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युवक का शव मिला, गले पर चोट के निशान

March 31, 2026

युवक का शव मिला, गले पर चोट के निशान

फिरोजाबाद। थाना रामगढ़ क्षेत्र अन्तर्गत मंगलवार को एक युवक का शव मिला है। गले पर चोट के निशान है। युवक की संदिग्धावस्था में मौत हुई है। पुलिस घटना की जांच कर रही है।
थाना रामगढ़ क्षेत्र अन्तर्गत सांती रोड गांव मिलक के सामने भट्ठे के समीप मंगलवार को एक युवक का शव लोगों ने पड़ा देखा तो वह हैरान रह गए। मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पहचान कराई। मृतक की पहचान थाना रामगढ़ क्षेत्र के सैलई निवासी चन्दन पुत्र महेश के रूप में हुई है। मृतक के गले पर चोट के निशान है। पुलिस मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल लेकर आई है और घटना की जांच में जुट गई है।
इस सम्बन्ध में अपर पुलिस अधीक्षक रवि शंकर प्रसाद का कहना है कि एक युवक का शव मिला है। जिसके गले पर चोट के निशान है। युवक की संदिग्ध मौत हुई है। मृत्यु का सही कारण व समय जानने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है। फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए है। घटना की जांच कर कार्यवाही की जा रही है।

Gorakhpur दुष्कर्म के आरोपी को 16 दिन में सजा

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
31/03/2026

16 कार्य दिवस में कठोर सजा: 6 वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद

गोरखपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई बना नजीर, साक्ष्य छिपाने पर महिला को भी 4 साल की कठोर सजा

गोरखपुर। मासूम बच्ची से दुष्कर्म अपराध के मामले में त्वरित न्याय की मिसाल सामने आई है। थाना पीपीगंज में 21 फरवरी 2026 को 6 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में महज 16 दिन के भीतर न्यायालय ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुना दी।
मा० न्यायालय विशेष पॉक्सो-01 गोरखपुर ने अभियुक्त अशोक निषाद पुत्र टुनटुन निषाद, निवासी साखी उर्फ मेंहदरिया, थाना पीपीगंज को दोषी पाते हुए शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास तथा 55,000 के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, साक्ष्य छिपाने के आरोप में उसकी माँ सुनीता देवी को 4 वर्ष का कठोर कारावास और 5,000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
घटना 20/21 फरवरी 2026 की रात की है, जब एक शादी समारोह के दौरान आरोपी ने मासूम के साथ दरिंदगी की। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपी और उसकी मां को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मात्र 5 दिनों में साक्ष्य एकत्र कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद न्यायालय ने लगातार सुनवाई करते हुए 16 दिन में गवाहों के बयान और बहस पूरी कर कठोर सजा सुनाई।
इस केस में एडीजीसी राघवेन्द्र राम त्रिपाठी और एडीजीसी अरविन्द्र कुमार श्रीवास्तव की प्रभावी पैरवी अहम रही।
गोरखपुर पुलिस की यह कार्रवाई ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत त्वरित न्याय की एक बड़ी नजीर मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की सख्त और त्वरित कार्रवाई से अपराधियों में भय और आमजन में कानून के प्रति विश्वास मजबूत होगा।

ताजगंज में भीषण आग से परिवार की रोजी-रोटी राख, लाखों का नुक़सान

आगरा। ताजगंज थाना क्षेत्र स्थित राठौर मंदिर के पास तुलसी चबूतरा के पीछे बस्ती में आज सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक घर में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते घर के भीतर रखा सामान और परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा ‘राधा मोहन साड़ी सेंटर’ चंद मिनटों में लपटों की भेंट चढ़ गया।

बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार बेहद साधारण आर्थिक स्थिति में जीवनयापन करता है। परिवार का पालन-पोषण सनी नामक दुकानदार करता है, जो वर्षों से साड़ी का छोटा कारोबार कर अपने घर का खर्च चला रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, सनी लंबे समय से मेहनत-मजदूरी और छोटे व्यापार के सहारे अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहा था। अचानक लगी इस आग ने परिवार की पूरी पूंजी और भविष्य की उम्मीदों को झकझोर कर रख दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जैसे ही घर से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई दीं, आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। बस्ती के लोग तुरंत मौके पर जुटे और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। घटना की सूचना मिलते ही भाजपा नेता राजेश राठौर तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लेते हुए ताजगंज पुलिस प्रशासन को तुरंत अवगत कराया। साथ ही स्थानीय निवासियों ने भी बिना देर किए फायर ब्रिगेड को सूचना दी।

