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ये हैं यूजीसी के नए नियम

January 27, 2026

ये हैं यूजीसी के नए नियम

UGC Regulations 2026

    यूजीसी ने जारी किए नए नियम

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नियम पढ़ने के लिए लिंक पर दो बार क्लिक करें

University Grants commission UGC Rules

यूजीसी रूल

नई दिल्ली, 27 जनवरी 2016, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग University Grants commission UGC ने 13 जनवरी को अधिसूचित नियमों को 14 जनवरी को जारी के दिया।

🖇️Read the UGC Regulations: ugc.gov.in/pdfnews/188125…

 

January 26, 2026

Bareilly: City Magistrate ने यूजीसी के विरोध में दिया इस्तीफा

Alankar Agnihotri City Magistrate Bareilly PCS

नगर मैजिस्ट्रेट बरेली अलंकार अग्निहोत्री पद से त्यागपत्र देने के बाद सरकारी आवास के बाहर पोस्टर प्रदर्शित करते हुए।

बरेली Bareilly, 26 जनवरी 2026, विश्विद्यालय अनुदान आयोग University Grants commission (UGC) Rules 2026 के नए नियम के विरोध में PCS Officer पीसीएस अधिकारी और यहां City Magistrate नगर मैजिस्ट्रेट के पद पर तैनात Alankar Agnihotri अलंकार अग्निहोत्री ने पद से त्यागपत्र दे दिया है।

राज्यपाल और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे पत्र में श्री अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों को सवर्ण छात्रों, छात्राओं के लिए उत्पीड़नकारक बताया है। उन्होंने त्यागपत्र में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों की आलोचना की है। इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी को विदेशी जनता पार्टी कहा है, तथा एक वैकल्पिक राजनीतिक दल की बात कही है।

श्री अलंकार 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। उन्होंने बीएचयू आईआईटी से बी टेक किया है। श्री अग्निहोत्री के इस्तीफे पर अभी तक शासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Resignation City Magistrate Bareilly 1

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का त्यागपत्र

Resignation letter Alankar Agnihotri

त्यागपत्र अलंकार अग्निहोत्री

ब्रेकिंग न्यूज /यूजीसी रूल्स के विरोध में बरेली सिटी मजिस्ट्रेट

ब्रेकिंग न्यूज /

    City Magistrate Bareilly बरेली के नगर मजिस्ट्रेट, अलंकार अग्निहोत्री ने दिया त्यागपत्र

बरेली, 26 जनवरी 2026, सिटी मजिस्ट्रेट एवं 2019 बैच के पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य मामले एवं UGC के नए नियमों के विरोध में पद से दिया इस्तीफा… अग्निहोत्री ने लिखा… ब्राह्मण बटुक शिष्यों की चोटी पकड़ कर मारपीट पर इस्तीफा दे रहा हूं..!! अपने बोर्ड पर नाम काट लिखा रिजाइन ……. फोटो सोशल मीडिया पर वायरल

January 25, 2026

मुरादाबाद के चिरंजी लाल को पद्मश्री, लगातार तीसरी बार मुरादाबाद को पद्मश्री

Chiranji laal yadav, Moradabad

पद्मश्री चिरंजी लाल यादव, मुरादाबाद

मुरादाबाद, 25 जनवरी 2026, (उप्र समाचार सेवा) दस्तकारी में अपने हुनर से लोहा मनवाने वाले हस्तशिल्पी चिरंजी लाल यादव को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। भारत सरकार ने हस्तशिल्प में दस्तकार की नक्काशी को सराहते हुए अवार्ड देने का ऐलान किया है। मुरादाबाद को लगातार तीसरी बार पद्मश्री का खिताब मिला है।
गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा से मुरादाबाद का नाम देश भर में चमका है। इस साल पद्मश्री पुरस्कार मुरादाबाद के चिरंजी लाल यादव को मिलेगा। शहर के गुरहट्टी क्षेत्र में कटरा पूरन जाट में रहने वाले 56 साल के चिरंजी लाल का आज भी नायाब नक्काशी में हुनर है। धातु उत्पादों पर नायाब नक्काशी उकेरने वाले चिरंजी लाल को अब तक अन्य कई अवार्ड मिल चुके हैं। शिल्प गुरु, तीन बार स्टेट अवार्ड और नेशनल अवार्ड मिल चुका है। इस बार उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है।
इससे पहले मुरादाबाद में 2024 में दिलशाद हुसैन और 2025 बाबूराम यादव को पुरस्कार मिल चुका है।
पुरस्कार मिलने से खुश चिरंजी लाल को पद्मश्री मिलने की खबर से घर पर लोग बधाई देने पहुंचने लगे। इस मौके पर आर्टीजन एसोसिएशन के आजम अंसारी समेत अन्य लोगों ने चिरंजी लाल यादव को पुरस्कार मिलने पर बधाईयां दी।

