मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना 2025-26
के अन्तर्गत चयनित वैज्ञानिकों को सम्मानित किया
उ0प्र0 में कृषि और कृषि से सम्बन्धित क्षेत्र में असीमित सम्भावनाएं, विगत 09 वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा किये गये प्रयासों के बेहतर परिणाम प्राप्त हुए : मुख्यमंत्री
कृषि विकास दर को 08 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत पहुंचाने में सफलता प्राप्त
प्रदेश के अन्नदाता किसानों में कृषि क्षेत्र की सम्भावनाओं को धरातल पर
उतारकर दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने का सामर्थ्य, राज्य
सरकार ने किसानों और कृषि को एजेण्डे का हिस्सा बनाया
गन्ना किसानों के खाते में अब तक 02 लाख 90 हजार करोड़ रु0 से अधिक
धनराशि डी0बी0टी0 के माध्यम से प्रेषित की जा चुकी, प्रदेश की
चीनी मिलें सुगर कॉम्प्लेक्स के रूप में काम कर रहीं
देश के कुल गन्ना का 55 प्रतिशत उत्पादन अकेले उ0प्र0 कर रहा
अच्छे बीज आने, समय पर बीमारी चिन्हित कर समाधान का रास्ता निकालने
तथा टिश्यू कल्चर जैसी नई तकनीक अपनाने से प्रदेश में गन्ना उत्पादन बढ़ा
प्रदेश सरकार के प्रयासों से कृषि तथा किसानों के हित में स्पष्ट नीति बनायी
गयी, किसान को बीज प्रदान करने से लेकर उसके उत्पाद को खरीदने
तथा उसे वैल्यू एडीशन के साथ जोड़ने का कार्य कर रही
प्रदेश सरकार द्वारा सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को वर्ष 2021 में पूर्ण कराया
गया, इसके माध्यम से 14 लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध
खेती प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग कर कई कार्यों को आसान किया जा सकता
इण्टरनेट ऑफ थिंग्स‘ के माध्यम से मिट्टी की नमी और पोषण का डाटा एकत्र
कर किसान लाभान्वित हो सकते, कृषि में आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस उपयोगी
हो सकती, प्रदेश में ‘वन नेशन वन मण्डी’ के नियम को लागू किया गया
अब समय आ गया, जब लैब-टू-लैण्ड नहीं, बल्कि लैब-इन-लैण्ड का उपयोग किया जाए, अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाने की दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता
लखनऊ : 08 अप्रैल, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि और कृषि से सम्बन्धित क्षेत्र में असीमित सम्भावनाएं हैं। भारत की कुल कृषि योग्य भूमि में उत्तर प्रदेश का योगदान 11 प्रतिशत है, लेकिन देश के कुल खाद्यान्न का 21 प्रतिशत उत्पादन इस भूमि पर होता है। विगत 09 वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में किये गये प्रयासों के बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं। कृषि विकास की दर को 08 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत पहुंचाने में सफलता प्राप्त हुई है।
मुख्यमंत्री जी आज यहां ‘विकसित कृषि-विकसित भारत/2047’ के लिए कृषि कायाकल्प हेतु कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों का महासंगम-छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 (08 से 10 अप्रैल, 2026) का शुभारम्भ करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना 2025-26 के अन्तर्गत चयनित वैज्ञानिकों को लाइफटाइम एचीवमेण्ट, विशिष्ट वैज्ञानिक, विशिष्ट महिला वैज्ञानिक, युवा वैज्ञानिक, उत्कृष्ट पी0एच0डी0 थीसिस आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री जी ने ‘विकसित कृषि-विकसित उत्तर प्रदेश/2047’, ‘उपकार कृषि प्रेरणा’, ‘उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद परिचय, गतिविधियाँ एवं भावी रणनीतियाँ’, ‘उपकार समाचार’, ‘न्यू डाइमेंशन्स ऑफ एग्रीकल्चर इन रिसर्च कोआर्डिनेशन एण्ड प्रोडक्टिविटी’, ‘उपकार सीड’, ‘छठी यू0पी0 एग्रीकल्चरल साइंस कांग्रेस सौवेनिर एण्ड एब्स्ट्रैक्ट‘ आदि पुस्तकों का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद एवं इसकी सहयोगी संस्थाओं ने प्रदेश में तीन दिवसीय कृषि विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया है, इनमें भारतीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान, उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान अकादमी तथा गो-सेवा आयोग आदि सम्मिलित हैं। इस कार्यक्रम में तीन दिनों तक कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित अलग-अलग विषयों पर चर्चा की जाएगी। उत्तर प्रदेश की आबादी देश में सर्वाधिक है। यहां देश की 16 से 17 प्रतिशत आबादी निवास करती है। यहां दुनिया की सबसे उर्वरा भूमि, सबसे अच्छा जल संसाधन है। विश्व में सर्वाधिक सिंचित भूमि का प्रतिशत भारत में तथा भारत में सर्वाधिक सिंचित भूमि का प्रतिशत उत्तर प्रदेश में है।
