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मुरादाबाद के चिरंजी लाल को पद्मश्री, लगातार तीसरी बार मुरादाबाद को पद्मश्री

January 25, 2026

मुरादाबाद के चिरंजी लाल को पद्मश्री, लगातार तीसरी बार मुरादाबाद को पद्मश्री

Chiranji laal yadav, Moradabad

पद्मश्री चिरंजी लाल यादव, मुरादाबाद

मुरादाबाद, 25 जनवरी 2026, (उप्र समाचार सेवा) दस्तकारी में अपने हुनर से लोहा मनवाने वाले हस्तशिल्पी चिरंजी लाल यादव को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। भारत सरकार ने हस्तशिल्प में दस्तकार की नक्काशी को सराहते हुए अवार्ड देने का ऐलान किया है। मुरादाबाद को लगातार तीसरी बार पद्मश्री का खिताब मिला है।
गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा से मुरादाबाद का नाम देश भर में चमका है। इस साल पद्मश्री पुरस्कार मुरादाबाद के चिरंजी लाल यादव को मिलेगा। शहर के गुरहट्टी क्षेत्र में कटरा पूरन जाट में रहने वाले 56 साल के चिरंजी लाल का आज भी नायाब नक्काशी में हुनर है। धातु उत्पादों पर नायाब नक्काशी उकेरने वाले चिरंजी लाल को अब तक अन्य कई अवार्ड मिल चुके हैं। शिल्प गुरु, तीन बार स्टेट अवार्ड और नेशनल अवार्ड मिल चुका है। इस बार उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है।
इससे पहले मुरादाबाद में 2024 में दिलशाद हुसैन और 2025 बाबूराम यादव को पुरस्कार मिल चुका है।
पुरस्कार मिलने से खुश चिरंजी लाल को पद्मश्री मिलने की खबर से घर पर लोग बधाई देने पहुंचने लगे। इस मौके पर आर्टीजन एसोसिएशन के आजम अंसारी समेत अन्य लोगों ने चिरंजी लाल यादव को पुरस्कार मिलने पर बधाईयां दी।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोशियारी को पदम सम्मान

Padam Bhushan Samman, Bhagat Singh Koshiyari, Uttarakhand

भगत सिंह कोशियारी को पदम भूषण सम्मान

नई दिल्ली, 25 जनवरी 2026, भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पदम सम्मान की घोषणा की है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी को पदम भूषण सम्मान से अलंकृत किया गया है। उन्हें यह सम्मान राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू भव्य समारोह में प्रदान करेंगी।

भगत सिंह कोशियारी ने राजनीति में दीर्घकाल तक नैतिकता, सुचिता और आदर्श के मानदंडों का हमेशा पालन किया। उनका जीवन सादगी भरा और समाज के लिए समर्पित है। वे मुख्यमंत्री बनने के पूर्व उत्तर प्रदेश में विधान परिषद सदस्य भी रहे।

श्री कोश्यारी ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए संघर्ष किया और शांतिपूर्ण तरीकों से आंदोलन का नेतृत्व भी किया। वे राज्य बनने के पूर्व उत्तराखंड के विकास के बनी उत्तरांचल उत्थान परिषद के पहले महामंत्री और बाद में अध्यक्ष बने।

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीब ने किए श्री बांके बिहारी  के दर्शन- पूजन

