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निर्भीक होकर तथ्य सामने लाएं पत्रकार: दयाशंकर सिंह

April 19, 2026

निर्भीक होकर तथ्य सामने लाएं पत्रकार: दयाशंकर सिंह

रिपोर्ट – संजय कुमार तिवारी
स्थान – बलिया यूपी
डेट – 19/04/2026

बलिया, 19 अप्रैल 26, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा है कि पत्रकार निर्भीक होकर तथ्यों को सामने लाएं। पत्रकारिता चौथा स्तंभ है। इस जिम्मेदारी को निभाएं। वे यहां भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त कर रहे थे।

संघ के पदाधिकारियों ने यहां पहुंचे यूपी सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का माल्यार्पण और अंगवस्त्र से स्वागत किया। परिवहन मंत्री ने मंच से कहा कि समाज का चौथा स्तंभ पत्रकारिता है न्याय पालिका, कार्यपालिका उसी तरह से पत्रकारिता का एक अलग स्थान है तीनों अगर अपना काम सही ढंग से करें और उसपर अगर कोई अंकुश लगाने का कोई काम करता है जो पत्रकारिता का चौथा स्तंभ है वह कार्य करता है। पत्रकारिता में निर्भीक होकर सही तथ्यों को समाज के सामने लाना यही पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य होता है।समाज के हर क्षेत्र में गिरावट आई है चाहे कार्यपालिका हो,व्यवस्थापिका जो,या न्याय पालिका हो सब में कही न कही गिरावट है जो पत्रकारिता जगत भी कही अक्षुता नही है । अगर सही तथ्यों को उजागर करेंगे तो समाज में एक परिवर्तन आएगा।जब जब समाज में परिवर्तन आया है या बड़े से बड़े आंदोलन हुये  है वह पत्रकारिता के माध्यम से हुआ है और देश की आजादी की लड़ाई में भी पत्रकारिता का बहुत बड़ा सहयोग रहा है।

ईरान की नापाक हरकत से भारत नाराज

Article Posted on 19.04.2026, Time 09.23 PM, Sunday Writer Sarvesh Kumar Singh, Senior Journalist

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

अमेरिका, इजराइल और ईरान के युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नरम रुख अपनाए जाने के बाद भी ईरान की तरफ से कुछ ऐसी घटनाएं अंजाम दी जा रही हैं जो इस क्षेत्र में फिर से अशांति पैदा कर सकती है। भारत के साथ भी ईरान के संबंध तनावपूर्ण हो सकते यह घटनाक्रम कल हुआ है, जिससे भारत ईरान से बेहद नाराज है। अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय ने, विदेश मंत्री विक्रम मिश्री ने कल ईरान के दिल्ली स्थित दूतावास से ईरान के राजदूत को तलब किया और अपनी नाराजगी जाहिर की।

Iran

घटना यह है कि कल हॉर्मूज जलडमरू मध्य मार्ग से भारत के 14 भारत आ रहे थे , जिसमें सात भारत के थे और बाकी कुछ दूसरे देशों के थे। लेकिन जो उसमें तेल, गैस और उर्वरक तीन चीजें लदी हुई थी। ये तीनों भारत ही आ रही थीं। यानी कि भारत के आपूर्ति की श्रंखला का यह हिस्सा थे। इनमें जो जहाज आ रहे थे उनको ईरान के (आईआरजीसी)  इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने अनुमति दी थी। लेकिन अचानक दो जहाजों पर ईरान की आईआरजीसी की नौकाओं ने लाइट मशीन गन से अटैक कर दिया। फायरिंग कर दी। इसमें एक जहाज को मामूली नुकसान भी हुआ।

लेकिन वो दोनों जहाज वापस लौट गए और दोनों ही नहीं लौटे। लगभग 13 जहाज जिसमें एलपीजी गैस, कच्चा तेल और यूरिया लगा हुआ था। ये फिर से फारस की खाड़ी की ओर वापस लौटने को मजबूर हुए। हालांकि भारतीय जहाज के जो नाविक थे, जहाज के कैप्टन थे उन्होंने आईआरजीसी से कहा कि हमें आपने पहले अनुमति दी अब आप अटैक क्यों कर रहे हैं? इसी बीच एक जहाज वहां से निकलने में सफल हो गया और वो भारत की ओर बढ़ रहा है। आ रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक जहाज इसमें ऐसा भी था जिसमें बहुत बड़ा टैंकर था और 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा था। यह इराक से भारत आ रहा था।