जब भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था में 44 से 45 प्रतिशत हिस्सा रखता था, उसका आधार भारत की कृषि, अन्नदाता किसान और कारीगर थे। यहां किसानों को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा गया था, बल्कि वह स्वयं में कारीगर भी थे। उत्पादक किसान जब कारीगर के रूप में कार्य करता था, तो स्वयं को उद्यमी के रूप में स्थापित करता था। भारत की कृषि की गाथा उत्पादक से उद्यमी बनने की है। वैदिक काल से ही उत्तर प्रदेश इसकी भूमि रहा है। आक्रान्ताओं ने भारत की कृषि पर ही हमला नहीं किया, बल्कि यहां की उद्यमिता पर भी हमला किया था। जो किसान पहले कारीगर से उद्यमी बनने की गाथा को आगे बढ़ाता था, उसे केवल कच्चा माल उत्पन्न करने का अधिकार दिया गया। यहां का कच्चा माल बाहर जाता था। वैल्यू एडीशन का लाभ विदेशियों को मिलता था। हमारा उत्पादक किसान ऋणी बन गया। हमारी कारीगर उद्यमी से बेरोजगार हो गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम‘ बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय के आनन्द मठ उपन्यास का एक हिस्सा है। यह बंगाल की त्रासदी पर आधारित गीत है। बंगाल में पड़े अकाल के दौरान लोग भूख से मर रहे थे। वहां के जमींदार महेन्द्रनाथ के परिवार को भी संकट का सामना करना पड़ा। इस कालक्रम की परिणति संन्यासी विद्रोह के रूप में हुई। आनन्द मठ में औपनिवेशिक काल के शोषण की पूरी गाथा समाहित है। जब भारत के उत्पादक किसान को ऋणी बना दिया जाता है, तो उसका परिणाम अकाल की त्रासदी के रूप में देखने को मिलता है। इन सभी बिन्दुओं पर विचार करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के अन्नदाता किसानों में कृषि क्षेत्र की सम्भावनाओं को धरातल पर उतारकर दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने का सामर्थ्य है। दूसरों पर निर्भरता किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति उत्पन्न करती है। वैदिककालीन भारत में जब उत्पादक व उद्यमिता की इकाइयां किसानों के पास थीं, तब हमारे गांव आत्मनिर्भर होते थे। एक साजिश के तहत उस आत्मनिर्भर इकाई को भंग किया गया। उस समय ऐसा कोई ईकोसिस्टम तैयार नहीं किया गया, जो प्रत्येक सम-विषम परिस्थितियों में टॉप-टू-बॉटम प्रत्येक कड़ी को जोड़ते हुए चुनौतियों का सामना कर सके।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में ‘खेती की बात खेत पर’ कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। इसके अन्तर्गत प्रदेश के कुछ क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान वहां तीसरी फसल देखने को मिली। किसानों ने संवाद के दौरान बताया कि उन्हें मक्का की खेती से प्रति एकड़ 01 लाख रुपये बचत हो रही है। जिस प्रदेश में बिजली, पानी, बीज, प्रोक्योरमेण्ट सेण्टर आदि के अभाव में पहले एक फसल प्राप्त करने में किसान परेशान था, आज वहां तीसरी फसल उत्पादित हो रही है। पहले प्रदेश के कृषि विज्ञान केन्द्र बदहाल थे, आज उन कृषि विज्ञान केन्द्रों पर प्रत्येक सप्ताह गोष्ठियां व किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। डेमोन्स्ट्रेशन के माध्यम से किसानों को अवगत कराया जाता है कि कौन सा कृषि कार्य किस रूप में हो और उसके क्या परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के आपसी समन्वय से कृषि वैज्ञानिकों की क्षमताओं में वृद्धि का कार्य आगे बढ़ा है। राज्य सरकार ने किसानों और कृषि को एजेण्डे का हिस्सा बनाया है। जिस उत्तर प्रदेश में पहले कई वर्षों से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हुआ था, आज किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाता है। गन्ना किसानों के खाते में अब तक 02 लाख 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि डी0बी0टी0 के माध्यम से प्रेषित की जा चुकी है। प्रदेश में जो चीनी मिलें पहले बन्द हो रही थीं, आज वह सुगर कॉम्प्लेक्स के रूप में काम कर रहीं हैं। देश के कुल गन्ना का 55 प्रतिशत उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश कर रहा है। यहां एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग पौने 02 लाख करोड़ लीटर तक पहुंच चुका है, जो देश में नम्बर एक है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में संचालित 122 चीनी मिलों में 106 या 107 चीनी मिलें ऐसी हैं, जो