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जच्चा-बच्चा की मौत पर ब्रज नर्सिंग होम में हंगामा, परिजनों ने डॉक्टर पर लगाया लापरवाही का आरोप

March 8, 2026

जच्चा-बच्चा की मौत पर ब्रज नर्सिंग होम में हंगामा, परिजनों ने डॉक्टर पर लगाया लापरवाही का आरोप

मथुरा। शहर के थाना कोतवाली क्षेत्र की चौकी बाग बहादुर इलाके में स्थित ब्रज नर्सिंग होम में शुक्रवार को जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर स्थिति को शांत कराया।
परिजनों के अनुसार गोवर्धन क्षेत्र के गांव पाडल निवासी दीपा (32) पत्नी खेमचंद को शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे प्रसव पीड़ा होने पर ब्रज नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। परिवार का आरोप है कि सुबह से शाम तक डॉक्टरों द्वारा डिलीवरी को सामान्य बताया जाता रहा, लेकिन शाम करीब 6:30 बजे अचानक जच्चा और बच्चे दोनों की मौत हो गई।
मौत की खबर मिलते ही अस्पताल में मौजूद परिजन भड़क गए और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
बताया गया है कि दीपा की यह तीसरी डिलीवरी थी। इससे पहले उसके दो बच्चे सामान्य प्रसव से हुए थे। जच्चा-बच्चा की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। मृतका का पति खेमचंद मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता है। मां की मौत के बाद दो छोटे बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है।
इस मामले में अस्पताल के डॉक्टर अवधेश अग्रवाल का कहना है कि परिजन महिला को पहले गोवर्धन के एक निजी अस्पताल लेकर गए थे, जहां बच्चे की पहले ही मौत हो चुकी थी। बाद में महिला को गंभीर हालत में ब्रज नर्सिंग होम लाया गया था। अस्पताल में सुबह से उसका उपचार किया जा रहा था और परिजनों को स्थिति की जानकारी दी जाती रही, लेकिन दुर्भाग्यवश महिला को भी नहीं बचाया जा सका।
घटना की सूचना मिलने पर थाना कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और हंगामा कर रहे लोगों को समझाकर मामला शांत कराया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जानकारी जुटाने में लगी है।

चुनावी सहानुभूति

Posted on 08.03.2026 Sunday Time 08.06 PM, Editorial By Sarvesh Kumar Singh

बसपा सुप्रीमो बहन मायावती की याद अखिलेश यादव जी को फिर से आई है। आखिर अचानक क्यों आई याद सपा प्रमुख को? और सिर्फ मायावती जी की ही याद नहीं आई, उन्होंने नीतीश कुमार जी को भी याद किया है।

नीतीश कुमार जी का जो राजनीतिक परिदृश्य में परिवर्तन सामने आ रहा है, उसको लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की है और उनसे सहानुभूति जताई है। कल समाजवादी पार्टी कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता थी, जिसमें अखिलेश यादव जी के साथ उनके चाचा शिवपाल यादव जी, लाल बिहारी यादव और राजेंद्र चौधरी भी मौजूद थे।

इस पत्रकार वार्ता की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अखिलेश जी ने अनायास कहा कि— “हम सपा-बसपा गठबंधन के दौर में मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे।” उनको प्रधानमंत्री बनाने के लिए ही एक तरह से गठबंधन हुआ था। यह बात 2019 की है।

लोकसभा चुनाव  2019 में सपा और बसपा ने आपसी दूरियों को कम करते हुए गठबंधन किया था। उन्होंने सपना देखा था कि मायावती जी को वो प्रधानमंत्री बनाएंगे। हालांकि गठबंधन की हार हुई, बसपा को कुछ सीटें मिलीं लेकिन सपा को अपेक्षा के अनुरूप सीटें नहीं मिलीं और मोदी जी फिर प्रधानमंत्री बने।

दूसरी महत्वपूर्ण बात उन्होंने नीतीश कुमार जी के राजनीतिक परिवर्तन पर कही। राज्यसभा के चुनाव हो रहे हैं और चर्चा है कि नीतीश कुमार जी मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देंगे और राज्यसभा जाएंगे।

इस पर अखिलेश जी ने कहा— “हम तो उनको प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे।” यानी इंडिया गठबंधन की योजना नीतीश जी को प्रधानमंत्री बनाने की थी, लेकिन वो नहीं माने। वो तो राज्यसभा पर अटक कर रह गए।

क्या यह सहानुभूति अनायास है या चुनावी रणनीति का हिस्सा? 2027 का चुनाव नजदीक है और अब लगभग एक वर्ष से थोड़ा कम समय बचा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक और जातीय समीकरण (सोशल इंजीनियरिंग) सबसे प्रमुख है।

2024 के चुनाव में अखिलेश जी के ‘PDA’ ने असर दिखाया। यादवों के बाद दूसरा प्रमुख मत प्रतिशत कुर्मी (पटेल) वोट का है। इसका रुख सपा के प्रति ज्यादा रहा। यही वजह है कि सपा के 7 कुर्मी सांसद जीते, जबकि भाजपा के 4।

