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संघ की सौ वर्ष की यात्रा हिन्दू स्वाभिमान और समरसता की यात्राः जोगिन्दर पाल सिंह

February 8, 2026

संघ की सौ वर्ष की यात्रा हिन्दू स्वाभिमान और समरसता की यात्राः जोगिन्दर पाल सिंह

Joginder Pal Singh Adress in Hindu Sammelan

हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश महामंत्री जोगिंदर पाल सिंह

Posted on: 08.02.2026 Sunday, Time: 11.17 PM, Moradabad

मुरादाबाद, 08 फरवरी 2026, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश महामंत्री जोगिन्दिर पाल सिंह ने कहा कि है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्ष की यात्रा हिन्दू स्वाभिमान और समरसता की यात्रा है। हिन्दू पुनर्जागरण की यात्रा है। संघ का सौ वर्ष का इतिहास गौरवपूर्ण है। श्री सिंह रविवार को यहां कृष्णा विद्या मन्दिर इंटर कालेज मंगुपुरा में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में  सम्बोधित कर रहे थे।

श्री सिंह ने कहा कि आज शबरी जयंती है। यह हमें समरसा का संदेश देती ही। शबरी ने अनेक वर्ष तक दृढ़ विश्वास के साथ भगवान श्रीराम की प्रतीक्षा की थी। भगवान श्रीराम ने भी शबरी के बेर खाकर समसरसा का संदेश दिया। उन्होंने कहा  हिन्दू समाज और संस्कृति पर अनेक आक्रमण हुए हैं। पहला आक्रमण मुहम्मद बिन कासिम ने सन् 712 में किया था। हमारी संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं को नष्ट करने का प्रयास हुआ। इसके बाद भी अनेक आक्रमण हुए। लेकिन भारत के संत महात्माओं, महापुरुषों ने उन आक्रमओं का डटकर सामना किया। उन्हें विफल करते रहे।

हिन्दू सम्मेलन के अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह का सम्मान

श्री सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना काल की परिस्थितियों और संस्थापक डा केशव बलिराम हेडगेवार के प्रेरणादायी जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि संघ ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ चढकर हिस्सा लिया। संघ संस्थापक डा हेडगेवार ने ही सबसे पहले पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। उनके प्रस्ताव को मानकर ही पूर्ण स्वराज्य दिवस मनाने की परंपरा आरम्भ हुई थी। स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगे प्रतिबंधों की भी उन्होंने चर्चा की। साथ ही बताया कि संघ के योगदान को देखते हुए ही 1963 में संघ को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल किया गया था।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर शनि सिंह ने कहा कि आज यह विडम्बना ही है कि हिन्दुओं के देश में हिन्दू सम्मेलन आयोजित करने की आवश्यकता पड़ रही है। उन्होंने उन कारणों पर प्रकाश डाला जिनके कारण हिन्दू समाज को संगठित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्य कर रहा है। श्री सिंह ने संघ के शताब्दी वर्ष में निर्धारित किये गए पंच परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला।  इन पंच परिवर्तनों के लिये समाज को तैयार होने और अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि पंच परिवर्तनों में कुटुम्ब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व का जागरण और राष्ट्रीय कर्तव्य को आत्मसात करना है। इनके माध्यम से ही समाज अनेक आसन्न चुनौतियों का सामना करने में सफल होगा।

प्रो. सिंह ने कहा कि हमें यह नारा देना होगा और इसे अपनाना भी होगा-जातिवाद की करो विदाई, हम सब हैं भाई भाई। हमें जातिवाद को दूर करना है, जातियों में नहीं बंटना है। भेदभाव रहित समाज, एकात्म समाज की स्थापना ही संघ का उद्देश्य है। इन पंच परिवर्तनों के भाव को युवा पीढ़ी को समझना और अपनाना आवश्यक है क्योंकि ये युवा ही देश के भविष्य हैं।

हिन्दू सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि मेजर राजीव ढल ने कहा कि हम हिन्दू गर्व से कह सकते हैं कि हम हिन्दू हैं। हमारे पूर्वजों ने लालच में आकर, भय के कारण हिन्दू धर्म नहीं छोड़ा। उन पर अनेक अत्याचार हुए, अनेक तरह के प्रलोभन भी दिये गए किन्तु उन्हें स्वीकार नहीं किया। पूर्वजों ने बलिदान कर दिये किन्तु हिन्दू धर्म नहीं त्यागा। इसलिए हम कह सकते हैं कि हमें गर्व है कि हम हिन्दू हैं। भारत पर आक्रमण करने वालों ने हिन्दू संस्कृति को मिटाने का अभियान चलाया। मठ मन्दिर तोड़े गए, उनके स्थान पर मस्जिदें बनायी गईं। यदि उन्हें मस्जिदें बनानी थीं तो कहीं और भी बना सकते थे। लेकिन उन्हें हिन्दू समाज को अपमानित करना था इसलिए हिन्दू मंदिरों को तोड़ा गया, वहीं मस्जिदें बना दी गईं।