छठें-सातवें दिन गन्ना मूल्य का भुगतान कर देती हैं। लोग नई चीनी मिलें स्थापित करने के लिए आगे आ रहे हैं। अच्छे बीज आने, समय पर बीमारी चिन्हित कर समाधान का रास्ता निकालने तथा टिश्यू कल्चर जैसी नई तकनीक अपनाने से प्रदेश में गन्ना उत्पादन बढ़ा है। हम सभी के समक्ष भारत की प्राचीन पद्धति अपनाते हुए अपने उत्पाद को पोषण से जोड़ने तथा फर्टिलाइजर के स्थान पर नेचुरल व जैविक खेती अपनाने की चुनौती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए कार्य को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। किसानों को तकनीक का प्रयोग करते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन करने पर जोर देना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज भारत को खाद्य संकट से जूझना नहीं पड़ रहा है। यहां प्रचुर मात्रा में खाद्य पदार्थों का उत्पादन हो रहा है। वर्ष 2014 से पूर्व, देश में किसान आत्महत्या कर रहे थे। आज किसान की आत्महत्या के मामले शून्य हो चुके हैं। किसान की आमदमी कई गुना बढ़ी है। यह परिवर्तन हम सभी को देखने को मिल रहा है। वर्ष 2017 से पूर्व, प्रदेश के किसानों व आमजन में सरकार के प्रति विश्वास का अभाव था। किसान विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाओं से परेशान होकर पलायन को मजबूर थे। अन्नदाता किसान केवल चुनावी मुद्दा रह जाता था। लागत अधिक तथा उत्पादन कम होता था। प्रोक्योरमेण्टर सेण्टर न होने से बिचौलिये हावी थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 के पश्चात प्रदेश सरकार के प्रयासों से कृषि तथा किसानों के हित में स्पष्ट नीति बनाई गयी। इसके अन्तर्गत सरकार किसान को बीज प्रदान करने से लेकर उसके उत्पाद को खरीदने तथा उसे वैल्यू एडीशन के साथ जोड़ने का कार्य कर रही है। क्रय केन्द्रों के माध्यम से किसानों को एम0एस0पी0 के रूप में लागत का डेढ़ गुना अधिक मूल्य उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश सरकार पहले से ही सरकारी ट्यूबवेलों और नहरों से निःशुल्क पानी उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही, 16 लाख ऐसे ट्यूबवेलों, जिसका संचालन किसान बिजली कनेक्शन लेकर करता था, जिससे उन्हें बिजली का बिल चुकाना पड़ता था। प्रदेश सरकार ने ऐसे ट्यूबवेलों के बिजली बिल को माफ करते हुए 03 हजार करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को भुगतान किया। जिन 23 लाख ट्यूबवेलों में बिजली के कनेक्शन नहीं है, उन्हें सोलर पैनल से जोड़ने की कार्यवाही आगे बढ़ायी जा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में नहरों का जाल बिछाया जा रहा है। वर्ष 1972 में सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना बनायी गयी थी। वर्ष 1977 में इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था, परन्तु वह पूर्ण नहीं हो सकी थी। प्रदेश सरकार के प्रयासों से वर्ष 2021 में इसे पूर्ण कराया गया। आज इसके माध्यम से 14 लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। इसी प्रकार धनराशि, इच्छा शक्ति, एजेण्डे में कृषि व किसान के अभाव के कारण पहले से अधूरी पड़ी कई अन्य परियोजनाओं को पूर्ण करने का कार्य किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसानों की फसलों को जानवरों से बचाने के लिए सोलर फेन्सिंग उपलब्ध करायी जा रही है। देश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में 16 लाख गोवंश के लिए 7,700 निराश्रित गोआश्रय स्थलों का निर्माण किया गया है। प्रदेश सरकार प्रत्येक गाय के भरण-पोषण के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध करा रही है। उत्तर प्रदेश का यह मॉडल देश में लागू किया जा रहा है। आज बुन्देलखण्ड से अन्ना प्रथा समाप्त हो चुकी है। गोसेवा आयोग को इस दिशा में और अधिक प्रयास करने और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। प्रत्येक किसान को फार्मर रजिस्ट्री की व्यवस्था से जोड़ना आवश्यक है। अंश निर्धारण के कार्यक्रम को समय पर आगे बढ़ाना चाहिए, जिससे तकनीक माध्यम से लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समय से प्राप्त हो सके।