एटा 14 मई उप्रससे। जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम नई सफलता की कहानियां लिख रही है।
अलीगंज के खैरपुरा गांव की रीता ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अपनी और 250 अन्य महिलाओं की जिंदगी बदली है। वह अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जाती हैं।
रीता ने बताया कि एक समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। इसी दौरान उन्होंने वैष्णवी स्वयं सहायता समूह का गठन किया और 11 महिलाओं को साथ लेकर काम शुरू किया। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। समूह की महिलाओं ने पशुपालन, कृषि कार्य, सिलाई-कढ़ाई और अन्य छोटे स्वरोजगार अपनाए। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई और परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरी। लगातार बेहतर कार्य करने पर रीता का चयन समूह सखी के पद पर हुआ। वर्तमान में रीता के मार्गदर्शन में महिलाएं भैंस और गाय पालन, बकरी पालन, ई-रिक्शा संचालन, किराना दुकान, सिलाई सेंटर और सब्जी उत्पादन जैसे विभिन्न कार्यों से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। बताया गया है कि कई महिलाओं की वार्षिक आय तीन से चार लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
रीता ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिला और वे आत्मनिर्भर बन सकीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय खंड विकास अधिकारी शिव शंकर शर्मा, एडीओ आईएसबी शिव प्रताप और ब्लॉक मिशन प्रबंधक गंगाधर को दिया।
खंड विकास अधिकारी शिव शंकर शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का एक मजबूत माध्यम बन रहे हैं। सरकार की योजनाओं के जरिए ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जा रहा है।