इसको भी वापस लौटना पड़ा। यह घटनाक्रम बहुत महत्वपूर्ण है। भारत ने पश्चिम एशिया के युद्ध में अपना संतुलित दृष्टिकोण और समर्थन बनाए रखा है। भारत की विदेश नीति बिल्कुल सही दिशा में थी और उसका ईरान के साथ भी बातचीत का क्रम जारी था और इजराइल के साथ भी जारी था। अमेरिका के साथ भी जारी था। भारत का पूरा प्रयास था कि युद्ध बंद होना चाहिए। शांति प्रयास बहाल होने चाहिए। इसके लिए भारत लगातार सक्रिय था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर लगातार ईरान के विदेश मंत्री से और ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत कर रहे थे।

इसी बीच यह एक कष्टकारी और अप्रिय घटना भारत के सामने आई है। बताया ये जाता है कि जो शांति प्रयास चल रहे थे और लगभग युद्ध विराम की स्थिति थी तो ऐसे में ईरान ने अचानक स्टेट हॉर्मस को फिर से ब्लॉक क्यों कर दिया? और उसने यह रणनीति अपनाई है कि या तो टोल टैक्स दे या ईरान से अनुमति ले तब वहां से निकलेंगे। लेकिन सहमति यह हुई थी कि इसको निर्बाध आवाजाही के लिए खोल कर रखा जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने भी यही बात कही थी। लेकिन ईरान का कहना यह है कि उसकी नौसेना की नाकेबंदी अमेरिका ने शुरू कर दी है। इसके बदले में हमने यह कारवाई की है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अब इस युद्ध के बारे में अपना नरम रुख अपनाए हुए हैं। वे बार-बार कह रहे हैं कि युद्ध समाप्ति की ओर है। क्योंकि अब ईरान में लड़ने की क्षमता नहीं है। उनके पास नौसेना और वायु सेना नहीं है। नेतृत्व भी कोई बहुत मजबूत नहीं है। इसलिए युद्ध विराम बहुत जल्दी होगा और युद्ध समाप्त हो जाएगा। लेकिन ये जो कल की घटना है इससे तनावपूर्ण संबंध फिर से सामने आ सकते हैं और जैसा अटैक उन्होंने भारतीय जहाजों पर किया है, वो किसी और जहाज पर भी कर सकते हैं ।

इससे एक बार फिर पश्चिम एशिया में अशांति उत्पन्न हो जाएगी। डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी भारत सरकार लगातार बात कर रही है । हालांकि एक बड़ा हिस्सा तेल का हमारे पास जो आता है वो खाड़ी देशों से ही आता है लेकिन अब रूस से भी तेल की आपूर्ति फिर से शुरू हो रही है तो इसलिए भारत को बहुत ज्यादा चिंता की तो जरूरत नहीं है लेकिन ये जो खाड़ी देशों से तेल आता है बहुत सारे सभी देशों से लगभग जो खाड़ी के देश हैं तेल उत्पादक देश हैं। उनसे हमारे यहां एलपीजी गैस, कच्चा तेल और इसके अलावा नेफ़्था जिससे यूरिया बनता है वो भी वहां से आता है। यूरिया भी गल्फ के कई देशों से हम आयात करते हैं। क्योंकि हमारे कृषि क्षेत्र के में यूरिया की बड़ी खपत है और यह कृषि उत्पादन को प्रभावित करता है। इसलिए स्टेट हॉर्बोज का खुला रहना भी जरूरी है। क्योंकि हमें जो यूरिया मिलता है वह इन्हीं क्षेत्रों से मिलता है। नेफा भी मिलता है।

यह जो घटनाक्रम है । इस घटनाक्रम की पुनरावत्ति ना हो और भारत के जहाजों का निर्बाध आवागमन बना रहे। यह पूरे पश्चिम एशिया के हित में है और भारत के भी हित में है और ईरान भारत के संबंधों के लिए यह आवश्यक भी है। ईरान को यह भी याद रखना चाहिए कि जब अमेरिका ने ईरान के एक जहाज को हिंद महासागर में डुबो दिया, नष्ट कर दिया था तो दूसरे जहाज को भारत ने ही शरण दी। भारत ने उसे बचा लिया अमेरिका के हमलों से। बावजूद इसके कि यह बात अमेरिका को नागवार गुजरी होगी। लेकिन भारत ने अपना धर्म निभाया और ईरान की संकट की घड़ी में मदद भी की। तो ऐसी स्थिति में ईरान के नेतृत्व को विचार करना चाहिए और ये जो घटना हुई है इसकी फिर से पुनरावृत्ति ना हो। शांति बहाल हो। पूरे विश्व के लिए यही आवश्यक है।

एटा में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व शुरू

प्राचीन कैलाश मंदिर में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और पूजन-अर्चना कर यात्रा रवाना

