Posted on 15.05.2026 Time 11.30 AM Friday
Article by Sarvesh Kumar Singh, Lucknow
सर्वेश कुमार सिंह
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से संयममित उपभोग की अपील की है। यह अपील समय की मांग है। इसे स्वीकार करना हर भारतवासी का राष्ट्रहित में योगदान होगा। कारण बहुत स्पष्ट हैं किसी से कोई भी स्थिति छिपी हुई नहीं है। आज दुनिया का जो परिदृश्य बना हुआ है। उसमें आसन्न संकट से बचने का एक मात्र उपाय संयमित उपभोग ही है।
प्रधानमंत्री ने 10 मई को हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में जनता से अपील की। कार्यक्रम हैदराबाद में अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन केन्द्र में आयोजित था, जहां उन्होंने 9400 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इसके बाद भाजपा की रैली को भी सम्बोधित किया। यहीं श्री मोदी ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कोविड काल जैसी व्यवस्थाओँ को अपनाने की अपील की। श्री मोदी ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और गैस का संयमित उपयोग किया जाए। इसके साथ ही श्री मोदी ने यह भी कहा कि कोविड काल में जैसे वर्क फ्राम होम की व्यवस्था की गई थी, वैसे ही इसे फिर से अपनाया जाना समय की मांग है। उन्होंने आनलाइन बैठकों, वीडियो कांफ्रेंसिंग को अपनाने की भी बात कही। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने किसानों से भी अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों को रायायनिक खादों का उपयोग 50 प्रतिशत तक कम करना चाहिए। इसके लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना एक अच्छा उपाय है। सिंचाई के लिए डीजल पंप के स्थान पर सोलर पंप अपनाए जाएं। इससे डीजल की बचत होगी।
प्रधानमंत्री ने उसके एक ही दिन बाद इसी अपील को फिर दिल्ली में दोहराया। उन्होंने जो भी कहा वह राष्ट्रीय परिदृश्य,देश की अर्थव्यवस्था, भविष्य की चुनौतियों और आसन्न संकट की चेतावनियों को देखते हुए कहा है। क्योंकि हम 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इसके लिए जरूरी है कि उच्च विकास दर बनी रहे। उच्च विकास दर तभी रह सकती है जब राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखा जाए।
पश्चिम एशिया संकट के कारण पूरी दुनिया गैस, पेट्रोल, डीजल, रायासयिक उर्वरकों के संकट का सामना कर रही है। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। पश्चिम एशिया संकट से पहले जहां कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 70 डालर थी वह आज 126 डालर तक पहुंच गई है। लेकिन भारत सरकार ने घरेलू आपूति में दामों को नियंत्रित रखा है। इस कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों इंडियन आयल, भारत प्रेट्रोलियम, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। यह घाटा प्रतिदिन 1600 से 1700 करोड़ रुपये है। अभी तक ये कंपनियां कुल एक लाख करोड़ रुपये का घाटा उठा चुकी हैं। तेल कंपनियों का घाटा सीधे तौर पर हमारे देश की विदेशी मुद्रा के स्तर को प्रभावित करता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार कम होने की आशंका है, जोकि रणनीतिक रूप से उचित स्थिति नहीं होगी। भारत के पास वर्तमान में विदेशी मुद्रा का इतना भंडार है कि वह 11 महीने तक निर्बाध आयात कर सकता है। लेकिन इस स्थिति को सदैव स्थिर रखने की जरूरत होती है।
देश के मुद्रा भंडार को जो दूसरी सबसे बड़ी खरीद प्रभावित करती है वह सोना है। प्रधानमंत्री ने इसी लिए एक साल तक सोना न खरीदने की भी अपील की है ताकि भारत को विदेश से सोना आयात नहीं करना पड़े। क्योंकि मांग की पूति के लिए सोना आयात किया जाता है। इसे भी नियंत्रित रखना है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सहयोग की अपील की है। हालांकि इस अपील को भारत के विपक्ष ने स्वीकार करने के बजाय इस पर टीका टिप्पणी शुरु कर दी है। सबसे खराब टिप्पणी नेता विरोधी दल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने की है। उन्होंने कहा कि समझौतावादी पीएम के बस का देश चलाना नहीं है।
लेकिन, प्रधानमंत्री की अपील को देश की जनता स्वीकार कर रही है। जनता ने संयम दिखाना प्रारम्भ कर दिया है। राज्य सरकारों ने सकारात्मक रुख दिखाया है। अधिकांश राज्यों ने अपने मंत्रियों के काफिले छोटे कर दिये हैं। सप्ताह में एक दिन नो वेहिकल डे और दो दिन वर्क फ्राम होम की व्यवस्था लागू करने का फैसला ले लिया है। इससे पट्रोल, डीजल की बचत होगी।
आज दुनिया का परिदृश्य जिस तरह से बदल रहा है। भू राजनैतिक परिदृश्य में भी बदलाव हो रहे हैं। हमारे देश की सीमाओं पर हर समय तनाव बना हुआ है। आपरेश सिन्दूर के बाद चीन और पाकिस्तान का गठजोड़ उजागर हो चुका है। अमेरिका की छद्मनीति के चलते हम उस पर भरोसा नहीं कर सकते। इन हालातों में भारत की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि हम स्वयं सशक्त आर्थिक शक्ति, निजीं संसाधनों पर अधिक निर्भरता, विदेशी आयात की कम से कम जरूरतों पर निर्भर रहें। ताकि आसन्न चुनौतियों का सामना दृढ़ता से कर सकें। अतः प्रधानमंत्री की अपील को स्वीकार करना चाहिए।