    Mathura Banke bihari mandirभाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने बनके बिहारी मंदिर में किए दर्शन
  • पहली बार उप्र के दौरे पर आए हैं राष्ट्रीय अध्यक्ष,  माननीय मुख्यमंत्री  के साथ पहुंचे मंदिर
  • वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्री बांके बिहारी जी के दर्शन कर मांगा ‘विकसित भारत’ का आशीर्वाद
मथुरा, 25 जनवरी 2026 ( अतुल कुमार जिंदल)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने रविवार को वृन्दावन के विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी जी के दर पर हाजिरी लगाई। उन्होंने आराध्य के चरणों में शीश झुकाकर विधि- विधान से पूजा-अर्चना की तथा इत्र सेवा की। मंदिर के सेवायतों ने यूपी के मुख्यमंत्री और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष  को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा करवाई।
 मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ  एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन ने ठाकुर जी के समक्ष दीपक प्रज्ज्वलित किया और पुष्प अर्पित किए। इस दौरान माननीय मुख्यमंत्री जी ने ठाकुर जी से प्रदेश की सुख-समृद्धि और ‘विकसित भारत’ के संकल्प की सिद्धि के लिए प्रार्थना की।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नवनिर्वाचित होने के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश की धरा ‘ब्रज भूमि’ पर पहुंचे श्री नितिन नबीन जी ने माननीय मुख्यमंत्री श योगी आदित्यनाथ  के संग आध्यात्मिक व राजनीतिक कार्यक्रम में शिरकत की।
दर्शन के बाद मंदिर सेवायतों द्वारा माननीय मुख्यमंत्री  एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जी को पट्टीका और प्रसाद भेंट किया गया। ठाकुर श्री बांके बिहारी जी मंदिर हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी, वृन्दावन, मथुरा के अध्यक्ष  मा० न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मा० उच्च न्यायालय इलाहाबाद  अशोक कुमार जी, समिति के सदस्य मा० जिला एवं सत्र न्यायाधीश (सेवानिवृत्त)  मुकेश मिश्रा जी, सदस्य राजभोग समूह श्रीवर्धन गोस्वामी पुत्र  जुगलकिशोर गोस्वामी, सदस्य शयनभोग समूह श्री दिनेश कुमार गोस्वामी पुत्र  बिहारीलाल गोस्वामी एवं सदस्य शयनभोग समूह  विजय कृष्ण गोस्वामी (बब्बू) पुत्र  बाल कृष्ण गोस्वामी ने मुख्यमंत्री  एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष को श्री बांके बिहारी जी की आकर्षक एवं मनमोहक चित्र/तस्वीर भेंट किया।
इस दौरान  केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष  पंकज चौधरी , राष्ट्रीय महामंत्री  दुष्यंत गौतम , माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा विभाग  संदीप सिंह , विधायक मांट  राजेश चौधरी , महानगर अध्यक्ष  हरीशंकर राजू यादव , अपर पुलिस महानिदेशक  अनुपम कुलश्रेष्ठ, मंडलायुक्त  शैलेन्द्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, मुख्य विकास अधिकारी मनीष मीना सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

गणतंत्र के 77 वर्ष: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य का संकल्प

 

