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डम्फर की टक्कर से दम्पति की मौत, आक्रोशित भीड ने किया हाइवे जाम

March 17, 2026

डम्फर की टक्कर से दम्पति की मौत, आक्रोशित भीड ने किया हाइवे जाम

Posted on 17.03.2026 Tuesday, Time 07.13 PM
मैनपुरी 17 मार्च 2026 (उप्र समाचार सेवा)। किशनी मैनपुरी मार्ग पर गांव डांडेहार के सामने अज्ञात डम्फर ने बाइक सवार के टक्कर मार दी।जिससे दम्पति की मौके पर ही मौत हो गयी।स्थानीय लोगों ने रास्ते से निकल रहे दूसरे डम्फर को मार्ग पर ही खड़ा कर जाम लगा दिया।जाम खुलवाने गयी पुलिस से स्थानीय लोगों ने जमकर नोकझोंक व धक्का मुक्की कर दी। एक घण्टे बाद जाम खुलवाया जा सका।लेकिन शव उनके परिजनों के आने तक नही उठने दिए।
मंगलवार को सुबह  किशनी की ओर से अपनी बहन के यहां जा रहे दम्पति ध्रुव 45 पुत्र ज्ञानी चौहान व संतोषी देवी 43 निवासी नगरिया थाना भरथना इटावा बाइक से अपनी बहन सतोसे अलीगंज एटा के यहां जा रहे थे।10.30 बजे मैनपुरी की ओर से आ रहे डम्फर ने बाइक में टक्कर मार दी।स्थानीय लोगो ने जाम लगा दिया ।सूचना पर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक छत्रपाल सिंह मौके पर पहुंच गए और जाम खुलवाने व शव उठाने का प्रयास किया।स्थानीय लोग भड़क गए जमकर पुलिस से नोकझोंक कर धक्का मुक्की की । एक घण्टे जाम लगने के बाद में काफी समझाने पर जाम खोला जा सका।मौके पर पहुंचे परिजनों ने शव को भाजपा नेता राहुल राठौर के कहने पर भी नही उठने दिया।