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस तीन दिवसीय आयोजन में प्रोडक्शन को प्रोडक्टिविटी से जोड़ने तथा प्रोडक्टिविटी को प्रॉफिटेबिलिटी में बदलने तथा प्रॉफिटेबिलिटी से प्रॉस्पेरिटी प्राप्त करने पर चर्चा अवश्य करें, ताकि अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ उनमें खुशहाली भी लाई जा सके। अन्नदाता किसान खुशहाल होगा, तो समाज और देश भी खुशहाल होगा। तकनीक से कृषि और किसानों की एफिशिएन्सी में वृद्धि की जा सकती है। कृषि में जहां ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए छिड़काव किया जाता है, वहां एक जैसी खेती दिखाई देती है, लेकिन जहां बेतरतीब तरीके से छिड़काव किया जाता है, वहां विषमता दिखाई देती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस समय असमय बरसात, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान के कारण अन्नदाता किसानों की खेतों में खड़ी फसल नष्ट हुई हैं। आज कृषि से जुड़े इन सभी मुद्दों के सम्बन्ध में एक बैठक की गई है। इस सम्बन्ध में सरकार ने व्यापक कार्ययोजना आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में किसी भी आपदा में जनहानि होने अथवा अन्नदाता किसान, बटाईदार या उसके परिवार के किसी सदस्य के दुर्घटना की चपेट में आने पर तत्काल राहत देने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अन्तर्गत पीड़ित परिवार को 05 लाख रुपये उपलब्ध कराया जाता है। यह सहायता 24 घण्टे के भीतर अन्नदाता किसानों को मिलनी चाहिए। राहत कोष से पशु हानि पर भी धनराशि तत्काल उपलब्ध होनी चाहिए।
यदि किसी किसान या नागरिक का आवास अग्निकाण्ड, तूफान, अतिवृष्टि की चपेट में आ गया है, तो उसे तत्काल मुख्यमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत एक आवास उपलब्ध कराया जाए। हमारा प्रयास होना चाहिए कि अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान को बीमा कम्पनियां कम्पनसेट करें। सरकार के स्तर से प्रत्येक पीड़ित किसान की हर सम्भव सहायता करने के लिए प्रत्येक जिलाधिकारी को आदेश जारी किये गये हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि खेती प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग कर पूर्वानुमान के आधार पर कई कार्यों को आसान किया जा सकता हैं। 05 वर्ष पूर्व मीरजापुर और सोनभद्र में आकाशीय बिजली से एक दिन में 30 मौतें हुई थीं। प्रदेश सरकार ने जनपद सोनभद्र में अर्लीवॉर्निंग सिस्टम लगवाया। अर्लीवॉर्निंग सिस्टम से 03 घण्टे पूर्व सूचना देकर लोगों को जागरूक किया जा सकता हैं। सोनभद्र व मीरजापुर में इसके अच्छे परिणाम सामने आए। जहां एक दिन में 30 मौतें होती थीं, आज वहां यदा-कदा एक या दो मौतें होती हैं। टेक्नोलॉजी इस दिशा में अच्छी भूमिका का निर्वहन कर रही है।
सेटेलाइट के माध्यम से भूमि और मौसम की निगरानी की जानकारी और समय पर व्यापक प्रचार-प्रसार की सुविधा दी जा रही है। प्रदेश में वेदर रडार लगाए जा रहे हैं। ‘इण्टरनेट ऑफ थिंग्स‘ के माध्यम से सेन्सर द्वारा मिट्टी की नमी और पोषण का डाटा एकत्र कर किसान लाभान्वित हो सकते हैं। कृषि में आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस उपयोगी हो सकती है। तकनीक के माध्यम से फसल का रियल टाइम विश्लेषण, रोगों की समय से पहचान तथा उत्पादन का पूर्वानुमान किया जा सकता हैं। बायोटेक्नोलॉजी के माध्यम से अच्छी उत्पादकता वाले बीजों को प्राप्त किया जा सकता हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग कर जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य के अनुरूप फसलों की उन्नत किस्मों को विकसित कर सकते हैं। कृषि में डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म अर्थात किसान को बाजार से जोड़ने की कार्रवाई के अन्तर्गत मौसम और कीमत की जानकारी उपलब्ध करायी जा सकती है। यह आवश्यक नहीं कि किसान क्रय केन्द्र में अपनी उपज लेकर आएं। किसानों को बाजार में अच्छा दाम मिलने पर अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता दी गई है।
प्रदेश में ‘वन नेशन वन मण्डी’ के नियम को लागू किया गया है। मण्डी शुल्क को आधे से भी कम किया गया है। ए0आई0 आधारित डिजिटल स्वॉयल हेल्थ कार्ड के माध्यम से प्रत्येक किसान को जानकारी प्राप्त हो। किसानों को सीधे मोबाइल पर सलाह और समाधान उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा भूमिका का निर्वहन किया जा रहा है। इन कार्यां को और बड़े स्केल पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अब समय आ गया है जब लैब-टू-लैण्ड नहीं बल्कि लैब-इन-लैण्ड का उपयोग किया जाए। पहले लैब-टू-लैण्ड के माध्यम से प्रयोगशाला से तकनीक निकाल कर खेती में प्रयोग की जाती थी। अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाने की दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है। हमें ऐसी देशी पद्धति विकसित करनी पड़ेगी, जिसके बारे में प्रधानमंत्री जी बार-बार कहते हैं। वह पद्धति प्राकृतिक खेती है।