– डॉ. सत्यवान सौरभ
Satywan Saurabh, Writer

सत्यवान सौरभ, लेखक, स्वतंत्र पत्रकार

भारत का गणतंत्र आज 77 वर्ष का हो चुका है। 26 जनवरी 1950 को लागू हुए संविधान ने एक नई भारत की नींव रखी, जो स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों से प्रेरित थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से हमने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की—साहित्य, खेल, कृषि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर आर्थिक-सैन्य क्षमता तक। विविध संस्कृति को मजबूत करते हुए राष्ट्र ने वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बनाई। चंद्रयान मिशनों से अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी बने, यूपीआई जैसी डिजिटल क्रांति ने भुगतान व्यवस्था बदल दी, जबकि ओलंपिक-एशियाड में पदकों की बौछार ने खेलक्षेत्र में नई ऊंचाइयां छुईं। आज विश्व भारत को चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देखता है, जहां सात से आठ प्रतिशत की विकास दर ने गरीबी उन्मूलन में योगदान दिया। लेकिन यह यात्रा सहज नहीं रही। आंतरिक चुनौतियां, सीमापार खतरे और सामाजिक विषमताएं बनी रहीं। गणतंत्र दिवस पर आत्मचिंतन आवश्यक है: हमने क्या पाया, क्या खोया और भविष्य के लिए क्या संकल्प लें?
भारत की पहली और सबसे बड़ी चुनौती थी—विविधता में एकता। महाद्वीप के आकार का यह देश सौ तीस करोड़ से अधिक लोगों, सैकड़ों भाषाओं-बोलियों, विविध धर्मों-संस्कृतियों का मेल था। स्वतंत्रता के समय आशंका थी कि यह एकजुट नहीं रहेगा। विभाजन की त्रासदी ने आशंकाओं को बल दिया, लाखों जानें गईं, लेकिन संविधान ने संघीय ढांचे से एकता सुनिश्चित की। अनुच्छेद एक ने ‘भारत एक अखंड राज्य’ घोषित किया। भाषाई राज्यों का पुनर्गठन, एकीकृत न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं को मुख्यधारा से जोड़ा। नक्सलवाद, अलगाववाद जैसी चुनौतियों के बावजूद हमने एकता बनाए रखी। पिछले 25 वर्षों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, पूर्वोत्तर में शांति प्रक्रियाएं इसका प्रमाण हैं। आज ‘एक देश, एक राशन’ जैसी योजनाएं विविधता को शक्ति बना रही हैं। यह उपलब्धि कम नहीं—विश्व के अधिकांश बहुलवादी देश टूट चुके, लेकिन भारत अटल खड़ा है।
दूसरी चुनौती थी—लोकतंत्र को जीवंत बनाना। संविधान ने वयस्क मताधिकार, मौलिक अधिकार, धर्मनिरपेक्षता प्रदान की। संसदीय प्रणाली अपनाई, जो ब्रिटिश मॉडल से प्रेरित किंतु भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप। नेहरू युग से चली आ रही परंपरा में अठारह लोकसभा चुनाव शांतिपूर्ण हुए। न्यायपालिका ने जनहित याचिका के माध्यम से गरीबों के अधिकार स्थापित किए—विशाखा दिशानिर्देशों से महिला सुरक्षा, शिक्षा का अधिकार से शिक्षा का अधिकार। महिला आरक्षण ने पंचायती राज में तैंतीस से पचास प्रतिशत क्रांति लाई, जो राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की प्रतीक्षा कर रहा। सूचना का अधिकार ने पारदर्शिता बढ़ाई, जबकि वस्तु एवं सेवा कर ने आर्थिक एकीकरण किया। चुनौतियां रहीं—आपातकाल जैसे काले अध्याय, लेकिन संस्थाओं ने पुनरुद्धार किया। आज त्रस्तंभ मजबूत हैं: चुनाव आयोग निष्पक्ष, भारतीय रिज़र्व बैंक आर्थिक स्थिरता का प्रहरी। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र ने साबित किया कि गरीबी और निरक्षरता के बावजूद प्रजातंत्र फल-फूल सकता है।
तीसरी चुनौती थी विकास। 1947 में सकल घरेलू उत्पाद दो लाख तीस हजार करोड़ था, आज चार सौ लाख करोड़ से अधिक। हरित क्रांति ने अन्न भंडार भरे, सफेद क्रांति ने दूध उत्पादन में विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसरो के सौ से अधिक उपग्रह मिशन, कोविशील्ड वैक्सीन ने आत्मनिर्भरता दिखाई। डिजिटल भारत ने सौ करोड़ से अधिक आधार कार्ड जोड़े, जबकि स्टार्टअप भारत ने एक लाख से अधिक स्टार्टअप जन्मे। सामाजिक मोर्चे पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने अस्सी करोड़ को सस्ता अनाज दिया, स्वच्छ भारत ने बारह करोड़ शौचालय बनाए। आयुष्मान भारत ने पचास करोड़ गरीबों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया। लेकिन असमानता बनी—ऊपर दस प्रतिशत के पास सत्तावन प्रतिशत संपत्ति, जबकि निचले पचास प्रतिशत के पास तीन प्रतिशत। ग्रामीण-शहरी खाई, किसान आत्महत्याएं चिंताजनक। फिर भी, गरीबी रेखा से बाहर पच्चीस करोड़ लोग निकले—यह गर्व का विषय।
गणतंत्र की उपलब्धियां गर्व का कारण हैं, किंतु खोया भी बहुत। भ्रष्टाचार ने जड़ें जमा लीं—दो जी, कोयला आवंटन जैसी घोटालों ने अरबों लूटे। चुनावी बॉन्ड पर सवाल, नोटबंदी के बाद काला धन वापसी असफल। महिला असुरक्षा चरम पर—निर्भया से हाथरस तक बलात्कार की घटनाएं थम नहीं रही। जातिगत हिंसा, दलित अत्याचार जारी। किसान संकट गहरा: न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग, कर्जमाफी नाकाफी। युवा बेरोजगारी तीनों प्रतिशत पर, असंतोष से हिंसा भड़क रही। प्रदूषण घातक, प्रांतीयता का जहर बरकरार। अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर दुरुपयोग। नक्सलवाद, आतंकवाद बने सिरदर्द। ये घाव भारत माता को रक्तरंजित कर रहे।
खोया भले हो, लेकिन हल संभव। भ्रष्टाचार पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने रिसाव रोका। महिला सुरक्षा हेतु फास्ट-ट्रैक कोर्ट, निर्भया कोष उपयोग बढ़ाएं। किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान उत्पादक संगठन मजबूत करें। रोजगार हेतु कौशल भारत, आत्मनिर्भर तीन से दस करोड़ नौकरियां सृजित संभव। सामाजिक सद्भाव हेतु संविधान जागरण अभियान चलाएं। प्रदूषण पर विद्युत वाहन नीति, नमामि गंगे को गति। पंचायती राज को सशक्त बनाएं—महिला प्रतिनिधित्व से स्थानीय शासन मजबूत। युवाओं को मुख्यधारा जोड़ें। कृत्रिम बुद्धिमत्ता-बिग डेटा से नफरत फैलाव रोका जा सकता। 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करने हेतु एकजुट हों।
गणतंत्र दिवस मात्र परेड-झंडारोहण नहीं, आत्मचिंतन का अवसर। हमने एकता, लोकतंत्र, विकास पाया; भ्रष्टाचार, असमानता खोया। लेकिन युवा शक्ति हमारा हथियार। आशावादी रहें—भारतीय मॉडल अपनाएं। राष्ट्रपिता गांधी, संविधान निर्माता अम्बेडकर के सिद्धांतों पर चलें। गणतंत्र को कंटीली झाड़ियों से निकालें, उज्ज्वल भविष्य बनाएं। जय हिंद, जय भारत!
(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)