बीवी ने मिटाया सिंदूर: प्रेमी का प्यार पाने के लिए कातिल बनी सुनीति

अवैध संबंध में रोड़ा बना पति, पत्नी ने रची हत्या की साजिश
मैनपुरी 16 मार्च 26,  किशनी इलाके के गांव सुल्तानपुर निवासी डेयरीकर्मी कमलेश यादव की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। अवैध संबंध में रोड़ा बने पति को रास्ते से हटाने के लिए पत्नी ने ही हत्या की साजिश रची थी।
दरअसल, मैनपुरी के किशनी इलाके के गांव सुल्तानपुर निवासी कमलेश यादव कासगंज स्थित डेयरी पर काम करता था, उधर कमलेश की गैर मौजूदगी में 28 साल का सिथलेश घर पर आता था। कमलेश की पत्नी सुनीति(40) उम्र में सिथलेश से 12 साल बड़ी थी। उससे प्रेम संबंध हो गए थे।
यह सिलसिला चार साल से चल रहा था, मगर। सब कुछ जानते हुए भी कमलेश कुछ भी नहीं कर पा रहा था। इसके पीछे जो वजह बताई जा रही है वह थी कि सिथलेश और कमलेश का साथ उठना बैठना और शराब पीना था।
सिथलेश अच्छा खासा कमाता था और कमलेश को भी अपने साथ रखने के लिए कहता रहता था। कमलेश ने कुछ समय से पत्नी पर सख्ती कर दी थी, जिससे वह प्रेमी सिथलेश से नहीं मिल पा रही थी।
इसके बाद सुनीति ने 12 साल छोटे प्रेमी सिथलेश से कमलेश को रास्ते से हटाने के लिए कहा। इसके बाद सिथलेश ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर कमलेश की हत्या की साजिश रची थी।
तीन बार नाकाम हो चुका था आरोपी
एसपी सिटी ने बताया कि 14 फरवरी और 15 फरवरी को आरोपी सिथलेश कासगंज की डेयरी पर गया था। उसने हत्या करने के इरादे से कमलेश को बुलाया था। मगर वह नहीं आया। 16 फरवरी को जब कमलेश आया तो उसके साथ डेयरी का एक कर्मी था। इस वजह से आरोपी कामयाब नहीं हो सका। 20 फरवरी को कमलेश छुट्टी लेकर घर आ रहा था। इस पर आरोपी और उसके साथियों ने घर छोड़ने की बात कहते हुए उसे कार में बैठाया और रास्ते में हत्या कर डाली।
आपस में व्हाट्सएप कॉल पर बात करते थे आरोपी
प्रभारी निरीक्षक छत्रपाल सिंह ने बताया कि कमलेश की हत्या करने के बाद सभी आरोपी सतर्क हो गए थे। वे आपस में बात करने के लिए व्हाट्सएप कॉल का प्रयोग करते थे। हत्या कर शव को जब खेत में फेंका गया, तब सभी के मोबाइल बंद थे।
आरोपियों के कब्जे से कार, मोबाइल और अन्य सामान बरामद
पुलिस ने कमलेश हत्याकांड में पत्नी और प्रेमी सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से वारदात में प्रयुक्त कार, तमंचा-कारतूस, तीन मोबाइल फोन व अन्य सामान बरामद किया है। सभी को जब्त कर पुलिस साक्ष्य के तौर पर पेश करेगी।
अवैध संबंध में रोड़ा बना पति, पत्नी ने रची हत्या की साजिश
गांव सुल्तानपुर निवासी डेयरीकर्मी कमलेश यादव की हत्या अवैध संबंध में रोड़ा बनने पर पत्नी ने कराई थी। इस वारदात को प्रेमी ने दो साथियों के साथ मिलकर अंजाम दिया था। किशनी पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया है। पत्नी सहित सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

पंचायत में खूनखराबा करने वाला दामाद पुलिस मुठभेड़ में ढेर

सास-साले की चाकू से हत्या के बाद फरार था आरोपी, पुलिस पर फायरिंग के बाद जवाबी कार्रवाई में लगी गोली

बरेली। इज्जतनगर थाना क्षेत्र में पंचायत के दौरान सास और साले की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी अफसर उर्फ बौरा को मंगलवार तड़के पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के अनुसार मुखबिर की सूचना पर आरोपी की घेराबंदी की गई थी। खुद को पुलिस से घिरा देख उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी। घायल आरोपी को जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

इज्जतनगर थाना क्षेत्र के गांव रहपुरा चौधरी में सोमवार को पारिवारिक विवाद सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई थी। बताया जा रहा है कि आरोपी अफसर खान का अपनी 24 वर्षीय पत्नी सायमा से लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के लोग गांव में बैठे थे। इसी दौरान अचानक आरोपी अफसर खान ने चाकू निकाल लिया और वहां मौजूद लोगों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

सास और साले की मौके पर मौत

हमले में उसकी 45 वर्षीय सास आसमा और 19 वर्षीय साला आदिल गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन और ग्रामीण उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।

पत्नी भी गंभीर रूप से घायल

आरोपी ने अपनी पत्नी सायमा पर भी हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।

घटना से गांव में मचा हड़कंप

घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल फैल गया। सूचना मिलने पर इज्जतनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश में टीमें लगा दी थीं।

घेराबंदी के दौरान पुलिस पर की फायरिंग

मंगलवार तड़के पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी इलाके में छिपा हुआ है। पुलिस ने घेराबंदी की तो आरोपी ने खुद को घिरा देख पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लग गई।

अस्पताल ले जाते समय हुई मौत

घायल आरोपी को पुलिस जिला अस्पताल ले जा रही थी, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की आगे की जांच की जा रही है।

