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UP Politics: पीडीए फार्मूले को चुनौती देने की बीजेपी की कोशिश

May 11, 2026

UP Politics: पीडीए फार्मूले को चुनौती देने की बीजेपी की कोशिश

Posted on 11.05.2026 , Time 02.33 PM, Monday, Article by Ratibhan Tripathi, Senior Journalist, Lucknow

पिछड़ों और दलितों को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया, ब्राह्मण चेहरा भी शामिल कर ब्राह्मणों की कथित नाराजगी खत्म करने की दिशा में कदम

रतिभान त्रिपाठी
लखनऊ : देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में से तीन में अपनी जीत का परचम लहराने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश का रुख किया है, जहां अगले साल फरवरी महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। रविवार को योगी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार उसी रणनीति के तहत पहला कदम है जिसमें जरूरत के हिसाब से जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है। प्रदेश में भाजपा की मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी ने पीडीए फार्मूले का ढोल पहले से ही पीट रखा है। ताज़ा मंत्रिमंडल विस्तार उसी पीडीए फार्मूले को चुनौती देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल में उन जातियों को शामिल किया गया है जिनका प्रतिनिधित्व सरकार में कम माना जा रहा था। जैसे फतेहपुर से कृष्णा पासवान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से सुरेंद्र दिलेर को मंत्री बनाकर मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलितों का प्रतिनिधित्व सरकार में बढ़ाया गया तो भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के जाट चेहरे को महत्व दिया गया है। कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर केवल दलित समुदाय को ही नहीं महिलाओं की ओर से भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
ऐसे ही कैलाश सिंह राजपूत और हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाकर लोध और लोहार समाज को सरकार में महत्व देने की कोशिश की गई है। कैलाश राजपूत कन्नौज से आते हैं, जो अखिलेश यादव का लोकसभा क्षेत्र है। वहां से असीम अरुण दलित समाज से पहले से ही मंत्री हैं। अब लोध समाज के कैलाश राजपूत को मंत्री बनाकर पीडी फार्मूला स्पष्ट कर दिया है। वाराणसी क्षेत्र के हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाने से पूर्वांचल में उपरोक्त समुदाय के बीच एक अच्छा संदेश देने की कोशिश की गई है।
सपा के पीडीए में से भाजपा ने सरकार में पीडी को तो खूब महत्व दे रखा है, आखिरी अक्षर ए के हिस्से में सिर्फ एक मंत्री हैं दानिश अंसारी और भाजपा को मुस्लिम समाज को सरकार में इससे ज्यादा प्रतिनिधित्व देना भी नहीं है क्योंकि मुस्लिम समाज भाजपा को वोट तो देता ही नहीं, बल्कि चुनाव में खुलकर मुखालिफत करता है। अल्पसंख्यकों में से सिख कोटे से एक मंत्री बलदेव सिंह औलख पहले से ही हैं। वह भी दलित समुदाय से आते हैं। ऐसे में वह दलितों और अल्पसंख्यकों की एक साथ अगुवाई करते हैं। चूंकि 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव पीडीए पीडीए चिल्ला रहे हैं, ऐसे में भाजपा इन समुदायों के बीच यह बताने में पीछे नहीं रहेगी कि उसकी सरकार में इन समुदायों को भरपूर महत्व दिया गया है।
गौरतलब है कि भाजपा की सरकार बनाने में गैर यादव पिछड़ों की अच्छी खासी भूमिका होती है इसलिए मौजूदा सरकार में उनकी भागीदारी अधिक बढ़ाकर पार्टी अगला चुनाव आसान बनाने में लगी हुई है।  इधर रायबरेली के ऊंचाहार से समाजवादी पार्टी से भाजपा में आए मनोज कुमार पाण्डेय को सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। जिस समय मनोज पाण्डेय ने सपा छोड़ी थी, उस समय उन्होंने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया था कि वह न केवल राममंदिर मुद्दे पर हिंदुत्व के विरुद्ध काम कर‌ रहे हैं बल्कि स्वामी प्रसाद मौर्य के जरिए ब्राह्मणों को अपमानित करवा रहे हैं। इस बीच सरकार और भाजपा से ब्राह्मणों की कुछ नाराजगी की बात भी उभरकर सामने आने लगी थी तो मनोज पाण्डेय को मंत्रिमंडल में जगह देना असंतोष को कुछ हद तक दबाने की दिशा में कोशिश के रूप में माना जा रहा है। दो मंत्रियों का प्रमोशन करके उन्हें राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। अब देखना है कि इस विस्तार और प्रतिनिधित्व का निकट भविष्य में कैसा प्रभाव होता है।

Ratibhan Tripathi Senior Journalist