में होती है।

अतुल जी ने कहा कि अमृत काल के चरण के साक्षी बनने का सौभाग्य हमें प्राप्त हो रहा है। इस कालावधी का पूर्ण उपयोग करना होगा। वर्ग में शारीरिक, बौद्धिक प्रशिक्षण के साथ अलग अनुभूति मिलती है। अलग-अलग प्रांतों के लोग साथ में रहते हैं। ‘हम सब एक हैं’, यह एकत्व की अनुभूति वर्ग में प्राप्त होती है। गौतम बुद्ध जी ने कहा था कि मुक्ति का मार्ग मैं बताता हूँ, पर पहुँचते वही हैं जो उसी मार्ग का अनुसरण कर निरंतर चलते रहते हैं। अपने मार्ग पर चलने के लिए स्वयंसेवकों को सिद्ध करने के लिए इस वर्ग में तैयार किया जाता है।

यह वर्ग अगले 25 दिनों तक चलेगा और आगामी 4 जून को समापन होगा। समापन के अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत जी उपस्थित रहेंगे।

May 6, 2026

केमिकल अटैक की साजिश में तीन के खिलाफ NIA ने चार्जशीट दाखिल की

Logo NIA

नई दिल्ली, 06 मई 2026,उत्तर प्रदेश के एक आरोपी समेत तीन के खिलाफ एनआईए ने गुजरात की अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। तीनों ने आईएस आईएस के नेटवर्क से जुड़कर भारत में घातक रासायनिक हमले की साजिश रची थी। तीनों को एनआईए ने गिरफ्तार कर लिया था। इस षड्यंत में एक डॉक्टर भी शामिल था।

राष्ट्रीय अन्‍वेषण अभिकरण (एन.आई.ए) ने एक डॉक्टर समेत तीन लोगों के खिलाफ आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट से जुड़े एक षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप पत्र दायर किया है। इस षड्यंत्र में सार्वजनिक स्थानों पर जैविक विष का इस्तेमाल करके सामूहिक नरसंहार करने की योजना थी। हैदराबाद के डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन और उत्तर प्रदेश के सह-आरोपी आजाद तथा मोहम्मद सुहेल को गुजरात के अहमदाबाद की विशेष एनआईए अदालत में पेश किया गया है।

इस्लामिक स्टेट से जुड़े आरोपियों ने समन्वित तरीके से काम करते हुए कट्टरपंथी बनाए गए युवाओं को जिहाद का समर्थन करने और प्रतिबंधित हथियारों के माध्यम से आतंक फैलाने के लिए भर्ती किया। उन्होंने इस्‍लामिक स्‍टेट के नापाक एजेंडे को अंजाम देने के लिए रिसिन का इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी।

रिसिन अरंडी के बीजों से प्राप्त एक अत्यधिक विषैला पदार्थ है, जिसे रासायनिक हथियार की अनुसूची में वर्गीकृत किया गया है। यह मामला मूल रूप से गुजरात आतंक रोधी दस्ते द्वारा नवंबर 2025 में डॉ. मोहिउद्दीन की गिरफ्तारी के बाद दर्ज किया गया था। जांच के बाद दो अन्‍य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

गन्ना किसानों को 2026-27 के लिए 365 रु. प्रति क्विंटल FRP: शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह चौहान

केन्द्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान

सरकार का बड़ा किसान हितैषी फैसला
5 करोड़ गन्ना किसानों और 5 लाख श्रमिकों को मिलेगा लाभ, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत- श्री शिवराज सिंह

Posted on May 06, 2026, Time 02.06 PM

नई दिल्ली, 05 मई 2026, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने एक बार फिर किसानों के हित में बड़ा, संवेदनशील और दूरदर्शी निर्णय लिया है। चीनी सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो गन्ना किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें उत्पादन का बेहतर प्रतिफल दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

श्री चौहान ने कहा कि यह निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि केंद्र सरकार किसानों की समृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा लिया गया यह फैसला देश के करोड़ों गन्ना उत्पादक किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला है। उन्होंने कहा कि 10.25 प्रतिशत की बेसिक रिकवरी दर पर 365 रु. प्रति क्विंटल FRP स्वीकृत किया गया है। साथ ही, 10.25 प्रतिशत से अधिक रिकवरी पर प्रत्येक 0.1 प्रतिशत वृद्धि के लिए 3.56 रु. प्रति क्विंटल का प्रीमियम दिया जाएगा, जबकि 10.25 प्रतिशत से कम रिकवरी पर इसी दर से FRP में कमी का प्रावधान है।

श्री चौहान ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि केंद्र सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक अत्यंत मानवीय और किसान-पक्षीय निर्णय भी लिया है। जिन चीनी मिलों में रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम रहेगी, वहां भी किसानों के FRP में कोई कटौती नहीं की जाएगी और ऐसे किसानों को 338.30 रु. प्रति क्विंटल का मूल्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल मूल्य वृद्धि भर नहीं है, बल्कि किसानों को सुरक्षा, स्थिरता और सम्मान देने का संकल्प भी है। चीनी सत्र 2026-27 के लिए गन्ने की उत्पादन लागत 182 रु. प्रति क्विंटल आंकी गई है, जबकि घोषित FRP 365 रु. प्रति क्विंटल है, जो लागत से 100.5 प्रतिशत अधिक है। यह भी उल्लेखनीय है कि नया FRP वर्तमान चीनी सत्र 2025-26 की तुलना में 2.81 प्रतिशत अधिक है।

