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गाय की रक्षा न करने वाला मुख्यमंत्री कमजोर: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

May 3, 2026

गाय की रक्षा न करने वाला मुख्यमंत्री कमजोर: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
03/05/2026

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का गोरखपुर में हुंकार:, मुझे रोकने की हिम्मत किसी में नहीं”

​गोरखपुर : ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने रविवार 3 मई को गोरखपुर के सहारा स्टेट स्थित भारत माता मंदिर से ‘गोविष्टि यात्रा’ का शंखनाद किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की सत्ता और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गोरखपुर आने से पहले उन्हें धमकियां मिलीं, लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं।
​सत्ता और ‘परम सत्ता’ का संघर्ष
​शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें दो तरह से डराने की कोशिश की गई—एक ‘सत्ता’ द्वारा और दूसरी ‘परम सत्ता’ (प्रकृति) द्वारा। उन्होंने कहा, “हमें धूप और गर्मी का डर दिखाया गया, लेकिन आज का सुहावना मौसम गवाह है कि परम सत्ता हमारे साथ है। रही बात धमकियों की, तो किसी ‘माई के लाल’ में हिम्मत नहीं कि हमें मरवा दे। अगर किसी पार्टी ने ऐसा किया, तो वह सत्ता से बेदखल हो जाएगी।”

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना उन्होंने उनके “कथित साहस” पर सवाल उठाए। शंकराचार्य ने कहा जो मुख्यमंत्री गाय की रक्षा नहीं कर पा रहा, वह कमजोर है। अगर उनमें साहस होता, तो वे केंद्र की परवाह किए बिना गोमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित कर देते।
​सरकार डरती है कि गोमाता को सम्मान देने से गो-हत्यारे और कुछ समुदाय उन्हें वोट नहीं देंगे। भाजपा के मुख्यमंत्री अब गो-हत्यारों का भी वोट मांग रहे हैं। क्या आप गाय का खून और दूध मिलाकर पिएंगे?

सरकार में कई इंजन होने का दावा किया जाता है, लेकिन जनता के लिए कोई डिब्बा नहीं है। जो हैं भी, वे केवल चापलूसों के लिए ‘फर्स्ट क्लास’ डिब्बे हैं।

​शंकराचार्य ने वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भारत हिंदू राष्ट्र होता या सत्ता में बैठी पार्टी हिंदूवादी होती, तो गो-हत्या कब की बंद हो चुकी होती। उन्होंने कहा कि ईसाई और मुस्लिम देशों में उनके धर्म की सुनी जाती है, लेकिन भारत में गोमाता की पुकार सरकार नहीं सुन रही। उन्होंने आगाह किया कि देश में 37 से ज्यादा कानून हिंदुओं के खिलाफ हैं और मंदिरों को जेसीबी से ढहाया जा रहा है।

​इस आंदोलन को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल उनका अकेले का निर्णय नहीं है। यह आवाज चारों शंकराचार्यों की है। जैसे किसी पार्टी का एक प्रवक्ता होता है, वैसे ही चारों पीठों ने मुझे गोमाता की आवाज उठाने के लिए आगे किया है। पश्चिम के शंकराचार्य भी जल्द ही इस यात्रा में शामिल होंगे।

उन्होंने जनता से अपील की कि वे ‘एक नोट और एक वोट’ गो-रक्षा के नाम पर दें। यदि हर विधानसभा में एक हजार वोट इधर-उधर हुए, तो सत्ता को समझ आ जाएगा। हर विधानसभा में गो-रक्षा के लिए ‘रामाधाम’ बनाने का संकल्प लिया गया। उन्होंने तंज कसा कि प्रधानमंत्री 8,000 करोड़ के विमान में चलते हैं, जबकि देश की प्राथमिकताएं कुछ और होनी चाहिए।
​शंकराचार्य ने गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा से यात्रा को झंडी दिखाकर रवाना किया और घोषणा की कि यात्रा के तीसरे चरण में वे बूचड़खानों की ओर कूच करेंगे। उन्होंने अंत में कहा कि वे योगी के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उनकी गलतियों और गोमाता के प्रति उनकी उदासीनता के विरोधी हैं।