एटा 19 अप्रैल उप्रससे। जनपद में रविवार को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का शुभारंभहुआ। इस अवसर पर प्राचीन कैलाश मंदिर में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और विशेष पूजन-अर्चन किया गया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष सुधा गुप्ता, पंकज गुप्ता, सदर विधायक विपिन कुमार वर्मा ‘डेविड’, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अपर उप जिलाधिकारी राजकुमार मौर्य और अधिशासी अधिकारी निहाल सिंह ने संयुक्त रूप से किया। मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोषों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के बाद, एटा से 10 श्रद्धालुओं और कर्मचारियों का एक दल लखनऊ के लिए रवाना हुआ। इस दल ने राजधानी के गोमती नगर रेलवे स्टेशन पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भाग लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा उत्तर प्रदेश’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि यह यात्रा भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य समाज को अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ना और गौरवशाली विरासत के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता उत्पन्न करना है।

जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह के निर्देशन में एटा का यह श्रद्धालु दल राज्य स्तरीय यात्रा के साथ गुजरात स्थित विश्वविख्यात सोमनाथ धाम के लिए प्रस्थान कर चुका है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यह जत्था 21 अप्रैल 2026 को सोमनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन एवं पूजन-अर्चन करेगा।

Breaking News: तमिलनाडु में विस्फोट से 18 की मृत्यु, 6 घायल

चेन्नई, 19 अप्रैल 2026, विरुधुनगर में पटाखा फैक्टरी में आज हुए विस्फोट में 18 लोगों की मृत्यु हो गई है और 6 लोग घायल हुए है। दुर्घटना पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने शोक व्यक्त किया है।

पटाखा फैक्टरी में विस्फोट की सूचना मिलते ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने तत्काल दो मंत्रियों को मौके पर रवाना किया है। विस्फोट के कारणों की जांच की जा रही है।

 

पीएम मोदी ने क्यों कहा कांग्रेस को एंटी रिफॉर्म पार्टी

Article Posted on 19.04.2026 Time 07.48 PM , Reservation bill for Women in Parliament, PM Narendra Modi, Writer Name: Sarvesh Kumar Singh

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

महिला आरक्षण बिल से संबंधित विधेयक के शुक्रवार 17 अप्रैल को लोकसभा में गिर जाने के बाद एक बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम कल शाम को हुआ। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीवी पर आए और उन्होंने 8:30 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन यह उनके पिछले संबोधन से बिल्कुल अलग है। यह संबोधन यूं तो एक बहुत महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर है। लेकिन यह राजनीतिक संबोधन भी कहा जा सकता है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें राजनीतिक घटनाक्रम और विपक्ष पर तीखा हमला बोला। इतना तीखा हमला शायद ही कभी प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर बोला हो। चाहे वो चुनावी रैली हो, संसद में उनके भाषण हो या जनसभाएं हो। प्रधानमंत्री ने कभी इतनी तीखी बातें और इतना कड़ा हमला कभी कांग्रेस और विपक्ष पर नहीं किया जितना उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में किया।

PM Narendra Modi

उन्होंने एक तरह से कांग्रेस को और पूरे विपक्ष को आईना दिखा दिया। भारत की आजादी से लेकर आज तक के कांग्रेस के फैसलों की समीक्षा कर दी और उन्होंने कांग्रेस को एंटी रिफॉर्म दल घोषित कर दिया और विपक्ष के बारे में तो उन्होंने कहा कि संपूर्ण विपक्ष ने कल जो महिला आरक्षण पर फैसला लिया और उस बिल को पास नहीं होने दिया। बिल को गिरा दिया। यह इन विपक्षी दलों ने पाप किया है। उन्होंने पाप की संज्ञा दी और कहा कि इस पाप की सजा इन विपक्षी दलों को भुगतनी पड़ेगी। जनता इसका फैसला सुनाएगी। जनता इसका जवाब देगी

प्रधानमंत्री कल बहुत भावावेश में थे। उनके अंदर का जो आक्रोश था वो साफ झलक रहा था। स्पष्ट झलक रहा था। क्योंकि एक ऐसा बिल जिसके लिए महिलाओं ने सपना सजोया था और जिसके लिए राजनीतिक दल भी 40 साल से प्रयास कर रहे थे, मांग कर रहे थे, चाहे सरकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की रही हो या सरदार मनमोहन सिंह जी की रही हो या उसके पहले भी पीवी नरसिंह राव जी की रही हो, वीपी सिंह की सरकार रही हो। महिला आरक्षण का मुद्दा हमेशा उठता रहा और सभी दल कहते रहे कि हम महिला आरक्षण बिल लाना चाहते हैं। महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाना चाहिए। लेकिन जब आरक्षण देने का समय आया और लोकसभा में एक बिल आया। एक नहीं तीन बिल आए। जिसमें पहला बिल 131वां संशोधन विधेयक था। संविधान संशोधन विधेयक जिसके अनुसार लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जानी है। इस बिल को प्रस्तुत किया गया और जब इस पर मतदान हुआ तो यह पारित नहीं हुआ। संपूर्ण विपक्ष ने इसका विरोध किया और बिल गिर गया। बिल ही नहीं गिरा। इससे महिलाओं के सपने गिर गए। सपने टूट गए, चूरचूर हो गए।