मेजर ढल ने कहा कि सिख गुरुओं के बलिदान से हिन्दू समाज की रक्षा हुई। गुरुओं की संतानों ने बलिदान किये। गुरुओं के शीश काट दिये गए। लेकिन उन्होंने हिन्दू धर्म को बचा लिया। भारत विभाजन की विभिषिका और कश्मीर में हुए नरसंहार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए यह सब किया गया। नेता देखते रहे और नरसंहार होते रहे। भारत विभाजन के समय हो अत्याचारों को झेलते हुए जब अनेक हिन्दू यहां आये तो कोई मदद को नहीं आया। सिर्फ राष्ट्रीय स्वंयंसेवक संघ ने शिविर लगाकर सहायता की थी। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि स्वतंत्रता के बाद देश में मुगलों की इतिहास पढ़ाया जाने लगा, कभी गुरुओं के बलिदान का इतिहास नहीं पढ़ाया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि 21वीं शताब्दी, हिन्दू शताब्दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में हो रहे हिन्दू सम्मेलनों की श्रंखला में सभी समस्याओं की भी समाधान है। उन्होंने बताया कि इसी क्षेत्र में 1982 से 85 के मध्य चार हिन्दू सम्मेलन हुए थे। ये सम्मेलन काशीपुर, अमरोहा, मुजफ्फरनगर और दिल्ली मे हुए। इन सम्मेलनों की ही शक्ति और जागरण का परिणाम था कि मात्र 46 वर्ष में अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य दिव्य मन्दिर बन गया। क्योंकि इन सम्मलेनों से ही राम मन्दिर के निर्माण की मांग उठी थी। हिन्दू सम्मेलन की शक्ति ने उस संघर्ष में निर्णायक विजय दिला दी जोकि 496 साल तक चला था। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नगर कार्यवाह जितेन्द्र चौधरी ने किया।

 

 

उपज अध्यक्ष का रामपुर में स्वागत

UPAJ President Sarvesh Kumar Singh hounered by Surya Prakash Pal in Rampur

रामपुर में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश पाल ने उपज अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह का स्वागत किया

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time 08.32 PM, Rampur

रामपुर, 08 फरवरी 2026, उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) श्री सूर्य प्रकाश पाल जी से वरिष्ठ पत्रकार और उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (उपज) के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह ने भेंट की। भेंट के दौरान श्री पाल ने अंगवस्त्र भेंट कर उपज प्रदेश अध्यक्ष का स्वागत किया।

इस अवसर पर साथ में राष्ट्र सेविका समिति की पदाधिकारी श्रीमती अनीता प्रकाश और उत्तर प्रदेश समाचार सेवा के वरिष्ठ संवाददाता श्री किशन लाल शर्मा भी उपस्थित थे। उपज अध्यक्ष ने श्री सूर्य प्रकाश पाल जी को उत्तर प्रदेश समाचार सेवा का विशेषांक अभ्युदय भेंट किया।

Uttar Pradesh Samachar Sewa Souvenir Abhuday presented to Upadhyaksh UP Rajya pichda varg ayog

उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश पाल को उत्तर प्रदेश समाचार सेवा की स्मारिका अभ्युदय भेंट करते हुए सर्वेश कुमार सिंह

भेंट वार्ता के दौरान श्री पाल से वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य पर चर्चा हुई।

मन में 2047 में देश विभाजन का डर नहीं, अखंड भारत का संकल्प मजबूत बनाओ

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का उदघोष, 2047 में विभाजन का डर पालने की बजाए, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो

DR MOHAN BHAGWAT SRSANGHCHALAK RSS

मुम्बई में संघ यात्रा के सौ वर्ष नए क्षितिज व्याख्यान माला के पहले सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 08.09 PM, RSS Rashtriya Swayamsevak Sangh, Sar Sanghchalak, Mumbai Samvad, #RSS100