यह तीन दिवसीय कांग्रेस निश्चित ही अपने लक्ष्यों तक पहुंचेगी। अच्छे शोध पत्रों को प्राप्त कर एक्शन टेकन प्लान आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि प्रदेश के अन्नदाता किसान इससे लाभान्वित हो सकें। प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र तथा कृषि विश्वविद्यालयों को भी इस अभियान से जोड़ने की आवश्यकता है। एक कृषि विज्ञान केन्द्र में कृषि के 06-07 सेक्टरों के वैज्ञानिक होते हैं। इस गोष्ठी में सम्बन्धित वैज्ञानिकों को बुलाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद ‘उपकार‘ से सम्बन्धित लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी।
कार्यक्रम को कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री सरदार बलदेव सिंह ओलख, उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता तथा उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद के अध्यक्ष कैप्टन (सेवानिवृत्त) विकास गुप्ता ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव कृषि श्री रविन्द्र, महानिदेशक उपकार डॉ0 संजय सिंह, महानिदेशक इक्रीसैट डॉ0 हिमांशु पाठक, भारतीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान, लखनऊ के निदेशक डॉ0 दिनेश सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री जी आज यहां ‘विकसित कृषि-विकसित भारत/2047’ के लिए कृषि कायाकल्प हेतु कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों का महासंगम-छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 (08 से 10 अप्रैल, 2026) का शुभारम्भ करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना 2025-26 के अन्तर्गत चयनित वैज्ञानिकों को लाइफटाइम एचीवमेण्ट, विशिष्ट वैज्ञानिक, विशिष्ट महिला वैज्ञानिक, युवा वैज्ञानिक, उत्कृष्ट पी0एच0डी0 थीसिस आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री जी ने ‘विकसित कृषि-विकसित उत्तर प्रदेश/2047’, ‘उपकार कृषि प्रेरणा’, ‘उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद परिचय, गतिविधियाँ एवं भावी रणनीतियाँ’, ‘उपकार समाचार’, ‘न्यू डाइमेंशन्स ऑफ एग्रीकल्चर इन रिसर्च कोआर्डिनेशन एण्ड प्रोडक्टिविटी’, ‘उपकार सीड’, ‘छठी यू0पी0 एग्रीकल्चरल साइंस कांग्रेस सौवेनिर एण्ड एब्स्ट्रैक्ट‘ आदि पुस्तकों का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद एवं इसकी सहयोगी संस्थाओं ने प्रदेश में तीन दिवसीय कृषि विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया है, इनमें भारतीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान, उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान अकादमी तथा गो-सेवा आयोग आदि सम्मिलित हैं। इस कार्यक्रम में तीन दिनों तक कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित अलग-अलग विषयों पर चर्चा की जाएगी। उत्तर प्रदेश की आबादी देश में सर्वाधिक है। यहां देश की 16 से 17 प्रतिशत आबादी निवास करती है। यहां दुनिया की सबसे उर्वरा भूमि, सबसे अच्छा जल संसाधन है। विश्व में सर्वाधिक सिंचित भूमि का प्रतिशत भारत में तथा भारत में सर्वाधिक सिंचित भूमि का प्रतिशत उत्तर प्रदेश में है।
जब भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था में 44 से 45 प्रतिशत हिस्सा रखता था, उसका आधार भारत की कृषि, अन्नदाता किसान और कारीगर थे। यहां किसानों को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा गया था, बल्कि वह स्वयं में कारीगर भी थे। उत्पादक किसान जब कारीगर के रूप में कार्य करता था, तो स्वयं को उद्यमी के रूप में स्थापित करता था। भारत की कृषि की गाथा उत्पादक से उद्यमी बनने की है। वैदिक काल से ही उत्तर प्रदेश इसकी भूमि रहा है। आक्रान्ताओं ने भारत की कृषि पर ही हमला नहीं किया, बल्कि यहां की उद्यमिता पर भी हमला किया था। जो किसान पहले कारीगर से उद्यमी बनने की गाथा को आगे बढ़ाता था, उसे केवल कच्चा माल उत्पन्न करने का अधिकार दिया गया। यहां का कच्चा माल बाहर जाता था। वैल्यू एडीशन का लाभ विदेशियों को मिलता था। हमारा उत्पादक किसान ऋणी बन गया। हमारी कारीगर उद्यमी से बेरोजगार हो गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम‘ बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय के आनन्द मठ उपन्यास का एक हिस्सा है। यह बंगाल की त्रासदी पर आधारित गीत है। बंगाल में पड़े अकाल के दौरान लोग भूख से मर रहे थे। वहां के