January 20, 2026

उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करना समय की आवश्यकता हैः प्रो. नचिकेता तिवारी

हिन्दुत्व की शाश्वत प्रासंगिकता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

(World Association of Hindu Academicians – WAHA

वर्ल्ड एसोसिएशन आफ हिन्दू एकेडमिशियन्स का सम्मेलन सम्पन्न

लखनऊ, 20 जनवरी 2026, विश्व हिन्दू परिषद के आयाम विश्व हिन्दू अकादमिक संगठन (World Association of Hindu Academicians – WAHA) द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयोग से “The Eternal Relevance of Hindutva: Reviving Cultural Consciousness and Transformation” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 20 जनवरी 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ जिसमें सैकड़ों प्राध्यापक एवं शिक्षाविद् शामिल हुए । दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि एवं वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक आरंभ किया गया।

WAHA के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. नचिकेता तिवारी ने संगठन की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि “गुरुकुल परंपरा में ज्ञान और संस्कार साथ-साथ दिए जाते थे; आज उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करना समय की आवश्यकता है।” उन्होंने विश्वविद्यालयों में भारतीय दर्शन आधारित शोध को प्रोत्साहित करने के उदाहरण प्रस्तुत किए।

विशिष्ट अतिथि गजेन्द्र, जोनल ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी, लखनऊ जोन, विश्व हिन्दू परिषद ने कहा कि “योग, संस्कृत और भारतीय पर्वों के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि यह प्रमाण है कि सांस्कृतिक चेतना स्वतः समाज में पुनर्जीवित हो रही है।” मुख्य वक्ता प्रो. संजीव कुमार शर्मा, पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय जीवन-दृष्टि सत्य, अहिंसा, करुणा और कर्तव्यबोध जैसे मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वसुधैव कुटुम्बकम् और सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसे विचार आज के सामाजिक और वैश्विक संकटों के समाधान का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू मूल्य समाज में सह-अस्तित्व, नैतिकता और समरसता को सुदृढ़ करते हैं।

मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने काशी, अयोध्या और मथुरा के सांस्कृतिक पुनरुद्धार का उदाहरण देते हुए कहा कि “सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से न केवल आस्था, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बल मिला है।” अध्यक्षीय उद्बोधन में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को शामिल किए जाने को हिन्दुत्व की समावेशी भावना का आधुनिक उदाहरण बताया। अपराह्न द्वितीय सत्र में विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) विक्रम सिंह, CMS, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने कहा कि “योग और प्राणायाम जैसी भारतीय चिकित्सा परंपराओं ने कोविड काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता पद्मश्री रमेश पतंगे ने सामाजिक समरसता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय समाज की शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि परिवार, सेवा-भाव और सांस्कृतिक परंपराएँ समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग, संवाद और समान दायित्व की भावना से ही सामाजिक समरसता सुदृढ़ होती है, जो राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजय सिंह, कुलपति, डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने की और दिव्यांग पुनर्वास को हिन्दुत्व की करुणा और मानवीय गरिमा की परंपरा से जोड़ा।

समापन सत्र (Valedictory Session) में विशेष वक्ता प्रो. नचिकेता तिवारी ने सम्मेलन के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि “हिन्दुत्व जीवन को संतुलन, सहअस्तित्व और कर्तव्यबोध की दिशा देता है।” मुख्य वक्ता डॉ. निखिल वलिम्बे ने सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. निखिल वालिम्बे ने इस्लाम और उसके सामाजिक प्रभावों पर विचार रखते हुए कहा कि किसी भी धर्म का प्रभाव उसकी ऐतिहासिक व्याख्याओं और सामाजिक प्रयोगों से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कालखंडों में इस्लाम का प्रभाव कहीं सांस्कृतिक समन्वय के रूप में तो कहीं कठोर धार्मिक दृष्टिकोण के कारण सामाजिक चुनौतियों के रूप में सामने आया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत जैसी बहुलतावादी संस्कृति में संवाद, सह-अस्तित्व और विवेक आधारित दृष्टि ही सामाजिक संतुलन बनाए रख सकती है तथा हिन्दुत्व की समावेशी सोच इसी भावना को सशक्त करती है।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. आर. के. मित्तल, कुलपति, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों के साथ भारतीय संस्कृति के सहअस्तित्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रान्त संगठन मंत्री विजय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन, WAHA के पदाधिकारियों, आयोजक समिति, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यह सम्मेलन केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की साझा यात्रा है।”

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