भाजपा की शहर कमेटी में कई जातियों को नहीं मिली जगह

सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए भाजपाई, जबकि महिला आरक्षण भी पूरा नहीं, चार‌ महिलाएं पदाधिकारी
पिछली बार चार की बजाय तीन महामंत्री, सिख समुदाय भी छूटा

Post on 17.3.26
Tuesday, Moradabad
Rajesh Bhatia

मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
सालों बाद घोषित भाजपा की नई कमेटी में कई बड़ी जातियों को जगह नहीं मिल पाईं।धोबी , पाल, कश्यप व प्रजापति के अलावा ठाकुर बिरादरी भी उपेक्षित हो गई। साथ ही भाजपा का महिला आरक्षण का भी कोटा पूरा नहीं है। पिछली बार के मुकाबले अबकी तीन महामंत्री ही बनाए गए।
पार्टी की पिछली शहर कमेटी 2019 में घोषित हुईं थीं। धर्मेन्द्र मिश्रा अध्यक्ष बने और फिर कार्यकारिणी की घोषणा हुईं। करीब सवा छह साल बाद शहर कमेटी का ऐलान हुआ। पार्टी नेतृत्व ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कार्यकर्ताओं को समायोजित कर बूस्टर खुराक देने की कोशिश की। पार्टी नेताओं ने
सभी जातियों को शामिल कर समायोजित करने का प्रयास किया पर घोषित कमेटी में कई बड़ी जातियों को अहमियत नहीं मिल सकी।कश्यप, पाल, धोबी,
प्रजापति आदि के अलावा ठाकुर को भी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया।
सबसे ज्यादा महिला आरक्षण का कोटा अधूरा रहा।20 पदाधिकारियों की कमेटी में चार महिलाएं शामिल की गई। 2019 के मुकाबले इस बार कार्यकारिणी में बदलाव करने की कोशिश की गई। धर्मेन्द्र मिश्रा के संग दो पंजाबी गिरीश भंडूला और कमल गुलाटी थे। इस बार अध्यक्ष इस समुदाय से महिला को जगह मिली। जबकि कमल गुलाटी को नामित पार्षद बनाया गया है।

पूर्व पार्षद अब शहर कमेटी में शामिल
नगर निगम में पूर्व पार्षद हेमराज सैनी, अशोक सैनी को महानगर उपाध्यक्ष बनाया गया है। जबकि हेमराज की पुत्रवधू निगम की चुनिंदा पार्षद है। जबकि कपिल देव भी कमेटी में उपाध्यक्ष बने। हालांकि दो चुनाव पहले उनकी पत्नी निगम की पार्षद रह चुकीं हैं।