जमींदार महेन्द्रनाथ के परिवार को भी संकट का सामना करना पड़ा। इस कालक्रम की परिणति संन्यासी विद्रोह के रूप में हुई। आनन्द मठ में औपनिवेशिक काल के शोषण की पूरी गाथा समाहित है। जब भारत के उत्पादक किसान को ऋणी बना दिया जाता है, तो उसका परिणाम अकाल की त्रासदी के रूप में देखने को मिलता है। इन सभी बिन्दुओं पर विचार करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के अन्नदाता किसानों में कृषि क्षेत्र की सम्भावनाओं को धरातल पर उतारकर दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने का सामर्थ्य है। दूसरों पर निर्भरता किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति उत्पन्न करती है। वैदिककालीन भारत में जब उत्पादक व उद्यमिता की इकाइयां किसानों के पास थीं, तब हमारे गांव आत्मनिर्भर होते थे। एक साजिश के तहत उस आत्मनिर्भर इकाई को भंग किया गया। उस समय ऐसा कोई ईकोसिस्टम तैयार नहीं किया गया, जो प्रत्येक सम-विषम परिस्थितियों में टॉप-टू-बॉटम प्रत्येक कड़ी को जोड़ते हुए चुनौतियों का सामना कर सके।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में ‘खेती की बात खेत पर’ कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। इसके अन्तर्गत प्रदेश के कुछ क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान वहां तीसरी फसल देखने को मिली। किसानों ने संवाद के दौरान बताया कि उन्हें मक्का की खेती से प्रति एकड़ 01 लाख रुपये बचत हो रही है। जिस प्रदेश में बिजली, पानी, बीज, प्रोक्योरमेण्ट सेण्टर आदि के अभाव में पहले एक फसल प्राप्त करने में किसान परेशान था, आज वहां तीसरी फसल उत्पादित हो रही है। पहले प्रदेश के कृषि विज्ञान केन्द्र बदहाल थे, आज उन कृषि विज्ञान केन्द्रों पर प्रत्येक सप्ताह गोष्ठियां व किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। डेमोन्स्ट्रेशन के माध्यम से किसानों को अवगत कराया जाता है कि कौन सा कृषि कार्य किस रूप में हो और उसके क्या परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के आपसी समन्वय से कृषि वैज्ञानिकों की क्षमताओं में वृद्धि का कार्य आगे बढ़ा है। राज्य सरकार ने किसानों और कृषि को एजेण्डे का हिस्सा बनाया है। जिस उत्तर प्रदेश में पहले कई वर्षों से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हुआ था, आज किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाता है। गन्ना किसानों के खाते में अब तक 02 लाख 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि डी0बी0टी0 के माध्यम से प्रेषित की जा चुकी है। प्रदेश में जो चीनी मिलें पहले बन्द हो रही थीं, आज वह सुगर कॉम्प्लेक्स के रूप में काम कर रहीं हैं। देश के कुल गन्ना का 55 प्रतिशत उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश कर रहा है। यहां एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग पौने 02 लाख करोड़ लीटर तक पहुंच चुका है, जो देश में नम्बर एक है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में संचालित 122 चीनी मिलों में 106 या 107 चीनी मिलें ऐसी हैं, जो छठें-सातवें दिन गन्ना मूल्य का भुगतान कर देती हैं। लोग नई चीनी मिलें स्थापित करने के लिए आगे आ रहे हैं। अच्छे बीज आने, समय पर बीमारी चिन्हित कर समाधान का रास्ता निकालने तथा टिश्यू कल्चर जैसी नई तकनीक अपनाने से प्रदेश में गन्ना उत्पादन बढ़ा है। हम सभी के समक्ष भारत की प्राचीन पद्धति अपनाते हुए अपने उत्पाद को पोषण से जोड़ने तथा फर्टिलाइजर के स्थान पर नेचुरल व जैविक खेती अपनाने की चुनौती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए कार्य को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। किसानों को तकनीक का प्रयोग करते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन करने पर जोर देना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज भारत को खाद्य संकट से जूझना नहीं पड़ रहा है। यहां प्रचुर मात्रा में खाद्य पदार्थों का उत्पादन हो रहा है। वर्ष 2014 से पूर्व, देश में किसान आत्महत्या कर रहे थे। आज किसान की आत्महत्या के मामले शून्य हो चुके हैं। किसान की आमदमी कई गुना बढ़ी है। यह परिवर्तन हम सभी को देखने को मिल रहा है। वर्ष 2017 से पूर्व, प्रदेश के किसानों व आमजन में सरकार के प्रति विश्वास का अभाव था। किसान विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाओं से परेशान होकर पलायन को मजबूर थे। अन्नदाता किसान केवल चुनावी मुद्दा रह जाता था। लागत अधिक तथा उत्पादन कम होता