इसी बात की पीड़ा को प्रधानमंत्री ने व्यक्त किया। उन्होंने चुन चुन कर दलों के नाम लिए। उन्होंने टीएमसी का नाम लिया कि बंगाल की महिलाएं टीएमसी को माफ नहीं करेंगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने डॉ. राम मनोहर लोहिया के सपनों को तोड़ दिया और अब इस पार्टी का डॉ. राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से कोई मतलब नहीं है। उत्तर प्रदेश की महिलाएं समाजवादी पार्टी को सबक सिखाएंगी। उन्होंने दक्षिण की पार्टियों को, स्टालिन की पार्टी पर भी निशाना साधा और सबसे तीखा हमला तो उन्होंने कांग्रेस पर ही किया।

उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने कैसे-कैसे रिफॉर्म का विरोध किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब जब विकसित भारत के लिए कोई रिफॉर्म होता है तो कांग्रेस उसका विरोध करती है। चाहे वो रिफॉर्म सीएए बिल का हो, चाहे वो जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का हो, चाहे वो तीन तलाक का मुद्दा हो, चाहे यह महिला आरक्षण का बिल। हमेशा कांग्रेस ने विरोध किया और इन रिफॉर्म के साथ वह कभी खड़ी नहीं हुई।

उन्होंने याद दिलाया कि 40 साल तक ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को कांग्रेस ने दबाए रखा। कांग्रेस दबाने की, भटकाने की राजनीति करती रही और वही हस महिला आरक्षण का कांग्रेस ने किया। उन्होंने कांग्रेस को कहा कि कांग्रेस अपने इस कार्य का भी परिणाम भुगतेगी और कांग्रेस को जनता जवाब देगी। एक मौका था कांग्रेस के पास और संपूर्ण विपक्ष के पास कि वे महिलाओं को न्याय दिला सकते थे, सहभागी हो सकते थे। लेकिन वो यह मौका गवा बैठे। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में कही।

इसका संबंध राजनीति के उस मुद्दे से था जो लगातार चुनावी मुद्दा भी बनता रहा। चुनावी घोषणा पत्रों में जगह पाता रहा। महिला आरक्षण। इसी पर प्रधानमंत्री ने संबोधन किया। यह समय की मांग थी कि प्रधानमंत्री अपना पक्ष रखें क्योंकि यह पहला ऐसा मौका है। नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद 12 साल में जब उनका कोई बिल गिर गया है। हालांकि ये सोचने और समझने की बात सत्तारूढ़ दल के लिए भी है। एनडीए के लिए भी है कि आखिर बिल क्यों गिरा? बिल के लिए आवश्यक बहुमत जुटाने की रणनीति क्यों नहीं बनाई गई? यह भी विचारणीय प्रश्न है।

विपक्ष एकजुट था। विपक्ष तालियां बजा रहा था। मेज थपथपा रहा था। महिलाओं को आरक्षण से वंचित करने के लिए यह महिलाएं देख रही थी। अब फैसला जनता के हाथ है, महिलाओं के हाथ में है कि वह इस पूरे घटनाक्रम को प्रक्रिया को कैसे लेती हैं। हालांकि विपक्ष के भी अपने तर्क हैं। कल राज्यसभा में बोलते हुए कांग्रेस के राज्यसभा में नेता और कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बात कही। उनकी बात का भी महत्व है। उसे भी नकारा नहीं जा सकता। उनका अपना पक्ष है। उन्होंने कहा कि यह जो 543 की वर्तमान संख्या है इसी में 33% आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा है? इसी में दे दिया जाए। हम साथ देंगे। ये उनका अपना पक्ष है।

लेकिन सत्तारूढ़ दल चाहता है कि सदस्यों की संख्या बढ़ाकर, संसद को विस्तारित करके आरक्षण दिया जाए। कुल मिलाकर अब संसद का यह सत्र था जो बजट सत्र था । 28 जनवरी से शुरू हुआ था। यह 18 तारीख को 18 अप्रैल को समाप्त हो गया। तीन सत्रों में मतलब तीन भागों में यह बजट सत्र पूरा हुआ। यह समाप्त हो गया है और इसके साथ ही अब यह तय हो गया है कि अगला लोकसभा चुनाव बगैर महिला आरक्षण के होगा। यानी कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को संसद में आरक्षण मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।

लेखक: वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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