तानाशाही के नाम पर: युद्ध नियंत्रण की आवश्यकता : डाॅ०राकेश सक्सेना

Rakesh Saxena

Posted on 17.03.2026, Tuesday

एटा 17 मार्च उप्रससे। युद्ध आक्रामक कृत्य है जो किसी भी राष्ट्र की अस्मिता के विनाश से जोड़ता है। इस विचार को दृष्टिगत रखते हुए मानव सभ्यता के इतिहास में युद्ध एक जटिल पक्ष रहा है। समय बदलाव के साथ युद्ध की प्रवृत्ति, साधन, उद्देश्य व परिणाम में व्यापक परिवर्तन हुए। प्राचीन युद्धों में तलवार, भाला, धनुष-बाण, गदा आदि अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग होता था किन्तु आधुनिक युद्धों में टैंक, मिसाइलें, लड़ाकू विमान, परमाणु बम, ड्रोन और साइबर तकनीक जैसे अत्याधुनिक साधनों का प्रयोग होता है। प्राचीन काल में युद्ध के कुछ नैतिक नियम और मर्यादाएँ थीं। दिन में युद्ध और रात्रि में विश्राम, निहत्थे व शरणागत पर आक्रमण न करना, स्त्रियों, बच्चों व निर्दोष नागरिकों की रक्षा करना आदि नियमों का पूर्णरूपेण पालन किया जाता था किन्तु आधुनिक युद्धों में ये मर्यादाएँ तार-तार हो चुकीं हैं। युद्ध किसी भी समस्या के समाधान नहीं होते। आज के युग में युद्ध अत्यधिक विनाशकारी हो गए हैं, इसकी विभीषिका, इसका दुष्प्रभाव समूचे समाज, संस्कृति और मानव जीवन पर पड़ता है, हजारों-लाखों लोग अपने प्राण ग॔वा बैठते हैं, परिवार उजड़ जाते हैं, माताएँ अपने पुत्रों को खो देतीं हैं, बच्चे अनाथ हो जाते हैं, उद्योग धंधे नष्ट हो जाते हैं, जनता अभाव का जीवन जीने को विवश हो जाती है, भय, असुरक्षा और अशान्ति का वातावरण समाज में फैल जाता है, हिंसा व घृणा का वातावरण पनपता है।
आज भारत-पाकिस्तान, अफगान-पाकिस्तान, यूक्रेन-रूस, इजरायल-फिलिस्तीन, अमेरिका-ईरान, इजरायल-ईरान आदि देशों के युद्धों से दृष्टिगोचर हो रहा है कि दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़ी है। वैश्विक राजनीति में ऊर्जा संसाधनों विशेषकर तेल का महत्वपूर्ण स्थान है। औद्योगिक विकास, सैन्य शक्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा भाग तेल पर निर्भर करता है, इसी कारण तेल -समृद्ध क्षेत्रों पर नियंत्रण को लेकर विश्व की महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा रही है। अमेरिका की विदेश नीति में तेल राजनीति की बड़ी भूमिका रही है, जिसके कारण आज वह अपनी तानाशाही दिखा रहा है। ट्रम्प नाम का पक्षी जो अमेरिका में पाया जाता है, वह सारी दुनिया पर अपनी चोंच मारना चाहता है, इसलिए उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को रातों-रात उठा लिया, ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई को मार दिया और इसी की प्रजाति वाले ने कुछ वर्षों पूर्व ईराक के सद्दाम हुसैन को मार दिया था, फिर भी दुनिया चुप है। सन् 2025 में आयोजित ब्रिक्स बैठक में अमेरिका- इजरायल के ईरान पर हमलों को लेकर निंदा की गई थी लेकिन आज संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों व संगठनों की ओर से इस तानाशाही का विरोध नहीं हो रहा है, जो चिंता का विषय है।
मध्य पूर्व विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार क्षेत्र है। इस क्षेत्र के सऊदी अरब, ईराक, ईरान, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात के पास विशाल तेल संसाधन हैं, इसलिए तानाशाह अमेरिका इन क्षेत्रों पर अपना प्रभाव जमाए हुए है। परस्पर इन देशों में एकजुटता का अभाव है, महाशक्तियाँ पीड़ित देशों के सहयोग हेतु आगे नहीं आ रहीं हैं, नाटो, ब्रिक्स, एससीओ पीस मिशन, शंघाई संगठन मौन साधे दूरी बनाए हुए हैं। डालर में अमेरिका के प्राण बसते हैं, उसके रक्षार्थ वह कुछ भी करता रहे, इस अहंकार को तोड़ना आवश्यक है। अमेरिका ने ईरान पर हमला करके विश्व अर्थव्यवस्था के समक्ष संकट बढ़ा दिया है और यदि युद्ध लम्बा खिचता है तो वह स्वयं भी इस संकट के घेरे में आ जाएगा। वैश्विक तेल कारोबार पर आधिपत्य जमाना किसी भी दृष्टि से न्यायोचित नहीं है। वेनेजुएला की भाँति ईरान भी अपना तेल डालर में नहीं बेच रहे थे। डालर का वर्चस्व अमेरिका कायम न रख पाए इसलिए उस पर अंकुश लगाने के लिए दुनिया के देशों को आगे आना ही होगा।

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