था। प्रोक्योरमेण्टर सेण्टर न होने से बिचौलिये हावी थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 के पश्चात प्रदेश सरकार के प्रयासों से कृषि तथा किसानों के हित में स्पष्ट नीति बनाई गयी। इसके अन्तर्गत सरकार किसान को बीज प्रदान करने से लेकर उसके उत्पाद को खरीदने तथा उसे वैल्यू एडीशन के साथ जोड़ने का कार्य कर रही है। क्रय केन्द्रों के माध्यम से किसानों को एम0एस0पी0 के रूप में लागत का डेढ़ गुना अधिक मूल्य उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश सरकार पहले से ही सरकारी ट्यूबवेलों और नहरों से निःशुल्क पानी उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही, 16 लाख ऐसे ट्यूबवेलों, जिसका संचालन किसान बिजली कनेक्शन लेकर करता था, जिससे उन्हें बिजली का बिल चुकाना पड़ता था। प्रदेश सरकार ने ऐसे ट्यूबवेलों के बिजली बिल को माफ करते हुए 03 हजार करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को भुगतान किया। जिन 23 लाख ट्यूबवेलों में बिजली के कनेक्शन नहीं है, उन्हें सोलर पैनल से जोड़ने की कार्यवाही आगे बढ़ायी जा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में नहरों का जाल बिछाया जा रहा है। वर्ष 1972 में सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना बनायी गयी थी। वर्ष 1977 में इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था, परन्तु वह पूर्ण नहीं हो सकी थी। प्रदेश सरकार के प्रयासों से वर्ष 2021 में इसे पूर्ण कराया गया। आज इसके माध्यम से 14 लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। इसी प्रकार धनराशि, इच्छा शक्ति, एजेण्डे में कृषि व किसान के अभाव के कारण पहले से अधूरी पड़ी कई अन्य परियोजनाओं को पूर्ण करने का कार्य किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसानों की फसलों को जानवरों से बचाने के लिए सोलर फेन्सिंग उपलब्ध करायी जा रही है। देश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में 16 लाख गोवंश के लिए 7,700 निराश्रित गोआश्रय स्थलों का निर्माण किया गया है। प्रदेश सरकार प्रत्येक गाय के भरण-पोषण के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध करा रही है। उत्तर प्रदेश का यह मॉडल देश में लागू किया जा रहा है। आज बुन्देलखण्ड से अन्ना प्रथा समाप्त हो चुकी है। गोसेवा आयोग को इस दिशा में और अधिक प्रयास करने और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। प्रत्येक किसान को फार्मर रजिस्ट्री की व्यवस्था से जोड़ना आवश्यक है। अंश निर्धारण के कार्यक्रम को समय पर आगे बढ़ाना चाहिए, जिससे तकनीक माध्यम से लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समय से प्राप्त हो सके।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस तीन दिवसीय आयोजन में प्रोडक्शन को प्रोडक्टिविटी से जोड़ने तथा प्रोडक्टिविटी को प्रॉफिटेबिलिटी में बदलने तथा प्रॉफिटेबिलिटी से प्रॉस्पेरिटी प्राप्त करने पर चर्चा अवश्य करें, ताकि अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ उनमें खुशहाली भी लाई जा सके। अन्नदाता किसान खुशहाल होगा, तो समाज और देश भी खुशहाल होगा। तकनीक से कृषि और किसानों की एफिशिएन्सी में वृद्धि की जा सकती है। कृषि में जहां ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए छिड़काव किया जाता है, वहां एक जैसी खेती दिखाई देती है, लेकिन जहां बेतरतीब तरीके से छिड़काव किया जाता है, वहां विषमता दिखाई देती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस समय असमय बरसात, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान के कारण अन्नदाता किसानों की खेतों में खड़ी फसल नष्ट हुई हैं। आज कृषि से जुड़े इन सभी मुद्दों के सम्बन्ध में एक बैठक की गई है। इस सम्बन्ध में सरकार ने व्यापक कार्ययोजना आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में किसी भी आपदा में जनहानि होने अथवा अन्नदाता किसान, बटाईदार या उसके परिवार के किसी सदस्य के दुर्घटना की चपेट में आने पर तत्काल राहत देने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अन्तर्गत पीड़ित परिवार को 05 लाख रुपये उपलब्ध कराया जाता है। यह सहायता 24 घण्टे के भीतर अन्नदाता किसानों को मिलनी चाहिए। राहत कोष से पशु हानि पर भी धनराशि तत्काल उपलब्ध होनी चाहिए।