मुंबई, 08 फरवरी। देश विरोधी शक्तियों के देश विभाजन के मंसूबों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी ने कहा कि आप 2047 में देश विभाजन का डर पालने की बजाय, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो। जो 500 साल में सुल्तान बादशाह यहां रहकर नहीं कर सके, 200 साल में अंग्रेज नहीं कर सके। वह स्वतंत्र भारत में क्यों व कैसे होगा, यह 1947 नहीं है। हम बहुत आगे बढ़ गए हैं, अब भारत को तोड़ने वाले टूट जाएंगे। भारत जुड़ जाएगा, और यह होगा। यह संकल्प मन में मजबूत बनाओ। तो ये जो कुछ लोग दुस्वप्न देख रहे हैं, उनके मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। हम सब लोग हैं, हम होने नहीं देंगे।

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘संघ यात्रा के १०० वर्ष : नए क्षितिज’ दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में मुंबई के ९०० से अधिक प्रतिष्ठित मान्यवरों को संबोधित किया। नेहरू सेंटर सभागार, वरळी में रविवार, ०८ फरवरी को संपन्न प्रश्नोत्तर सत्र में डॉ. मोहन भागवत जी ने उपस्थित सदस्यों द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विषयों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। इस अवसर पर मंच पर पश्चिम क्षेत्र संघचालक डॉ. जयंतीभाई भाडेसिया, कोंकण प्रांत संघचालक अर्जुन चांदेकर, मुंबई महानगर संघचालक सुरेश भगेरिया उपस्थित थे। पूछे गए कुल १४३ प्रश्नों को १४ श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया। इनमें संघ नीति, हिन्दुत्व, राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीति, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, संस्कृति, कला, खेल व भाषा, जीवनशैली, पर्यावरण आदि विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल रहे।

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार पर सरसंघचालक जी ने बांग्लादेश के सवा करोड़ हिन्दुओं से संगठित होने का आह्वान किया। ऐसा होने पर अत्याचार पर स्वतः ही रोक लग जाएगी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र इनमें से कोई नहीं, बल्कि हिन्दू ही संघ का सरसंघचालक होगा। उन्होंने कहा कि संघ का सरसंघचालक बनने के लिए किसी भी जाति का होना न तो बाधा है और न ही कोई अनिवार्य योग्यता। भविष्य में अनुसूचित जाति या जनजाति के कार्यकर्ता भी सरसंघचालक बन सकते हैं।

जिन पर पीढ़ी दर पीढ़ी अन्याय या अत्याचार हुआ है, उनके सर्वांगीण उत्थान होने तक तथा उनके मन में सुरक्षा की भावना उत्पन्न होने तक संविधान सम्मत आरक्षण जारी रहना चाहिए, यह संघ की स्पष्ट भूमिका है।

संघ के स्वयंसेवकों को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों तथा सभी प्रकार के प्रयासों में सहभागी होना चाहिए, यह संघ की भूमिका है। किंतु केवल कानून बनाकर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करना कठिन है, इसके लिए संस्कारित समाज मन का निर्माण उतना ही महत्वपूर्ण है। साथ ही कोई भी व्यवस्था मूल रूप से भ्रष्ट नहीं होती, बल्कि उस व्यवस्था में कार्य करने वाले व्यक्तियों का मन भ्रष्ट होता है और उसी कारण व्यवस्था भ्रष्ट होती है।

जबरदस्ती या लालच देकर धर्मांतरण किया जाता है तो वह निंदनीय है और उसका प्रत्युत्तर घर वापसी होगा, यह स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा या स्वप्रेरणा से धर्म परिवर्तन करता है तो उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए। जनसंख्या का अनुपात केवल जन्मदर में कमी से नहीं बदलता, बल्कि धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ के कारण भी बदलता है, इस ओर ध्यान दिलाते हुए अवैध घुसपैठ के संदर्भ में ‘डिटेक्ट एंड डिपोर्ट’ नीति को कठोरता से लागू करने का आह्वान किया।

हिन्दू और सिक्ख पहले से ही एक थे और आज भी उनके बीच रोटी-बेटी के संबंध हैं। उनका रक्त संबंध है। पूजा पद्धति अलग मानी जा सकती है, उनकी विशिष्टता को मान्यता दी जानी चाहिए, लेकिन वे अलग नहीं हैं। हम सभी धर्म एक ही परंपरा से आए हैं। गुरु ग्रंथ साहिब में केवल सिक्ख गुरुओं की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के संतों की वाणी संकलित की गई है। ‘हिंद की चादर’ के रूप में पहचानी जाने वाली यह प्राचीन एकता पुनः स्थापित करनी है। समाज के नाते हम सभी एक हैं, यह ध्यान में रखना चाहिए। हिन्दू नाम से कोई अलग धर्म अस्तित्व में नहीं है। आज जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है, वही प्राचीन सनातन धर्म है। तथागत बुद्ध ने अपने उपदेशों के माध्यम से इसी सनातन धर्म में समयानुकूल सुधार किए। आधुनिक काल में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भी इस ओर इंगित किया।