30 जनवरी से रफ्तार भरेंगी बरेली-बांदीकुई पैसेंजर ट्रेन

छस साल पहले रेलवे ने कोरोना महामारी में रोका था ट्रेनों का संचालन

मुरादाबाद, 25 जनवरी 2026, (उप्र समाचार सेवा।)
कोरोना काल में बंद बरेली बांदीकुई पैसेंजर ट्रेन का 30 जनवरी से संचालन शुरू हो जाएगा। राजस्थान में मेंहदीपुर बालाजी समेत अन्य जगहों पर पर जाने वाले यात्रियों को ट्रेन की सुविधा मिलेगी।
छह साल पहले कोरोना वायरस के प्रभाव को देखते हुए रेलवे ने पैसेंजर समेत कई एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन रोक दिया था। अब आम यात्रियों की सुविधा को रेलवे ने दोबारा से बहाल करने का निर्णय लिया है।
मुरादाबाद के सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता के अनुसार बरेली बांदीकुई पैसेंजर ट्रेन का टाइम टेबल जारी किया गया है। पहले पैसेंजर ट्रेन 54461-62 नंबर से चलती थी। अब ट्रेन का नया नंबर 543655-56 जारी हुआ है।
30 जनवरी को ट्रेन बरेली से चलेगी। अगले दिन 31 जनवरी को बांदीकुई से ट्रेन को चलाया जाएगा। रोजाना चलने वाली ट्रेन रामगंगा ब्रिज, आंवला, चंदौसी, हरदुआगंज, अलीगढ़, एत्मादपुर, हाथरस, मथुरा, आगरा फोर्ट, अछनेरा, भरतपुर समेत कई स्टेशनों पर रुकेंगी।

बरेली से रात 9.05 बजे से चलने वाली ट्रेन चंदौसी में रात 11.30 बजे और अगले दिन 9.50 बजे बांदीकुई पहुंचेंगी। जबकि वापसी में बांदीकुई से दोपहर 2.45 बजे चलकर चंदौसी सुबह 6.20 बजे पहुंचेंगी। रेल प्रशासन का कहना है कि पैसेंजर ट्रेन में रूट पर सभी छोटे स्टेशनों पर ठहराव निर्धारित किया गया है। इससे यात्रियों को सुविधा का लाभ मिलेगा।

-पुशपुल पैसेंजर के संचालन की आस बढ़ी
बरेली बांदीकुई पैसेंजर ट्रेन के पटरी पर लौटने की तैयारी के बीच मुरादाबाद रूट की प्रमुख ट्रेन पुशपुल पैसेंजर ट्रेन के संचालन की आस बढ़ गई है। मुरादाबाद दिल्ली के बीच चलने वाली ट्रेन की आज भी बड़ी डिमांड है। ट्रेन से आम यात्री के अलावा ड्यूटी पर जाने वाले, मजदूर, कामगार समेत अन्य लोग आवागमन करते। कोरोना काल के दौरान ट्रेन का संचालन रोक दिया गया। दोपहर में मुरादाबाद से दिल्ली के बीच पैसेंजर ट्रेन की आज भी यात्री कमी महसूस करते हैं।

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