यदि किसी किसान या नागरिक का आवास अग्निकाण्ड, तूफान, अतिवृष्टि की चपेट में आ गया है, तो उसे तत्काल मुख्यमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत एक आवास उपलब्ध कराया जाए। हमारा प्रयास होना चाहिए कि अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान को बीमा कम्पनियां कम्पनसेट करें। सरकार के स्तर से प्रत्येक पीड़ित किसान की हर सम्भव सहायता करने के लिए प्रत्येक जिलाधिकारी को आदेश जारी किये गये हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि खेती प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग कर पूर्वानुमान के आधार पर कई कार्यों को आसान किया जा सकता हैं। 05 वर्ष पूर्व मीरजापुर और सोनभद्र में आकाशीय बिजली से एक दिन में 30 मौतें हुई थीं। प्रदेश सरकार ने जनपद सोनभद्र में अर्लीवॉर्निंग सिस्टम लगवाया। अर्लीवॉर्निंग सिस्टम से 03 घण्टे पूर्व सूचना देकर लोगों को जागरूक किया जा सकता हैं। सोनभद्र व मीरजापुर में इसके अच्छे परिणाम सामने आए। जहां एक दिन में 30 मौतें होती थीं, आज वहां यदा-कदा एक या दो मौतें होती हैं। टेक्नोलॉजी इस दिशा में अच्छी भूमिका का निर्वहन कर रही है।
सेटेलाइट के माध्यम से भूमि और मौसम की निगरानी की जानकारी और समय पर व्यापक प्रचार-प्रसार की सुविधा दी जा रही है। प्रदेश में वेदर रडार लगाए जा रहे हैं। ‘इण्टरनेट ऑफ थिंग्स‘ के माध्यम से सेन्सर द्वारा मिट्टी की नमी और पोषण का डाटा एकत्र कर किसान लाभान्वित हो सकते हैं। कृषि में आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस उपयोगी हो सकती है। तकनीक के माध्यम से फसल का रियल टाइम विश्लेषण, रोगों की समय से पहचान तथा उत्पादन का पूर्वानुमान किया जा सकता हैं। बायोटेक्नोलॉजी के माध्यम से अच्छी उत्पादकता वाले बीजों को प्राप्त किया जा सकता हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग कर जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य के अनुरूप फसलों की उन्नत किस्मों को विकसित कर सकते हैं। कृषि में डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म अर्थात किसान को बाजार से जोड़ने की कार्रवाई के अन्तर्गत मौसम और कीमत की जानकारी उपलब्ध करायी जा सकती है। यह आवश्यक नहीं कि किसान क्रय केन्द्र में अपनी उपज लेकर आएं। किसानों को बाजार में अच्छा दाम मिलने पर अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता दी गई है।
प्रदेश में ‘वन नेशन वन मण्डी’ के नियम को लागू किया गया है। मण्डी शुल्क को आधे से भी कम किया गया है। ए0आई0 आधारित डिजिटल स्वॉयल हेल्थ कार्ड के माध्यम से प्रत्येक किसान को जानकारी प्राप्त हो। किसानों को सीधे मोबाइल पर सलाह और समाधान उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा भूमिका का निर्वहन किया जा रहा है। इन कार्यां को और बड़े स्केल पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अब समय आ गया है जब लैब-टू-लैण्ड नहीं बल्कि लैब-इन-लैण्ड का उपयोग किया जाए। पहले लैब-टू-लैण्ड के माध्यम से प्रयोगशाला से तकनीक निकाल कर खेती में प्रयोग की जाती थी। अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाने की दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है। हमें ऐसी देशी पद्धति विकसित करनी पड़ेगी, जिसके बारे में प्रधानमंत्री जी बार-बार कहते हैं। वह पद्धति प्राकृतिक खेती है।
यह तीन दिवसीय कांग्रेस निश्चित ही अपने लक्ष्यों तक पहुंचेगी। अच्छे शोध पत्रों को प्राप्त कर एक्शन टेकन प्लान आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि प्रदेश के अन्नदाता किसान इससे लाभान्वित हो सकें। प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र तथा कृषि विश्वविद्यालयों को भी इस अभियान से जोड़ने की आवश्यकता है। एक कृषि विज्ञान केन्द्र में कृषि के 06-07 सेक्टरों के वैज्ञानिक होते हैं। इस गोष्ठी में सम्बन्धित वैज्ञानिकों को बुलाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद ‘उपकार‘ से सम्बन्धित लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी।
कार्यक्रम को कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री सरदार बलदेव सिंह ओलख, उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता तथा उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद के अध्यक्ष कैप्टन (सेवानिवृत्त) विकास गुप्ता ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव कृषि श्री रविन्द्र, महानिदेशक उपकार डॉ0 संजय सिंह, महानिदेशक इक्रीसैट डॉ0 हिमांशु पाठक, भारतीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान, लखनऊ के निदेशक डॉ0 दिनेश सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