ईसा मसीह द्वारा प्रतिपादित ईसाईयत और पैगंबर मोहम्मद द्वारा बताए गए इस्लाम का स्वरूप आज उसी रूप में दिखाई नहीं देता। इसका कारण यह है कि उनके बाद इन दोनों पंथों पर तत्कालीन राजनीति का प्रभाव बढ़ गया। परिणामस्वरूप इन पंथों की आध्यात्मिकता पीछे रह गई और राजनीतिक हित अधिक प्रभावी हो गए। इन पंथों के मूल आध्यात्मिक तत्वों को प्रोत्साहन दिया जाए तो विश्वभर के राजनीतिक संघर्ष कम हो सकते हैं।

भारत रत्न सम्मान प्राप्त न होने पर भी स्वातंत्र्यवीर सावरकर करोड़ों भारतीयों के हृदय पर राज कर रहे हैं। किंतु यदि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो इस सम्मान की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

भाजपा के सत्ता में आने से संघ को कोई प्रत्यक्ष लाभ हुआ ऐसा नहीं है, बल्कि समाज में संघ की बढ़ती शक्ति और स्वीकार्यता का लाभ समान विचारधारा और भारतीय नीतियों का पालन करने वाले दलों को मिला है। संघ के स्वयंसेवकों के निरंतर परिश्रम तथा समाज द्वारा संघ को मिले स्नेह और विश्वास के कारण ही संघ का कार्य बढ़ा है। संघ से संबंधित संस्थाओं, संगठनों या दलों पर संघ दबाव नहीं डालता। यहां कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को पर्याप्त स्वतंत्रता होती है, जिससे वे अपने क्षेत्र में आवश्यक निर्णय और प्रयोग जिम्मेदारी से कर सकते हैं। वे जो अच्छे कार्य करते हैं, उसका श्रेय उन्हीं को जाता है, लेकिन जहां कमियां रह जाती हैं, उसके प्रश्न अभिभावक के नाते हमारे पास आते हैं और उसकी नैतिक जिम्मेदारी हम लेते हैं। संघ का कार्य केवल व्यक्ति निर्माण का कार्य है। किसी विशेष क्षेत्र में कार्य करना संघ का कार्य नहीं है।

समान नागरिक संहिता पर अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि समाज की मानसिकता तैयार करके तथा सभी समाज घटकों को विश्वास में लेकर इस प्रकार का कानून लागू किया जाना चाहिए। उत्तराखंड तथा अन्य कुछ राज्यों में ऐसे प्रयोग हो रहे हैं, इसलिए हम उसका स्वागत करते हैं। भारत विविधता में एकता को बनाए रखने वाला देश है, यह सिद्धांत ऐसे कानून बनाते समय प्राथमिकता से ध्यान में रखना चाहिए।

संघ के कार्यकर्ताओं की औसत आयु २८ वर्ष है और इसे २५ वर्ष से नीचे लाने का प्रयास चल रहा है। देश का युवा देशभक्त और नैतिक आचरण करने वाला है। यदि उन्हें उनकी भाषा में विषय समझाए जाएं, तो वे उन्हें स्वीकार करते हैं और उसका आचरण भी करते हैं। इसलिए तार्किक पद्धति से उन्हें अपने मूल विचारों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्हें प्रयोग करने की स्वतंत्रता और अवसर देना चाहिए तथा यदि प्रयोग में कोई त्रुटि हो जाए तो उनके पीछे दृढ़ता से खड़ा रहना चाहिए। यदि वर्तमान पीढ़ी युवाओं की जिज्ञासा शांत करने की क्षमता विकसित करे, तो युवा पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी के समन्वय से भविष्य का सशक्त भारत निर्माण होगा। भारतीय दर्शन का प्रभाव अंतरात्मा तक पहुंचता है, जबकि पाश्चात्य प्रभाव बाहरी स्तर तक सीमित रहता है।