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और दमकलकर्मियों ने स्थानीय लोगों के सहयोग से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। समय रहते राहत कार्य शुरू होने से आग को आसपास के अन्य मकानों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

भाजपा नेता राजेश राठौर ने बताया कि पीड़ित परिवार की दुकान में करीब चार से पांच लाख रुपये का साड़ी का माल रखा हुआ था। इसके अलावा दुकान में नकद रकम भी मौजूद थी, जो आग की चपेट में आकर पूरी तरह जल गई। उन्होंने कहा कि इस हादसे में परिवार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और उनकी वर्षों की मेहनत एक झटके में राख हो गई।

हालांकि इस दर्दनाक हादसे में राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। आग के दौरान घर में मौजूद लोग समय रहते बाहर निकल आए, जिससे एक बड़ा अनर्थ टल गया। स्थानीय लोगों ने इसे भगवान की कृपा बताया और कहा कि सामान फिर से जुटाया जा सकता है, लेकिन जान बचना सबसे बड़ी राहत है।

घटना के बाद इलाके में भारी संख्या में लोग जुट गए। पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। बस्तीवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, राहत सामग्री और व्यापार दोबारा शुरू करने के लिए सहयोग दिया जाए, ताकि यह गरीब परिवार फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

आगरा: 48 अश्लील वीडियो से दहला गांव

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नाबालिगों की हरकतों से मचा हड़कंप, समाज पर लगा कलंक

— पुलिस तैनात, माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

आगरा 31 मार्च 26,  थाना खंदौली क्षेत्र के एक गांव से सामने आए 48 आपत्तिजनक वीडियो ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इन वीडियो के वायरल होने के बाद गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्र में भी हड़कंप और शर्मिंदगी का माहौल है। सबसे गंभीर बात यह है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे लड़के-लड़कियां नाबालिग बताए जा रहे हैं, जिससे मामला सिर्फ अश्लीलता तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह बाल संरक्षण, साइबर अपराध और सामाजिक विघटन का बेहद संवेदनशील विषय बन जाता है।

सूत्रों के अनुसार, वायरल वीडियो में तीन से चार किशोर और किशोरियों के चेहरे साफ तौर पर कैमरे में दिखाई दे रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि ये सभी एक ही गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वीडियो की संख्या अधिक होने और उनमें एक ही क्षेत्र के नाबालिगों की मौजूदगी ने ग्रामीणों के बीच गुस्सा, दहशत और अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है।

गांव में स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि माहौल खराब करने, वीडियो फैलाने, अफवाह फैलाने या सोशल मीडिया पर इसे भड़काऊ तरीके से प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एक साथ 48 आपत्तिजनक वीडियो का सामने आना कोई सामान्य घटना नहीं मानी जा रही। ग्रामीणों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में वीडियो कैसे बने?

यह मामला सिर्फ कुछ वीडियो का नहीं, बल्कि ग्रामीण सामाजिक संरचना में बढ़ती डिजिटल अराजकता का संकेत है। जब नाबालिग लड़के-लड़कियां इस तरह कैमरे के सामने दिख रहे हों और वीडियो की संख्या दर्जनों में हो, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बच्चों तक अश्लील कंटेंट की आसान पहुंच है? क्या कोई उन्हें उकसा, फुसला, या रिकॉर्ड कर रहा था? क्या यह सहमति से बनी सामग्री थी या दबाव/ब्लैकमेल का मामला? क्या वीडियो को किसी ने बाजारू कंटेंट की तरह तैयार कर फैलाया? क्या यह मामला सिर्फ गांव तक सीमित है या इसके तार बाहर तक जुड़े हो सकते हैं?