भाजपा ने भी कुर्मी नेता पंकज चौधरी को जिम्मेदारी देकर अपनी रणनीति मजबूत की है। उधर सपा की नजर भी इसी वोट बैंक पर है। इसीलिए उन्होंने नीतीश जी का नाम लिया और सहानुभूति जताई क्योंकि नीतीश जी भी इसी समाज से आते हैं।

मायावती जी का नाम लेने के पीछे भी यही रणनीति है कि दलित और पिछड़ा वोट उनके साथ जुड़ जाए। 2024 में दलित वोट का कुछ हिस्सा कांग्रेस और सपा की ओर गया था। अखिलेश जी 2019 के गठबंधन का उल्लेख इसीलिए कर रहे हैं ताकि दलित समाज में संदेश जाए।

हालांकि, अखिलेश जी ने अब यह खुलासा किया है, लेकिन अगर यह बात इंडिया गठबंधन ने सार्वजनिक रूप से कही होती तो स्थिति अलग होती। उस समय कांग्रेस तो सिर्फ राहुल गांधी के नाम पर अड़ी हुई थी।

देखते हैं राजनीति किस करवट बैठती है।

 

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जागरूकता रैली का हुआ आयोजन


उप्रससे,अजय बरया

ललितपुर- अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जनपद ललितपुर में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं अधिकारों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ललितपुर पुलिस द्वारा एक जागरूकता रैली का आयोजन किया गया । रैली का शुभारम्भ श्रीमान् जिलाधिकारी सत्य प्रकाश एवं पुलिस अधीक्षक, मो0 मुश्ताक द्वारा हरी झण्डी दिखाकर किया गया।

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक ने उपस्थित अधिकारीगण, कर्मचारीगण एवं आमजन को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तिकरण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों के प्रति जागरूकता तथा त्वरित सहायता के लिए पुलिस सदैव तत्पर है।

रैली में पुलिस अधिकारी/कर्मचारी, महिला पुलिसकर्मी, रिक्रुट आरक्षीगण शामिल रहे। रैली के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, आत्मनिर्भरता तथा उनके अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।

यह रैली रिजर्व पुलिस लाइन, ललितपुर से कलेक्ट्रेट चौराहा, तुवन चौराहा, सुमेरा तालाब, शनिचरा चौराहा, घण्टाघर, जेल चौराहा, सदनशाह से होते हुए नगर क्षेत्र में निकाली गई, जिसमें प्रतिभागियों द्वारा महिला सुरक्षा एवं सम्मान से सम्बन्धित नारों के माध्यम से आमजन को जागरूक किया गया ।

घुसपैठ के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई जारी: अमित शाह

हरिद्वार 07 मार्च 26, गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश भर में अतिक्रमण और घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। उन्‍होंने यह बात हरिद्वार में उत्तराखंड सरकार के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

इस अवसर पर श्री शाह ने राज्य के लिए एक हजार एक सौ करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड संघर्ष के दौर से निकल चुका है और विकास की ओर अग्रसर है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम का जिक्र करते हुए श्री शाह ने कहा कि धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद भारत आए लोगों को नागरिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लगभग 200 लोगों को नागरिकता दी गई है।

गृह मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती गांवों के विकास और पलायन को रोकने के लिए जीवंत ग्राम कार्यक्रम लागू किया जा रहा है, जिससे उत्तराखंड को लाभ होगा।

हैदराबाद में 130 माओवादियों का आत्मसमर्पण

हैदराबाद, 07 मार्च 26 में आज एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र में एक सौ 30 माओवादियों ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के समक्ष समर्पण कर दिया। इस गुट में राज्य समिति के तीन सदस्य़, क्षेत्रीय समिति का एक और प्रादेशिक समिति के दस सदस्य शामिल है। समर्पण करने वाले माओवादियों ने एक सौ 24 अत्याधुनिक हथियारों का ज़खीरा भी सौंपा। इनमें हल्की मशीन गन, 31 ए. के. 47, 21 राइफल और 20 सेल्फ-लोडिंग राइफल शामिल हैं।

इस अवसर पर संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इतनी बड़ी संख्या में माओवादियों के समर्पण को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिंसा के बजाय बातचीत और महात्मा गांधी के शांतिपूर्ण सिद्धांत के ज़रिए समस्याओं को हल करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेलंगाना में जनवरी 2024 से अब तक 721 माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पहले समर्पण कर चुके माओवादियों के प्रस्ताव और अधिक विचार के लिए गृह मंत्री अमित शाह को भेजे गए हैं।राज्य सरकार ने एक बड़े पुनर्वास पैकेज का भी वादा किया है इसमें  इंदिराम्मा आवास, बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और अधिक वित्तीय मुआवज़ा शामिल है। मुख्यमंत्री ने गणपति सहित सभी छिपे हुए माओवादियों से समर्पण करने की अपील की। उन्होंने माओवादी के बीच भरोसा बनाने के सफल प्रयासों के लिए पुलिस बल की भी प्रशंसा की।

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