निगम-व्यापारियों में नहीं बनीं अंतिम सहमति

दुकानों का किराया विवाद

अपर नगर आयुक्त से हुई किराया वृद्धि पर वार्ता

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 07.28 PM

Moradabad Samachar

मुरादाबाद समाचार

मुरादाबाद, 8 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
नगर निगम की दुकानों का किराया बढ़ाए जाने का विरोध दूसरे दिन भी कायम रहा। शहर में बाजार बंद के चलते मेयर विनोद अग्रवाल और अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह की मौजूदगी में व्यापारियों में वार्ता शुरू हुईं। काफी देर चलीं वार्ता में अंतिम सहमति नहीं बन सकीं हालांकि विवाद को देखते हुए हर मार्केट से एक दो व्यापारियों संग सोमवार को निगम से वार्ता होगी।
शहर में नगर निगम की 488 दुकानें हैं। निगम प्रशासन ने सरकार के निर्देश के बाद दुकानों का किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि 2015-16 में दुकानों के किराए में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि के प्रस्ताव पर व्यापारी राजी नहीं हुए। लंबे समय से किराए में अब बढ़ोतरी की गई। पर व्यापारियों ने विरोध कर बाजार बंद कर दिया। किराया वृद्धि विवाद के निपटारे के लिए
रविवार को निगम प्रशासन व व्यापारियों के बीच वार्ता का हुईं। मेयर के हस्तक्षेप के बाद पीली कोठी पर मेयर कैंप हुईं वार्ता में तमाम व्यापारी और निगम अधिकारी रहे।
व्यापारी नितिन राज का कहना है कि दुकानों के किराए में अप्रत्याक्षित वृद्धि की गई। कई मार्केट में किराया कम है। दुकानों का किराया सर्किल रेट के हिसाब से लिया जा रहा है। 15 साल तक किराए के बाद नए सिरे से किराया निर्धारित होगा। हालांकि निगम ने किराया निर्धारण का आश्वासन दिया है।
मेयर विनोद अग्रवाल का कहना है कि 25 साल बाद किराए में वृद्धि की गई है। दुकानदारों को किराए में छूट का प्रस्ताव रखा गया है। तीस प्रतिशत की छूट दी गई है।

47 वर्षीय कलम सिंह बिष्ट ने जीती  120 किलोमीटर लम्बी ओमान  रेस !

Kalam Singh Bist, Chamoli, Ex Army Person

लंबी दूरी की दौड़ का विश्व विजेता कलम सिंह बिष्ट पूर्व सैनिक

  • गढ़वाल राइफल के पूर्व सैनिक ने विश्व मंच पर भारत और  उत्तराखंड का परचम  लहराया 
  • गढ़वाल राइफल के पूर्व सैनिक नायक कलम सिंह बिष्ट ने ओमान में आयोजित 120 किलोमीटर लम्बी अल्ट्रा ट्रेल रेस जीतकर कीर्तिमान बनाया है।
  • लम्बी दौड़ की श्रेणी में अभी तक मैराथन 42 किलोमीटर को सबसे लम्बी दौड़ माना जाता रहा है और यह सामान्य रोड़ पर आयोजित की जाती है। 

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 09.13 AM, Report Bhupat Singh Bist, Dehradun 

देहरादून, 08 फरवरी। ओमान में आयोजित 120 किलोमीटर लम्बी अल्ट्रा ट्रेल रेस जीतकर उत्तराखंड के कलम सिंह बिष्ट ने रिकॉर्ड बनाया है। बिष्ट पूर्व सैनिक हैं, वे गढ़वाल राइफल्स से सेवानिवृत हुए हैं।

अल्ट्रा ट्रेल रेस का मार्ग पथरीला और रेगिस्तान की दुर्गमता लिए है जाना जाता है। ये दूरी नापने में नायक कलम सिंह बिष्ट ने 18 घंटे और 18 मिनट का समय दर्ज किया। इस दुर्गम रोमांचक दौड़ में 68 देश के हजारों धावक शामिल थे। चमोली गढ़वाल के मुन्दोली ग्राम निवासी कलम सिंह बचपन में 12 किलोमीटर रोजाना स्कूल की दूरी नापा करते थे।

जीवन में अभाव ने संघर्ष की प्रेरणा दी। पिता ने जोश भरा – जीतने से पहले छोड़ना नहीं है। 

नई युवा पीढ़ी को ड्रग और मोबाइल की लत से छुड़ाने के लिए पूर्व फौजी नायक कलम सिंह बिष्ट अब प्रशिक्षक की भूमिका में सुदूर गांवो में शिविर आयोजित कर रहें हैं अल्ट्रा ट्रेल रेस विजेता उत्तराखंड के युवाओं को अंतर -राष्ट्रीय खेलों में सफल देखना चाहते हैं।

प्रस्तुति – भूपत सिंह बिष्ट

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