हालांकि, जब तक पुलिस जांच में पुष्टि न हो, तब तक किसी पोर्नोग्राफी गिरोह या अश्लील फिल्म नेटवर्क से सीधा संबंध बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन जांच का यह एंगल बेहद गंभीर और अनिवार्य माना जा रहा है।

—–नाबालिगों का मामला, कानून बेहद सख्त

क्योंकि वीडियो में कथित रूप से नाबालिग शामिल हैं, इसलिए यह मामला बेहद गंभीर कानूनी दायरे में आता है। यदि जांच में पुष्टि होती है, तो पोक्सो एक्ट, आईटी एक्ट की संबंधित धाराएं, अश्लील सामग्री प्रसारण/वितरण से जुड़ी धाराएं, बाल अश्लीलता से जुड़े प्रावधान और वीडियो वायरल करने, शेयर करने, सेव करने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है। जो लोग ऐसे वीडियो देखते, डाउनलोड करते, फॉरवर्ड करते या सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, वे भी गंभीर अपराध की जद में आ सकते हैं।

——पुलिस की चुनौती, सच, साजिश या साइबर शोषण?

पुलिस के सामने इस मामले में कई बड़े सवाल हैं। वीडियो कब और कैसे रिकॉर्ड किए गए?
वीडियो किस डिवाइस से बने? सबसे पहले किसने वायरल किए? क्या किसी ने जानबूझकर गांव की छवि खराब करने के लिए फैलाया? क्या कोई बाहरी व्यक्ति या गिरोह बच्चों तक पहुंचा? क्या नाबालिगों को ब्लैकमेल किया गया? क्या वीडियो पहले से किसी प्राइवेट ग्रुप/ऐप पर शेयर हो रहे थे? अगर पुलिस डिजिटल फॉरेंसिक जांच गहराई से करती है, तो यह मामला सिर्फ गांव की बदनामी से आगे बढ़कर एक बड़े साइबर-यौन शोषण नेटवर्क तक भी पहुँच सकता है।

—-समाज के लिए कलंक, परिवारों के लिए त्रासदी

यह घटना सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक पतन का गंभीर संकेत है।
गांव की चौपाल से लेकर घर-घर तक चर्चा है। परिवारों में शर्म, तनाव, गुस्सा और भय का माहौल है। जिन बच्चों के चेहरे वायरल वीडियो में बताए जा रहे हैं, उनके परिवारों पर मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक दबाव कई गुना बढ़ गया है।

बच्चों की काउंसलिंग, अभिभावकों की डिजिटल निगरानी, स्कूल स्तर पर साइबर जागरूकता, सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर कड़ी रोक, गांव स्तर पर सामुदायिक हस्तक्षेप, ऐसे मामलों को रोकने के लिए सबसे बड़ी जरूरत है।
इस मामले में सिर्फ एफआईआर और पुलिस बल तैनात करना काफी नहीं होगा। इसके लिए साइबर सेल को तुरंत लगाया जाए। वीडियो की डिजिटल ट्रेल निकाली जाए। वायरल करने वाले सभी मोबाइल नंबर/आईडी ट्रैक हों। नाबालिगों की पहचान गोपनीय रखी जाए। पीड़ित/संबंधित परिवारों की काउंसलिंग हो। गांव में अफवाह नियंत्रण और शांति समिति बैठक कराई जाए। स्कूल-कॉलेज स्तर पर मोबाइल और सोशल मीडिया उपयोग पर जागरूकता अभियान चले।

एसएसपी गोरखपुर ने किए पांच निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन, 2 उपनिरीक्षक का गैर जनपद ट्रांसफर

Santosh Kumar Singh
Gorakhpur
31/03/2026

गोरखपुर.एसएसपी डॉ कौस्तुभ ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पांचनिरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन किया है वहीं 2 उपनिरीक्षक को गैर जनपद ट्रांसफर कर दिया हैं।आपको बता दें कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ कौस्तुभ ने 5 निरीक्षक अंजुल कुमार चतुर्वेदी प्रभारी निरीक्षक थाना गगहा से थाना सिकरीगंज ,सतपाल सिंह प्रभारी आर टी सी को प्रभारी 112,जगदीश प्रसाद पाल पुलिस लाइन से प्रभारी निरीक्षक गगहा,नीरज कुमार राय पुलिस लाइन से प्रभारी एस ओ जी ,संदीप यादव रिट सेल से प्रभारी निरीक्षक बेलघाट बनाया है ।
वही एसएसपी ने 2 उपनिरीक्षक को गैर जनपद भेजा है।उपनिरीक्षक विकास नाथ थानाध्यक्ष बेलघाट को स्थानांतरित करते हुए जनपद देवरिया भेजा और थानाध्यक्ष सिकरीगंज आशीष तिवारी को भी स्थानांतरित करते हुए जनपद देवरिया भेजा है। एसएसपी ने उक्त कदम कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उठाया है ।

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