श्री चौहान ने कहा कि देश का चीनी क्षेत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण कृषि आधारित क्षेत्र है, जो लगभग 5 करोड़ गन्ना किसानों और उनके परिजनों के जीवनयापन से जुड़ा है। इसके साथ ही, चीनी मिलों तथा संबंधित गतिविधियों में कार्यरत लगभग 5 लाख श्रमिकों को भी इस निर्णय से प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिससे ग्रामीण रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि प्पिछले चीनी सत्र 2024-25 में देय 1,02,687 करोड़ रु. में से लगभग 1,02,209 करोड़ रु. का भुगतान 20 अप्रैल 2026 तक किया जा चुका था, यानी लगभग 99.5 प्रतिशत गन्ना बकाया भुगतान हो चुका था। वहीं, चालू चीनी सत्र 2025-26 में देय 1,12,740 करोड़ रु. में से लगभग 99,961 करोड़ रु. का भुगतान 20 अप्रैल 2026 तक किया जा चुका है, जो लगभग 88.6 प्रतिशत है।

सपना देखने का साहस करें और उसे साकार करने को शक्ति समर्पित करें:हरिवंश

Posted on 06.05.2026 Time 01.24 PM Wednesday, New Delhi, #IIMC, #200 Years of Hindi Journalism in India

आईआईएमसी ने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘संचार माध्यम’ का विशेषांक जारी 

बदलते दौर में सपना देखने का साहस करें और उसे साकार करने के लिए अपनी पूरी शक्ति समर्पित करें: हरिवंश, उपसभापति, राज्यसभा

संचार माध्यम’ का विशेषांक हिंदी पत्रकारिता के विकास और भारत की ज्ञान परंपराओं को दर्शाता है: प्रज्ञा पालीवाल गौड़, कुलपति, आईआईएमसी

नई दिल्ली, 05 मई 2026, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश Haivansh ने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) IIMC की प्रमुख शोध पत्रिका ‘संचार माध्यम’ के विशेष स्मारक अंक के विमोचन के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। यह विशेषांक भारत में हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफर को दर्शाता है। इस अवसर पर आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ Dr Pragya Paliwal Gaur तथा संयुक्त सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, डॉ. के.के. निराला Dr KK Nirala और प्रो प्रमोद सैनी  Prof Pramod Saini की गरिमामयी उपस्थिति रही।

Harivansh Vice Chairman Rajya Sabha

राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध विरासत और उसकी बदलती भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री हरिवंश ने कहा कि त्‍वरित परिवर्तन के इस दौर में साक्षर और निरक्षर की परिभाषा पारंपरिक पढ़ने-लिखने के दायरे से आगे बढ़ चुकी है। निरंतर सीखते रहने और उभरती ज्ञान प्रणालियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता अनिवार्य हो गई है। जो प्रौद्योगिकियाँ पहले विकसित होने में सदियाँ लेती थीं, वे अब कुछ वर्षों और महीनों में ही बदल रही हैं।

इसी पृष्‍ठभूमि में, उन्होंने व्यक्तियों, विशेषकर युवा संचारकों से आह्वान किया कि वे इस बदलते परिदृश्य में सार्थक सपने देखें और उन्हें अटूट प्रतिबद्धता के साथ साकार करें। उन्होंने कहा, “केवल तभी, कोई व्यक्ति अपनी अमिट छाप छोड़ सकता है, ठीक उसी तरह, जैसे 1826 में कलकत्ता से प्रकाशित पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ Udant Martand ने छोड़ी थी।”

‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को रेखांकित करते हुए श्री हरिवंश ने भारत के भविष्य को आकार देने में संचार, अनुसंधान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने वर्तमान युग को “कौशल-प्रधान युग” करार दिया, जहाँ कौशल का अर्जन और उसका प्रभावी उपयोग जीवन को परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। आर्थिक परिवर्तन की महत्‍वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यही व्यापक सामाजिक बदलाव की दिशा निर्धारित करता है। इस संदर्भ में, उन्होंने भारत में हाल के वर्षों में हाई-स्‍पीड रेल, आधुनिक बंदरगाहों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों सहित बुनियादी ढाँचे में हुई प्रगति का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि सूचना क्रांति के इस युग में व्यक्तिगत और राष्ट्रीय भविष्य को आकार देने के लिए नवाचार तथा पारंपरिक मार्गों से आगे बढ़ने के साहस की आवश्यकता है। श्री हरिवंश ने कहा कि पत्रकारिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि सूचनाओं का सबसे छोटा अंश भी जन-जन तक पहुँचे, ताकि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सुविज्ञ सार्वजनिक चर्चा हो सके और आम सहमति बन सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संचारकों को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी का पूरा अहसास होना चाहिए।

आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने कहा कि ‘संचार माध्यम’ का यह विशेषांक प्रमुख शिक्षाविदों और मीडिया पेशेवरों के आलेखों का संकलन है, जो पिछली दो शताब्दियों में हिंदी पत्रकारिता के विकास के महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर यह पत्रिका पत्रकारिता के उभरते रुझानों पर निरंतर नजर रखती है, वहीं भारत की समृद्ध ज्ञान परंपराओं के तत्वों को समकालीन परिप्रेक्ष्य में पुनः समझने और प्रस्तुत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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